जानिए मशहूर भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस के जीवन को | Nostradamus in hindi

एक मशहूर भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस के जीवन का संपूर्ण विवरण (भविष्यवाणी मोदी के लिए) (Nostradamus Biography Jivani in hindi, Bhavishyavani Predictions)

इतिहास में बहुत से ऐसे ज्ञानीयों को देखा गया जिन्होंने भविष्य में होने वाली सम्भावनाओं की भविष्यवाणी पहले से ही कर दी थी। बहुत से ज्ञानी ऐसे थे जिनकी भविष्यवाणी आज तक सच होती आई है उन्हीं में से एक फ्रांस में जन्मे नास्त्रेदमस भी हुए थे, जिन्होंने दुनिया में होने वाली कई सारी बातों को पहले से ही अपनी किताब में लिख दिया था। आज के समय में भी लोग भविष्यवाणी करते हैं परंतु वह कितनी सच होती है और कितनी झूठ इस बात का तो अंदाजा आपको होगा ही। लेकिन फिर भी अंधविश्वास के पीछे आज के समय में दुनिया बहुत ज्यादा भागती है इसलिए पंडित, गुरु ना जाने किन किन से अपने जीवन की भविष्यवाणी कराते फिरते हैं। परंतु आज हम इतिहास के एक ऐसे भविष्यवाणी करने वाले व्यक्ति की बात करने वाले हैं जिनके बारे में आपने पहले कभी नहीं सुना होगा।

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कौन थे नास्त्रेदमस?

नास्त्रेदमस फ्रांस के 16वी शताब्दी के दौरान एक मशहूर भविष्यवक्ता थे। भविष्यवक्ता होने के साथ-साथ वे एक जाने-माने डॉक्टर और बहुत ज्ञानी शिक्षक भी थे। यह ऐसे महान डॉक्टर थे जो प्लेग जैसी बीमारियों का भी इलाज कर दिया करते थे। यह एक ऐसे कवितज्ञ थे जो भविष्य में होने वाली घटनाओं का वर्णन पहले से ही अपनी कविताओं के जरिए कर दिया करते थे। आरंभ में उनके द्वारा की जाने वाली भविष्यवाणियों को गलत और बेकार बताया जाता था परंतु जब बीसवीं शताब्दी में उनकी भविष्यवाणियां आम लोगों के बीच सच होने लगी तब वे बहुत ज्यादा लोकप्रिय हो गए।

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आरंभिक जीवन

फ्रांस के एक छोटे से गांव सेंट रेमी में 24 दिसंबर 1503 में हुआ था। उनके बचपन में उन्हें मिशेल दी नास्त्रेदमस कहकर पुकारा जाता था।फ्रांस में एक छोटे से गांव जिसका नाम सेंट रेमी था वहां 24 दिसंबर 1503 में नास्त्रेदमस का जन्म हुआ था। उन्हें उनके बचपन में मिशेल दी नास्त्रेदमस के नाम से संबोधित किया जाता था। उनकी माता रेनियर डे सेंट रेमी और उनके पिता जामे दे नास्त्रेदमें मूल रूप से एक यहूदी परिवार से संबंध रखते थे। नास्त्रेदमस के पिता क्रिस क्रॉस में अनाज का व्यापार किया करते थे जिन्होंने 1459 और 60 के दशक के बीच  कैथोलिक धर्म में परिवर्तन  होकर  ईसाई धर्म धारण कर लिया था। वे बचपन से ही अध्ययन की ओर अग्रसर थे उन्होंने लैटिन, यूनानी, हिब्रू के साथ-साथ गणित, शरीर विज्ञान एवं ज्योतिष शास्त्र से जुड़े कई सारे विषयों में महारत हासिल कर रखी थी।

