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इसरो गगनयान मिशन 2022

इसरो गगनयान मिशन 2022 (ISRO Gaganyaan Mission 2022 in Hindi) (ह्यूमन स्पेस मिशन) [Cost, Target, Date, Astronaut Vyomanaut Training Centre, Crew Members] 

दोस्तों आपने आसमान को छूने की कहावतें कई बार सुनी होगी. लेकिन यह सब किताबी बातें लगती हैं, किन्तु अब दुनिया में कई सारे ऐसे देश हैं जिन्होंने अंतरिक्ष जैसे क्षेत्र में बहुत आगे बढ़ते हुए इस कहावत को सच कर दिखाया है. जी हां अमेरिका, रशिया एवं चीन जैसे कुछ देश हैं, जिन्होंने इस कहावत को सच करते हुए, किसी इंसान को आसमान को छू कर आने जैसा बहुत बड़ा कार्य कर दिया हैं. अब इस दौड़ में हमारा भारत देश भी पीछे नहीं हैं. अब हमारे देश का भी नागरिक आसमान को छूने के लिए तैयार होने जा रहा हैं. यह एक मिशन के तहत किया जायेगा जिसका नाम ‘गगनयान मिशन’ हैं. इस मिशन के बारे में सभी तरह की जानकारी जैसे यह मिशन क्या हैं, इसकी लांच की जानकारी एवं इसकी संरचना आदि के बारे में हम आपको इस लेख में बताने जा रहे हैं.     

ISRO Gaganyaan Mission hindi

गगनयान मिशन क्या है ? (What is Gaganyaan Mission)

गगनयान एक मानव मिशन हैं जिसमें हमारे देश के भारतीय अंतरिक्ष रिसर्च संगठन यानि इसरो ने यह योजना बनाई हैं कि वे 3 भारतीय एस्ट्रोनॉट्स को अंतरिक्ष पर 7 दिनों के लिए भेजने वाले हैं. यह एक भारतीय मानव अंतरिक्ष यान कार्यक्रम का हिस्सा हैं. इसका निर्माण भारतीय अंतरिक्ष रिसर्च संगठन द्वारा ही किया जाना हैं, जिसकी शुरुआत हो चुकी हैं. दरअसल अपने इस मिशन में इसरो बड़े पैमाने पर लगभग 3.7 टन कैप्सूल बोर्ड का निर्माण करने जा रहा हैं, जिसमें 2 या 3 एस्ट्रोनॉट्स कई हजार किमी की ऊंचाई पर जाकर 7 दिनों तक पृथ्वी की परिक्रमा करेंगे. इसमें एक सर्विस मोड्यूल और एक क्रू मोड्यूल शामिल हैं जिसे सामूहिक रूप से ऑर्बिटल मोड्यूल के रूप में जाना जाता हैं. यह भारत के इतिहास में पहली बार होगा जब भारत अपने मानवयुक्त अंतरिक्षयान को अंतरिक्ष में उतारेगा, और इससे भारत का दुनिया में चौथा स्थान बन जायेगा जोकि एक इंसान को अंतरिक्ष में भेजेगा.   भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा जी थे.

गगनयान मिशन के लांच की जानकारी (Gaganyaan Mission Launch Details UPSC)

मिशन की जानकारी बिंदु मिशन की जानकारी
मिशन का नाम गगनयान मिशन
मिशन के लांच की घोषणा नरेंद्र मोदी जी द्वारा
मिशन के घोषणा की तारीख साल 2018 के स्वतंत्रता दिवस पर
मिशन को लांच किये जाने की तारीख दिसंबर, 2021 या सन, 2022 में
अंतरिक्षयान का प्रकार क्रू
निर्माण करने वाले संगठन इसरो एवं एचएएल
ऑपरेट करने वाला संगठन इसरो
डिजाईन का जीवन 7 दिन
मिशन की कुल लागत 10,000 करोड़ रूपये

गगनयान मिशन की शुरुआत एवं अब तक की प्रक्रिया (Gaganyaan History)

