ताज़ा खबर

मीडिया चैनल के सकारात्मक व नकारात्मक प्रभाव पर निबंध | Media Advantages and Disadvantages in hindi

मीडिया एक ऐसा जरिया है, जिसके द्वारा देश विदेश की जानकारी, डाटा को एक साथ लाखों लोगों तक पहुँचाया जाता है. पहले लोग अपनी बात दूसरों तक पहुँचाने के लिए, डांस, गाने, नाटक का प्रयोग करते थे, जिससे वे बात दूसरों तक पहुंचा सकें. समय के साथ इसमें बदलाव आया, और इसकी जगह प्रिंट मीडिया, फिर मास मीडिया, और अब सोशल मीडिया के द्वारा लोग अपनी बात सबके सामने रखते है. मीडिया संचार का एक बहुत आसान और मजबूत तरीका है. आजकल मीडिया के सबसे आसान तरीके है, रेडियो, टीवी, न्यूज़पेपर एवं इन्टरनेट. मीडिया का हमारी सोसाइटी में एक अहम स्थान है.

मीडिया ने जब पहली बार काम शुरू किया तो प्रिंट मीडिया आया, इसका मतलब समाचार पत्र. समाचार पत्र के इतिहास के बारे में यहाँ जानें. समाचार पत्रों के द्वारा लोग अपनी बात या, देश विदेश की जरुरी जानकारी उसमें छापने लगे. इसके द्वारा एक साथ बहुत से लोगों तक, बहुत कम समय में जानकारी जाने लगी. इसके बाद आया रेडियो, जिसके द्वारा हम गाने, विविध जानकारी एवं समाचार को सुन सकते थे. रेडियो के इतिहास के बारे में यहाँ पढ़ें. रेडियो की फ्रीक्वेंसी सेट कर, ये गाँव-गाँव शहर पहुँचने लगा, इसके द्वारा और भी जल्दी जानकारी मिलने लगी. इसके बाद मीडिया के क्षेत्र में क्रांति लाई टीवी ने. भारत में दूरदर्शन चैनल के साथ सभी के घर में टीवी आई. टीवी में मनोरंजन के लिए बहुत से सीरियल, ज्ञान वर्धक बातें आती थी, इसके साथ ही इसमें समाचार का प्रसारण होने लगा. इसमें किसी भी कार्यक्रम को सुनने के साथ साथ हम देख भी सकते थे. उस समय मीडिया चैनल के नाम पर सिर्फ दूरदर्शन था. दूरदर्शन की पुरानी यादों के बारे में यहाँ पढ़ें. ये दिन में 2 बार 10-15 min के लिए ही आता था, जिसमें देश-विदेश की जरुरी बातों को ही कवर किया जाता था.

मीडिया क्या है? (Media Definition)

लोकल न्यूज़, टीवी सितारे, राजनेता के लिए पेपर मीडिया ही कार्य करता था, उसी में इन सभी के बारे में विस्तार से पढ़ा जा सकता था. समय के साथ टीवी में चैनल बढे, लोगों का रुझान बढ़ा, जिसके साथ इसमें समाचार के लिए अलग से चैनल बना दिए गए, जिसमें 24 घंटे न्यूज़ आने लगी. अब गानों के लिए अलग चैनल, फिल्मो के लिए अलग चैनल, धार्मिक चैनल, बच्चों के लिए चैनल, हर भाषा के अलग चैनल, कॉमेडी सीरियल के लिए चैनल आ गए है. इसके साथ ही अब तो ये मीडिया वाले अपने पुराने सीरियल को वापस टेलीकास्ट करने के लिए, एक नया चैनल ही बना देते है. इस तरह मीडिया का विस्तार होते चला गया, और मीडिया नाम का जाल देश, समाज में फ़ैल गया. इस तरह टीवी पर आने वाले मीडिया को मास मीडिया नाम मिला.

Media Advantages and Disadvantages

भारत में प्रसारित होने वाले चैनल (Total TV channels in India) –

न्यूज़ चैनल (हिंदी) 25 (लगभग)
मनोरंजक चैनल (हिंदी) 25 (लगभग)
फिल्म चैनल 20 (लगभग)
म्यूजिक चैनल 15 (लगभग)
किड्स चैनल 14 (लगभग)
जानकारी वाले चैनल 18 (लगभग)
धार्मिक चैनल 29 (लगभग)
स्पोर्ट्स चैनल 13 (लगभग)

मीडिया चैनल के सकारात्मक व नकारात्मक प्रभाव पर निबंध

Media Advantages and Disadvantages in hindi

टीवी में बढ़ते मीडिया का समाज पर अपना ही प्रभाव है, मीडिया का जनजीवन पर दोनों सकारात्मक और नकारात्मक कई फायदे भी है तो कई नुकसान. आइये इसके बारे में विस्तार से जानते है –

मीडिया का सकारात्मक प्रभाव और फायदे (Media Advantages) –

मीडिया का सबसे बड़ा साधन आज के समय में टेलीविज़न है. टीवी में आज जितने मनोरंजन के चैनल है, उतने ही या उससे भी ज्यादा समाचार चैनल है.