बचपन से ही वे भविष्यवाणी किया करते थे परंतु उनकी यह हरकतें उनके माता-पिता के लिए बहुत ज्यादा चिंता का विषय बन जाती थी क्योंकि उस समय में कट्टरपंथी इसाई लोग इस विद्या को उच्च दर्जे में नहीं मानते थे और भविष्यवाणी करने वाले लोगों से घृणा किया करते थे। उनके माता-पिता ने ज्योतिष विद्या से नास्त्रेदमस का ध्यान भटकाने के लिए उन्हें शिक्षा की ओर जाने के लिए अग्रसर किया और चिकित्सक की पढ़ाई के लिए उनको मांट पेलियर भेज दिया, जहां पर उन्होंने 3 वर्ष तक चिकित्सा की पढ़ाई की और एक जाने-माने चिकित्सक बन गए। 23 अक्टूबर 1529 के दिन उन्हें मांड पोलियर विश्वविद्यालय में ही एक शिक्षक के पदवी के साथ साथ डायरेक्टर का पद भी प्राप्त हुआ।

वैवाहिक जीवन

जल्द ही उनकी भविष्यवाणी के ज्ञान की ख्याति पूरे फ्रांस में फैल गई और शीघ्र ही वे पूरे फ्रांस में मशहूर हो गए। चिकित्सक बनने के बाद उन्होंने लोगों का इलाज भी आरंभ कर दिया और साथ ही शिक्षा प्रदान करने का काम भी बखूबी किया। अपनी पहली पत्नी के देहांत के बाद विरोध चले गए जहां पर उन्होंने 1547 में ऐन नामक महिला से दूसरा विवाह रचाया। उनकी दूसरी शादी के बाद भविष्यवक्ता के रूप में बहुत ज्यादा फेमस हो गए और उन्होंने अपनी एक अलग ख्याति प्राप्त कर ली।

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नास्त्रेदमस से जुड़े कुछ मशहूर किस्से

नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी से जुड़े कुछ मशहूर किस्से जो आज भी बहुत सुने और सुनाएं जाते हैं जिनमें से कुछ निम्नलिखित हैं:-

  • एक समय की बात है जब नास्त्रेदमस अपने एक परम मित्र के साथ सड़कों पर ऐसे ही टहल रहे थे जब उन्होंने भीड़ में से एक युवक को देखा और उनके पास जाकर दोनों हाथ जोड़कर उन्हें नमस्कार किया। नास्त्रेदमस के मित्र ने पूछा कि तुमने उस व्यक्ति को नमस्कार क्यों किया तो नास्त्रेदमस ने बताया कि आने वाले समय में वह एक बहुत मशहूर पोप का आसन ग्रहण करने वाला है। नास्त्रेदमस की यह बात सुनकर उसका मित्र असमंजस में पड़ गया और आश्चर्यचकित हो गया। वह व्यक्ति फेलिस पेरेती हाथ जो 1585 के दौरान पोप चुना गया।
  • नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी की चर्चा इतनी अधिक पूरे प्रांत मे फैल चुकी थी कि फ्रांस की महारानी कैथरीन ने भी अपने बच्चों का भविष्य जानने के लिए उन्हें अपने महल में निमंत्रण दिया। उनके बच्चों के भविष्य में अल्प आयु ही लिखी थी लेकिन इसका जिक्र वह आसान शब्दों में यदि रानी के सामने कर देते तो शायद उन्हें अच्छा नहीं लगता इसलिए उन्होंने कुछ छन्दों में अपनी उस भविष्यवाणी को व्यक्त किया। बाद में उनका यह कथन झूठा नही हुआ। और महारानी के दोनों बच्चों की मृत्यु अल्पायु में ही हो गई। उसके बाद से ही नास्त्रेदमस ने अपनी प्रत्येक भविष्यवाणी को छंदों की सहायता से व्यक्त करना ही जारी रखा।

