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मुख्यमंत्री भावान्तर भुगतान योजना मध्यप्रदेश | Mukhyamantri Bhavantar Bhugtan Yojana Madhya Pradesh in hindi

मुख्यमंत्री भावान्तर [भावांतर] भुगतान योजना की जानकारी [पोर्टल, पंजीयन प्रक्रिया (रजिस्ट्रेशन), नियम, लिस्ट, फॉर्म 2018 रेट , कीमत [Bhavantar Bhugtan Yojana (MBBY) Madhya Pradesh In Hindi] {Application Form, Documents, Eligibility, Regitration For Kharif and Rabi Crop Last Date Extended @mpeuparjan.nic.im,E-Uparjan} 

मध्यप्रदेश की राज्य  सरकार ने एक नयी योजना की घोषणा की जिसका नाम मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना हैं जिसका उद्देश्य  किसानों को खराब हुई फसलों के लिए आर्थिक सहायता देकर उन्हें भी विकास की मुख्य धारा में लाना हैं. कुछ राज्य सरकारों ने किसानों के फसलों के लोन में राहत की सुविधा के लिए कुछ आवश्यक स्टेप्स लिए हैं. हालाँकि मध्य प्रदेश की राज्य सरकार ने किसानों के ऋण को पूरा माफ़ नहीं करते हुए केवल खराब हुई फसलों पर ही लोन देकर उनकी समस्या को कम करने का मार्ग निकाला हैं,जिसमें सरकार बैंकों के माध्यम से किसानों को केवल खराब हुई फसलों पर ही ऋण माफ़ करेगी.

Mukhyamantri Bhavantar Bhugtan Yojana

नाम  Name मुख्यमंत्री भावंतर भुगतान योजना (BMYY)
लांच की  Launched by श्री शिवराज सिंह चौहान ने
भावांतर योजना का शुभारंभ अगस्त 2017
लाभार्थी वर्ग Target Audience राज्य के किसान
विशेष लाभ  किसानो के लिये फसलों का सही मूल्य
एमएसपी का निर्धारण होगा MSP will be decided by मध्य प्रदेश किसान उत्पाद लागत और विपणन आयोग द्वारा
मोबाइल एप्प Mobile App गिरदावरी मोबाईल एप्प
ओफिश्यिल पोर्टल Official site http://mpeuparjan.nic.in/mpeuparjan/Home.aspx

मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना के विशेषताएं Features Of the Mukhyamantri Bhavantar Bhugtan Yojana

