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महात्मा गांधी जिन 8 महिलाओं के करीब रहे

महात्मा गांधी जिन 8 महिलाओं के करीब रहे (Women List who were Very Close to Mahatma Gandhi in hindi)

 महात्मा गाँधी के जीवन में बहुत से ऐसे लोग आये, जो उनसे प्रभावित रहे जिनमें काफी लोग ऐसे थे, जिन्हें गांधी स्वयं अपनी प्रेरणा बताते थे. इन सब में कभी भी महिला-पुरुष का विभेदन नहीं रहा, गांधीजी के करीबियों में केवल पुरुष नहीं थे कुछ महिलाएं भी थी जिनसे गांधीजी के निकट एवं घनिष्ठ सम्बन्ध थे.

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महिलाओं की लिस्ट जिनके करीबी थे महात्मा गाँधी 

निला क्रैम कुक (Nilla Cram Cook)

नीला को गांधीजी के आश्रम निला नागिनी कहा जाता था,क्योंकि ये उनका हिन्दू नाम था. उनका जन्म अमेरिका में हुआ था लेकिन वेदों और संस्कृत में रूचि उन्हें भारत ले आई, यहाँ उन्होने कुछ वर्ष कश्मीर में बिताए फिर माउंट आबू में रहने चली गयी, लेकिन आबू में वो ज्यादा नहीं रही और साबरमती स्थित गांधीजी के आश्रम में पहुँच गयी. यहाँ उन्होंने गांधीजी से अहिंसा की शिक्षा लेनी शुरू की, और बहुत जल्द गांधीजी से उनके अच्छे सम्बंध बन गये. उन्होंने कहा कि वो गांधीजी को स्वयं के मसीहा के रूप में देखती हैं और उनसे बेटी बनकर ही उनसे ज्ञान ग्रहण करेंगी.  इस तरह वो गांधीजी का बेहद सम्मान करती थी, लेकिन वहां के सख्त नियमों के कारण उनका वहां ज्यादा मन नही लगा और वो नवंबर 1933 में वहां से भागकर निकल गयी और दिल्ली पहुंची, फिर कुछ समय कलकता में बिताने के बाद उन्हें वापिस उनके जन्मभूमि अमेरिका भेज दिया गया, जहां उन्होंने इस्लाम धर्म अपना लिया और कुरान का अनुवाद किया.

सरला देवी चौधरानी (Sarala Devi Chaudhurani)

सरला देवी रविन्द्र नाथ टैगोर की भतीजी थी और वो भाषाओं, संगीत एवं लेखन में गहन रूचि रखती थी. सरलादेवी को गांधीजी ने पहली बार 1901 में देखा था, जब वो 29 वर्ष की थी. लाहौर प्रवास के दौरान गांधीजी सरला देवी और उनके पति के साथ रहे थे. सरला देवी और गांधीजी के रिश्ते बेहद निकट थे, क्योंकि गांधीजी स्वयं उन्हें अपनी अध्यात्मिक पत्नी मानते थे जबकि गांधीजी की तरह ही सरला देवी भी विवाहित थी. उनका विवाह एक अन्य स्वतंत्रता सेनानी रामभुज दत्त चौधरी से हुआ था. सरला देवी और गांधीजी के रिश्ते में रोचक तथ्य ये था कि स्वयं गांधीजी ने ही स्वीकारा था कि इस रिश्ते के कारण उनकी शादी टूटने वाली थी लेकिन ऐसा हुआ नहीं, क्योंकि समय रहते गांधीजी ने सरला देवी से दूरी बना ली थी. सरला देवी अपने जीवन के अंतिम दिनों में हिमालय चली गयी थी और वही से उनके मृत्यु की खबर आई थी.

