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इसरो के बारे में जानकारी हिंदी में

इसरो की पूरी जानकारी, फुल फॉर्म, केंद्र कहां हैं, अध्यक्ष, मुख्यालय, इतिहास (ISRO Ki Puri Jankari in hindi Full Form, Scientist, Satellite List, Exam, Missions, Mars, Application, Achievements, Rocket, Indian Space Research Organization)

भारत देश एक विकासशील देश है यह बात आप सब जानते ही हैं धीरे-धीरे भारत देश बहुत प्रगति कर रहा है और दूसरे देशों में अपना मान बढ़ा रहा है. ऐसे में विज्ञान ने भी भारत देश में बहुत अधिक प्रगति की है, इसमें सबसे अधिक महत्वपूर्ण योगदान इसरो का होता है. आज के समय में विज्ञान से जुड़ी या फिर अंतरिक्ष से जुड़ी कोई भी वार्ता होती है, तो इसरो का नाम टीवी और अखबारों पर आने लगता है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि इसरो है क्या और क्या है इसका पूरा नाम? तो चलिए आज हम आपको आपके इन सवालों का जवाब विस्तार-पूर्वक देने वाले हैं.

isro in hindi

इसरो क्या है ? (What is ISRO?)

भारतीय विज्ञान की सबसे बड़ी जीत इसरो, जिसका संक्षिप्त रूप में अर्थ भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन है. इसरो भारत की सबसे बड़ी स्पेस एजेंसी है जो राष्ट्रीय अंतरिक्ष संसाधनों की देखरेख और उनके रखरखाव का ध्यान रखती हैं, साथ ही नई-नई और बड़ी खोज से भारत का नाम देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी रोशन करती आई है. यदि बात करें इसरो के मुख्य कार्यालय की तो वह बेंगलुरु में स्थित है जिसका पूरा विभाग भारतीय सरकार के निर्देशानुसार काम करता है और स्पेस सेंटर में होने वाले प्रत्येक कार्य की रिपोर्ट सीधे प्रधानमंत्री को पहुँचाती है.

इसरो की स्थापना किसने की ? (Who is The Founder of ISRO ?)

भारत का सबसे बड़ा स्पेस सेंटर जोकि कर्नाटक राज्य की राजधानी बेंगलुरु में स्थित है यह एक ऐसा स्थान है, जिसने भारत को गर्व महसूस कराने में अपनी पूरी मेहनत लगा दी है. इसका निर्माण 15 अगस्त 1959 में किया गया था. इसरो की स्थापना करने वाले व्यक्ति जिन्हें इसरो के पिता के रूप में माना जाता है उनका नाम विक्रम अंबालाल साराभाई है. इस अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की नींव रखने वाले मुख्य व्यक्ति विक्रम साराभाई ही थे. आज के समय में यदि अनुमान लगाया जाए तो लगभग 17000 व्यक्ति इस अंतरिक्ष अनुसंधान में कार्यरत हैं. सबसे अचंभित कर देने वाली बात तो यह है कि वे सभी वैज्ञानिक अपने परिवार से दूर रहते हैं और उन्होंने अपना अमूल्य जीवन इसरो को समर्पित कर दिया है.

इस अनुसंधान द्वारा कई सारे भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम किए गए, जिनकी शुरुआत सन 1962 में हुई थी. भारतीय अनुसंधान ने पूरे देश में अपनी एक ऐसी छाप छोड़ी है कि यदि उनके द्वारा किए गए खर्चों का आंकलन किया जाए तो वह इसरो द्वारा खर्चे जाने वाले आंकड़ों से काफी हद तक कम है. यहां तक कि सबसे अधिक सैटेलाइट भारत के इस अनुसंधान द्वारा ही छोड़े गए हैं ऐसा रिकॉर्ड ऐतिहासिक तौर पर दर्ज किया जा चुका है.