  • भारत में जब इसरो की स्थापना की गई तभी से उनके द्वारा अंतरिक्ष में इंसान को भेजने की बात की जाती रही हैं, किन्तु यह सफल नहीं हो पा रहा था. फिर सामान्य ऑर्बिटल व्हीकल के तहत साल 2006 में अंतरिक्ष में भारतीय एस्ट्रोनॉट्स भेजने के लिए अध्ययन एवं तकनीकी विकास कार्य शुरू किया गया.
  • इस योजना में लगभग एक सप्ताह के अंदर 2 अंतरिक्ष यात्रियों की क्षमता के साथ और फिर उनकी शानदार लैंडिंग के साथ एक साधारण कैप्सूल डिजाइन किया गया था.
  • इस डिजाईन को मार्च 2008 तक अंतिम रूप देकर भारत सरकार के सामने प्रस्तुत किया गया और फिर अगले साल इस प्रोग्राम के लिए फंडिंग को मंजूरी दी गई. किन्तु फिर राजनीतिक कारणों के कारण इसे 4 सालों के लिए स्थगित कर दिया गया था.
  • साल 2014 की शुरूआत में इस प्रोजेक्ट पर फिर से विचार किया गया और फरवरी, 2014 में इसके बजट में वृद्धि कर इसे फिर से घोषित कर ‘गगनयान मिशन’ के रूप में शुरू करने की मंजूरी दी गई.
  • साल 2016 में इसमें कुछ संशोधन किया गया और फिर इसे साल 2017 में भारतीय मानव अंतरिक्ष यान कार्यक्रम का नवीनीकरण करते हुए शुरू किया गया. और इस बार इस पर मोदी सरकार द्वारा पूरी तरह से हरी झण्डी दिखाते हुए 10,000 करोड़ रूपये का बजट निर्धारित किया गया.
  • मोदी जी ने इस मिशन की घोषणा सन 2018 के स्वतंत्रता दिवस के दिन औपचारिक रूप से अपने भाषण के दौरान की थी.
  • मई, 2019 में गगनयान की पूरी डिजाइन बना दी गई हैं, कि वह किस तरह से कार्य करेगा. हालही में इसरो के ह्यूमन स्पेस फ्लाइट सेंटर और ग्लावकास्मोस, जो रशिया स्टेट कारपोरेशन रोस्कोस्मोस की सहायक कंपनी है, ने भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों के चयन, सहायता, चिकित्सा परिक्षण और अंतरिक्ष प्रशिक्षण में सहयोग देने के लिए जुलाई की पहली तारीख को समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं. साथ ही कुछ प्रमुख टेक्नोलॉजी के विकास और अंतरिक्ष में जीवन का समर्थन करने के लिए एवं आवश्यक विशेष सुविधाओं की स्थापना के लिए मास्को में एक इसरो टेक्नोलॉजी लायसन यूनिट (आईटीएलयू) की स्थापना करने का निर्णय भी लिया गया है.

गगनयान की संरचना (Gaganyaan Infrastructure)

