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करण जौहर का जीवन परिचय | Karan Johar biography in hindi

Karan Johar biography and Quotes in hindi करण जौहर भारतीय फ़िल्म उद्योग में एक जाना पहचाना नाम है. यह भारतीय फ़िल्म उद्योग के निर्माता, निर्देशक, अभिनेता, पोशाक डिज़ाइनर, पटकथा लेख़क के अलावा टेलीविजन व्यक्तित्व भी है. उन्होंने बॉलीवुड इन्डस्ट्री में धर्मा प्रोडक्शन्स नाम के बैनर को स्थापित किया है. वो हिंदी सिनेमा के जाने माने निर्माता निर्देशकों की सूची में अपना नाम स्थापित करने में सफल रहे है. हाल ही में उनकी कंपनी धर्मा प्रोडक्शन्स जो की बाहुबली 2 फ़िल्म की हिंदी संस्करण की वितरक है, उसकी सफलता ने उन्हें चर्चित कर दिया है. बाहुबली 2 द कन्क्लूजन फिल्म रिव्यु यहाँ पढ़ें.  

 

करण जौहर का जन्म और शिक्षा (Karan Johar birth and education)  

करण जौहर का जन्म भारत के महाराष्ट्र राज्य के मुम्बई में 25 मई 1972 को हुआ था. उन्होंने अपनी सारी पढाई मुम्बई से ही की है. स्कूल की शिक्षा उन्होंने ग्रीन्लावंस हाई स्कूल से पूरी की. इसके बाद उन्होंने एच आर कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स एंड इकोनॉमिक्स में नामांकन कराया उन्होंने फ्रेंच में मास्टर डिग्री भी प्राप्त की है. करण जौहर की बायोग्राफी की पुस्तक का नाम ‘एन अनसूटेबल बॉय’ है, जिसको पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के द्वारा लॉन्च किया गया. इस पुस्तक में उनके बचपन से लेकर निर्देशक बनने तक की सभी बातों का जिक्र है.

करण जौहर का पारिवारिक जीवन (Karan Johar family)  

करण जौहर के पिता का नाम यश जौहर है, जोकि धर्मा प्रोडक्शन्स के संस्थापक थे और माँ का नाम हीरू जौहर है, वह फ़िल्म निर्माता यश चोपड़ा की छोटी बहन है. करण जौहर अपने माता पिता की इकलौती संतान है.

करण जौहर का करियर (Karan Johar career)  

अपने करियर में उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में काम किया हुआ है, जिनका अलग अलग वर्णन करने का प्रयास किया गया है जो निम्नलिखित है –

  • फ़िल्मों में अभिनेता के तौर पर किये गए कार्य (Karan Johar as actor)

एक अभिनेता के रूप में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1989 में दूरदर्शन पर आने वाले सीरियल इन्द्रधनुष में काम करके किया था. इस सीरियल में उन्होंने श्री कान्त नाम के किरदार की भूमिका निभाई थी. फिर 1995 में आई फ़िल्म दिल वाले दुल्हनिया ले जायेंगें में उन्होंने अभिनेता शाहरुख़ खान के दोस्त की भूमिका निभाई थी. साथ ही इस फ़िल्म के लिए उन्होंने सहायक निर्देशक का भी काम किया था. फिर ये 2007 में फ़िल्म ‘ओम शांति ओम’ में, 2008 में फ़िल्म ‘फ़ैशन’ और 2009 में फ़िल्म ‘लक बाय चांस’ में कैमियो के रूप में दिखें. उसके बाद 2015 में उनके द्वारा पूर्ण रूप से अभिनीत फ़िल्म ‘बोम्बे वेलवेट’ आई, जिसमे अनुष्का शर्मा और रणवीर कपूर भी थे. यह फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर कुछ अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई, लेकिन करण जौहर द्वारा किये गए अभिनय की सबने प्रसंशा की. उनके अभिनय की तारीफ़ करते हुए फ़िल्म आलोचक सरिता ए तंवर ने कहा कि फ़िल्म में करण जौहर ने अपने किरदार को बहुत सम्मानीय तरीके से निभाया है, जोकि पूरी तरह से प्रशंसा करने के लायक है, क्योंकि वह एक प्रोफेशनल अभिनेता नहीं है ये उनका क्षेत्र नहीं है, फिर भी उन्होंने अच्छा काम किया है. अनुष्का शर्मा का जीवन परिचय यहाँ पढ़ें.