इसरो का इतिहास (ISRO History)

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान आज जिस मुकाम पर है इसके पीछे एक गहरा इतिहास छुपा हुआ है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान की इस सफलता का राज इसके पीछे छुपी हुई कड़ी मेहनत और देश के प्रति समर्पित होने वाले व्यक्ति हैं जिन्होंने आज इसरो का नाम पूरे विश्व में सबसे ऊपर लाकर खड़ा कर दिया है. इसरो एक ऐसा नाम है जिसकी शुरुआत 1920 के दशक में ही हो गई थी, जब वैज्ञानिक एस.के. मित्रा ने कोलकाता शहर में भूमि आधारित रेडियो प्रणाली को लागू करने के लिए और आयन मंडल की ध्वनि के लिए कई सारे प्रयोग किए थे. बाद में देश के कुछ और जाने-माने वैज्ञानिक भी वैज्ञानिक सिद्धांतों के निर्माण के लिए आगे आए, जिनमें से सीवी रमन और मेघनाद सहाय मुख्य थे. इन दोनों का भी वैज्ञानिक सिद्धांतों को पूर्ण करने में महत्वपूर्ण योगदान था.

कुछ समय पश्चात लगभग सन् 1945 के बाद एक ऐसा समय आया जब भारत धीरे-धीरे विकास करने लगा, ठीक इसी प्रकार अंतरिक्ष अनुसंधानों को लेकर भी कई सारे महत्वपूर्ण विकास किए जाने लगे. सन 1945 के दशक में 2 महान वैज्ञानिक जिन्होंने सबसे पहले अपनी सोच और समझ से इसरो के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया. उन दोनों वैज्ञानिको का नाम होमी भाभा और विक्रम साराभाई था. उन्होंने कई सारे प्रयोग करके अंतरिक्ष अनुसंधानों का निर्माण किया जिसमें सबसे पहले उन्होंने कॉस्मिक किरणों का अध्ययन किया. बाद में उन्होंने वायु परीक्षण, कोलार खानो में गहरे भूमिगत प्रयोग और ऊपरी वायुमंडल का संपूर्ण अध्ययन करके एक मुख्य अध्ययन अनुसंधान प्रयोगशाला और कुछ विद्यालयों एवं स्वतंत्र स्थानों का निर्माण किया. 

उन दोनों में कुछ ऐसी लगन थी जिन्होंने कई सारी खोज व निर्माण को अंजाम दिया. इसके लिए धीरे-धीरे उन्होंने अनुसंधान बनाने शुरू किए और भारत सरकार को भी अपने अंतरिक्ष अनुसंधान में रुचि दिखाने के लिए प्रोत्साहित किया. वह एक ऐसा समय था जिस समय धन की उपलब्धता बहुत कम थी, इसलिए उन्होंने 1950 में परमाणु ऊर्जा विभाग की स्थापना की, जिसका प्रयोग पूरे भारत में अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए धन अर्जित करने के लिए किया गया. कुछ परीक्षण ऐसे थे जो निरंतर वैज्ञानिकों द्वारा जारी रखे गए, जिसमें मौसम विभाग, पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के पहलुओं पर परीक्षण आदि था.

भारत की जनता को अंतरिक्ष और अंतरिक्ष से जुड़ी किसी भी बात पर विश्वास दिलाना इतना आसान नहीं था, इसलिए जब सन् 1957 में सोवियत यूनियन ने स्पूतनिक 1 को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया, तो बाकी पूरी दुनिया में अंतरिक्ष से जुड़ी सभी बातों पर विश्वास किया जाने लगा और अंतरिक्ष से जुड़ी सभी बातों को अहमियत भी दी जाने लगी. उसके बाद ही सन 1962 में भारत सरकार द्वारा भारतीय राष्ट्रीय अनुसंधान समिति बनाई जाने का फैसला लिया गया. तत्पश्चात इसरो के जनक विक्रम साराभाई के साथ मिलकर भारतीय राष्ट्रीय अनुसंधान समिति ने ऊपरी वायुमंडल के अध्ययन के लिए एक रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन बनाया जिसकी स्थापना तिरुवंतपुरम के थुम्बा में की गई.