  • गगनयान मिशन में गगनयान की संरचना की बात की जाए, तो इसे इस तरह से डिज़ाइन किया गया हैं, कि इसमें कम से कम 3 मानव बैठ सकें, और अंतरिक्ष पर पहुँच कर, वहां 7 दिन तक रह कर फिर वापस उनकी सफलतापूर्वक लैंडिंग पृथ्वी में हो सके.
  • यह इस बात को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन किया गया हैं कि जब कोई इंसान अंतरिक्ष में प्रवेश करें तो वह वहां की हीट और रेडियेशन से बच सकें, और उसे किसी तरह की समस्या भी न हो. गगनयान को इसरो के जीएसएलवी – एमके III लांचर के माध्यम से लांच किया जायेगा.
  • भारत ने इसकी डिज़ाइन में पहले से ही कई बिल्डिंग ब्लॉक्स का सफलतापूर्वक विकास और परिक्षण को शामिल किया हैं, जिसमें री-एंट्री स्पेस कैप्सूल, पैड अबो्र्ट टेस्ट, राकेट फेल होने की स्थिति में सुरक्षित क्रू इंजेक्शन मैकेनिज्म, डीईबीईएल द्वारा विकसित फ्लाइट सूट और शक्तिशाली जीएसएलवी – एमके III लांच व्हीकल आदि शामिल हैं.
  • इसमें उन्हीं सब टेक्नोलॉजी एवं डिजाइन को इस्तेमाल करने का निर्णय लिया गया है, जिसे दुनिया के पहले देश अमेरिका ने मानव युक्त मिशन को सफल अंजाम देने में उपयोग किया था. इसकी डिज़ाइन तैयार हो गई हैं.
  • इसमें स्प्लैशडाउन टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जा रहा हैं, जिससे यह मानवयुक्त अंतरिक्षयान सात दिन अंतरिक्ष में रह सके और उसके बाद पैराशूट खुले और उसकी सहायता से वह समुद्र में वापस अच्छी तरह से लैंड कर सके.
  • इसकी डिजाइन में इस बात का भी ख्याल रखा गया हैं कि अगर किसी कारणवश इस गगनयान में कुछ परेशानी या खराबी आने का संकेत सिस्टम में मिलता हैं, तो क्रू मोड्यूल को वापस पृथ्वी पर लैंड करा दिया जायेगा.

गगन मिशन का परीक्षण (Gaganyaan Mission Testing)

मानवयुक्त अंतरिक्षयान को अंतरिक्ष में भेजने की कोशिश इसरो द्वारा शुरू से ही की जा रही हैं.

  • साल 2006 में जब इसकी शुरुआत की गई थी, तब इसका पहला परीक्षण किया गया था. एक बहुत कम वजन (लगभग 550 किलोग्राम) का छोटा सा स्पेसक्राफ्ट बनाया गया, जिसका नाम था स्पेस कैप्सूल रिकवरी एसआरई – 1. इसे जनवरी, 2007 में पीएसएलवी सी 7 राकेट लांचर में लांच किया गया था. लांच होने के बाद यह स्पेसक्राफ्ट 12 दिनों तक वहीँ रहा और उसके बाद यह स्प्लैशडाउन टेक्नोलॉजी से पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करने के बाद बंगाल की खाड़ी में जाकर लैंड हुआ.
  • इसके बाद फरवरी, 2014 को हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड ने पहला क्रू मोड्यूल स्ट्रक्चरल असेंबली इसरो को सौंपी. फिर इसरो द्वारा इस साल गगनयान मिशन के लिए एक और परिक्षण किया गया, जिसका नाम क्रू मोड्यूल एटमोस्फियरिक रि – एंट्री एक्सपेरिमेंट यानि ‘केयर’ था. इसमें यह परीक्षण किया गया कि क्रू मोड्यूल कैसे अंतरिक्ष से पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करते हैं और कितने समय बाद पैराशूट खुलता हैं और कब यह यान लैंड करता हैं. इसरो द्वारा किया गया यह प्रयास भी सफल हुआ था. इसमें वही डिजाईन का उपयोग किया गया था जोकि इसके पहले वाले परिक्षण में किया गया था. किन्तु इसमें उसका वजन काफी अधिक था, लगभग 3800 किलोग्राम. इस परीक्षण में कार्बन की कुछ तरह की सीटों का इस्तेमाल किया गया था ताकि यह क्रू मोड्यूल को वहां की हीट एवं रेडियेशन से बचा सके.
  • पिछले साल जुलाई महीने में इसरो द्वारा पैड अबो्र्ट परीक्षण भी किया गया था, जोकि सफलतापूर्वक सही से हो गया था.

इस तरह से इसकी अब तक कुल 3 बार टेस्टिंग हो चुकी हैं और आने वाले समय में इसकी 2 बार टेस्टिंग और होनी हैं. इसकी एक टेस्टिंग दिसंबर, 2020 में होगी और इसके बाद दूसरी टेस्टिंग जुलाई 2021 में होगी. और फिर अंत में यानि दिसंबर, 2021 या जनवरी 2022 में इसका जीएसएलवी एमके – 3 राकेट लांचर के माध्यम से फाइनल लांच किया जायेगा.