एक मशहूर भविष्यवक्ता

उन्होंने चिकित्सक और शिक्षक के रूप को त्याग कर पूरी तरह से भविष्यवक्ता बनने पर अपना पूरा समय लगा दिया जिसके लिए उन्होंने अपने सारे पैसे छोड़कर अपना पूरा समय विद्या की साधना पर ही देना उचित समझा। 1550 से उन्होंने अपने भविष्य को निहित कर वार्षिक पंचांग भी निकालना शुरू कर दिया उसमें वह पूरे वर्ष की ग्रहों की स्थिति मौसम और फसलों से जुड़े सभी पूर्वानुमान पहले से ही लिख दिया करते थे। उनके द्वारा बताए गए प्रत्येक अनुमान सदैव सत्य साबित हुआ करते थे साथ ही वित्त जादू से जुड़ी किताबों में भी अपना बहुत ज्यादा समय दिया करते थे।

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उनकी मशहूर पुस्तकें

अपनी भविष्यवाणियों से जुड़ी पुस्तकें ग्रंथों के रूप में उन्होंने लिखनी आरंभ कर दी। उन्होंने  नाम से उनकी पहली भविष्यवाणी से संबंधित ग्रंथ सेंचुरी के नाम से पुस्तक का पहला भाग 1555 में लिखकर पूरा कर दिया। उन्होंने अपने उस भाग को सबसे पहले फ्रेंच में लिखा जिसे बाद में अंग्रेजी, जर्मन, इटालवी, रोमन और ग्रीक भाषाओं में भी छापा गया। यह पुस्तक प्रांत के लोगों को इतनी अधिक पसंद आई कि इसकी एक प्रतिलिपि बहुत महंगी होने के बाद भी सारी प्रतिलिपि तुरंत बिक गई। उनकी भविष्यवाणी की गाथा उन्होंने अपनी इस प्रथम किताब के कई छंदों के रूप में प्रथम विश्वयुद्ध, नेपोलियन, हिटलर और केनेडी आदि से जुड़ी घटनाओं के बारे में पहले ही व्याख्यान कर दिया था।

उनकी उस किताब में छंदों के अंदर तीसरे विश्वयुद्ध का पूर्वानुमान और दुनिया के विनाश के सभी संकेत पहले से ही लिख दिए गए थे। कुछ व्याख्याकारों का कहना था कि नास्त्रेदमस की किताब में कुछ भविष्यवाणियां गलत भी थी जिनका कोई आधार नहीं था परंतु कुछ भविष्यवाणियां सच हुई और बाकियों के सच होने का समय उस समय तक आया नहीं था।

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नास्त्रेदमस की कुछ अचूक भविष्यवाणियां

नास्त्रेदमस ने 20 और 21 वीं शताब्दी से जुड़ी कुछ भविष्यवाणियां भी की थी जो बाद में सत्य हुई कुछ भविष्यवाणियां निम्नलिखित हैं जिन्हें शायद आपने सत्य घटना के रूप में अपने जीवन में देखा भी होगा।

