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मनोहर पर्रीकर का जीवन परिचय | Manohar parrikar biography in hindi

मनोहर पर्रिकर का जीवन परिचय  ( Goa CM Manohar Parrikar Biography in Hindi )

हमारे देश की राजनीति के हर स्तर पर केवल भ्रष्टाचार ही देखने को मिलता है और ऐसे में देश की जनता का विश्वास नेताओं पर से उठता जा रहा है. भारत के कई नेताओं की छवि जनता के बीच कुछ खास नहीं हैं. वहीं जनता लगभग हर नेता को भ्रष्ट नेता के रूप में देखती है, जो कि गलत है. क्योंकि अभी भी भारत की राजनीति में कुछ गिने-चुने ऐसे राजनेता मौजूद हैं, जिनकी छवि एक दम साफ है. इन्हीं साफ छवि वाले नेताओं में से एक नेता मनोहर पर्रिकर जी हैं. जिन्हें उनके द्वारा किए गए कार्य और उनकी ईमानदारी के लिए जाना जाता है. एक छोटे से राज्य से अपना राजनीति का सफर शुरू करने वाले पर्रिकर ने अपनी मेहनत के दम पर आज अपना एक नाम बनाया है.

मनोहर पर्रीकर गोवा के मुख्यमंत्री के पद पर आसीन है. उन्होंने अपने मुख्यमंत्री पद की शपथ 14 मार्च 2017 को ली. इससे पहले भी वह 2000 से 2005 तक और 2012 से 2014 तक गोवा के मुख्यमंत्री के साथ ही वे बिजनेस सलाहकार समिति के सदस्य भी रह चुके हैं. 2014 में उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देकर भारतीय जनता पार्टी की मोदी सरकार में रक्षा मंत्री का पदभार ग्रहण किया. वे पहले ऐसे भारतीय मुख्यमंत्री है, जिन्होंने आई आई टी से स्नातक किया हुआ है. इनके बारे में पूरी जानकारी यहाँ दर्शायी गई है.

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मनोहर पर्रीकर का जीवन परिचय  (Manohar parrikar biography in hindi)

इनका परिचय निम्न सूची में दर्शाया गया है-

       नाम मनोहर गोपाल कृष्ण प्रभु पर्रीकर
       जन्म 13 दिसम्बर 1955
       जन्म स्थान मापुसा ,गोवा ,भारत
       उम्र 61 वर्ष
       पिता का नाम गोपाल कृष्ण पर्रीकर
      माता का नाम राधा बाई पर्रीकर
      पत्नी मेधा पर्रीकर
       धर्म हिन्दू
       भाषा हिंदी और इंग्लिश
        बेटे अभिजीत पर्रीकर और उत्पल पर्रीकर
      स्नातक आईआईटी ग्रेजुएट, मुंबई 1978 
      करियर राजनीतिज्ञ, गोवा के मुख्यमंत्री, देश के रक्षा मंत्री (2014 से लेकर 2017 तक)
      पार्टी भारतीय जनता पार्टी
   पसंदीदा खेल क्रिकेट
      रूचि जेनेटिक्स
      यात्रा USA

मनोहर पर्रिकर का जन्म और शिक्षा (Manohar Parrikar’s  Education And Birth) – 

मनोहर पर्रिकर का नाता भारत के गोवा राज्य से है और इनका जन्म इस राज्य के मापुसा गांव में साल 1955 में हुआ था. वहीं इस राज्य के लोयोला हाई स्कूल से उन्होंने अपनी शिक्षा हासिल की थी. अपनी 12 वीं की पढ़ाई खत्म करने के बाद उन्होंने मुंबई में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में दाखिला लिया था और यहां से उन्होंने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी. वहीं पर्रिकर को हिंदी और अंग्रेजी भाषा के अलावा मराठी भाषा भी बोलनी आती है.