  • टेलीविजन में किये गए कार्य (Karan Johar television)

करण जौहर एक ऐसे सेलिब्रिटीज आधारित टॉक शो के मेजबानी करते है, जिसमे भारतीय हिंदी फ़िल्म उद्योग से जुड़े हस्तियों को बुलाकर उनका साक्षात्कार किया जाता है. इस शो के अब तक 5 सीजन प्रसारित हो चुके है, जिनमे से पहला सीजन 2004 से 2005 तक प्रसारित किया गया था, दूसरा सीजन 2007 में तथा तीसरे सीजन का प्रसारण 2010 से 2011 तक हुआ था. चौथा सीजन 2013 से 2014 तक और पांचवां सीजन 6 नवम्बर 2016 में प्रसारित किया गया. इसके अलावा उन्होंने 2012 में माधुरी दीक्षित और कोरियोग्राफर रेमो डी सुजा के साथ झलक दिखला जा नामक शो को जज किया था. इसके बाद उन्होंने एक और शो में भी जज के रूप में काम किया जिसका नाम था ‘इंडिया गौट टैलेंट’. इस शो में उनके साथ मलाइका अरोड़ा खान, फराह खान और किरण खेर ने भी जज के रूप में अपना योगदान दिया था. माधुरी दीक्षित का जीवन परिचय यहाँ पढ़ें.

  • निर्माता के रूप में कार्य (Karan Johar producer)  

करण जौहर अपने पिता के कामों में हमेशा हाथ बटाते रहते थे, लेकिन उनके पिता यश जौहर की मृत्यु के बाद उनके पिता द्वारा स्थापित की गयी धर्मा प्रोडक्शन्स की जिम्मेदारी पूर्ण रूप से उन्होंने संभाल ली. उन्होंने ज्यादातर फ़िल्मों का निर्देशन धर्मा प्रोडक्शन्स के बैनर तले ही किया है, सिर्फ़ एक फिल्म ‘बॉम्बे टॉकीज’ को छोडकर, जोकि 2012 में बनी थी, क्योकि इस फ़िल्म को एन्थोलोजी फ़िल्म ने बनाया था. इस फ़िल्म के वो लेखक भी थे. इसके अलावा अन्य निर्देशकों के साथ मिलकर धर्मा प्रोडक्शन्स के बैनर के तहत कई अन्य फ़िल्मों का भी उन्होंने निर्माण किया है, जिनमे से कुछ फ़िल्मों के नाम है- 2003 में आई फिल्म ‘कल हो न हो’, करण जौहर इस फ़िल्म के निर्माता के साथ ही लेखक भी थे, इसके अलावा 2005 में रेड चिल्लीज इंटरटेनमेंट के साथ मिलकर इन्होने फ़िल्म ‘काल’ को निर्मित किया था और 2008 में फिल्म कुर्बान और दोस्ताना को निर्मित किया. 2010 में फ़िल्म हेट लव स्टोरी आई, जिसको यू टीवी मोशन पिक्चर्स के साथ मिल कर बनाया था. इसी वर्ष करण ने फिल्म ‘वी आर फैमिली’ को सोनी पिक्चर्स के साथ मिलकर निर्मित किया. 2013 में फिल्म ‘अग्निपथ’, ‘यह जवानी है दीवानी’ और ‘गोरी तेरे प्यार में’ का निर्माण किया.