  1. पिछले कुछ वर्षों में मध्य प्रदेश में किसानों की आत्महत्या करने के कारण चिंतित राज्य सरकार ने ये योजना बनाई हैं. और आत्म-हत्याओं की बढती संख्या देखकर सरकार ने इस समस्या को जड़ से खत्म करने का सोच लिया हैं. वास्तव में किसानों के परेशान रहने का मुख्य कारण हैं कि फसलों से उन्हें इतना फायदा नहीं हो पाता जितना कि वो उनमें मेहनत करते हैं.
  2. एमएसपी : मुख्यमंत्री भावांतर योजना (MBBY) में भुगतान की राशि निर्धारण फसलों के विक्रय और मिलने वाले वेतन के मध्य के अंतर पर आधारित होगा. मंडी से फसल को मिली राशि को एमएसपी कहा गया हैं.
  3. कृषि विभाग (मध्य प्रदेश कृषि उत्पाद लागत और विपणन आयोग) ही फसलों का वेतन निर्धारित करेगा.
  4. खरीफ और रबी दोनों प्रकार की फसलों को इस योजना में शामिल किया गया हैं. जहाँ खरीफ की फसल जैसे सोयाबीन, अरहर मक्का इत्यादि भी योजना में शामिल होगी वहीँ रबी की कुछ फसलें भी इस योजना के अंर्तगत शामिल की जायेगी.
  5. विवाद सुलझाने के लिए भी कुछ ऐसे नियम बनाए गए हैं जिससे कि किसान को लाभ लेते समय कोई कष्ट ना उठाना पड़े. सरकार तब भी किसान को फसल के नुकसान की भरपाई करेगी जब कोई विवाद नियत समय में खत्म नहीं हो सके. इसके लिए सरकार अभ्यर्थी को राज्य के आधिकारिक धन कोष से मुआवाजे का भुगतान करेगी.
  6. भावांतर भुगतान योजना (घाटे के भुगतान की योजना) शुरू में केवल 8 फसलों को शामिल करेगी. इनमे ज्यादातर फसलें पल्स और ऑइल सीड की वेराइटी की होगी. और ऐसा इसलिए हैं क्योंकि इन फसलों पर सरकार को चावल की अपेक्षा कम भुगतान करना होगा.
  7. मध्य प्रदेश की सरकार राज्य के निर्धारित एमएसपी से कम राशि में फसल (लिस्ट में दी गयी फसलें) बेचे जाने पर किसानों को भुगतान करेगी. हालांकि ये भुगतान मॉडल प्राइस के आधार पर ही हो सकेगा. (मॉडल प्राइस एक मार्केट में किसी पर्टिक्यूलर आइटम के लिए निर्धारित एवरेज प्राइस हैं जो कि मध्य प्रदेश और  2 अन्य राज्यों में फसल के उगाने से लेकर उसे बेचने तक के 2 महीने की राशि की गणना पर निर्धारित की गई हैं.)
  8. इसलिए यदि किसी आइटम की एमएसपी 3050 रूपये हैं तो इसकी मॉडल रेट 2700 रूपये पर क्विंटल होगी. यदि किसान फसल को 2800 रूपये प्रति क्विंटल की दर से बेचना चाहे तो सरकार विक्रय की गई फसल पर 250 रूपये का भुगतान प्रति क्विंटल के हिसाब से करेगी.
  9. यह पेमेंट किसान के बैंक अकाउंट में सीधा ट्रान्सफर कर दिया जाएगा. हालांकि यदि फसल 2600 रूपये प्रति क्विंटल पर बेची जाए तो राज्य केवल 350 रूपये प्रति क्विंटल देगा.
  10. इसलिए यदि आप योजना के योग्य हैं तो आपको मॉडल प्राइस और एमएसपी के बीच के अंतर की राशि ही मिलेगी.

      इसलिए यदि आप इस योजना के अंतर्गत आने वाली कोई फसल उगाते हैं तो आपको अपने गाँव के कोपरेटिव सोसाइटी में अपनी फसल को रजिस्टर करवाना होगा.

भावांतर भुगतान के अंतर्गत आने वाली फसले एवं उनके समर्थन मूल्य

फसल के नाम समर्थन मूल्य
1 तिल्ली 5300
2 मूंगफली 4250
3 ज्वार 1725
4 बाजरा 1425
5 अरहर 5050
6 मेज 1425
7 पेडी 1590
8 सोयाबीन 3050
9 मूंग 5375
0 उड़द 5400
11 मक्का 1425

मुख्यमंत्री भावांतर योजना में ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया Offline Registration Process In Mukhyamantri Bhavantar Bhugtan Yojana

  1. मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री भावांतर योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए किसानों को इस प्रोजेक्ट में खुद को रजिस्टर करवाना जरुरी हैं. इस प्रक्रिया को नीचे दिए गये कुछ महत्वपूर्ण बातों से समझा जा सकता हैं कि योजना का लाभ लेने के लिए किसान को कैसे रजिस्ट्रेशन करवाना होगा.
  2. इसके लिए जो किसान रजिस्ट्रेशन करवाना चाहते हैं वो पंचायत ऑफिस,जिला कलेक्टर के ऑफिस ,ब्लॉक ऑफिस में खुद को रजिस्टर भी करवा सकते हैं.
  3. सभी आवश्यक डिटेल्स जैसे नाम, पता, उम्र, अन्य निजी जानकारी, आधार नंबर, फोटो इत्यादि भी एप्लीकेशन फॉर्म में भरी जाएगी.
  4. बैंक अकाउंट की डिटेल्स जैसे अकाउंट नंबर, आईएफसी कोड, ब्रांच नेम इत्यादि भी भरी जायेगी जिसका उपयोग भुगतान के समय किया जाएगा. हर किसान का किसी भी नेशनल बैंक, ग्रामीण बैंक या कोआपरेटिव बैंक में खाता होना अनिवार्य हैं.
  5. एप्लीकेशन फॉर्म में फसल उगाने के सम्बन्धित सभी डिटेल्स और उपयोग में ली जाने वाली जमीन की सारी जानकारी होनी चाहिए.