जीएसएलवी एमके – 3 राकेट लांचर (GSLV MK – III Rocket)

जैसे ही गगनयान जीएसएलवी एमके – 3 राकेट लांचर से लांच किया जायेगा, उसके 16 मिनिट के बाद ही यह पृथ्वी के लो ऑर्बिटल में प्रवेश कर जायेगा. फिर यह 7 दिनों तक वही पर स्थित होगा. इस बीच हमारे वैज्ञानिकों के द्वारा कुछ परीक्षण किये जायेंगे, और 7 दिन बीत जाने के बाद क्रू मोड्यूल को वापस बुला लिया जायेगा. आपको बता दें कि क्रू मोड्यूल को पृथ्वी के लो आर्बिटल यानि अंतरिक्ष से वापस धरती में आने के लिए केवल 36 मिनिट का समय लगेगा, और यह बंगाल की खाड़ी में आकर उतरेगा. इस तरह से यह मिशन 7 दिन में पूरा हो जायेगा.

गगनयान मिशन से सम्बंधित कुछ रोचक जानकारी (Gaganyaan Mission Important Points)

  • गगनयान को 2 मोड्यूल के तहत लांच किया जाना हैं, जिसमें से एक सर्विस मोड्यूल है. इसमें संचार प्रणाली एवं अन्य सेवाएं शामिल होगी. वहीँ इसका दूसरा मोड्यूल क्रू मोड्यूल है जिसमें क्रू सदस्य एवं उनकी कुछ आवश्यकताओं की चीजें आदि शामिल होंगी.
  • जीएसएलवी – 3 बूस्टर की पेलोड क्षमता के आधार पर सर्विस मोड्यूल का कुल मास लगभग 3 टन होगा.
  • स्पेस कैप्सूल में जीवन समर्थन एवं पर्यावरण नियंत्रण प्रणाली होगी, जोकि आपातकालीन मिशन अबो्र्ट और आपातकालीन पलायन से युक्त होगी, और यह राकेट के जलने के पहले या दुसरे चरण में किया जा सकता हैं.
  • इस अंतरिक्षयान के कुल भार की बात करें, तो यह 3.7 टन हैं, किन्तु लॉन्चिंग के साथ इसका भार 7.8 टन हो जायेगा. और वहीं अगर इसकी ऊंचाई देखी जाएँ तो यह कुल मिलाकर 2.70 मीटर ऊंचा है.
  • स्पेस कैप्सूल पृथ्वी के चारों ओर हर 90 मिनिट में घूमेगा, और अंतरिक्ष यात्री सूर्योदय और सूर्यास्त देख सकेंगे. तीनों अंतरिक्ष यात्री पुरे 24 घंटे में अंतरिक्ष से भारत को भी देख पाएंगे.

गगनयान मिशन में जाने वाले 3 एस्ट्रोनॉट्स (Gaganyaan Mission Astronauts, Vyomanauts)

  • गगनयान मिशन में जाने वाले तीनों एस्ट्रोनॉट्स को ‘व्योमनॉट्स’ कहा जाएगा.
  • ये व्योमनॉट्स का चयन इसरो एवं भारतीय वायु सेना के द्वारा किया जायेगा, और इसके बाद इसरो द्वारा उन्हें बैंगलोर में प्रशिक्षण दिया जायेगा.
  • जब इसका लांच किया जायेगा तब इन्हें एक विशेष स्पेससूट पहनाया जायेगा, जोकि उनकी अंतरिक्ष में मौजूद सूर्य के तेज प्रकाश एवं रेडीएशन के साथ – साथ हर तरह के खतरनाक वातावरण से सुरक्षा करेगा. साथ ही उन्हें पर्याप्त ऑक्सीजन भी प्रदान की जाएगी.
  • एक रिपोर्ट के अनुसार व्योमनॉट्स को विभिन्न गुरुत्वाकर्षण फील्ड एवं अन्य सभी चीजों के बारे में प्रशिक्षण के लिए रशिया भी भेजा जा सकता हैं.
  • व्योमनॉट्स को विभिन्न तरह के प्रशिक्षण दिए जायेंगे जोकि काफी कठिन होते हैं. इस प्रशिक्षण के लिए इसरो के चीफ ने महिला को भी शामिल करने की अनुमति दी है, यानि अब इस मिशन में जो 3 व्योमनॉट्स होंगे वे केवल पुरुष ही नहीं बल्कि महिलाएं भी हो सकती हैं. लेकिन ऐसा तभी होगा जब वे भी इस प्रशिक्षण के टेस्ट को पास कर लेती हैं.       