karan johar

2014 में उन्होंने फ़िल्म ‘2 स्टेट्स’, ‘हम्प्टी शर्मा की दुल्हनिया’ और ‘ऊँगली’ का निर्माण किया. 2015 में फ़िल्म ‘ब्रदर्स’ को लायन गेट इंटरटेनमेंट और एंडमोल इंडिया के साथ बनाया. उन्होंने इस साल ही फिल्म ‘शानदार’ का निर्माण फ़िल्म ‘फैंटम’ के साथ किया और 2016 में फिल्म ‘कपूर एंड संस’, ‘बार बार देखो’ का निर्माण किया, जिसको उन्होंने एक्सेल इंटरटेनमेंट और एरोस इंटर नेशनल के साथ मिलकर बनाया था. इसी वर्ष फ़िल्म ‘डियर जिन्दगी’ को रेड चिल्लीज इंटरटेनमेंट के साथ मिल कर निर्मित किया. 2017 में भी उन्होंने ‘इत्तेफाक’ नाम की फ़िल्म का निर्माण रेड चिल्लीज के साथ मिलकर किया है.     

  • निर्देशक के रूप में किये गए कार्य (Karan Johar as Director)

करण जौहर ने सहायक निर्देशक के रूप में आदित्य चोपड़ा के साथ मिलकर 1995 में एक फ़िल्म का निर्देशन कर फ़िल्म उद्योग में प्रवेश किया. इस फ़िल्म का नाम ‘दिल वाले दुल्हनिया ले जायेंगें’ था. हिंदी फ़िल्म जगत में यह फ़िल्म मील का पत्थर साबित हुई. इसके बाद पूर्ण रूप से उनके द्वारा निर्देशित फ़िल्म 1998 में आई, जिसका नाम ‘कुछ कुछ होता है’ था. इस फ़िल्म की कहानी भी उन्हीं के द्वारा लिखी गयी थी. यह फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई. यह फ़िल्म एक त्रिकोणीय प्रेम पर आधारित थी. इस फ़िल्म में सलमान खान, शाहरुख़ खान, काजोल और रानी मुखर्जी जैसे कलाकार थे. इस फ़िल्म के लिए आलोचकों ने भी सकारात्मक समीक्षा की. प्लेनेट बॉलीवुड के समीक्षक अनिश खान ने इस फिल्म की समीक्षा करते हुए कहा कि करण जौहर ने अपने निर्देशन की बहुत अच्छी शुरुआत की है, उनके द्वारा स्क्रिप्ट को एक सार्थक अर्थ प्रदान किया गया है, साथ ही उन्हें यह भी पता है कि फ़िल्म को किस स्टायल में बनाना है. उन्होंने इस सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फ़िल्म के लिए कई सारे पुरस्कार प्राप्त किये.

2001 में उनके द्वारा निर्देशित फ़िल्म ‘कभी खुशी कभी गम’ आई. यह फ़िल्म मल्टी स्टारर फ़िल्म थी. इस फ़िल्म की कहानी भी करण जौहर ने ही लिखी थी. इस फ़िल्म में अमिताभ बच्चन, काजोल, करीना कपूर, शाहरुख़ खान और हृतिक रोशन ने अपने अभिनय क्षमता को बखूबी से बहुत अच्छी तरह से प्रदर्शित किया था. यह फ़िल्म करण जौहर की दूसरी ब्लॉक बस्टर फ़िल्म साबित हुई. इस फ़िल्म की कहानी में अमिताभ बच्चन को एक अमीर उद्योग पति के रूप में, जया बच्चन को उनकी पत्नी के रूप में जो की स्वाभाव से बहुत दयालु प्रवृती की रहती है और उनके दो बेटों के रूप में शाहरुख़ खान और हृतिक रोशन को दिखाया गया है, जिसमे शाहरुख़ को गोद लिए अनाथ बच्चे के रूप में दिखाया गया है. इस फ़िल्म में हीरोइन करीना कपूर और काजोल को मध्यम वर्गीय परिवार की दो बहनों के रूप में दिखाया गया है, और उन्हें शाहरुख़ और हृतिक के प्यार में पड़े हुए दिखाया गया है. इस फ़िल्म को भी आलोचकों ने भी काफी सकारात्मक समीक्षा दी. आलोचक तरन आदर्श ने इस फ़िल्म की समीक्षा करते हुए अपनी टिपण्णी दी कि इस फ़िल्म के माध्यम से करण जौहर ने इस बात को साबित कर दिया है कि वह फिल्मों के निर्माण में प्रतिभाशाली है. इस फ़िल्म का आधार काफ़ी सरल है, लेकिन इसकी कहानी की प्रस्तुति बहुत ही उम्दा है.