एप्लीकेशन फॉर्म और ऑनलाइन पोर्टल Application Form and Online Portal :

  • इच्छुक अभ्यर्थी एप्लीकेशन फॉर्म का पीडीएफ फॉर्मेट वेबसाईट से डाउनलोड कर सकते हैं और आवश्यक डिटेल्स भी भर सकते हैं.
  • ये एप्लीकेशन फॉर्म अलग राज्य के विभिन्न मंडियों या ई-उपार्जन केंद्र में जमा करवाए जा सकते हैं
  • आप इसके लिए अपने वेब ब्राउजर से ऑनलाइन पोर्टल http://mpeuparjan.nic.in/mpeuparjan/Home.aspx भी विजिट कर सकते हैं. एप्लीकेशन फॉर्म में डिटेल्स भरकर इसे ऑनलाइन सबमिट करवा सकते हैं.

खरीफ की फसल के लिए मुख्यमंत्री भावंतर भुगतान योजना की आवश्यक तिथियाँ

रजिस्ट्रेशन प्रोसेस शुरू होने की तिथि (Opening Date of Registration Process) 11 सितम्बर
फसल के विक्रय की तिथि (Selling crops) 16 अक्टूबर से 15 दिसम्बर
फंडिंग के लिए डेट (सरकार से लाभार्थी के अकाउंट को) Date of Funding (Gov to Beneficiary’s bank account) 25 दिसम्बर से

रजिस्ट्रेशन की डेट और वेबसाईट की डिटेल्स  2018

ये स्टेटमेंट दिया गया हैं कि किसान इस योजना के अंतर्गत 2018-2019 के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं. इसके लिए किसान  mpeuparjan.nic.in पर ई-उपार्जन की ऑफिशियल साईट पर लॉगऑन कर सकते हैं. ये वेब सर्विस राज्य में सभी गेहूं का उत्पादन करने वाले किसानो के लिए उपलब्ध होगी.

  • वेब सर्विस का मुख्य फायदा ये हैं कि इसे फ्री में चलाया जा सकेगा. किसान जो इस सर्विस का फायदा लेना चाहते हैं उन्हें इस योजना के अंदर कोई तरह का पैसा नहीं जमा करवाना होगा
  • केंद्र सरकार की आज्ञा के अनुसार यदि मार्केट में गेहूं की राशि एमएसपी से बहुत कम हैं तो घाटे की राशि राज्य सरकार द्वारा दी जायेगी.

ऑनलाइन रजिस्टर कैसे करे?? How to register

  • किसान इस योजना के अंतर्गत अपने वेब ब्राउजर से ऑफिशियल ई-उपार्जन वेब साईट को विजिट करके रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं. इसके होम पेज पर ये सुविधा होगी जहाँ से आप 2018-2019 के आर्थिक वर्ष के अंतर्गत गेहूं उत्पादन का ऑप्शन चुन सकते हैं.
  • एक बार सेलेक्ट करने पर आपको सेकंड वेब पेज जिस पर प्रोक्रुमेंट मॉनिटरिंग सिस्टम दिखाई देगा वहां पर री-डाइरेक्ट कर दिया जाएगा. आपको आवश्यक जानकारी दी हुयी स्पेस में भरनी होगी.
  • इस पेज पर वेरिफिकेशन कोड के साथ समग्र आईडी के बार में मेंशन करना जरुरी हैं (यदि ये नहीं है तो आप आईडी नंबर भी मेंशन कर सकते हैं.)
  • किसानों द्वारा ऑथेंटिकेशन के लिए एप्लीकेशन फॉर्म में जमीन समबन्धित डिटेल्स, निजी जानकारी और बैंक अकाउंट भी देना जरुरी हैं.
  • यदि आपको भविष्य में रेफेरेंस के लिए जरूरत हो तो आप प्रिंट आउट पर क्लिक करके अपने फॉर्म का प्रिंट भी ले सकते हैं

ई-उपार्जन स्टेप्स E-Uparjan Steps

आपको घाटे की राशि प्राप्त करने की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए 6 निर्दिष्ट स्टेप्स पूरे करने होंगे.  सरकार इस बात का ध्यान रख रही हैं कि किसान को समय पर राशि मिले. सरकार ये भी पक्का करेगी की ये प्रक्रिया किसानों के लिए मुश्किल ना हो.

