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किसान कर्ज माफ़ी योजना 2017 | Kisan Karz Mafi yojana 2017 in UP in hindi

Kisan Karz Mafi yojana in UP 2017 in hindi ऋण माफ़ी उस व्यक्ति या पार्टी की ओर से दी जाती है जो किसी व्यक्ति ने किसी खास वजह से लिया हो. इस तरह कर्ज माफ़ी पूरी तरह से पार्टी या व्यक्ति के ऊपर निर्भर है कि वो उस पार्टी या व्यक्ति के कर्ज को माफ़ करेगी या नही. कर्ज माफ़ी या तो लिखित रूप में या एक करवाई के तहत एक समझौता भी हो सकता है. कर्ज माफ़ी का सबसे बड़ा उदाहरण है अमेरिका में स्टैफ़ोर्ड लोन को माफ़ करने का कार्यक्रम और भारत में कृषि कर्ज माफ़ी योजना तथा कर्ज राहत योजना जिसके तहत समय समय पर सरकार के द्वारा कर्जों की माफ़ी की योजना की घोषणा की जाती है.

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किसान कर्ज माफ़ी योजना 2017

Kisan Karz Mafi yojana 2017 in UP in hindi

स्टैफ़ोर्ड लोन माफ़ी योजना (Stafford loan forgiveness scheme)

कभी कभी परिस्थितियां ऐसी होती है की पैसों की कमी की वजह से बहुत से प्रतिभावान छात्र नहीं पढ़ पाते है, ऐसी स्थिति से बचने के लिए संयुक्त राष्ट्र अमेरिका की सरकार ने स्टैफोर्ड लोन माफ़ी योजना की शुरुआत की. इस योंजना का लाभ उठाने वालों के लिए कुछ नियम भी बनाये गये है. अगर उनकी शिक्षा पूरी हो जाती है सरकार अगर चाहे तो उनके द्वारा शिक्षा के लिए उठाये गये कर्ज के एक भाग को माफ़ किया जा सकता है. कुछ नियम और शर्ते इस प्रकार है:

  • सेना के राष्ट्रीय रक्षक विभाग में काम करने वालों को यह छुट मिल सकती है.
  • इसके अलावा जो कम आमदनी वाले गरीब परिवार के छात्र है, उनको इस कर्ज माफ़ी योजना का लाभ मिल सकता है.
  • इसी तरह से जो गैर- लाभकारी संस्थाये है उन्हें भी इस योजना के अंतर्गत लाभ प्राप्त हो सकता है.
  • जो लोग आर्थिक रुप से कमजोर है अगर कोई संस्था उन्हें चिकित्सा का लाभ और दवा का लाभ देती है तो उन्हें भी इस योजना का लाभ मिल सकता है.

कृषि कर्ज माफ़ी योजना और कर्ज राहत योजना  (kisan karz mafi yojna)

भारत में भारत के सकल घरेलु उत्पाद में कृषि का योगदान लगभग 15% है, जबकि आज भी एक बहुत बड़ी जनसंख्या अपनी आजीविका के लिए मुख्य रूप से खेती पर ही निर्भर है. इस हिसाब से कृषि की सकल घरेलु उत्पाद में इसकी भागीदारी बहुत कम है. कांग्रेस की सरकार में जब भारत के वित् मंत्री पी. चिदंबरम थे तब उन्होंने किसानों के लिए एक राहत पैकेज की घोषणा की, जिसमे छोटे और सीमांत किसानों को दिए गए कर्जों को माफ़ करना था इसको ही कृषि ऋण माफ़ी योजना और ऋण माफ़ी योजना का नाम दिया गया. 2008-2009 में कर्ज माफ़ी योजना की रकम को 20% से बढाकर 716.8 बिलियन रूपये कर दिया गया और माफ़ी का कुल लाभ 43 मिलियन किसानों को प्राप्त हुआ. चुकि भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में 70% आबादी बस्ती है और वो खेती के कामों से जुडी हुई है. इस योजना से 70% से लेकर 94% तक के छोटे और बड़े किसान लाभ प्राप्त करेंगे.