2006 में उनके द्वारा निर्देशित एक और मल्टी स्टारर फ़िल्म आई जिसका नाम था ‘कभी अलविदा न कहना’. इस फ़िल्म में शाहरुख़ खान, काजोल, अभिषेक बच्चन, प्रीति जिन्टा और रानी मुखर्जी ने अभिनय किया है. यह फ़िल्म काफ़ी विवादस्पद विषय पर बनी थी, जिसमे न्यू यॉर्क शहर में रहने वाले गैर प्रवासी भारतियों के विवादस्पद पृष्ठभूमि को दिखाया गया था. इस फ़िल्म को भारत के साथ साथ विदेशों में भी काफी सफलता प्राप्त हुई. इस फ़िल्म को भी आलोचकों की काफ़ी सकारात्मक समीक्षा मिली. इस फ़िल्म के बारे में बताते हुए राजीव मसंद ने लिखा है कि कुछ लेख़क को अपनी पटकथा के लिए करण जैसे ठोस नियंत्रित निर्देशक की चाहत हमेशा रहती होगी, क्योकीं वो कहानियों की जटिलता को बहुत अच्छे से समझते हुए उसको निर्देशित करते है. वास्तव में करण जौहर ये जानते है कि किस तरह से एक लाइन के संवाद को भी बैक ग्राउंड म्यूजिक के साथ कैसे प्रस्तुत करना है, और किस तरह से एक सधारण से दृश्य को असाधारण बनाया जा सकता है. 

अपनी निर्देशन क्षमता का बख़ूबी से अच्छा प्रदर्शन करते हुए करण जौहर ने अपने निर्देशन में चौथी फ़िल्म 2010 में बनाई जिसका नाम था ‘माय नेम इज खान’. यह फ़िल्म आतंकवाद पर आधारित थी, जिसकी कहानी में यह दिखाया गया कि एक मुस्लिम पति पत्नी जो की सन फ्रांसिस्को में रहते है, और 2011 में हुए आतंकी हमले से जुड़े लोगों के नस्लीय पूर्वाग्रह का सामना करते है. इस फ़िल्म में मुस्लिम पति-पत्नी का किरदार काजोल और शाहरुख़ खान ने निभाया है. यह फ़िल्म भी व्यावसायिक रूप से काफी सफल रही थी. आलोचकों ने भी फ़िल्म की सकारात्मक समीक्षा की और कहा की फ़िल्म में करण ने नये विषय को लाकर कुछ अलग करने की कोशिश की है, जो प्रशंसा के लायक है. इस फ़िल्म की समीक्षा करते हुए आलोचक सुभाष के झा ने लिखा है कि किसी भी फ़िल्म को परिपूर्ण बनाने के लिए उसकी सामग्री, टोन उसकी प्रस्तुत करने का तरीका परिपूर्ण बनाता है. करण जौहर ने इस फ़िल्म को बहुत मासूमियत से प्रस्तुत किया है. इस फ़िल्म के लिए भी जौहर पुरस्कार प्राप्त कर चुके है.

2012 ने उनके द्वारा निर्देशित फ़िल्म ‘स्टूडेंट ऑफ़ द इयर’ के लिए करण जौहर ने किसी भी मल्टी स्टार को न ले के कुछ नए चेहरों को लेने का विचार किया, और इसके लिए उन्होंने तीन नवोदित अभिनेताओं को चुना जिनके नाम आलिया भट्ट, वरुण धवन और सिद्धार्थ मल्होत्रा थे. यह फ़िल्म त्रिकोणीय प्रेम पर आधारित और छात्रों के समूह की साजिशों पर आधारित थी. इस फ़िल्म ने बॉक्स ऑफिस पर मध्यम व्यावसायिक सफलता प्राप्त की. समीक्षकों ने भी इस फिल्म के लिए मिली जुली समीक्षा की. कुछ ने इसके पक्ष में सकरात्मक बाते कही, तो  कुछ ने इस फिल्म के विपक्ष में बोलते हुए इसे सिंड्रोम से पीड़ित बताया.