  • मीडिया के द्वारा लोगों को शिक्षा मिलती है, वे टीवी, रेडियो प्रोग्राम के द्वारा स्वास्थ्य, वातावरण, दूसरी अन्य जानकारी को जान पाते है.
  • मीडिया के द्वारा लोगों को अपना टैलेंट पूरी दुनिया में सबके सामने रखने का एक अच्छा प्लेटफार्म मिला.
  • बच्चों का ज्ञान बढ़ता है. बच्चे डिस्कवरी जैसे चैनल, क्विज प्रोग्राम के द्वारा बहुत कुछ सीखते है.
  • रेडियो भी एक अच्छा माध्यम है, इसके द्वारा कही पर भी रहकर जानकारी मिल जाती है. आजकल मोबाइल में भी रेडियो, एफ़एम् की सुविधा मौजूद रहती है.
  • मीडिया के द्वारा विज्ञापन कंपनी के उन्नति के रास्ते खुल गए. जैसे ही मीडिया आई, उसके पीछे पीछे अपने प्रोडक्ट का विज्ञापन करने के लिए, उन्हें अच्छा माध्यम मिल गया. विज्ञापन के द्वारा अलग अलग तरह के समान के बारे में लोगों को जानकारी मिलती है, जिससे इसकी बिक्री भी अधिक होती है.
  • विज्ञापन के द्वारा टीवी चैनलों की भी कमाई होती है.
  • ये मनोरंजन का बहुत अच्छा साधन है. इसमें दिखाए जाने वाले, टीवी सीरियल, न्यूज़, गाने, फिल्मों के द्वारा लोगों का मनोरंजन होने लगा.
  • देश दुनिया के अलग अलग प्रान्त, धर्म के लोग एक साथ आकर अपनी बात, अपने टैलेंट को इसमें दिखा सकते है.
  • मीडिया के माध्यम से देश-दुनिया की लाइव न्यूज़ देखने को मिल जाती है. दुनिया के किसी भी कोने में होने वाली घटना को ये मीडिया वाले तुरंत अपने कैमरे में कैद कर सबके सामने ले आते है.
  • सभी विषयों के लिए अलग अलग चैनल हो गए, जिससे अपनी मर्जी, मन मुताबित जब जो चाहा वो देख लिया.
  • बच्चों के लिए अलग से चैनल है, जिससे अभिभावक उन्हें सिर्फ वही दिखा सकते है, और बाकि चैनल से उन्हें दूर रख सकते है.
  • धार्मिक चैनल भी कई उपलब्ध है, जिसे हमारे घर के बड़े बुजुर्ग एन्जॉय कर सकते है.
  • न्यूज़ चैनल भी कई तरह के है, लोकल न्यूज़ के लिए अलग, प्रदेश के लिए अलग, देश के लिए अलग, विदेश के लिए अलग एवं शेयर मार्किट का अलग चैनल. इतने विकल्प होने पर हम अपनी मर्जी से किसे भी चुन सकते है. ये चैनल कई भाषा में भी उपलब्ध है, जिससे देश के अलग भाषा समझने वाले, अपनी क्षेत्रीय भाषा में इन चैनलों का मजा ले सकते है.
  • लेटेस्ट न्यूज़ के लिए, इन्टरनेट का भी सहारा लिया जा सकता है, सोशल मीडिया आजकल काफी प्रचलित है, जिसके द्वारा अनेकों लोग जुड़ें हुए है, और जानकारी के साथ साथ अपनी बात भी शेयर कर सकते है.
  • टीवी पर ढेरों स्पोर्ट्स चैनल भी आते है, इन्हीं की बदौलत हम घर बैठे बैठ दूर दराज चल रहे क्रिकेट मैच का मजा पाते है.
  • मीडिया वाले भ्रष्टाचारी नेताओं की पोल खोलने के लिए कई तरह से मेहनत करते है. वे स्टिंग ऑपरेशन के द्वारा उनकी सच्चाई सबके सामने लाते है. भ्रष्टाचार पर निबंध यहाँ पढ़ें.
  • मीडिया का रूप बढ़ने से बड़े नेता अभिनेता कुछ भी गलत काम करने से डरते है, क्यूंकि उनकी हर गतिविधि पर मीडिया की पेनी नजर होती है.