मनोहर पर्रिकर का परिवार (Manohar Parrikar’s  Family) –

पर्रिकर के गोवा के मुख्यमंत्री बनने के कुछ समय बाद उनकी पत्नी की मृत्यु हो गई थी. उनकी पत्नी का नाम मेधा पर्रिकर था और पर्रिकर और मेधा की शादी साल 1981 में हुई थी. पर्रिकर के कुल दो बच्चे हैं. जिनमें से पहले बच्चे का नाम उत्पल पर्रिकर है, जबकी दूसरे लड़के का नाम अभिजीत पर्रिकर है. वहीं पर्रिकर के दोनों बच्चों का राजनीति से कोई लेना देना नहीं है. उत्पल बतौर एक इंजीनियर के रूप में कार्य कर रहे हैं, जबकि अभिजीत का खुद का एक व्यापार है. वहीं मनोहर पर्रिकर का एक भाई भी है जिसका नाम अवधूत पर्रिकर है.

मनोहर पर्रिकर का राजनीतिक सफर (Manohar Parrikar’s Political Career)

पर्रिकर अपने स्कूलों के दिनों से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में शामिल हो गए थे. अपनी पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने आरएसएस की युवा शाखा के लिए भी काम करना शुरू कर दिया था. वहीं स्कूल से पास होने के बाद उन्होंने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू कर दी. वहीं अपनी ये पढ़ाई पूरी करने के बाद एक बार फिर उन्होंने आरएसएस को अपनी सेवा देना शुरू कर दिया. जिसके बाद उन्हें बीजेपी पार्टी का सदस्य बनने का मौका मिला और उन्होंने बीजेपी पार्टी की तरफ से पहली बार चुनाव भी लड़ा. बीजेपी ने पर्रिकर को साल 1994 में गोवा की पणजी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिया. वहीं  पर्रिकर को इस चुनाव में जीत मिली. लेकिन बीजेपी इन चुनाव में कुछ खास नहीं कर सकी. वहीं पर्रिकर ने गोवा की विधानसभा सभा में विपक्ष नेता की भूमिका भी निभाई हुई है.

पहली बार बने गोवा के मुख्यमंत्री (Manohar Parrikar Chief Minister of Goa)

साल 2000 में गोवा में हुए विधान सभा चुनावों में बीजेपी पार्टी को लोगों का साथ मिला और बीजेपी को गोवा की सत्ता में आने का मौका मिला. वहीं सत्ता में आते ही बीजेपी पार्टी ने इस राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर पर्रिकर को चुना. वहीं 24 अक्टूबर को पर्रिकर ने बतौर गोवा का मुख्यमंत्री बन अपना कार्य शुरू कर दिया. हालांकि पर्रिकर के परिवार के हालात उस वक्त सही नहीं चल रहे थे और उनकी पत्नी कैंसर से ग्रस्त थी. पर्रिकर के मुख्यमंत्री बनने के ठीक एक साल बाद उनकी पत्नी ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया. पत्नी के जाने के बाद पर्रिकर ने गोवा के मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ अपने बच्चों की जिम्मेदारी भी बहुत अच्छे तरीके से निभाई.

लेकिन किन्हीं कारणों से उनका ये कार्यकाल ज्यादा समय तक नहीं चल पाया और 27 फरवरी 2002 को उन्हें अपनी ये कुर्सी छोड़नी पड़ी. वहीं 5 जून 2002 को फिर से उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में चुना गया.

मुख्यमंत्री से लेकर देश के रक्षा मंत्री बनने का सफर

वहीं साल 2005 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी को हार मिली और पर्रिकर को मुख्यमंत्री के पद को छोड़ना पड़ा. जिसके बाद बीजेपी पार्टी को साल 2012 में गोवा में हुए चुनाव में फिर जीत मिली और फिर से बीजेपी ने पर्रिकर को मुख्यमंत्री बना दिया. वहीं 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी पार्टी को जीत मिली और पार्टी केंद्र में अपनी सरकार बनाने में कामयाब हुई. वहीं जब देश के रक्षा मंत्री को चुनने की बारी आई, तो बीजेपी की पहली पसंद पर्रिकर बने और उन्होंने देश का रक्षा मंत्री बना दिया गया. देश के रक्षा मंत्री बनने के लिए पर्रिकर को अपना मुख्यमंत्री का पद छोड़ना पड़ा और उनकी जगह लक्ष्मीकांत को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया.