सन 1969 में अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन को तत्कालीन रूप से इसरो का नाम दे दिया गया. भारत देश के नागरिकों और सरकार को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका और महत्व समझाते हुए इसरो के विकास में विक्रम साराभाई का अपना महत्वपूर्ण योगदान रहा और अधिक विकास के लिए उन्होंने आवश्यक दिशा-निर्देशों के साथ इसरो को 1 महत्वपूर्ण स्थान दिया. इस प्रकार धीरे-धीरे इसरो में अपने महत्वपूर्ण सहयोग द्वारा उन्होंने राष्ट्र को कई सारी अंतरिक्ष आधारित सेवाएं स्वतंत्र रूप से प्रदान की.

इसरो के मुख्य कार्य क्या है ? (ISRO Important Points, Questions in UPSC)

इसरो के बहुत से मुख्य कार्य हैं जो निम्नलिखित हैं.

  • इसरो का सर्वप्रथम मुख्य कार्य अंतरिक्ष में लांच होने वाले व्हीकल सिस्टम और साउंडिंग रॉकेट के संपूर्ण डिज़ाइन बनाने का और उसके विकास की प्राप्ति करने का और उन्हें ठीक तरह से अंतरिक्ष में लॉन्च करने का है.
  • उनका दूसरा प्रमुख कार्य यह है कि वह भारतीय जनता के लिए दूरसंचार टेलीविजन प्रसारण सुरक्षा आवश्यकताओं और सामाजिक अनु प्रयोगों के लिए समय-समय पर संचार उपग्रहों को डिजाइन करते रहे और उन्हें अंतरिक्ष में भेजते रहें. ताकि हम ठीक तरह से सभी प्रकार के टेलीविजन इंटरनेट और रेडियो आदि का इस्तेमाल कर सकें.
  • बड़ी-बड़ी नाव के संचालन हेतु वे उपग्रहों और अंतरिक्ष आधारित प्रणालियों के उचित डिज़ाइन बनाते हैं तथा उनके विकास और प्राप्ति की देखरेख पूरी तरह से करते हैं.
  • प्रकृति द्वारा प्राप्त सभी प्रकार के संसाधनों के मानचित्रण पर पूरी तरह से निगरानी करने के लिए इसरो उपग्रहों के डिजाइन बनाता हैं, जोकि पृथ्वी पर होने वाली सभी आपदाओं का पहले से ही अनुमान लगाने में सक्षम होते हैं.
  • कई सारे प्रबंधन की ज़िम्मेदारी भी इसरो पर ही होती है जैसे प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन, आपदा प्रबंधन, सहायता और कई सामाजिक अनुप्रयोगों में योगदान.
  • अंतरिक्ष से जुड़ी जितनी भी वस्तुएँ रॉकेट या फिर कोई भी प्रकार का उपकरण बनाया गया है तो उनकी पूरी जांच परख करना और उनकी अच्छे से देखरेख करना भी इसरो का मुख्य कार्य है.
  • इसरो के सबसे महत्वपूर्ण कार्यों में से एक देश के लिए कुछ ऐसे हथियार बनाना, जिनकी सहायता से किसी भी प्रकार के युद्ध या फिर कोई भी सीक्रेट मिशन के लिए भारत देश की जनता व सरकार सदैव तत्पर रहे.

इसरो के द्वारा अब तक कितने सेटेलाइट लांच किए जा चुके हैं ? (Satellite Sent by ISRO in hindi ?)

यदि आज के समय तक इसरो की कामयाबी के बारे में गिनती की जाए तो एक अनुमानित आंकड़ा कहता है कि आज की वर्तमान स्थिति में इसरो द्वारा लगभग 105 सैटेलाइट अंतरिक्ष की ओर लांच किए जा चुके हैं. इसरो ने केवल भारत के लिए ही यान लांच नहीं किए हैं बल्कि इनमें से अधिकतर यान विदेशों के लिए लांच किए गए हैं. साल 2019 में ही अब तक इसरो द्वारा चार अंतरिक्ष यान लांच किए जा चुके हैं जिनके नाम हैं –

इसरो द्वारा लांच की गई सैटेलाइट्स की सूची (ISRO Satellite List)

इसरो द्वारा अब तक 106 सैटेलाइट्स लांच की जा चुकी हैं जिसमें से हम यहाँ पर आपके सामने कुछ प्रसिद्ध सैटेलाइट्स की सूची प्रदर्शित करने जा रहे हैं जोकि इस प्रकार है –

क्र.म. सैटेलाइट का नाम लांच का साल विशेषतायें
1. आर्यभट्ट 19 अप्रैल, 1975 पहली भारतीय सैटेलाइट
2. भास्करा – 1 7 जून, 1979 पहली एक्सपेरीमेंटल रिमोट सेंसिंग अर्थ ऑब्सरवेशन सैटेलाइट
3. रोहिणी आरएस – 1 18 जुलाई, 1980 स्वदेशी लांच व्हीकल एसएलवी द्वारा पहली भारतीय सैटेलाइट सफलतापूर्वक लांच की गई.
4. एरीयन पैसेंजर पेलोड एक्सपेरीमेंट (एप्पल) 19 जून, 1981 पहला भारतीय 3 – एक्सिस स्टाबिलाइज्ड एक्सपेरीमेंटल जियोस्टेशनरी कम्युनिकेशन सैटेलाइट
5. भास्करा – 2 20 नवम्बर, 1981 ऑर्बिट से अर्थ ऑब्जरवेशन के लिए पहला भारतीय सैटेलाइट
6. इनसैट – 1ए (भारतीय नेशनल सैटेलाइट) 10 अप्रैल, 1982 पहला ऑपरेशनल मल्टीपर्पस संचार एवं मौसम विज्ञान सैटेलाइट
7. आईआरएस – 1ए (भारतीय रिमोट सेंसिंग – 1ए) 17 मार्च, 1988 पहला रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट
8. इनसैट – 2ए (भारतीय नेशनल सैटेलाइट) 10 जुलाई 1992 पहला भारतीय मल्टीपर्पस सैटेलाइट
9. ओसियनसैट – 1 (आईआरएस – पी4) 26 मई, 1999 पहला भारतीय सैटेलाइट जो विशेष रूप से ओसियन एप्लीकेशन्स के लिए बनाया गया था.
10. कल्पना – 1 (मेटसैट) 12 सितम्बर, 2002 पहला भारतीय डेडिकेटेड मीटरोलॉजी सैटेलाइट
11. जीसैट – 3 (ग्रामसैट – 3) (इदुसैट) 20 सितम्बर, 2004 पहला भारतीय सैटेलाइट जो विशेष रूप से एजुकेशनल सेक्टर की सेवा के लिए बनाया गया था.
12. आईएमएस – 1 (तीसरा विश्व सैटेलाइट – टीडब्ल्यूसैट) 28 अप्रैल, 2008 पहला भारतीय सैटेलाइट जिसमें इसरो के भारतीय मिनी सैटेलाइट का उपयोग किया गया था.
13. आईआरएनएसएस – 1ए (भारतीय रीजनल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम) 1 जुलाई, 2013 आईआरएनएसएस सीरीज में पहला नेविगेशनल सैटेलाइट
14. मार्स ऑर्बिटर मिशन (एमओएम) स्पेसक्राफ्ट 5 नवंबर, 2013 भारत का पहला मंगल ऑर्बिटर, जिसे मंगलयान भी कहा जाता है.
15. एस्ट्रोसैट 28 सितम्बर, 2015 मल्टी – वेवलेंथ स्पेस ऑब्जर्वेटरी के साथ पहला भारतीय सैटेलाइट
16. जीसैट – 15 (ग्रामसैट – 15) 11 नवंबर, 2015 कम्युनिकेशन के लिए उपयोग होने वाली भारतीय सैटेलाइट
17. स्वयं – 1 22 जून, 2016 पहला भारतीय सैटेलाइट जोकि पैसिव एटीट्यूड कण्ट्रोल को प्रदर्शित करने के लिए लांच किया गया था.
18. माइक्रोसैट – टीडी (माइक्रोसैटेलाइट) 10 जनवरी, 2018 यह स्पेस में भारत का 100 वां सैटेलाइट था, जोकि अर्थ ऑब्जरवेशन सैटेलाइट था.
19. जीसैट – 31 6 फरवरी, 2019 यह एक हाई थ्रूआउट टेलीकम्यूनिकेशन सैटेलाइट था.
20. ईएमआईसैट 1 अप्रैल, 2019 यह सैटेलाइट इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम मेज़रमेंट के लिए था, जोकि एक भारतीय रिकोनाइसंस सैटेलाइट है.
21 चंद्रयान – 2 22 जुलाई, 2019 यह चंद्रयान – 1 के बाद भारत का दूसरा लूनर एक्सप्लोरेशन मिशन था.

