मासिक कार्तिगाई एवं कार्तिगाई दीपम त्यौहार 2019 महत्व कथा एवं पूजा विधि | Masik Karthigai and Karthigai Deepam 2019 significance, pooja vidhi in hindi

मासिक कार्तिगाई एवं कार्तिगाई दीपम त्यौहार 2019 महत्व कथा एवं पूजा विधि ( Masik Karthigai and Karthigai Deepam 2019 significance, story and pooja vidhi in hindi)

श्रीलंका, केरल और तमिलनाडू में रहने वाले हिन्दुओं में मासिक कार्तिगाई एवं कार्तिगाई दीपम का त्यौहार मनाया जाता है. यह प्रति महीने पूर्णिमा को मनाया जाता है. अतः इसे मासिक कार्तिगाई कहा जाता है, लेकिन कार्तिक माह का महत्व बहुत अधिक है. इस महीने में पड़ने वाली मासिक कार्तिगाई सबसे महत्वपूर्ण है. वर्ष भर में एक बार यह त्यौहार बहुत अधिक धूम धाम से मनाया जाता है. ये त्यौहार वार्षिक रूप में कार्तिगाई दीपम के रूप में मनाया जाता है, जो कि दक्षिण भारत में एक बहुत बड़ा त्यौहार है. वार्षिक कार्तिगाई दीपम का महत्व, दीपावली के महत्त्व  जैसा ही होता है.

 

मासिक कार्तिगाई एवं कार्तिगाई दीपम त्यौहार का महत्व (Masik Karthigai Deepam importance in hindi)

यह तमिल हिन्दुओं के सबसे पुराने त्यौहार में से एक है. इस दिन तेल की दीप से घर को सजाया जाता है. कार्तिगाई दीपम का नाम एक नक्षत्र के नाम पर रखा गया है. अतः जिस दिन कार्तिगाई दीपम मनाया जाता है, उस दिन ऐसा माना जाता है कि यह नक्षत्र बहुत प्रबल होता है. इसलिए इसका हिन्दू धर्म में बहुत महत्व है.

मासिक कार्तिगाई एवं कार्तिगाई दीपम त्यौहार पर छः नक्षत्रों की कहानी (Masik Karthigai and Karthigai Deepam Story)

छः नक्षत्रों पर कई तरह की कहानियाँ, मिथक और कवितायेँ लिखीं गयी हैं. यह छः नक्षत्र हिन्दू मिथक के अनुसार छः आकाशीय देवियाँ होती हैं, जिन्होंने छः शिशुओं को पाला और एक साथ मिल कर छः मुख के देव के रूप प्रकट हुए. अतः इन्हें कार्तिकेय कहा जाता है. यह भगवान शिव के दुसरे पुत्र कार्तिकेय के नाम से जाने जाते हैं. मिथकों के अनुसार भगवान शिव ने मुरुगा को अपने तीसरे नेत्र से निर्मित किया है. इन छः नक्षत्रों का नाम तत्पुरुषम, अघोरम, सद्योजतम, वामदेवं, ईसनम और अधोमुखम है. भगवान मुरुगा इन छःहों नाम से जाना जाता है. अतः इन छःहों में से किसी एक नक्षत्र की पूजा भी भगवान मुरुगा के पूजा के जितना ही प्रभावशाली है. इनकी पूजा एक कतार में दीप जला कर की जाती है. इस पूजा के दिन श्रध्धालु घर आँगन में दीप जलाते हैं. इसे कार्तिगाई दीपम अथवा भगवान् मुरुगा की जयंती भी कहा जाता है.

मासिक कार्तिगाई एवं कार्तिगाई दीपम त्यौहार पर मिथक (Karthigai Deepam Myths)

ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव भगवान विष्णु और भगवान ब्रम्हा के समक्ष एक अंतहीन दीप शिखा के रूप में प्रकट हुए थे. शिव के इस अवतार की वजह दोनों देवों में श्रेष्ठतम देव का चयन करना था. भगवान ब्रम्हा और विष्णु दोनों में इस बात को लेकर मतभेद हो गया था कि उन दोनों में से कौन अधिक श्रेष्ठ है. इस मतभेद का फैसला करने के लिए भगवान शिव ने अनंत दीप शिखा का रूप लिया और उन दोनों देवताओं से कहा, कि आपको इस दीप शिखा का आदि और अंत ढूंढना है अर्थात भगवान् शिव का सर और उनके चरण. इस खोज में दोनों देवता निकाल गए किन्तु भगवान विष्णु जल्द ही लौट आये और उन्होंने मान लिया, कि उन्हें इसका कोई भी आदि अथवा अंत नहीं मिल सकता है. इसके बाद भगवान् ब्रम्हा आये. उन्होंने कहा, कि उन्हें भगवान शिव का सर देखने मिला है, किन्तु ये बात झूठ थी और भगवन शिव ये समझ गये. अंततः भगवान् शिव ने उन्हें कहा कि पृथ्वी पर भगवान ब्रम्हा का न तो कोई मंदिर बनेगा और न ही किसी तरह से इनकी पूजा होगी. इस तरह भगवान विष्णु ब्रम्हा से श्रेष्ठ साबित हुए. इस दिन लोग भगवान शिव की आराधना करते हैं और बाद में इस दिन को कार्तिकेय महा दीपम नाम से मनाया जाने लगा.