करण जौहर ने जोया अख्तर, अनुराग कश्यप और दिबाकर बनर्जी के साथ मिलकर 2013 में फिल्म ‘बॉम्बे टॉकीज’ को बनाया और यह फ़िल्म भारतीय सिनेमा घरों में बहुत ही शान से 100 दिनों तक चलती रही. यह फ़िल्म समलैंगिकता पर आधारित थी. इस फ़िल्म को भी आलोचकों की सकारात्मक समीक्षा हासिल हुई. इस फ़िल्म में रानी मुखर्जी, रणदीप हूड्डा और साकिब सलीम जैसे कलाकारों ने अभिनय किया था. 2016 में उनके द्वारा निर्देशित रोमांटिक फ़िल्म ‘ए दिल है मुश्किल’ आई. इस फिल्म में एश्वर्या रॉय, रणवीर कपूर और अनुष्का शर्मा ने मुख्य किरदारों के रूप में अभिनय किया है. यह फ़िल्म भी व्यावसायिकता के मामले में सफल रही आलोचकों ने इसके लिए सकारात्मक समीक्षा की.

  • कॉस्टयूम डिज़ाइनर के रूप में किये गए कार्य (Karan Johar costume designer)

करण जौहर ने शाहरुख़ खान के लिए बहुत से फ़िल्म के लिए कॉस्टयूम डिज़ाइनर का काम भी किया है. जिस फ़िल्म में शाहरुख़ खान उनके द्वारा डिज़ाइन किये हुए वस्त्र पहने है, उन फिल्मों के नाम है- दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे, दिल तो पागल है, डुप्लीकेट, मोहब्बतें, मै हूँ ना, वीर ज़ारा और ओम शांति ओम.                                                   

करण जौहर के अवार्ड और उपलब्धियां (Karan Johar awards)  

करण जौहर के अवार्ड्स और उपलब्धियों की फेहरिस्त थोड़ी लम्बी है. उन्हें बहुत से सम्मान प्राप्त हुए है, जिनमे निम्न शामिल हैं-

  • 2007 में उनको जेनेवा स्थित विश्व आर्थिक मंच 2006 के द्वारा 250 ग्लोबल युवा नेताओं में से एक के रूप में चुना गया था.
  • 30 सितम्बर 2006 को जो पोलैंड के वॉरसॉ में मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता हुई थी, उसमे जूरी सदस्य के रूप में योगदान देने वाले वो पहले भारतीय निर्माता बन गए.
  • वह दुसरे ऐसे भारतीय थे जो मनमोहन सिंह के बाद लन्दन ओलंपिक के कार्यक्रम में आमंत्रित थे.
  • 2017 में जौहर को एक सांस्कृतिक नेता के रूप में विश्व आर्थिक मंच के समारोह के लिए आमंत्रित किया गया.

करण जौहर ने कई सारे अवार्ड भी जीते है जिनकी सूची को नीचे संदर्भित किया गया है, जो निम्नवत है :-

वर्ष फ़िल्म अवार्ड केटेगरी
1999 कुछ कुछ होता है राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फ़िल्म के लिए
फ़ेयर अवार्ड, जी सीने अवार्ड और स्क्रीन अवार्ड   सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म निर्देशक के लिए
फ़ेयर अवार्ड सर्वश्रेष्ठ फिल्म पटकथा के लिए
2002 कभी कुशी कभी गम फ़िल्म फ़ेयर, आईफा अवार्ड सर्वश्रेष्ठ संवाद के लिए
आईफा अवार्ड सर्वश्रेष्ठ निर्देशक के लिए
2004 कल हो न हो आईफा अवार्ड सर्वश्रेष्ठ कहानी के लिए
स्क्रीन अवार्ड सर्वश्रेष्ठ संवाद के लिए
2001 मोहब्बतें आईफा अवार्ड सर्वश्रेष्ठ पोशाक डिज़ाइनर के लिए
2011 माय नेम इज खान फ़िल्म फ़ेयर, आईफा, अप्सरा और जी सीने का अवार्ड सर्वश्रेष्ठ निर्देशक के लिए
जी सीने अवार्ड सर्वश्रेष्ठ कहानी के लिए