मीडिया वाले अपनी बात, खबर पहुँचाने के लिए दिन रात मेहनत करते है, हर मीडिया वाला यही कोशिश करता है, कि उसके चैनल में सबसे पहले न्यूज़ या प्रोग्राम टेलीकास्ट हो. मीडिया हमारी रोजमर्रा की ज़िन्दगी का हिस्सा बन चुकी है.

मीडिया चैनल के नकारात्मक प्रभाव (Media Disadvantages ) –

  • बढ़ते चैनलों के साथ एक चैनल दुसरे का प्रतिद्वंद्दी हो गया. TRP की होड़ में ये प्रोग्राम की क्वालिटी में ध्यान नहीं देते, और बस कुछ भी दिखाते है.
  • आजकल टीवी पर कार्यक्रम से ज्यादा तो विज्ञापन आता है. टीवी चैनल वालों को विज्ञापन से पैसा मिलता है, जिससे वे अपने कार्यक्रम में विज्ञापन अधिक दिखाते है, और प्रोग्राम को छोटा कर देते है.
  • कुछ भी दिखाने के लिए, आजकल फूहड़ता परोसी जाती है. कई बार फॅमिली चैनल में भी ऐसे कार्यक्रम आते है, जो परिवार के साथ बैठकर नहीं देखे जा सकते है, और अचानक ऐसा कुछ आने से सभी असमंजस महसूस करते है.
  • टीवी में बढ़ते चैनल की वजह से अधिकतर लोग इसमें बिजी हो गए है. एक के बाद एक कार्यक्रम के चलते वे टीवी सेट्स के सामने ही बैठे रहते है. इसके साथ ही दुसरे चैनल में उसी समय में और प्रोग्राम आते है, जिसे देखने के लिए लोग उसका रिपीट देखते है. इसका मतलब लोगों की ज़िन्दगी बस टीवी के इर्दगिर्द ही घुमती है, मुख्य रूप से ऐसा औरतें करती है.
  • औरतें अपने कार्यक्रम के चलते, घर का सारा काम धाम छोड़ देती है. इनकी इस आदत से तो कई बार इनके पति भी परेशान होते है.
  • अधिक टाइम मास मीडिया, सोशल मीडिया में बिताने के कारण लोग समय बर्बाद करते है. इससे लोगों की सामाजिक जिंदगी भी प्रभावित होती है.
  • मास मीडिया, सोशल मीडिया का सबसे बुरा असर बच्चों पर एवं विद्यार्थियों पर पड़ता है, वे अपना ध्यान पर इस पर अधिक लगते है, जिससे उनकी पढाई पर बहुत असर पड़ता है.
  • मास मीडिया, सोशल मीडिया एक तरह से आपको अपनी आदत लगा देते है, इसके बिना रहना आपके लिए मुश्किल हो जाता है. इससे इन्सान के दिमाग का विकास भी रुक जाता है, और वे एक ही स्तर तक सोच पाता है.
  • लगातार मास मीडिया, सोशल मीडिया के संपर्क में रहने से बच्चों, बड़े सभी के दिमाग, आँख पर असर होता है. बच्चों को कम उम्र में ही चश्मे लगने लगते है. इसके आलावा भी बहुत से स्वास्थ्य की परेशानी जैसे सर दर्द, बेक में पैन आदि.
  • सोशल मीडिया में अधिक समय बिताने वालों के लिए कई तरह की परेशानी खड़ी हो जाती है. अगर माँ बाप ध्यान न दें, तो बच्चे गलत लोगों की संगति में पड़ जाते है, और अपना भविष्य ख़राब कर देते है.
  • मास मीडिया, सोशल मीडिया पर बहुत से गंदे गंदे चैनल भी आते है. ये हमारे समाज के लिए अभिशाप की तरह है, जो देश का भविष्य बिगाड़ते है. इसके लिए सरकार को कड़े कदम उठाना चाहिए, और ऐसे टीवी चैनल, प्रोग्राम को टीवी पर प्रसारित नहीं होने देना चाहिए.
  • कई लोग एफ़एम् (FM) सुनने के आदि होते है, वे हेडफोन लगाकर इसे सुनते है, ड्राइविंग करते है. इससे उनके कान में तो परेशानी होती ही है, साथ ही ड्राइविंग के समय हेडफोन लगाने से बड़ी बड़ी दुर्घटना भी होती है. अभी हाल ही में सुना था कि एक स्कूल की बस ट्रेन से जा टकराई, जिससे 15-20 बच्चों की मौत हो गई. दुर्घटना का कारण यही था कि ड्राईवर ने हेडफोन लगाया हुआ, जिससे रेलवे फाटक में खड़े आदमी के आवाज लगाने पर भी उसे सुनाई नहीं दिया, और इतनी बड़ी दुर्घटना हो गई.
  • मास मीडिया, सोशल मीडिया पर दिखाए जाने वाले प्रोग्राम कई बार गलत शिक्षा भी देते है. इसमें क्राइम से जुड़े प्रोग्राम भी आते है, जो कई लोगों को नए नए आईडिया दे देते है, और इससे हमारे समाज में भी तरह तरह की आपराधिक घटना होने लगती है.
  • मास मीडिया, सोशल मीडिया के प्रोग्राम में सिगरेट, शराब का सेवन भी खुलेआम दिखाया जाता है, इसे देख बड़ों के साथ बच्चे भी प्रभावित होते है, वे इसे अपने जीवन में उतार लेते है.
  • टीवी में दिखाए जाने वाले प्रोग्राम में अमीर, गरीब, जाति, धर्म का बहुत बोलबाला होता है, जिससे लोगों को गलत शिक्षा मिलती है. इसके साथ ही उसमें दिखावा, साजसज्जा अधिक होती है, जिससे प्रभावित होकर आम जनता भी उसे अपने जीवन में उतारने की कोशिश करती है.
  • मास मीडिया, सोशल मीडिया में दिखाए जाने वाले स्टंट को बच्चे, युवा अपने घर में करते है, जिससे उन्हें ही नुकसान होता है. ऐसा ही कुछ ‘शक्तिमान’ सीरियल के समय हुआ था, जब ये सीरियल आता था, तो जिस तरह से शक्तिमान गोल-गोल घूमकर उड़ने लगता था, बच्चे भी उसे अपने घर में करने लगे थे, जिससे कई बच्चों की तो जान तक चली गई थी. शक्तिमान सीरियल के बारे में जानने के लिए यहाँ पढ़ें.
  • मीडिया वाले अपनी न्यूज़ बनाने के लिए, कुछ भी बोलते है, किसी भी हद तक चले जाते है. आजकल मीडिया में सच्चाई कम कंटेंट ज्यादा होता है.
  • किसी भी एक्टर, एक्ट्रेस, राजनेता या फेमस पर्सनालिटी के बारे में गलत-गलत बात बोलते है. अपनी बात दिखाने के लिए छोटी सी बात में मिर्च मसाला लगाकर दिखाते है. उस न्यूज़ में सच्चाई तो आधी भी नहीं होती होगी.
  • ये मीडिया वाले देश में किसी आपदा, दुर्घटना के समय वहां जाकर उनकी मदद नहीं करेंगें, बल्कि उनसे पूछेंगें आपको कैसा लग रहा है? ऐसा देखकर लगता है, जैसे ये अपनी इंसानियत भी खो चुके है.
  • मीडिया ने जातिवाद को बढ़ावा दिया है, कई बार चैनल वाले किसी धर्म विशेष के लिए ऐसा बोल जाते है, जिससे उस धर्म के लोग आहित होते है, और कई बार ये मसला साम्प्रदायिक दंगे तक पहुँच जाते है.
  • किसी व्यक्ति विशेष के बारे में कई बार कुछ गलत अफवाह फैला दी जाती है, जिससे उस इन्सान की प्रतिष्ठा ख़राब होती है.