किसान कर्ज माफ़ी योजना का कार्यान्वयन  (Kisaan karz mafi yojna implementation)

कृषि कर्ज माफ़ी योजना को पूरा करने का समय 30 जून 2008 तक निर्धारित किया गया था, जिसको अच्छी तरह से लागू करने के लिए बैंक के सभी ब्रांचो जैसे की पब्लिक सेक्टर बैंक अर्थात सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंको, अनुसूचित वाणिज्य बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंको के सभी बैंको को और हर ऋण संस्थानों के शीर्ष अधिकारियों को इस योजना के कार्यों को सफल बनाने के लिए दिशा निर्देश दिए गये है.  ताकि जो भी जरूरतमंद किसान हो उनको इसका लाभ मिल सके.

किसान कर्ज माफ़ी योजना की आलोचना (Kisan karz mafi ghotala)

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार ने जब कर्ज माफ़ी योजना और कर्ज रहत योजना की घोषणा की थी, तब उनकी इस कार्य योजना को विपक्षी ने कठघरे में ला खड़ा किया. उनकी इस योजना की आलोचना भी हुई. सिर्फ़ विपक्षी दलों ने ही नहीं बल्कि कृषि विशेषज्ञ के साथ साथ बैंकरों ने भी इसकी आलोचना की. उनका ये मानना था कि ये किसानों के लिए नहीं बल्कि सरकार के खुद के पार्टी के लाभ को ध्यान में रखकर इस योजना को लाया गया. क्योंकि चुनाव के समय इसका फ़ायदा वो अपने पार्टी के लिए उठा सकते है. इस तरह के कर्ज ज्यादातर बड़े किसान ही लेते है और उन्हें इसका फ़ायदा मिल जाता है. अधिकांशतः छोटे और गरीब किसान इस योजना का लाभ नहीं उठा पाते है क्योंकि बैंकों तक उनकी पहुंच न के बराबर होती है, वो अपने पैसे की जरुरतों की पूर्ति के लिए साहूकारों या जमींदारों पर ही निर्भर रहते है. सीएजी की रिपोर्ट में भी कर्ज माफ़ी योजना की गड़बड़ी की बात सामने आई है.

भारतीय कृषि कर्ज माफ़ी योजना की रणनीति को बहुत से अनुभवी लोग इन समस्याओं का समाधान नहीं मान कर सरकार की नीति को गलत बता रहे है. अरुंधती भट्टाचार्य जोकि भारतीय स्टेट बैंक की चेयरमैन है उन्होंने कहा है कि कर्ज माफ़ी योजना समस्या का समाधान नहीं है, इससे भारतीय किसान हर चुनाव के समय कर्ज माफ़ी का इंतजार करने लगेगा. इस वजह से आर्थिक दबाव भी बढ़ेगा. एसबीआई के अर्थशास्त्री के अनुसार अभी जो हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कर्ज माफ़ी की नीति बनाई गई है, उससे 27420 करोड़ रूपये खर्च होंगें अर्थात राज्य के राजस्व का लगभग 8 % खर्च होगा.               

मोदी की किसानों के लिए योजना (Kisan karz mafi modi)

भारतीय जनता पार्टी की जब से सरकार बनी है उन्होंने किसानों के हित में कई बड़े फैसले लिए है. पार्टी के राष्ट्रीय नीति में किसानों के हितों को विशेष रूप से ध्यान में रखने की बात कही गई है. नरेन्द्र मोदी सरकार का दावा है कि 2022 तक खेती की आय को दोगुना बढ़ाए जाने का लक्ष्य रखा है.  