करण जौहर का जीवन परिचय (Karan Johar biography in hindi)

अपने व्यक्तिगत जीवन में करण जौहर अपने बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते है, किसी भी मुद्दें पर वो बिना डरे खुल कर अपनी बातों को रखते है. इस वजह से उन्हें बहुत बार विवादों का भी सामना करना पड़ा है. करण जौहर ने शादी नहीं की, किन्तु सरोगेसी के माध्यम से वो दो जुड़वाँ बच्चों के पिता है, उनके जुड़वा बच्चों का जन्म मुम्बई के मसरानी अस्पताल में 7 फ़रवरी को हुआ था. जिनमे से एक लड़की है जिसका नाम रूही है जोकि उनके माता जी के नाम से ही पुनर्गठित है और एक लड़का है जिसका नाम उन्होंने अपने पिता के नाम पर ही यश रखा है. उनका कहना था कि इन दोनों बच्चों को उन्हें 29 मार्च को सौपा गया था और वो उन्हें जब अपने घर ले कर आये थे, तब उनका जीवन पूरी तरह से बदल गया. उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि पहले उनकी पूरी दुनिया और दोस्त उनके माता पिता थे, लेकिन अब यश और रूही मेरे नए दोस्त और मेरी दुनिया है.        

इसके अलावा इनकी व्यक्तिगत जानकारी निम्न सूची में दर्शाई गई है-

नाम करण जौहर
उपनाम के जो
ऊचाई 5 फीट 9 इंच
वजन 77 किलो ग्राम
व्यवसाय निर्देशक, निर्माता, लेख़क और टेलीविजन होस्ट   
शारीरिक बनावट सीना 40 इंच, कमर 34 इंच, बाइसेप्स  12 इंच  
आँखों का रंग गहरा भूरा
बालों का रंग काला
नागरिकता भारतीय
राशि मिथुन राशि
गृह नगर मुम्बई
धर्म हिन्दू
पसंद पुरानी यादों को संगृहीत करना
पता कार्टर रोड, बांद्रा, मुम्बई  
पसंदीदा खाना पारसी खाना
पसंदीदा परफ्यूम क्रीड
पसंदीदा रेस्टोरेंट मुम्बई की स्टारबउस्क्स कॉफ़ी
पसंदीदा टीवी शो द गोल्डन गर्ल्स
पसंदीदा फ़ैशन ब्रांड गिवेंच्य
पसंदीदा फ़िल्म दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगें
पसंदीदा अभिनेता शाहरुख़ खान, ऋषि कपूर और ह्रितिक रोशन 
पसंदीदा अभिनेत्री मेरील स्ट्रीप, काजोल, रानी मुखर्जी और करीना कपूर   
पसंदीदा पेय पदार्थ पिंक शैम्पेन और वाइन में संत एमिलिओं 
वैवाहिक स्थिति अविवाहित
कार जैगुआर एक्स एफ
सैलरी 6 से 8 करोड़
कुल कमाई 200 मिलियन डॉलर

करण जौहर का विवाद (Karan Johar controversy)  

