Khud Ka Karam Motivational Hindi Kavita

खुद का करम हिंदी कविता (Khud Ka Karam Motivational Hindi Kavita) जिसमे एक ऐसा सच हैं जिससे कोई इनकार नहीं कर सकता | कोई भी इंसान बहुत ही बुरा ही क्यूँ ना हो पर खुद से झूठ नहीं बोल सकता वो अपनी माँ को भी पराया कर जाए पर खुद के सायें से दूर नहीं जा सकता | समाज का हर व्यक्ति सच जानता हैं सभी को सही गलत की पहचान हैं पर वो अपने दिल की सुनना नहीं चाहता वो समाज की भेड़ चाल में चलता हैं | बरसो की चली रीत को सच मानता हैं जिसके लिए वो इंसान होकर भी इंसानियत को कुचलता हैं | प्यार की परिभाषा वो जानत तो हैं पर उस राह पर चलने से पहले वो समाज  की तरफ देखता हैं |

आज हर व्यक्ति को जरुरत हैं खुद को समझने और खुद के कर्मो को सुधारने की ताकि जब भी वह अपने आप से रूबरू हो तो उसे खुद से कोई शिकायत ना हो |

इस हिंदी कविता के माध्यम से यही कहना हैं कि ऐ बन्दे ! ना हिन्दू बन, ना मुस्लिम, न भ्रष्टाचार का गुलाम,बस एक  इंसान बन | कुछ ऐसे कर्म कर, के खुद से कोई शर्म ना हो | हर व्यक्ति अगर अपने करम की हिफाज़त करेगा तो हमारा देश वापस सोने की चिड़िया कहलायेगा |

Hindi kavita

खुद का करम

कुछ न बोल, कुछ ना कर,
बस, खुद की आँखों से शर्म कर |

झूठ बोल लेगा, तू तेरी माँ से भी,

ना झूठ बोल सकेगा तू, खुद से कभी,

सच भरा है तुझ में ही, कहीं ना कहीं,

स्वीकार ले ए बन्दे, ये वक्त है सही,

हर इंसान में छिपा प्यार है |

प्यार ही तो इंसानियत की पहचान है

इंसान नहीं बना मज़हब से,

मज़हब है सजा इंसानियत से,

न इंतजार कर किसी के पहल की,

ज़िन्दगी है तेरी,

हिफाज़त कर खुद के करम की ,
खुद के करम की

 By: कर्णिका पाठक

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Karnika

कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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