गगनयान मिशन के फायदे (Gaganyaan Mission Benefits)

गगनयान मिशन का वैसे तो हाल फ़िलहाल में कोई फायदा नहीं है, लेकिन इससे भविष्य में फायदा हो सकता हैं, जैसे –

  • आज की पीढ़ी के लोगों में साइंस को लेकर काफी रुचि बढ़ी हैं और ऐसे में इस तरह के प्रयोग से उनमें और अधिक जिज्ञासा बढ़ेगी, जिससे वे इस क्षेत्र में आगे बढ़ेंगे और रिसर्च की नई – नई तकनीकों की खोज करेंगे.
  • इस मिशन की सफलता के बाद आने वाले समय में नासा की तरह पूरे भारत में इसरो की भी एक अलग पहचान बन जाएगी.
  • इस क्षेत्र में लोग जब ज्यादा से ज्यादा जुड़ेंगे तो इससे नौकरी एवं टेक्नोलॉजीस का विकास होगा. इससे हमारा देश अन्य बड़े देशों जैसे अमेरिका एवं रशिया आदि से बराबरी पर होगा.

यह गगनयान मिशन भारतीय लोगों के लिए एक गर्व की बात होगी. और इस मिशन में जाने वाले व्योमनॉट्स भारत के साथ – साथ पूरी दुनिया के लिए नायक बन जायेंगे. इससे अंतरिक्ष विज्ञान की ओर लोगों की रुचि बढ़ेगी, जिससे वे इसमें शामिल होंगे और हमारा देश इस क्षेत्र में आगे बढ़ कर और भी नई – नई रिसर्च कर सकेगा.

FAQ’s –

Q : इसरो के गगनयान प्रोजेक्ट का उद्देश्य क्या हैं ?

Ans : गगनयान प्रोजेक्ट का उद्देश्य 3 सदस्यों के चालक दल को पृथ्वी के लो आर्बिटल तक पहुँचाना एवं उन्हें सुरक्षित पूर्व निर्धारित डेस्टिनेशन पर उतरना हैं.

Q : इसरो गगनयान मिशन को किस साल लांच करने की योजना बना रहा हैं ?

Ans : इसरो द्वारा गगनयान मिशन को अंजाम लेने के लिए साल 2022 को चुना गया हैं.

Q: सन 2022 में लांच होने वाले इसरो के गगनयान प्रोजेक्ट का हेड कौन हैं ?

Ans : सन 2022 में लांच किये जाने वाले गगनयान प्रोजेक्ट के हेड इसरो के सीईओ ‘के सिवान’ हैं.  

Q : गगनयान मिशन में कौन सा देश भारत की मदद कर रहा हैं ?

Ans : गगनयान मिशन के लिए भारत की मदद करने वाला देश ‘रशिया’ है. 

Q : गगनयान के लिए कौन से राकेट लांचर का उपयोग किया जाना हैं ?

Ans : इसरो ने जीएसएलवी एमके – III राकेट लांचर के माध्यम से ‘गगनयान’ को लांच करने का निर्णय लिया हैं.

Q : क्या महिलाएं गगनयान मिशन में जाने वाली अंतरिक्ष यात्री हो सकती हैं ?

Ans : हां, इसरो के द्वारा यह अनुमति दी गई हैं कि गगनयान मिशन में जाने के लिए अंतरिक्ष यात्री के रूप में महिलायें भी हो सकती हैं.

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