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मी टू केम्पेनियन क्या है, एवं तनुश्री दत्ता नाना पाटेकर केस | Tanushree Dutta Nana Patekar Case in Hindi

#MeToo Movement kya hai? [History Origin Founder] Tanushree Dutta and Nana Patekar Case In Hindi [मी टू केम्पेनियन क्या है, एवं तनुश्री दत्ता नाना पाटेकर केस] 

हालही में बॉलीवुड इंडस्ट्री में एक मामला गरमाया हुआ हैं जिसमे अभिनेत्री तनुश्री ने, नाना पाटेकर पर दुर्व्यवहार के आरोप लगाये हैं और यह मुद्दा #MeToo मूवमेंट के तहत खुलकर सामने आया हैं,#MeToo मूवमेंट का असर दुनिया के हर हिस्से मे देखा जा रहा हैं .अब तक कई बड़ी हस्तियों के नाम हेश टेग के साथ सोशल मीडिया पर छप चुके हैं इनमे अब तक 8 बड़े नाम हैं, वो हैं क्वीन के डायरेक्टर विकास, एआईबी के सीईओ तन्मय भट्ट, रजत कपूर, चेतन भगत, सिंगर कैलाश खेर, आलोक नाथ, राज नेता एमजे अकबर एवं नाना पाटेकर. इनमे से कई ने माफी मांगी हैं और कुछ ने आरोपो को गलत करार कर दिया हैं.

MeToo Movement In Hindi

1 नाम #MeToo मूवमेंट
2 उत्तपत्ति 2006
3 किसने की इस वाक्य की उत्पत्ति तराना बर्क
4 पहला हेश टेग 15 अक्टूबर 2017
5 किसने लिखा था पहला केस हेश टेग के साथ एलीसा मिलाने

मी टू मूवमेंट क्या हैं?[What is #MeToo Movement?]

मी टू मूवमेंट, यह एक तरह का आंदोलन हैं जिसमे महिलायें अपने आप पर हुये योन शोषण को लिखकर दुनिया के साथ साझा कर रही हैं. यह कहा जा सकता हैं कि यह एक तरह की लड़ाई हैं जिसमें महिलायेँ अपने ऊपर हुये अत्याचारों के खिलाफ एकजुट होकर दुनिया के सामने आवाज उठा रही हैं.

इसे एक हेश टेग की तरह लिखा जाता हैं और उसके साथ अपने ऊपर हुये अत्याचारों को शब्दों में बयान किया जाता हैं इसका चलन 2017 से बढ़ा हैं और आज कई महिलायेँ इसके जरिये आवाज उठा रही हैं . इस वाक्य की उत्पत्ति 2006 में हुई थी यह कैसे हुआ और किस तरह यह एक आंदोलन की तरह व्यापक बन गया इसके लिए हम इतिहास के पन्नो को पलटेंगे.

मी टू मूवमेंट का इतिहास क्या हैं ?[ History (origin) Behind Metoo Movement]

इस आंदोलन के पीछे एक कहानी या कहें एक घटना हैं इसकी शुरुवात 2006 में हुई इसके बाद 2017 से यह व्यापक रूप से फैला और आज हर तरह सोशल मीडिया के जरिये दिखाई और सुनाई दे रहा हैं.

किसने और कैसे इस मूवमेंट की शुरुवात की ? [who started the me too movement (Founder)]

तराना बर्क नामक सामाजिक कार्यकर्ता ने इस शब्द “Me Too” का उपयोग 2006 में किया था, उनका मुख्य उद्देश्य इस त्रासदी से गृसित महिलाओं को जागृत करना और उनके साथ खड़े होकर उन्हे हिम्मत देना था. उन्होंने इस शब्द “मी टू” को एक डॉक्यूमेंट्री टाइटल की तरह उपयोग किया जिससे हर वो महिला जो इस तरह की कहानी को सभी के सामने रखने में असहज महसूस करती हैं वो इस वाक्य के जरिये अपनी बात को कह सके. बर्क को यह बात तब महसूस हुई जब 13 वर्ष की एक लड़की अपनी बात कहने में असमर्थ थी और इसी पल को समझ कर बर्क ने “मी टू” वाक्य को जन्म दिया .

मी टू एक हेश टेग की तरह कब सामने आया ?

हेश टेग के रूप में #MeToo की शुरुवात हॉलीवुड अभिनेत्री एलीसा मिलाने ने 15 अक्टूबर 2017 को अपने ट्वीट के जरिये की, उन्होने अपने #MeToo के जरिये खुद की कहानी दुनियाँ के सामने रखी. उनके ट्वीट में, उन्होने हार्वे वीनस्टीन द्वारा उनके साथ किये गये दुर्व्यवहार को लिखा, और साथ ही उन्होने दुनिया भर के लोगो से यह अपील भी की, कि वे अपने ऊपर हुई त्रासदी को मी टू हेश टेग लगाकर दुनियाँ के सामने रखे .

इस ट्वीट का असर कैसा हुआ ?

15 अक्टूबर 2017 के इस ट्वीट को काफी सराहा गया और 24 घंटों के अंदर कई करोड़ो लोगो ने इस हेश टेग का इस्तेमाल किया . करोड़ो लोगो ने इस ट्वीट पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की और काइयों ने अपने अनुभव को सोशल मीडिया पर साझा किया .

एलीसा मिलाने के इस कदम ने महिलाओं को शक्ति दी और आज यह एक आंदोलन की तरह उभर कर सामने आ रहा हैं जो महिला सशक्तिकरण को दृढ़ता से सबके सामने पेश कर रहा हैं.

आज के समय में दुनियाँ का हर देश कई तरह के शोषण से गृसित हैं शिक्षित समाज की वृद्धि के साथ- साथ इस तरह की वारदातें भी बढ़ती जा रही हैं और इनका कारण हैं इसका खुलकर विरोध ना कर पाना हैं जिस कारण शोषण को बढ़ावा मिलता जा रहा हैं.

भारत मे मी टू कैंपेन का असर [Me Too Movement in India]

एलीसा मिलाने के ट्वीट के बाद पूरी दुनिया ने इस टेग का इस्तेमाल किया और इसका असर भारत देश पर भी पड़ा और हमारे देश में भी कई लोगों ने अपने अनुभव को सभी के सामने निडरता से रखा जिसमे कई बॉलीवुड अभिनेत्रियाँ भी शामिल हैं .

इस #MeToo मूवमेंट के तहत अभिनेत्री तनुश्री दत्ता ने अभिनेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता नाना पाटेकर पर आरोप लगाये .

तनुश्री दत्ता नाना पाटेकर केस :[Tanushree Dutta and Nana Patekar Case]

तनुश्री दत्ता ने बताया कि दस साल पहले 2008 में एक फिल्म शूटिंग के दौरान नाना पाटेकर ने उन्हे गलत तरह से छूने की कोशिश की थी. उस वक्त फिल्म के गाने पर कोरियोग्राफी की जा रही थी, तब नाना ने सभी कोरियोग्राफर को हटाकर खुद ही डांस सीखाने की कोशिश की, साथ ही तनुश्री का कहना था कि नाना ने आपत्तिजनक सीन करने के लिये भी जबरजस्ती की .

तनुश्री द्वारा शिकायत दर्ज की गई :

तनुश्री ने अपने साथ हुये दुर्व्यवहार के लिये नाना पाटेकर के खिलाफ महाराष्ट्र महिला आयोग में शिकायत दर की हैं, शिकायत के अनुसार उन्होने 10 वर्ष पूर्व हुई इस घटना की जांच के आदेश दिये हैं उनकी एफ़आईआर में और भी नाम जैसे गणेश आचार्य, सामी सिद्दीकी, एवं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के कार्यकर्ताओं के नाम शामिल हैं.

तनुश्री द्वारा लगाई गई धारायें :

तनुश्री के वकील ने बताया कि महाराष्ट्र राज्य आयोग के तहत मामला दर्ज किया गया हैं जिसे वे यौन उत्पीड़न अधिनियम धारा 9 के तहत जिला अधिकारी के अंतर्गत ले जायेंगे.

तनुश्री ने बताया कि उन्होने आरपीसी धारा 354, 354 (ए), धारा 34 और धारा 50 9 के तहत मामला आगे बढ़ायेंगी. उन्होने अपनी शिकायत में लिखा हैं कि शूटिंग के पहले ही वो ये निर्देश दे चुकी थी कि वो किसी भी आपत्तीजनक सीन अथवा डांस स्टेप को परफॉर्म नहीं करेंगी लेकिन शूटिंग के दिन नाना का बर्ताव खराब था. उन्होने यह भी बताया कि ये सब करने के लिये गणेश आचार्य को भी धमकाया जा रहा था और जब तनुश्री ने इस बात का विरोध किया तो उन पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के कार्यकर्ताओं द्वारा हमला किया गया. इस सबके बाद उन्होने गोरेगाँव पुलिस स्टेशन में भी शिकायत दर्ज करवानी चाही पर किसी ने उनकी शिकायत आधिकारिक तौर पर दर्ज नहीं की गई. तनुश्री ने 2008 मार्च मे सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन में भी शिकायत की लेकिन कोई बात आगे नहीं बढ़ी.

इस पूरी घटना का तनुश्री के जीवन पर गहरा असर हुआ और वे ट्रोमा में चली गई साथ ही उन्हे कई करोड़ो का नुकसान भी हुआ.

नाना पाटेकर की प्रतिक्रिया :

नाना पाटेकर ने भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और सभी आरोपो का खंडन किया, उनका कहना यह हैं कि ऐसा कुछ नहीं हुआ था, दस साल पहले जो उन्होने कहा था आज भी वे उस पर कायम हैं, एवं बाद में वे रिपोटर के सवालों का जवाब बिना दिये ही वहाँ से चले.

यह भी बताया जा रहा हैं कि गणेश आचार्य ने भी इस घटना की पुष्टि नहीं की हैं उनका कहना हैं कि ऐसा कुछ नहीं  हुआ था.

इस तरह इस मामले में कई लोग तनुश्री के साथ हैं, तो कई नाना पाटेकर के साथ. यह आरोप किस हद तक सही हैं इसका अभी कोई अनुमान नहीं हैं.

विंटा नन्दा ने आलोक नाथ केस [Vinta Nanda’s Alok Nath Case]

विंटा नन्दा ने आलोक नाथ के लिए मी टू हेश टेग का उपयोग किया और अपने साथ हुये हादसे का खुलासा किया उन्होने आलोक नाथ का नाम तो नहीं लिया लेकिन संस्कारी शब्द का उपयोग किया। यह घटना तकरीबन 20 साल पुरानी हैं, नब्बे के दशक में टीवी पर प्रसारित होने वाले तारा सिरियल की  डायरेक्टर विंटा नन्दा ने सिरियल के मुख्य किरदार आलोक नाथ के खिलाफ योन शोषण का आरोप लगाया उन्होने बताया कि सिरियल के दौरान एक डिनर पार्टी में मिले थे जिसमे आलोक की पत्नी नहीं आई थी उसमे विंटा की ड्रिंक में कुछ मिलाया गया था, जिसके बाद उन्हे थोड़ा अजीब महसूस हुआ. पार्टी देर रात 2 बजे तक चली उसके बाद विंटा अकेले घर जा रही थी, तब ही रास्ते में उन्हे आलोक ने कार रोक कर छोडने कहा। विंटा कार में बैठ गई। विंटा नशे में थी लेकिन समझ पा रही थी कि उन्हे जबरजस्ती शराब पिलाई जा रही हैं और उनके मुंह ने कपड़ा घुसाया जा रहा हैं उसके बाद उन्हे घर छोड़ दिया गया अगली सुबह उन्हे महसूस हुआ कि उनके साथ योन शोषण हुआ हैं। इसके बाद उन्होने यह भी बताया कि इस तारा सिरियल की मुख्य अभिनेत्री नवनीत निशान के साथ भी आलोक ने दुर्व्यवहार किया जिसका विरोध किया गया और बाद में उनके खिलाफ एक्शन लिया गया।

विंटा नन्दा के आरोप के बाद तारा की मुख्य अभिनेत्री नवनीत निशान ने उनका सपोर्ट किया। विंटा ने बताया कि इस हादसे के बाद उन्होने मानसिक संतुलन खो दिया था और कभी विरोध की हिम्मत नहीं जुटा पाई लेकिन 20 वर्षों के बाद मी टू मूवमेंट के कारण उन में हिम्मत आई और उन्होने सभी के सामने अपनी आपबीती रखी.

इसी तरह इस हेश टेग मी टू मूवमेंट ने पूरी दुनिया को हिला दिया हैं. कई लोग इसका जमकर समर्थन कर रहे हैं तो कई इसका विरोध. लोगो का मानना हैं इसका दुरपयोग भी किया जा सकता हैं. फेमस होने अथवा सहानुभूति पाने के लिये भी महिलाएं इसका उपयोग कर सकती हैं . इस तरह मी टू आंदोलन देश भर मे काफी प्रसिद्ध हो चुका हैं.

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