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विश्वासी बने, अंधविश्वासी नहीं

विश्वासी बनों अंध-विश्वासी नहीं
यह story एक ही नगर (colony) की दो औरतों (woman) की हैं | जिनका नाम आरती और मधु था | Aarati बहुत ही नियम(rules) धर्म के हिसाब से पूजा करती और दोनों वक्त (time) भगवान के मंदिर (temple of god) जाती और दीपक लगाती और नर्मदा नदी (holy river) में दीप दान करती |

दूसरी तरफ, Madhu दिन रात केवल अपने कार्यों में वस्त रहती बस रात्रि (evening) के वक्त (time) वो अपने घर (house) के बाहर दो दीपक लगाती जो कि सांय 8 बजे से रात्रि 12 बजे तक जलते जिनका Madhu ध्यान भी रखती थी | अगर दीपक बूझ जायें तो उसमे तेल डालकर पुनह (again) उसे जलाती पूरी कोशिश करती कि वह दीपक कम से कम रात्रि (night)12 बजे तक जलते रहे |

एक दिन एक महत्मा उनके नगर में आयें| उनके पास एक पुष्प था जों माँ वैष्णव देवी का आशीर्वाद (blessing) था | उसी वक्त Madhu और Aarati उनके पास पहुंचे दोनों ने एक साथ ही महात्मा को प्रणाम किया | Mahtama ने कहा उसके पास एक ही पुष्प (flower) हैं और उसे उन दोनों में से एक को वह पुष्प देना हैं पर वह किसे दे ? Aarati ने कहा कि वह दिन रात पूजा (worship) करती है और दीप दान भी | वहीँ महात्मा ने Madhu से पूछा क्या वह पूजा (worship) नहीं करती | Madhu ने कहा वह रात्रि में केवल  दो बड़े दीपक जलाती हैं |

महात्मा मुस्कुराएँ और उन्होंने वह पुष्प Madhu को दे दिया | जिससे Aarti को बहुत क्रोध (anger) आया उसने महात्मा से इसका कारण पूछा | महात्मा ने कहा हैं कि तुम घी के दीपक मंदिर में लगाती हो और दीप दान भी करती हो पर उस मंदिर में जहाँ पहले ही रौशनी (light) हैं वहां इस दीपक का क्या महत्व (importance) ? जबकि Madhu घर के बाहर दीपक इसलिए लगाती हैं ताकि रास्ते पर उसका प्रकाश हों और राहगीर आसानी से चल सकें |

Moral Of The Story:

बिना बात का ज्ञान किसी को लाभ नहीं देता और विश्वासी बनो पर अंधविश्वासी नहीं | धर्म भी ऐसा करों जिससे किसी का लाभ हों |

विश्वासी बने, अंधविश्वासी नहीं

One comment

  1. i’m agree from this page.

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