  • किसान जब ऑफिशियल वेबसाईट पर लॉगऑन करेंगे तो उन्हें ई-उपार्जन साईट पर बताई गयी जानकारी सम्बन्धित डिटेल्स भी देनी होगी
  • ऑथेंटिकेशन के वेरीफाई करने के बाद ही रजिस्ट्रेशन की रसीद किसान को दी जायेगी.
  • किसान को जिस दिनाक पर भुगतान की राशि लेने के लिए सेंटर पर पहुंचना होगा वो उन्हें मोबाइल पर उपलब्ध करवा दिया जाएगा जो उन्होंने रजिस्ट्रेशन के समय दिया होगा.
  • राशि की प्राप्ति के केंद्र पर किसान को बैंक अकाउंट में ट्रान्सफर हुयी राशि के समय की रसीद भी मिलेगी
  • प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ये राशि किसान के बैंक अकाउंट में ट्रान्सफर कर दी जायेगी जो की किसी भी समय निकाली जा सकेगी.

राज्य सरकार का ये भी दावा हैं कि इस नए प्रणाली के अंतर्गत किसानों की मदद करने से उन्हें विक्रय मूल्य गिरने के कारण होने वाले नुकसान का सामना नहीं करना पड़ेगा

इस योजना में रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए आवश्यक डाक्यूमेंट्स important Documents For Registration In the Scheme :

  1. किसान को योजना का लाभ लेने के लिए हर एप्लीकेशन के साथ अपना आधार कार्ड लगना जरुरी होगा.
  2. आधार कार्ड को लिंक करना जरुरी हैं जो कि हर अभ्यर्थी के लिए यूनिक होगी इस कारण डुप्लीकेशन का कोई चांस नहीं होगा.
  3. इसके अलावा बैंक अकाउंट डिटेल्स भी प्रोवाइड करवाई जायेगी जिससे कि उस अकाउंट से ही लाभ प्राप्त किया जा सके.
  4. कृषि उपयोग में आने वाली जमीन के माप सम्बन्धित डाक्यूमेंट्स भी आवश्यक होंगे.
  5. आपको अपने लोन अमाउंट की पासबुक और जमीन के कागज जमा करवाने होंगे. इसी के साथ यदि आप कृषि भूमि या पट्टे के मालिक हैं तो आपको सम्बन्धित ऑथोराईजड लेटर भी जमा करवाने होंगे.
  6. आपको आधार कार्ड की डिटेल्स भी एप्लीकेशन फॉर्म के साथ जमा करवानी होगी. आपको पासबुक के पहले पन्ने की फोटोकॉपी भी देनी होगी जिसमें कि आपके नाम के साथ कोओपरेटिव या नेशनल बैंक के अकाउंट की डिटेल्स लिखी होती हैं.

रबी की फसल के लिए रजिस्ट्रेशन (शुरू और खत्म होने की डेट) Registration For Rabi Crop (Start And Last Date)

रबी की फसल के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया के लिए किसान के लिए बारह फरवरी दो हजार अठारह से ऑफिशियल प्रक्रिया शुरू हो जायेगी. ये रजिस्ट्रेशन प्याज,मसूर की दाल, चने और सरसों के की फसलों के लिए हो सकेगा, ये रजिस्ट्रेशन  3500 कृषि सोसाईटी के लिए बनाई गयी कॉपरेटिव सोसाइटी के अंतर्गत होगा. रजिस्ट्रेशन की लास्ट डेट 12 मार्च 2018 तक थी. इसके लिए ओफ्फिशियली ये बयान भी कहा गया कि वो 70 प्रतिशत किसान को इस योजना से लाभ दिलाएंगे. ये भी उम्मीद की जा रही हैं कि 48 प्रतिशत किसान खरीफ सीजन के लिए रजिस्टर होंगे.