अंततः भारतीय कृषि कर्ज माफ़ी से समस्या घटने की सम्भावना कम है इसलिए इस समस्या को स्थाई रूप से सुलझाने के लिए सही नीति बनाकर उस पर अमल करना ही इसका स्थाई हल हो सकता है जो इस प्रकार से है –   

  • भारत को सिंचाई क्षेत्र में सुविधा : भारतीय कृषि में नये और आधुनिक मशीनों और नई नीति को अपना कर जिसमें सिंचाई की बेहतरी के लिए सुविधा हो इससे किसानों को लाभ मिलेगा.    
  • जल संरक्षण : भारतीय कृषि अभी भी मौसम के ऊपर ज्यादा निर्भर है. हर राज्य की कृषि की अपनी समस्या है कही कही तो सूखे की समस्या भी है, जल संरक्षण नीति को अपना कर कृषि क्षेत्र में इस समस्या से बच सकते है.    
  • बेहतर भण्डारण की सुविधा : भण्डारण की समस्या से भी किसान ग्रसित है सरकार द्वारा बेहतर भण्डारण की नीति बना कर किसनों को लाभ पहुंचाया जा सकता है. 
  • बाजारों की सुविधा : किसानों को अपनी फसल को बेचने के लिए बाजार उपलब्ध कराकर उन्हें लाभ पहुँचाने की नीति को सही तरह से कार्यान्वित कर किसानों को लाभ पहुंचाया जा सकता है और इसके साथ कृषि अनुसंधान क्षेत्रों में ज्यादा निवेश की जरुरत है. भारतीय कृषि क्षेत्रों को दीर्घकालिक समस्या के समाधान की जरुरत है. कृषि कर्ज माफ़ी की नीति समस्या को सुलझाने के बदले और उलझा देगी.  

किसान क़र्ज़ माफ़ी योजना पर सरकार द्वारा घोषणा (Kisan-karz-mafi-yojna latest news)

भारतीय जनता पार्टी की सरकार की उत्तर प्रदेश की सरकार के साथ पहली कैबिनेट की बैठक लखनऊ के शास्त्री भवन में हाल ही में हुई जिसमे एक बहुत ही बड़ा फैसला किसानों के हितों को ध्यान में रख कर लिया गया यह फ़ैसला था किसान कर्ज माफ़ी का. इस फैसले से करीब करीब एक लाख तक के छोटे किसान और सीमांत किसानों को फ़ायदा सीधे तौर पर मिल सकेगा.

इस फैसले के द्वारा जनसंख्याँ की दृष्टि से सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश से सरकार ने अपनी घोषणाओ को अम्ली जामा पहनाना शुरु कर दिया है. इस फैसले से करीब 2.51 करोड़ छोटे और सीमांत किसानो में से दो करोड़ 15 लाख किसान के 1 लाख रूपये तक माफ़ किये जायेंगे. इसके 5630 करोड़ रूपये एनपीए का माफ़ कर एडिया गया. इस तरह विभन्न तरह से सरकार द्वारा किसानों का 36359  करोड़ तक का कर्ज माफ़ किया गया है.

पहले जब काँग्रेस की सरकार में यह फैसला लिया गया था तब किसी भी तरह के कागजात किसानों को नहीं दिखाने पड़े थे जिस वजह से योजना का क्रियान्वयन सही तरीके से नहीं हो पाया और कर्ज माफ़ी का लाभ किसानों से ज्यादा बिचौलिये ने उठा लिया. लेकिन बीजेपी सरकार द्वारा इस किसान कर्ज माफ़ी योजना को सही तरीके से इसका लाभ सीधे किसानों तक पहुचाने के लिए एक किसान राहत बांड जारी किया जायेगा और पैसों का भुगतान सीधे किसान के खाते में किया जायेगा.

उत्तर प्रदेश राज्य के ही तर्ज पर अब किसान कर्ज माफ़ी योजना को महाराष्ट्र और पंजाब में भी लागु करने के बारे में विचार किया जा रहा है.

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Ankita

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अंकिता दीपावली की डिजाईन, डेवलपमेंट और आर्टिकल के सर्च इंजन की विशेषग्य है| ये इस साईट की एडमिन है| इनको वेबसाइट ऑप्टिमाइज़ और कभी कभी आर्टिकल लिखना पसंद है|
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