  इसके अलावा इसरो की स्थापना के बाद से लेकर वर्तमान समय तक बहुत सारे यान अंतरिक्ष की ओर लांच किए जा चुके हैं जिसकी इतनी लंबी लिस्ट है कि दुनिया इसरो की तारीफ करते नहीं थक रही है.

भारत में इसरो के कितने सेंटर मौजूद हैं ? (How Many ISRO Centre in India ?)

भारत के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली इसरो ने अब तक 50 सालों में भारत का पूरे विश्व में नाम रोशन किया है. सफलतापूर्वक भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान ने अब तक पूरे भारत देश में अपने 20 महत्वपूर्ण सेंटर स्थापित कर चुके हैं. भारत के विभिन्न राज्यों में विभिन्न उद्देश्यों से अलग-अलग भारतीय अनुसंधान के केंद्र बनाए गए है. उन सभी का मुख्य कार्यालय बेंगलुरु में स्थापित अंतरिक्ष अनुसंधान ही है जिसे इसरो के नाम से भी जानते हैं. इसरो के चार मुख्य सेंटर भारत की राजधानी नई दिल्ली में स्थापित हैं जिनमें से दो केंद्र देहरादून में है और एक लखनऊ में भी बनाया गया है. इसके अलावा इसरो के अन्य केंद्र शिलांग, खड़गपुर, हैदराबाद, तिरुपति, पोर्ट ब्लेयर, केरला, महेंद्रगिरि, तिरुवंतपुरम, हसन, बेंगलुरु, मुंबई, नागपुर, माउंट आबू, अहमदाबाद, जोधपुर, उदयपुर औऱ बालासोर में निर्मित किए गए हैं. यह सभी इसरो के मुख्य केंद्र हैं, और यह सभी विभिन्न उद्देश्यों के लिए इन राज्यों में स्थापित किए गए हैं.

इसरो वैज्ञानिकों की सोच, मिशन और उनका उद्देश्य (ISRO Missions)

यदि इसरो वैज्ञानिकों की काल्पनिक दृष्टि के बारे में सोचा जाए या फिर देखा जाए, तो वे कुछ अनुसंधानों का प्रयोग करके ऐसे ग्रहों के बारे में खोज करना चाहते हैं और उनके बारे में जानना चाहते हैं, जिनका इस्तेमाल हमारे आने वाले वर्तमान समय में बहुत अधिक होने वाला है. वे राष्ट्रीय विकास के लिए अपने अधिकतम और सबसे उचित ऐसे अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देना चाहते हैं, जो हमारी आने वाली भावी पीढ़ी के लिए सहायक सिद्ध होंगे. इसरो के मिशन पर नजर डाली जाए तो उनके मिशन तो चाँद पर घर बनाने के हैं, परंतु यदि आमतौर पर बात की जाए तो उनके कुछ महत्वपूर्ण मिशन और उद्देश्य भी हैं जो निम्नलिखित हैं.