एमपी के किसानों के लिए गिरदावरी मोबाइल एप्प  Girdawari Mobile App For MP Farmers:

  1. एक मोबाइल एप्लीकेशन एप्प जिसका नाम गिरदावरी मोबाइल एप्प हैं उसका उपयोग इस योजना के अंतर्गत रजिस्टर्ड सभी किसानों के कृषि उत्पादों को ट्रैक करने और रिकॉर्ड रखने लिए किया जाता हैं.
  2. ये मोबाइल एप्प ना केवल योजना के अंतर्गत रजिस्टर्ड किसानों के द्वारा उगायी जाने वाली फसलों का ऑनलाइन डाटा को इकठ्ठा करेगा बल्कि लाभार्थियों के जमीन सम्बन्धित मैप के सभी डाटा को भी सुरक्षित रखेगा.
  3. वास्तव में जरूरत के डाटा को फिजिकली इकठ्ठा करने की जगह इस तरह की एप्प से इकठ्ठा करना आसान हैं.

मध्य प्रदेश एक ऐसा राज्य हैं जहाँ के किसान हर साल कृषि सम्बन्धित नुकसानों का सामना कर रहे हैं.  इसके पीछे मुख्य कारण पर्याप्त वर्षा की कमी होना, ज्यादा वर्षा होना और बाढ़ जैसे हालात होना (इस साल के जैसे), जरूरत की वस्तुओं की उपलब्धता ना होना इत्यादि हैं. ये सभी समस्याए कृषि उत्पादन का काम करने और फसलों को मार्केट में बेचने वाले किसानों को बहुत बड़ा नुकसान पहूँचाती हैं. जिसके कारण बहुत से किसान आत्म-हत्या तक कर लेते हैं और प्रति वर्ष इन आत्म-हत्याओं की संख्या बढ़ना राज्य  के लिए एक खतरे का सूचक हैं. इसी कारण राज्य सरकार ने ये तय किया कि इन किसानों को आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई जाए जिससे की फसलों को कम दर पर बेचने के कारण हुए नुकसान की भरपाई की जा सके.

Update

22/05/2018

इस योजना के अंतर्गत कई किसान लाभ उठा चुके हैं एवं अगले तीन महीनों तक इस योजना का काम जारी रहेगा. भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर एमएसपी के लिए योजना की शुरुवात होने की बात बजट 2018-19 में कही गई हैं . इसके लिए मध्य प्रदेश की भावांतर योजना को आधार बनाया जा सकता हैं 

29/07/2018

भावान्तर योजना की दोबारा शुरुआत [खरीफ फसल]

 इस साल नवम्बर-दिसंबर में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले मध्यप्रदेश सरकार किसानों को शांत करने के लिए ‘भावान्तर भुगतान योजना’ को फिर से शुरू करेगी. मुख्यमंत्री ने 13 खरीफ फसलों के लिए इस योजना की मंजूरी दे दी हैं, जो राज्य या राज्य के बाहर समर्थन मूल्यों के नीचे बेची जा रहीं हैं. इस योजना के लिए पंजीकरण 28 जुलाई से 31 अगस्त तक होगा. सूत्रों का कहना है कि कुछ खरीफ फसलों को मध्यप्रदेश के अंदर और बाहर न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम पर बेचा जा रहा है, जिससे किसानों की आय कम हो रही है. किसानों को लगता है कि लगभग सभी खरीफ फसलों की बाजार कीमत एमएसपी से कम हैं, और इसलिए सरकार ने किसानों के सुधार के लिए यह कदम उठाया. इस योजना के तहत किसानों को एमएसपी और अपनी उपज को मंडी में बेचने वाली कीमत के बीच अंतर का मुआवजा दिया जायेगा. इस मूल्य की गणना मध्यप्रदेश में वस्तुओं की औसत कीमत और दो अन्य राज्यों जहाँ फसल उगाई जाती है के द्वारा की जाएगी.

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Ankita

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अंकिता दीपावली की डिजाईन, डेवलपमेंट और आर्टिकल के सर्च इंजन की विशेषग्य है| ये इस साईट की एडमिन है| इनको वेबसाइट ऑप्टिमाइज़ और कभी कभी आर्टिकल लिखना पसंद है|
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