सरोजिनी नायडू (Sarojini Naidu)

सरोजनी नायडू का नाम उन महिलाओं में शामिल हैं जिनकी स्वयं की स्वतंत्र एवं सशक्त नेता की पहचान थी, उन्हें केवल गांधीजी के साथ जुड़ने या उनसे रिश्ते के कारण नहीं पहचाना जाता है, सरोजिनी जी खुद में एक सशक्त महिला रही है. उनकी पहली मुलाक़ात से लेकर आगे की राजनीतिक गतिविधियों में एक साथ रहने के कारण काफी घनिष्ठता रही थी.

उन दोनों की मुलाकात लंदन में हुयी थी और अपनी पहली मुलाकात में नायडू ने गांधीजी को सामान्य व्यक्तित्व का, बिना बाल वाला छोटे कद का आदमी समझा था, जो कम्बल ओढ़े जमीन पर बैठा था और टमाटर खा रहा था. नायडू विश्वप्रसिद्ध नेता को इतना सहज और सरल देखकर अचम्भित थी, लेकिन उन्हें हँसते देखकर गांधीजी ने स्वयं कहा कि आप श्रीमती नायडू लगती है, और उन्हें जो वस्तु वो खा रहे थे उसके लिए निमंत्रण दिया, लेकिन सरोजिनी ने शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि क्या बेकार तरीका हैं.  सरोजनी गांधीजी के 78वी जन्मदिन तक अपनी पहली मुलाक़ात को नही भूली थी और समारोह में इसका जिक्र किया था.

मेडलिन स्लेड उर्फ़ मीरा बेन (Madeleine Slade)

मेडलिन एक ब्रिटिश महिला थी जिनके पिताजी ब्रिटिश एडमिरल सर एडमंड स्लेड थे. वैसे मेडलिन का सीधा सम्पर्क गांधीजी से नहीं हुआ था. उन्होंने फ़्रांस के रोमेन रोलैंड द्वारा लिखी महात्मा गांधी की बायोग्राफी पढ़ी थी, जिसका उन पर काफी प्रभाव पड़ा और उन्होंने गांधीजी के दिखाए मार्ग पर चलने का निर्णय किया इसलिए उन्होंने गांधीजी से समपर्क किया और 1925 में भारत आ गयी. वो यहाँ अगले 34 वर्षों तक रही और इस दौरान अपने पिता के मृत्यु पर इंग्लैंड नहीं गयी. उन्हें मीरा बेन नाम गांधीजी ने ही दिया था. वो जल्द ही गांधीजी की विश्वसनीय बन गयी थी और वो दोनों 1931 में राउंड टेबल कांफ्रेंस में भी एक साथ गए थे, उसके बाद 1944 में वो कस्तूरबा एवं गांधीजी के साथ आगा खान जेल में भी साथ थी. गांधी-मीराबेन के मध्य हुए पत्र-संवाद को त्रिदिप सुर्हुद और थोमस वेबर (Thomas Weber) ने एक किताब में संकलित किया हैं.

राजकुमारी अमृत कौर (Rajkumari Bibiji Amrit Kaur)

अमृत कौर पंजाब के कपूरथला की राजकुमारी थी लेकिन शाही परिवार की सदस्य होने एवं इंग्लैड से पढाई करने के उपरान्त भी वो गांधीजी के निकट थी, 1927 में महिलाओं के सश्क्तिकरण के लिए कौर ने आल इंडिया वीमेन कांफ्रेंस शुरू की थी, इसके दो वर्षों बाद उन्होंने  सविनय अवज्ञा आन्दोलन में हिस्सा लिया और वर्धा के सेवाग्राम चली गयी.

वहां गांधीजी ने उनसे अपनी सेक्रेटरी का कार्य भार सम्भालने का आग्रह किया, जिसके उपरान्त लगातार 17 वर्षों तक कौर गांधीजी की सहयोगी बनकर इस पद पर रही. इस दौरान और इसके बाद भी उन दोनों में सैंकड़ों पत्रों का पत्र-व्यवहार हुआ था. 1942 में नमक सत्याग्रह और भारत छोड़ो आन्दोलन में सक्रिय योगदान देते हुए उन्होंने जेल यात्रा भी की. उनकी एक पहचान स्वतंत्र भारत की पहली स्वास्थ मंत्री की भी हैं लेकिन गांधीजी के साथ उनके पत्र भी काफी चर्चा का विषय रहे थे. गांधीजी अमृत को जो पत्र लिखते थे उसकी शुरुआत वो मेरी प्यारी पागल और बागी लिखकर करते थे जबकि अंत में खुदको तानशाह कहते थे.

डॉ सुशीला नय्यर (Sushila Nayyar)

सुशील के भाई गांधीजी के और उनके विचारों के कट्टर समर्थक थे और गांधीजी के सेक्रेटरी भी थे. सुशीला पर गांधीजी के विचारों और आदर्शों का प्रभाव तब पड़ा जब वो अपने भाई से मिलने के लिए आश्रम में आती थी और गांधीजी को सुनती थी या आश्रम के माहौल को देखती थी. अपने भाई के बाद सुशीला भी वर्धा में सेवाग्राम आश्रम  में रहने आ गयी, यहाँ उन्हें आध्यात्म के साथ राष्ट्रवादी माहौल भी देखने के साथ ही गाँव में चिक्तिसीय  सेवायें देने की सुविधा भी मिली पहले उनकी मां को अपने बच्चों के गांधीजी के अनुयायी बनने पर आपति थी लेकिन बाद में वो भी गांधीवादी बन गयी थी.  सुशीला ने गांधीजी की निजी चिकित्सक का कार्य किया था लेकिन उनकी पहचान उन महिलाओं में से एक की हैं जो गांधीजी को सहारा देती थी और जिन पर गांधीजी ने ब्रहमचर्य के प्रयोग किए थे. हालांकि सुशीला के सम्बंध गांधीजी के साथ ही उनकी पत्नी से भी अच्छे थे और उन्होंने मुंबई में ना केवल उनके साथ गिरफ्तारी दी थी बल्कि कस्तूरबा के अंतिम दिनों तक उनके साथ भी रही थी. 

आभा गांधी (Abha Gandhi)

बंगाली पृष्ठभूमि की आभा वैसे तो गांधीजी के पड़पोते कनु गांधी की पत्नी थी इसलिए उनके परिवार की सदस्य थी लेकिन वो इस विवाह के पहले से ही गांधीजी के काफी निकट थी. आभा और उनके पति गांधीजी के कार्यक्रमों में अग्रणी रहते थे, आभा जहां भजन गायन करती थी वहीँ उनके पति फोटोग्राफी का काम करते थे. 1940 के समय में ज्यादातर फोटो कनु की ही खींची ही है. गांधीजी जब हिन्दू-मुस्लिम दंगे सुलझाने के लिए देश का भ्रमण कर रहे थे तब आभा उनके साथ थी. गांधीजी की जब हत्या हुयी तब आभा वहाँ उपस्थित थी.

मनु गांधी (Manu Gandhi)

मनु गाँधी महात्मा गाँधी की ही रिश्तेदार थी, वो उन्हें अपनी पोती कहते थे. आभा के अतिरिक्त मनु भी गांधीजी को चलने में सहारा देती थी, और उनके अंतिम दिन भी मनु उनके साथ थी. मनु ने कस्तूरबा की सेवा-सुश्रुषा भी की थी. गांधीजी के अंतिम दिनों की काफी जानकारी मनु की डायरी से मिलती हैं.

 इस तरह महात्मा गाँधी पर विभिन्न महिलाओं से निकटता के कारण काफी सवाल और संशय भी रहे और इस मुद्दे पर बहुत से लोगों ने अपने विचार प्रगट किए लेकिन इससे गांधीजी की छवि और उनके प्रति समस्त देशवासियों  की निष्ठा पर कोई फर्क नहीं पड़ा.

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