  • उनका मिशन यह है कि वे कुछ ऐसे वाहनों को निर्मित करें जो आसानी से हमें दूसरे ग्रहों पर ले जाएं और वहां पर हमें जीवन की खोज में सहायता प्रदान करें.
  • उनके मिशन में से सबसे महत्वपूर्ण मिशन यह भी है कि वह पूरी पृथ्वी के अवलोकन के बाद पृथ्वी को संचार माध्यम से जोड़े रखें. दिशा निर्देशों पर आधारित नेवीगेशन प्रदान करते रहे, वे चाहते हैं कि मौसम की आगामी भविष्यवाणी को पहले से ही समझते हुए आपदा प्रबंधनो के लिए भारत देश व पूरे विश्व को पहले से ही सुरक्षित रखा जा सके. वे अपने अथक प्रयासों से ऐसे ही कुछ उपकरण व उपग्रह बना रहे हैं, जिनसे आने वाली भावी पीढ़ी को इन सभी सुविधाओं का संपूर्ण लाभ प्राप्त हो पाएगा.
  • उनका मिशन एक ऐसा इमेजनरी प्राकृतिक संसाधनों की निगरानी रखने के लिए रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट बनाने का है, जो हमारे प्रकृति से जुड़े सभी उद्देश्यों को पूरा करने में समय – समय पर वैज्ञानिक रूप से सरकार की और इसरो के वैज्ञानिकों की मदद कर सके.
  • इनका सबसे महत्वपूर्ण मिशन भारत का सामाजिक विकास है ताकि अंतरिक्ष के मामले में भारत के प्रयोग सबसे उत्तम और सभी देशों में प्रशंसनीय हो.
  • इसरो के सभी मशीनों में से एक मिशन यह भी है कि वे अंतरिक्ष विज्ञान की सहायता से कुछ ऐसे ग्रहों की खोज भी करना चाहते हैं, जो हमारी पृथ्वी के विकास और जीवन को एक नया प्रारूप प्रदान कर सके.

इसरो की मुख्य उपलब्धियाँ (ISRO Achievements)

इसरो के 50 साल के कार्यकाल में उन्होंने बहुत बड़ी बड़ी उपलब्धियाँ प्राप्त की जिनमें से मुख्य निम्नलिखित हैं –