करण जौहर का विवादों से भी नाता रहा है जो कि निम्न है –

  1. करण जौहर का पहला विवाद 2012 में हुआ जब फिल्म ‘स्टूडेंट ऑफ़ द इयर’ रिलीज़ हुई, तब राम गोपाल वर्मा ने इस फ़िल्म के बारे में ट्विटर पर टिप्पणी करते हुए लिखा था कि अगर कोई करण जौहर की फिल्म ‘स्टूडेंट ऑफ़ द इय’र को देख ले तो उसे साल का शिक्षक बना दे और यह साल का आपदा वर्ष बन जायेगा. इस बात का जवाब देते हुए करण जौहर ने लिखा था कि रामू आपके लिए आरामदायक जगह बनी हुई है वर्ष की बड़ी आपदा आपके क्षेत्र में है. इस तरह से दोनों के बीच का ट्विटर वॉर विवाद बना था.
  2. 2015 में जब एआईबी रोस्ट में उन्होंने भागीदारी ली थी तब भी काफ़ी विवाद हुआ था. उनके साथ साथ अभिनेता रणबीर कपूर, अर्जुन कपूर भी इस विवादित शो में भाग लिए थे, उस वक्त इन तीनों के ऊपर भागीदारी के लिए प्राथमिकी दर्ज हुई थी.
  3. फिर जब करण जौहर की फ़िल्म ‘ए दिल है मुश्किल’ के साथ ही अजय देवगन की फ़िल्म ‘शिवाय’ का ट्रेलर आया, तब कमाल रशीद खान जोकि एक फ़िल्म आलोचक है, जिनको संक्षिप्त में केआरके नाम से भी बुलाया जाता है उन्होंने कहा था कि करण जौहर ने अपने फ़िल्म ‘ए दिल है मुश्किल’ के पक्ष में समीक्षा देने के लिए कहा था. साथ ही उन्होंने इसके लिए भुगतान भी किया था. इसके बाद अजय देवगन ने भी इस बात का दावा किया कि करण ने अपनी फ़िल्म के पक्ष में बोलने के लिए पैसों का भुगतान किया. उस वक्त ये विवाद काफ़ी चर्चा में था.
  4. सितम्बर 2016 में जो भारतीय सेना पर उडी में हमला हुआ था, उसके बाद महाराष्ट्र की राजनीतिक पार्टी, महाराष्ट्र नव निर्माण सेना और शिव सेना ने पाकिस्तानी अभिनेता और अभिनेत्रियों को भारत छोड़ने का अल्टीमेटम दे दिया था और साथ ही बॉलीवुड के फ़िल्म निर्माताओं को पाकिस्तानी कलाकारों को अपनी फ़िल्मों से भी बाहर निकालने को कहा था. इस तरह के हालात आने से पहले ही हालाँकि फवाद खान और माहिरा खान जैसे पाकिस्तानी कलाकारों ने भारत को छोड़ दिया था, लेकिन करण जौहर ने कलाकारों का लगातार ट्विटर के माध्यम से समर्थन किया था. इसके बाद राजनीतिक पार्टी मनसे ने करण जौहर को धमकी दी कि अगर उन्होंने पाकिस्तानी कलाकारों के साथ अब भी काम करना जारी रखा तो वो उन्हें मार देंगे.               

करण जौहर के चर्चित वचन (Karan Johar quotes)                             