इस वक्त हैं गोवा के मुख्यमंत्री (who is current chief minister of Goa)

साल 2017 में एक बार पुनः गोवा में विधानसभा के चुनाव हुए और इन चुनावों में फिर से बीजेपी की जीत हुई. वहीं गोवा के विधायकों ने अपने राज्य के लिए पर्रिकर को मुख्यमंत्री बनाने का प्रस्ताव रखा गया है. जिसके चलते पर्रिकर को अपना रक्षा मंत्री पद छोड़ना पड़ा और वो गोवा के मुख्यमंत्री पद को संभालने गोवा वापस आ गए.

मनोहर पर्रिकर के साथ जुड़े विवाद (Manohar Parrikar Statements and controversies)

अन्य नेताओं की तरह मनोहर पर्रिकर के साथ भी कई विवाद जुड़े हुए हैं और समय-समय पर पर्रिकर को इन विवादों को सामना करना पड़ा है. हालांकि इन विवादों के कारण उनके राजनीति करियर पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ा.

यूरोपीय कचरा प्रबंधन संयंत्रों से जुड़ा विवाद –

साल 2013 में भारत की ओर से एक प्रतिनिधिमंडल यूरोप गया था. इस प्रतिनिधिमंडल में गोवा के उपमुख्यमंत्री फ्रांसिस डिसूज सहित कई विधायक मौजूद थे. ये प्रतिनिधिमंडल यूरोप के कचरा प्रबंधन पर अध्ययन करने के लिए गए थे. वहीं इस यात्रा के दौरान करीब 1 करोड़ रुपए का खर्चा आया था और इसी खर्चे को लेकर पर्रिकर को विवाद का सामना करना पड़ा था.

फीफा विश्व कप दावत को लेकर हुआ विवाद (FIFA World Cup junket)

साल 2014 में ब्राजील में हुए फीफा विश्व कप से जुड़ी हुई एक दावत को लेकर भी पर्रिकार पर विपक्ष पार्टी ने हमला किया था. विपक्ष पार्टी का कहना था कि इस दावत के आयोजन पर करीब 89 लाख रुपए का खर्चा आया था और जनता के पैसों को पानी की तरह इस्तेमाल किया गया है.

आमिर खान की टिप्पणी पर पर्रिकर का बयान (Manohar Parrikar on Aamir khan)

अभिनेता आमिर खान द्वारा देश के हालातों को लेकर की गई एक टिप्पणी पर पर्रिकर ने अपनी नाराजगी जतायी था. पर्रिकर ने कहा था कि अगर भारत में किसी को रहना है, तो उसे देश की राष्ट्रीयता का सम्मान करना चाहिए. जो व्यक्ति देश के खिलाफ बोलते हैं, उसको सबक सिखाना चाहिए. हालांकि पर्रिकर ने ये बयान देते हुए किसी का भी नाम नहीं लिया था. लेकिन उनकी बातों से साफ था, कि वो आमिर खान की टिप्पणी पर अपनी राय रख रहे हैं.

गौरतलब है कि पर्रिकर के दिए गए इस बयान से कुछ दिन पहले ही आमिर खान ने कहा था, कि उनकी पत्नी ने भारत से बाहर जाने की बात कही थी. आमिर खान ने ये टिप्पणी भारत में धार्मिक असहिष्णुता के मुद्दे पर की थी.

वहीं पर्रिकर द्वारा दिए गए बयान की काफी आलोचना की गई थी. वहीं पर्रिकर द्वारा दिए गए बयान की काफी आलोचना की गई थी. जिसके चलते पर्रिकर ने एक और बयान देते हुए कहा था, कि उन्होंने किसी पर भी व्यक्तिगत उपर वो टिप्पणी नहीं की थी.