मीडिया का समाज के प्रति कर्तव्य (Media Obligations and duties towards society) –

  • मीडिया वालों को ये ध्यान रखना चाहिए कि जो वो दिखा रहें है, उसमें सच्चाई हो. झूठी बात, अफवाह को नहीं दिखाना चाहिए.
  • अपने कार्यक्रम के द्वारा किसी को मानसिक रूप से परेशान नहीं करना चाहिए.
  • ऐसे कार्यक्रम दिखाने चाहिए, जिससे देश समाज कुछ सीखे और आगे बढे.

सरकार को मास मीडिया और सोशल मीडिया पर पेनी नजर रखनी चाहिए, किसी भी गलत बात, बेढंगे प्रोग्राम को टेलीकास्ट नहीं होने देना चाहिए.

मीडिया एक ऐसा प्लेटफार्म बन चूका है, जो समाज में एक महत्वपूर्ण ऊँचा स्थान रखता है, उसको अपनी प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए खुद काम करना चाहिए. वैसे कुछ भी कहो मीडिया वाले बहुत मेहनत करते है, वे 24 घंटे काम करते है, जिससे देश, समाज को मनोरंजित कर सकें. उन्ही की बदौलत फिल्म अभिनेता, स्टार बनता है, राजनेता का कालाचिटठा सामने आता है.

Vibhuti
Follow me

Vibhuti

विभूति दीपावली वेबसाइट की एक अच्छी लेखिका है| जिनकी विशेष रूचि मनोरंजन, सेहत और सुन्दरता के बारे मे लिखने मे है| परन्तु साईट के लिए वे सभी विषयों मे लिखती है|
Vibhuti
Follow me

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *