MSP पर निबंध | MSP Essay in Hindi

MSP पर निबंध [महत्व, हानी, अर्थ, पूरा नाम, प्रकार, उद्देश्, फसलों की सूची, एमएसपी बिल] MSP Nibandh [MSP Eassy , Importance, Risk, Objectives, MSP Full Form, MSP Objectives In Hindi]

प्रस्तावना

बीते दिनों पंजाब – दिल्ली बॉर्डर पर कई सारी घटनाएं देखने को मिली। इन घटनाओं में मुख्य रूप से भारत का किसान शामिल था। भारत के किसान उस आंदोलन का हिस्सा बने थे जिसका कारण था ‘‘ न्यूनतम समर्थन मूल्य ’’ यानी MSP। इस एक कानून के कारण देश का किसान सड़कों पर आ गया था और बात तो यहां तक पहुंच गई थी तब वह पूरा जनसमूह भारत के 72वें गणतंत्रता दिवस पर बेरिकोट टोड कर सेंट्रल दिल्ली मे घूस गये थे और लाल किला पर झंडा भी फहराया था केन्द्र सरकार ने भारत के किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए बीते साल 2020 में 3 विधेयक पास किये थे और उन ही विधेयकों पर भारत के कार्यपालक अध्यक्ष, भारत के राष्ट्रपति के हस्ताक्षर से उन विधेयकों को कानून में परिवर्तन कर दिया। इस कानून को पारित करने के बाद देश मे मानों एक भूचाल सा आ गया। देश के दो राज्य पंजाब और हरियाणा में इस कानून का विरोध किया जाने लगा जबकि भारत के अन्य हिस्सों में इस कानून का समर्थन भी किया गया। 

minimum support price in hindi

MSP का अर्थ

भारत में उत्पादित होने वाली फसलों पर एक तय दर / मूल्य को ही न्यूनतम समर्थन मूल्य कहा जाता है। किसानों द्वारा सरकार को बेची जाने वाली फसलों पर उस तय राशि को एम.एस.पी कहा जाता है, जिस राशि से कम मूल्य पर किसी भी फसल को किसानों से नही खरीदी जाएगी।  यह एक प्रकार की गारंटी होती है जो सरकार द्वारा किसानों को दी जाती है। 

MSP का पूरा नाम 

सामान्य भाषा में इसे एम.एस.पी कहा जाता है परन्तु इस का पूरा नाम हिन्दी मे ‘‘ न्यूनतम समर्थन मूल्य ’’ है और इसे अंग्रेजी भाषा में ‘‘ Minimum support price ’’ कहा जाता है। भारत में MSP को लेकर अलग से एक कानून बना हुआ है और इसी कानून के तहत भारत में किसानों से फसल खरीदी जाती है ताकि किसानों को भी कोई नुकसान न हो और सरकार भी देश की मांग की पूर्ति कर सके। 

कौन तय करता है न्यूनतम सर्मथन मूल्य 

भारत मे MSP यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने का अधिकार CACP के पास है। CACP यानी कृषि लागत एवं मूल्य आयोग। भारत में यही एक आयोग है जो यह निर्धारित करते है की भारत में किस फसल पर कितना MSP लगेगा। 

भारत में यह आयोग गत्रे पर MSP तय नहीं करता है जबकि गन्ने पर एम.एस.पी तय करने का अधिकार गन्ना आयोग के पास है। भारत सरकार द्वारा वर्तमान में केवल 23 फसलों पर ही एम.एस.पी निर्धारित किया गया है जिसमें 7 प्रकार की फसलें व 5 प्रकार के तिलहन है और इसके अलावा भी फसलें इसमे शामिल है। 

CACP (कृषि लागत एवं मूल्य आयोग) 

भारत में फसलों पर एम.एस.पी तय करने का अधिकार केवल इसी कृषि लागत एवं मूल्य आयोग के पास है – 

  • भारत में इस कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की स्थापना साल 1965 में की गई थी। यह आयोग भारत में यह आयोग किसान व कल्याण मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। 
  • इस आयोग की स्थापना का उद्देश्य – कृषि उत्पादों के संतुलित एवं एकीकृत मूल्य संरचना तैयार करना है। यह आयोग कृषकों को इस न्यूनतम समर्थन मूल्य की सलाह देता है। 
  • इस आयोग द्वारा भारत में 24 प्रकार की फसलों पर एम.एस.पी तय किया जाता है। 
  • यह आयोग गत्रे के अलावा अन्य तय फसलों पर ही एम.एस.पी तय करता है, गत्रे पर एम.एस.पी तय करने का अधिकार केवल गत्रा उत्पादन आयोग के पास ही है। 
  • कृषि व लागत आयोग का भारत में मुख्यालय दिल्ली में स्थित है जहां से इस का पूरा काम व इससे संबंधित मैनेजमेंट किया जाता है।

किस प्रकार तय किया जाता है MSP

भारत में न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने के लिए कुछ नियम व फैक्टर पहले से ही निर्धारित किया गया है और इन फैक्ट के आधार पर इन दरों का निर्धारण किया जाता है। 

  • उत्पादक फसल पर लागत – किसी भी फसल पर दर तय करने से पहले यह जानना जरूरी है कि किस फसल की बुवाई करने से कटाई करने तक कितना खर्च लगता है। उदाहरण के तौर पर समझे तो मान लीजिए कि कोई किसान गेहूं की फसल की बुवाई करता है और उसकी कटाई करता है तो इतने में किसान को इस फसल को उगाने में 500 रुपये का खर्च आता है,तो सरकार यह तय करेगी की गेहूं की फसल पर खर्च रुपये से कितना ज्यादा रुपये किसान को एम.एस.पी के तौर पर दिया जाए। 
  • उस समय की महंगाई – MSP तय करने के लिए इस बात को भी मध्यनजर रखा जाता है की जिस समय फसल की बुवाई की गई थी और जिस समय उस फसल की कटाई की गई थी, उस समय कितनी महंगाई थी। एम.एस.पी मे महंगाई का मतलब उसमें है जिसमें यह देखा जाता है की फसलों को उगाने से कटाई में प्रोसेस के मध्य किन – किन वस्तुओं का इस्तेमाल किया गया और उन वस्तुओं को इस्तेमाल करने मे कितना खर्च आया था। 
  • बाजार में मौजूदा कीमतों का रुख – एम.एस.पी तय करते समय इस बात का भी ख्याल रखा जाता है की जिस समय एम.एस.पी तय किया जा रहा है उस समय मौजूद फसलों की कीमत क्या है। MSP तय करने के लिए इस आधार को काफी महत्व दिया जाता है। 
  • बाजार की मांग व आपूर्ति की स्थिति– बाजार में किस फसल की कितनी मांग है और उसकी कितनी पूर्ति की जा रही है। एम.एस.पी तय करते समय इस बात का भी ख्याल रखा जाता है की वर्तमान समय में इस फसल की बाजार में मांग कितनी है और उस फसल की पूर्ति कितनी की जा रही है। बाजार में अगर मांग ज्यादा है और पूर्ति कम की जा रही है तो ऐसे मे एम.एस.पी ज्यादा निर्धारित कि जाती है और अगर बाजार में वस्तु की मांग कम है और उसकी पूर्ति ज्यादा की जा रही है तो ऐसे मे एम.एस.पी सामान्य निर्धारित की जाती है।
  • वर्तमान फसल की कीमत – फसलों पर एम.एस.पी तय करने से पहले इस बात का भी निर्धारण किया जाता है की वर्तमान में इस फसल की बाजार मे क्या कीमत चल रही है। वर्तमान फसल की कीमत के आधार पर ही इन फसलों पर एम.एस.पी तय की जाती है। 

MSP का फायदा

एम.एस.पी से इस बात का निर्धारण किया जाता है की किस फसल को सरकार किस रेट में किसानों से खरीदी करेगी। इसका किसानों से फसल खरीदने के लिए जो भी दर निर्धारित की जाती है उससे कम दर में कोई भी फसल नहीं खरीदी जा सकती है। इस वजह से यह कहा जा सकता है कि एम.एस.पी का एक सबसे बड़ा लाभ तो यह है की अगर बाजार में फसलों के दाम गिर भी जाते है तो उस स्थिति में सरकार एम.एस.पी से कम दर पर कोई भी फसल नहीं खरीदेगी, एम.एस.पी मे तय दर के अनुसार ही फसल की खरीदी सरकार को करनी होगी। भारत में सभी प्रकार फसलों पर एम.एस.पी दो बार तय की जाती है। 

MSP के उद्देश्य

भारत में फसलों पर एम.एस.पी निर्धारित तो पहले से ही की जा रही है जिसके कुछ उद्देश्य है, यह उद्देश्य एम.एस.पी की विशेषताएं बताते है और इस एम.एस.पी सिस्टम को बनाते है खास –

  • शोषण को रोकना – MSP तय करने से किसानों से इस बात का निर्धारण हो जाता है कि किस फसल पर क्या दर निर्धारित होगी। एम.एस.पी तय करने से किसानों के साथ होने वाले शोषण को रोका जा सकता है। एम.एस.पी से कम रेट में कोई भी फसल नहीं खरीदता और न ही कोई भी किसान इससे कम रेट में अपनी फसल को बेच सकता है। 
  • गिरती और बढ़ती किमतों पर नित्रंयण लगाना – किसी भी फसल की किमत अगर अचानक गिरती है तो उस स्थिति मे तय MSP पर ही फसलों को खरीदना होगा। इससे किसानों को होने वाले शोषण को रोका जा सकेगा। 

किन फसलों पर दिया जाता है एम.एस.पी

एम.एस.पी के दायरे में जिन फसलों को रखा गया है उन फसलों मे दाले व तिलहन को रखा जाता है। अधिदिष्ट प्रकार की फसलों में 14 खरीफ की फसलें और इसके अलावा 6 रबी फसलें और 2 और अन्य वाणिज्यिक फसलें शामिल हैं। एवं इसके अलावा कुछ ऐसी फसलें जैसे तोरिया (लाही) और नारियल के न्यूनतम समर्थन मूल्यों का निर्धारण क्रमशः सरसों और सूखे नारियल के न्यूनतम समर्थन मूल्यों के आधार पर ही तय किया जाता है।

फसलों की सूची: 

  • अनाज (7) – धान, गेहूँ, जौ, ज्वार, बाजरा, मक्का और रागी
  • दाल (5) – चना, अरहर, मूंग, उड़द और मसूर की दाल
  • तिलहन (8) – मूंगफली, सरसों, तोरिया (लाही), सोयाबीन, सूरजमुखी के बीज, तिल, कुसुम का बीज, रामतिल का बीज
  • कच्ची कपास, कच्चा जूट, नारियल, सूखा नारियल
  • गन्ना (उचित और लाभकारी मूल्य)

उत्पादन लागत निर्धारण का तरीका

भारत में कृषि एवं लागत आयोग द्वारा उत्पादन लागत निर्धारण के लिए कुछ आसान तरीकों को अपनाया जाता है, जिन के आधार पर ही फसलों पर लागत निर्धारित की जाती है। फसलों की लागत तय करने के लिए कृषि व लागत आयोग सांख्यिकी विभाग में उपलब्ध डाटा के आधार पर तय करता है। कृषि व लागत आयोग जमीनी स्तर से कोई भी फैक्ट नहीं लेती जिससे यह देखा जा सके की फसलों की बुवाई पर वास्तविक खर्च कितना है। 

CACP ( Commission for agricultural costs and prices ) द्वारा फसलों की एम.एस.पी तय करने के लिए राज्य व केन्द्र दोनों स्तरों पर 3 प्रकार के फार्मूले के आधार पर दर तय की जाती है। 

  • A2 – इस फार्मूले में उन सभी दरों को तय किया जाता है जिसमें यह देखा जाता है कि किसानों द्वारा फसल को उगाने मे बीज, उर्वरकों, कीटनाशकों, श्रम, पट्टे पर ली गई भूमि, ईंधन, सिंचाई इत्यादि पर प्रत्यक्ष रूप से कितना खर्च किया गया है जिसके आधार मान कर इन फसलों पर दर तय की जा सके। 
  • A2+FL – इस फार्मूले में अनैतिक रूप से जो भी पारिवारिक खर्च किया गया है उसको भी देखा जाता है। 
  • C2 – इस फार्मूले को अधिक व्यापारिक माना जाता है। इसमें किसानों की अचल व चल जमीन और उस पर लगे ब्याज के आधार पर MSP तय किया जाता है। 

MSP वर्तमान मे चर्चा मे क्यों ?

वर्तमान में नया कानून विधेयक पास करने के बाद पंजाब और हरियाणा समेत देश भर के कई अन्य राज्यों के किसानों द्वारा राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर हालिया इस नये कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। इस आंदोलन में प्रदर्शनकारी किसानों की प्रमुख मांगों में से एक मांग यह भी है कि नये कानून में सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रणाली को लेकर लिखित में गारंटी प्रदान करे, जो उन्हें उनके द्वारा उगाई गई उनकी फसलों के लिये निश्चित मूल्य का आश्वासन देती है।

भारत में MSP की शुरूआत

भारत में किसानों के हितों की रक्षा हेतु व उन्हें अच्छा मुनाफा देने के उद्देश्य से साल 1965 में कृषि व उत्पाद आयोग की स्थापना की थी। इस आयोग के अधीन ही इस एम.एस.पी की शुरुआत की गई थी। हाल की में ऐसा देखा गया है की सरकार किसानों के प्रति कितनी दयनीय है और किसानों के लिए काफी अच्छे प्रयास कर रहे है। 

MSP बिल क्या है ?

हाल ही में केंद्र सरकार ने किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए विधेयक में 3 बिल पास किये है। इस बिल के अनुसार किसान अपनी फसलों को मंडी में न्यूनतम दर के अनुसार बेच सकेंगे। केंद्र सरकार की माने तो इससे msp पर कोई असर नही पड़ेगा। msp तो पूर्व की भांति ही रखी गई है। इस बिल का उद्देश्य तो यह ही है कि इसके माध्यम से किसानों को मंडी में बीच में जो भी बिचौलिये है उनको हटाया जा रहा है।

उपसंहार 

भारत में कृषि पर भारत की सरकार काफी दयनीय है। एस.एम.पी की शुरुआत साल 1966 में इस उद्देश्य के साथ की गई थी की किसानों की फसलों को एक निश्चित दर पर खरीदा जाए ताकि किसानों का शोषण न हो और किसानों को पूरा अपनी फसल का पूरा मूल्य मिल सके।  MSP की शुरुआत से ही यह पद्धति सक्रिय है और किसानों को इसका नियमित लाभ दिया जा रहा है। 

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