पाकिस्तान को बताया था नरक (Manohar Parrikar’s statement on Pakistan)

बतौर भारत के रक्षा मंत्री रहते हुए पर्रिकर ने पाकिस्तान देश पर एक बयान दिया था. अपने इस बयान में पर्रिकर ने कहा था कि इस देश में जाना किसी नरक में जाने से कम नहीं है. वहीं पर्रिकर के इस बयान पर पाकिस्तान ने नाराजगी जताई थी.

विद्यालयों को लेकर विवाद

साल 2001 में बतौर गोवा के मुख्यमंत्री रहते हुए पर्रिकर ने गोवा के ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों को विद्या भारती में बदल दिया था. पर्रिकर के इस फैसले की आलोचना की गई थी. क्योंकि विद्या भारती आरएसएस की एक शिक्षा शाखा है.

पर्रिकर से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण बातें (manohar parrikar unknown facts)

  • बीजेपी द्वारा गोवा के बनाए गए पहले मुख्यमंत्री

साल 1961 में भारत की सरकार ने पुर्तगालियों से गोवा को स्वतन्त्र करवाया था. वहीं साल 1987 में गोवा पूरी तरह से हमारे देश का एक प्रदेश घोषित कर दिया गया था.  जिसके बाद बीजेपी ने साल 2000 में पहली बार इस राज्य के विधान सभा चुनाव में अपनी विजय हासिल की थी. चुनाव जीतने के बाद पर्रिकर को मुख्यमंत्री बनाया था. जिसके साथ ही पर्रिकर बीजेपी द्वारा गोवा के बनाए गए पहले मुख्यमंत्री बन गए थे. 

  • साधारण व्यक्ति की तरह रहन-सहन

गोवा के मुख्यमंत्री होने के बाद भी पर्रिकर ने अपने रहन-सहन में जरा भी बदलाव नहीं किया. कहा जाता है कि वो अपने राज्य की विधान सभा खुद स्कूटर चलाकर जाया करते थे. इतना ही नहीं उन्होंने मुख्यमंत्री बनने के बाद भी अपने घर को नहीं छोड़ा और सरकार द्वारा दिए गए घर में नहीं गए.

  • सोशल मीडिया पर सक्रिय

पर्रिकर पहले ऐसे आईआईटी ग्रेजुएट हैं जो कि किसी राज्य के मुख्यमंत्री बने हैं. पर्रिकर से पहले हमारे देश का ऐसा कोई भी व्यक्ति मुख्यमंत्री नहीं बना था, जिसके पास आईआईटी की डिग्री हो. इतना ही नहीं पर्रिकर सोशल मीडिया में भी काफी सक्रिय हैं और वो इस माध्यम से लोगों से जुड़े रहते हैं. 

  • पर्रिकर की सेहत को लेकर फैली थी अफवाह (rumours about Parrikar’s health)

हाल ही में पर्रिकर की सेहत को लेकर मीडिया में एक झूठी खबर फैलाई गई थी, जिसमें कहा गया था कि पर्रिकर को कैंसर है. वहीं इस खबर के फैलने के बाद लीलावती अस्पताल ने एक बयान जारी कर कहा था कि मीडिया में ये झूठी खबर फैलाई जा रही है. पर्रिकर को किसी भी तरह का कैंसर नहीं है. दरअसल पर्रिकर को विषाक्त भोजन (food poisoning) के चलते लीलावती अस्पताल में भर्ती करवाया गया था.

पर्रिकर के मिले सम्मान एंव पुरस्कार (awards and achievements) –

पर्रिकर को उनके कॉलेज यानी आईआईटी-मुंबई द्वारा सम्मानित किया जा चुका हैं. उन्हें उनके कॉलेज द्वारा ये सम्मान साल 2001 में दिया गया था. इतना ही नहीं साफ छवि वाले इस नेता को सीएनएन-आईबीएन ने भी राजनीति श्रेणी में पुरस्कार दिया था. पर्रिकर को ये सम्मान साल 2012 में दिया गया था.

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विभूति दीपावली वेबसाइट की एक अच्छी लेखिका है| जिनकी विशेष रूचि मनोरंजन, सेहत और सुन्दरता के बारे मे लिखने मे है| परन्तु साईट के लिए वे सभी विषयों मे लिखती है|
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