मासिक कार्तिगाई एवं कार्तिगाई दीपम त्यौहार 2019 की तिथि (Masik Karthigai Deepam 2019 Date and timing) 

यह पूजा वार्षिक तौर पर बड़े रूप में नवम्बर दिसम्बर के दौरान होती है. इस वर्ष कर्थिगयी दीपम का पर्व 10 दिसंबर को होगा. पंचांग के अनुसार कार्तिगाई नक्षत्र का आरम्भ 10 दिसंबर  से 05:01 से शुरू होगा और 11 दिसंबर  को 05:58 तक रहेगा. मासिक कार्तिगाई प्रत्येक महीने मनाया जाता है. इस वर्ष महीने के अनुसार मासिक कार्तिगाई का समय नीचे दिया जा रहा है.

तारिख महिनादिन त्यौहार
16जनवरी(बुधवार)मासिक कार्तिगाई
13फरवरी(बुधवार)मासिक कार्तिगाई
12मार्च(मंगलवार)मासिक कार्तिगाई
8अप्रैल(सोमवार)मासिक कार्तिगाई
5मई(रविवार)मासिक कार्तिगाई
2जून(रविवार)मासिक कार्तिगाई
29जून(शनिवार)मासिक कार्तिगाई
26जुलाई(शुक्रवार)मासिक कार्तिगाई
23अगस्त(शुक्रवार)मासिक कार्तिगाई
19सितम्बर(बृहस्पतिवार)मासिक कार्तिगाई
16अक्टूबर(बुधवार)मासिक कार्तिगाई
13नवम्बर(बुधवार)मासिक कार्तिगाई
10दिसम्बर(मंगलवार)कार्तिगाई दीपम्

मासिक कार्तिगाई एवं कार्तिगाई दीपम त्यौहार कैसे मनाएं (How to Celebrate Karthigai Deepam)   

यह ज्योति का पर्व है. इस दिन जलाए गये दीपक का आध्यात्मिक तौर पर बहुत बड़ा महत्व है. इस दिन ऐसा माना जाता है कि दीप प्रज्ज्वलित करने से बुरी शक्तियों का नाश होता है और अच्छाई फैलती है. दक्षिण भारत में इस दिन यह त्योहार भाई बहनों के बीच भी रक्षाबंधन अथवा भईया दूज की तरह मनाया जाता है. इस दिन बहने अपने भाई की मंगलकामना करतीं हैं और उनके लिए भगवान से प्रर्थना करतीं हैं.

मासिक कार्तिगाई एवं कार्तिगाई दीपम त्यौहार के लिए पूजन सामग्रियां (Karthigai Deepam Pooja Items)

मासिक कार्तिगाई एवं कार्तिगाई दीपम त्यौहार के लिए आवश्यक पूजन सामग्रियों का विवरण नीचे दिया जा रहा है.

  • दीपक
  • धागे/ बाती
  • तेल और घी
  • पान और सुपारी
  • केला
  • धुप और कपूर
  • नारियल

नैवेद्य:

  • पूरी, कचौड़ी और चावल
  • काला गुड
  • कच्चा चावल, और अप्पम बनाने के लिए आटा
  • नारियाल
  • पायसम बनाने के लिए मूँग डाल और अरवा चावल

मासिक कार्तिगाई एवं कार्तिगाई दीपम त्यौहार के लिए पूजन विधि (Karthigai Deepam Pooja Procedure)

यह पूजा तीन दिनों तक चलती है. विधिवत पूजा करने के लिए नीचे दिए गये निर्देशों पर ध्यान दें.

  • प्रत्येक वर्ष पूजा में एक नयी कंदील खरीदने का नियम है. इस नियम का पालन करने के लिए आप नयी कंदील ख़रीद सकते हैं. क़न्दील खरीदते समय ध्यान दें के ये टूटा हुआ न हो.
  • पूजा के एक दिन पहले घर और घर के सामान अच्छे से साफ़ कर लें. घर के जिन सामानों को धोया जा सकता है, वो सब धो कर शुद्ध कर लें ताकि घर पवित्र हो सके.
  • पूजा वाली शाम 5 से 7 दीप जलाए. घर के दरवाज़े पर अच्छे से रंगोली बनाएं. इसके बाद घर से बाहर ले जा कर ही दीपक जलाएं, क्योंकि ऐसी मान्यता है. घर से दीप जलाकर बाहर नहीं ले जाना चाहिए.
  • इसके बाद घर के देवी देवताओं के सामने बैठे. उनके सामने बनाये गये नैवैध्य आदि समर्पित करें. इसके बाद धुप दीप जला कर पूजा अर्चना करे.
  • इसके बाद सच्चे मन से अपने भाई बहन और समस्त परिवार के मंगल के लिए प्रार्थना करें. इसके बाद आरती करें.
  • आरती सम्पन्न हो जाने के बाद घर के सभी बड़ों का आशीर्वाद लें और सबके बीच प्रसाद बाँटें.

इस तरह से ये पूजा विधिवत श्रध्दा के साथ सम्पन्न हो जाती है. इस पूजा को विधिविधान से करने से जीवन में आने वाले कष्टों का निवारण होता है. यह पूजा आदि शक्ति शिव से जुडी हुई है, अतः भगवान् शिव को प्रसन्न करने के लिए ये पूजा की जाती है. प्रति माह भी इस पूजा को छोटे रूप में किया जा सकता है.

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Updated: January 11, 2019 — 11:22 am

1 Comment

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  1. very nice information.

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