  1. भाग दौड़ भरी जिंदगी में कही माता पिता उपेक्षित न हो जाये, सबको अपने माता पिता से प्यार करना चाहिए.
  2. मैंने अपने छात्रों को ढूंढ लिया है और अब टाटा नैनो भारत में अपने छात्रों की खोज कर रही है.
  3. मै भारतीय सिनेमा को अपना उत्पादन मानता हूँ मै जब से होश संभाला हूँ तब से भारतीय सिनेमा के गीत और नृत्य को हमारे जीवन के विशेष हिस्से के रूप में देख रहा हूँ, यह हमारी संस्कृति का हिस्सा है हम इसके लोरी को सुन के सोते है और जागते है. हम भारतीय संगीत के साथ हर धार्मिक और पारम्परिक समारोह का जश्न मनाते है.
  4. मै भारतीय हिंदी भाषा फ़िल्म के लिए ऑस्कार जीतना चाहता हूँ और ऑस्कर के रेड कारपेट पर चलना चाहता हूँ. जब ऐसा होगा यह मेरे जीवन के लिए एक जादुई क्षण जैसा और सपने के पुरे होने जैसा होगा मै ट्राफी को अपने हाथ में लेकर ये भाषण देना चाहता हूँ और जोर से कहना चाहता हूँ कि भारत यह ट्रॉफी आपके लिए है.
  5. मै धार्मिक नहीं हूँ लेकिन मै यह समझता हूँ कि दुनिया में धर्म को लेकर गलत धारणा है.
  6. मुझे कभी भी ऐसा नहीं लगता है कि आप सभी तरह के ऑडियंस को हर तरह से खुश रख सकते है.
  7. मै मिथुन राशि का हूँ जो कि अधिकत्तर वायुमंडल के लिए अनुकूल होता है, जब आप मिथुन है तो इसका लाभ ये है की आपको एक की कीमत पर दो मिलता है.
  8. मुझे ऐसा लगता है कि अपना पूरा ध्यान फ़िल्म बनाने में होना चाहिए, बनने के बाद ये जितनी हो सकती है उतनी तक अपनी यात्रा तय कर ही लेता है.
  9. एक सिनेमा ग्राफर के रूप में मै यह सोचता हूँ कि सिनेमा में रहने और फ़िल्म देखने से बेहतर कुछ भी नहीं है मुझे ऐसा लगता है कि जब आप एक भारतीय फ़िल्म को देखते है तो ऐसा महसूस होता है कि आप एक बड़ी शादी वाली पार्टी में है जहाँ पर आप गा रहे है, नाच रहे है, हँस रहे है, रो रहे है. आप हर पल को महसूस कर रहे है ये ऐसा इसलिए होता है कि हमारी भारतीय फ़िल्में सभी भावनाओं को अच्छी तरह से प्रस्तुत करती है.
  10. मेरी माँ मेरे स्नातक की पढाई पूरी होने को लेकर बहुत खुश और उत्सुक थी उन्हें सिर्फ़ इस बात से ही खुशी थी कि मै अपनी पढाई को पूरा कर लूँगा, वो कभी भी मुझे फ़िल्मों में नहीं देखना चाहती थी. इसका कारण ये था कि मेरे पिता जी ने 5 फिल्में बनाई थी और उनमे उनकी सारी पूंजी लग गयी थी. उनकी बनाई गयी फिल्मों में से एक अग्निपथ भी थी, लेकिन यह बॉक्स ऑफिस पर लोकप्रिय होने के बाद भी बहुत कमज़ोर थी. मुझे वो दिन अच्छे से याद है जब पिता जी को ऋण चुकाने के लिए मेरे दादी के फ्लैट को बेचना पड़ा था.
  11. मै कभी भी अपने संत होने या ब्रह्मचारी होने का दावा नहीं करूँगा, लेकिन ये सच है कि मेरे जीवन में कभी भी प्रेम एकपक्षीय ही रहा है.
  12. दो मशहुर और शक्तिशाली लोग कभी भी मित्र नहीं बन सकते है.
  13. मै अपनी माता पिता का एकलौता संतान रहा हूँ और हमारे पास एक बड़ा परिवार नहीं था, परिवार में मै और मेरी माँ थी. परिवार में हम दोनों ही दोस्त की तरह रहते है.
  14. मैंने अब तक के अपने जीवन के सफ़र में व्यावसायिकता से कही अधिक रिश्तों की अहमियत को बनाये रखने की कोशिश की है.
  15. मेरा मन और व्यवहार हमेशा हर एक बैठक के बाद बदलते रहता है ये सब इस बात पर निर्भर करता है कि मेरे सामने कमरे में कौन है मै कभी गंभीर और कभी अचानक से मजाकिया भी बन जाता हूँ और मुझे इस बात से कोई मतलब नहीं रहता की मै कार्यालय में काम कर रहा हूँ.       

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विभूति दीपावली वेबसाइट की एक अच्छी लेखिका है| जिनकी विशेष रूचि मनोरंजन, सेहत और सुन्दरता के बारे मे लिखने मे है| परन्तु साईट के लिए वे सभी विषयों मे लिखती है|
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