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धन संचय की अधिकता जीवन मृत्यु का कारण बनती हैं

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Hindi Kahani हिंदी कहानी कहानी पढ़ने में आनंद तो मिलता ही हैं साथ ही सीख भी मिलती हैं बच्चो को जिन्दगी का पाठ समझाने में कहानियों का विशेष महत्व होता हैं |

हिंदी कहानी Hindi Kahani धन संचय की अधिकता जीवन मृत्यु का कारण बनती हैं

श्री कृष्ण एवम देवी रुकमणी ब्रह्माण भ्रमण पर निकले थे तभी उनकी नजर एक परिवार पर पड़ी उस परिवार के सभी सदस्य धन  संचय में लगे रहते थे दिन रात मेहनत कर पैसा भविष्य के लिए सुरक्षित कर देते थे यह देख देवी रुक्मणी उनकी प्रशंसा करती हैं जिसे सुन श्री कृष्ण मुस्कुराने लगे और कहते कि ये मुर्ख हैं  | देवी ने उनके इस कथन का कारण पूछा तब श्री कृष्ण ने उन्हें ऋषि वेद व्यास की एक कहानी सुनाई

हिंदी कहानी Hindi Kahani कुछ इस प्रकार हैं

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एक दिन प्रश्नकाल के वक्त शिष्य ने गुरु व्यास से एक प्रश्न किया कि हे गुरु ! धन संचय करना उचित हैं या नहीं | ऋषि वेद व्यास ने कहा अति सदा ही बुरी होती हैं पुत्र | शिष्य ने इसको विस्तार से बताने का आग्रह किया |

ऋषि वेद व्यास ने पूछा पुत्र क्या तुमने  रेशम का कीड़ा देखा हैं यह एक अनमोल कीड़ा होता हैं जो अपने भीतर रेशम जैसे अमूल्य धागे को जन्म देता हैं वह अपने चारो तरफ इस अनमोल धागे का सांचय करता हैं और जाल बुनता जाता हैं जो उसे जकड़ लेता हैं यह उसकी जमा पूंजी है जो उसके किसी काम की नहीं होती इस जमा पूंजी के फल के लिए उसे अपने प्राण देना होता हैं और उसकी मृत्यु के बाद यह रेशम किसी अन्य के लिए लाभकारी होता हैं अत: इस संचय का उस कीड़े को कोई लाभ नहीं होता अपितु उसकी मृत्यु का कारण बनता हैं |आवश्यक्ता से अधिक धन का संचय विनाश का कारण बनता हैं |

यह कहानी सुनकर देवी को समझ आ गया कि भगवान ने उस परिवार को मुर्ख क्यूं कहा | अति का कभी भगवान भी सहयोग नहीं करते जीवन में हर चीज़ का संतुलन होना आवश्यक हैं |

कहानी की शिक्षा Moral of Hindi Kahani

अति सर्वत्र वर्जयेत् | किसी बात की अधिकता जीवन के लिए उचित नहीं होती जीवन को संतुलित करना ही जीवन को सफल बना सकता हैं |

Hindi Kahani “धन संचय की अधिकता जीवन मृत्यु का कारण बनती हैं “ आपको इससे क्या शिक्षा मिलती हैं अवश्य लिखे |

Hindi Kahani धन संचय की अधिकता जीवन मृत्यु का कारण बनती हैं आपको कैसी लगी हमें बताये |

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