  • सन 1975 के अप्रैल महीने की 19 तारीख को पहली बार भारतीय वैज्ञानिकों ने एक उपग्रह का लांच किया. इसे ‘आर्यभट्ट’ नाम दिया गया था और इसे रूस के वैज्ञानिकों की सहायता से लांच किया गया था. इस लॉन्च की सफलता के लिए कई सारे देशों ने भारत देश को बधाई भी दी थी.
  • साल 2019 तक इसरो द्वारा लगभग 105 से भी ज्यादा सैटेलाइट का लांच किया जा चुका है, जिनमें से अत्यधिक सेटेलाइट अमेरिकी और रूस जैसे बड़े देशों के लिए भारत द्वारा निर्मित की गई और लांच की गई. इन सेटेलाइट के लॉन्च के बदले इसरो को 700 करोड़ रुपए की एक बड़ी रकम का मुनाफ़ा हुआ.
  • इसरो की सबसे बड़ी और अहम उपलब्धि चंद्रयान की रही, जिसमें से उन्होंने Chandrayaan-1 अभियान को साल 2008, 22 अक्टूबर के दिन सतीश धवन स्पेस सेंटर से लांच किया था. यह यान धरती से छोड़ा गया और इसे चाँद तक पहुंचने में करीब 5 दिन लगे तथा इसको चंद्रमा की कक्षा में पहुंचाया गया, जिसमें चंद्रमा की कक्षा में पूरी तरह स्थापित होने के लिए इसे कम से कम 15 दिन का समय लग गया.
  • Chandrayaan-1 ने सफलतापूर्वक 10 महीने तक काम करने के बाद अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का Chandrayaan-1 से पूरी तरह संपर्क टूट गया. इसको लगभग 2 साल का कार्यकाल दिया गया था, परंतु पहले ही इससे संपर्क टूट गया. किंतु इस असफलता के बाद भी Chandrayaan-1 अपना 95% काम पहले ही पूरा कर चुका था.
  • चंद्रयान 1 भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा एक बहुत बड़ी सफलता थी, क्योंकि इस यान ने चंद्रमा पर पानी की खोज करके वहां भारत देश का परचम लहराया और चांद पर खोज करने वाला पहला देश बन कर इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज कराया. चंद्रमा पर पानी मौजूद है इसके बहुत से पुख्ता सबूत इकट्ठे करके भारतीय वैज्ञानिकों ने कई सारी अंतरिक्ष एजेंसियों को भेजा.
  • 10 साल की कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने फिर से Chandrayaan-2 का निर्माण किया. जिसके बारे में पूरी संक्षिप्त जानकारी आप आज के समय में प्रत्येक मीडिया के जरिए प्राप्त कर ही पा रहे हैं.
  • चांद की यात्रा करने के बाद इसरो ने मंगल की यात्रा साल 2013 में की जिसे मिशन मंगल का नाम दिया गया. मिशन मंगल की यात्रा लगभग 298 दिन की रही और सन 2014 के सितंबर माह की 24 तारीख वह तारीख थी जब मंगलयान को पूरी तरह से कक्षा में स्थापित करके इसरो ने एक बहुत बड़ी जीत हासिल की.
  • 2013 तक कोई भी देश मंगलयान के इस मिशन में सफलता प्राप्त नहीं कर पाया था, इसलिए भारत में ऐतिहासिक पन्नों में अपना नाम पहले नंबर पर दर्ज करा लिया.
  • इसके अलावा पीएसएलवी की सहायता से साल 2008 में एक साथ 10 रॉकेट अंतरिक्ष की ओर छोड़े गए. कमाल की बात तो यह है कि इस हलके उपग्रहों को छोड़ने के लिए पीएसएलवी का इस्तेमाल किया जाता है और अब तक इसकी सहायता से 70 से ज्यादा उपग्रह अंतरिक्ष की ओर छोड़े जा चुके हैं. इसकी संपूर्ण सफलता को देखते हुए इसकी सहायता से 22 जून 2016 को अपने अथक प्रयासों से भारतीय वैज्ञानिकों ने एक साथ 20 उपग्रह पृथ्वी की कक्षा में भेज दिए और उन्हें सफलतापूर्वक वहीं पर स्थापित किया.
  • भारत में जब पहला रॉकेट लांच इन स्टेशन बनाया गया तब तिरुवनंतपुरम से सफलतापूर्वक भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा प्रथम रॉकेट अंतरिक्ष की ओर लांच किया गया. भारतीय वैज्ञानिकों की कड़ी मेहनत थी, कि इस लांच में उन्होंने सफलता प्राप्त की.

अंत में इसरो का संपूर्ण और संक्षिप्त विवरण में हम यही कह सकते हैं कि इसरो ने देश के विकास में अपना अहम योगदान दिया ही है. वर्तमान पीढ़ी के साथ-साथ भावी पीढ़ी के लिए भी इसरो और इसरो के वैज्ञानिक अत्यधिक प्रेरणादायक और विकास पूर्वक काम कर रहे हैं. भारतीय सरकार के सहयोग से इसरो ने जो भी सफलता आज तक प्राप्त की है उसमें सबसे अधिक महत्वपूर्ण योगदान इसरो के वैज्ञानिकों का ही है. सरकार और इसरो के वैज्ञानिकों ने मिलकर देश का ही नहीं बल्कि भारतीय जनता का भी नाम विदेशों में रोशन किया है. भविष्य में इसरो की यही कोशिश है कि वह दूसरे ग्रहों पर भी जीवन की संपूर्ण खोज करना चाहते हैं और यही चाहते हैं कि कल को यदि पृथ्वी पर किसी भी समस्या का सामना इंसान को करना पड़े तो वह दूसरे ग्रह पर भी जाकर अपना घर आसानी से बसा सके.

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