  • नास्त्रेदमस ने अपनी कविताओं के जरिए जर्मनी के तानाशाह हिटलर और अमेरिका के राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी की अकस्मात मृत्यु का जिक्र पहले से ही अपनी पुस्तक में कर दिया था जो संपूर्ण रूप से सत्य हुई घटना है। उन्होंने पहले ही अपनी भविष्यवाणी की किताब में छंदों के जरिए बता दिया था कि उनकी हत्या किस प्रकार और किस समय की जाएगी।
  • नास्त्रेदमस ने अपनी किताब में तीसरे विश्व युद्ध को लेकर यह वर्णन पहले ही कर दिया था कि यह युद्ध दो देशों नहीं बल्कि 2 दिशाओं के बीच में होगा जहां पर आसमान से तो गोले बरसते हुए नजर आएंगे और धरती पर बहुत ज्यादा अत्याचार बढ़ जाएगा जिसकी वजह से इस युद्ध के दौरान बहुत कम लोग ही जीवित रह पाएंगे।
  • भारत देश के लिए भी नास्त्रेदमस ने कई सारी भविष्यवाणियां की जिनमें से कुछ मुख्य, इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री बनने और उनकी हत्या के सत्यापन को सिद्ध करता है। इंदिरा गांधी से जुड़ी भविष्यवाणी में उन्होंने यह जिक्र किया था कि एक ऐसी स्त्री होगी जिसे सत्ता से हटाने के लिए भविष्य में उसकी हत्या कर दी जाएगी और उसके बाद भी वह सत्ता में लौटेगी परंतु उसकी 70 वर्ष की आयु के दौरान उसके विरोधी षड्यंत्र रच कर उसकी मृत्यु का कारण बनेंगे।
  • इसके अलावा उन्होंने अपनी पुस्तक में राजीव गांधी के सत्ता में आने से लेकर उनकी मृत्यु तक का बखान कर दिया था। उन्होंने अपने छंदों के जरिए बताया था की वायु चालक अपना काम छोड़-छाड़ कर सत्ता में प्रवेश करेगा प्रसिद्धि तो बहुत पाएगा लेकिन उसकी हत्या का कारण सिर्फ एक महिला बनेगी। इस बात का सत्यापन तो भारतवर्ष के लोग स्वयं ही कर सकते हैं।
  • भारत में हुई 1857 की क्रांति के बारे में भी नास्त्रेदमस ने पहले से ही जिक्र कर दिया था कि कुछ अजनबी आकर साम्राज्य को हथियाने की कोशिश करेंगे जिसके खिलाफ वहां के नागरिक स्वयं ही हथियार उठाएंगे।
  • नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बारे में भी नास्त्रेदमस ने अपनी कविताओं के जरिए उल्लेख किया था। उन्होंने बताया था कि वह व्यक्ति देश से दूर जाएगा परंतु एक पनडुब्बी में छुपकर और उसकी सहायता करने वाले अलग भाषा के लोग होंगे उनकी मदद से ही वह अपने लोगों को रास्ता दिखा पाएगा और साथ ही एक भयंकर युद्ध के दौरान हजारों लोग मौत के घाट उतार दिए जाएंगे।
  • नास्त्रेदमस ने भारत पर होने वाले विदेशी आक्रमण और नालंदा तथा तक्षशिला विद्यालयों पर होने वाले बेवजह अत्याचार के बारे में भी पहले से ही अपनी किताबों में वर्णन कर दिया था। अपनी कविताओं के जरिए उन्होंने बता दिया था कि शिक्षा के मंदिरों को तहस-नहस करके उन्हें पूरी तरह जला दिया जाएगा।
  • नास्त्रेदमस की एक भविष्यवाणी को वर्तमान समय में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जोड़कर देखा जाता है। इस भविष्यवाणी के लिए नास्त्रेदमस ने अपनी पुस्तक में पूर्वानुमान लगाते हुए लिखा था कि भविष्य में एक ऐसा महान व्यक्ति इस धरती पर अवतरण लेगा जो पूरी दुनिया के प्रशंसा का पात्र बनेगा। उसका जन्म तीन ओर से समुद्र से गिरे हुए स्थान पर होगा अर्थात भारत। साथ ही उन्होंने उसमें यह बताया कि वह गुरुवार को पवित्र दिन घोषित करते हुए उसका सार्वजनिक अवकाश घोषित करेंगे।
  • नास्त्रेदमस की एक और भविष्यवाणी को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ही जोड़कर लोगों द्वारा देखा जाता है जिसमें नास्त्रेदमस का कहना था कि एशिया में एक ऐसा महान शायरन अवतरित होगा जो एक विद्वान व्यक्ति के रूप में शांति दूत का काम करेगा। आरंभ में लोग उससे नफरत भी करेंगे और उसके खिलाफ हो जाएंगे परंतु धीरे-धीरे सब उसको पसंद करने लगेंगे और साथ ही उससे प्रेम भी करेंगे।
  • नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी की किताब में इस बात का जिक्र भी पहले से ही कर दिया गया था कि आने वाली 21वीं सदी के दौरान पूरा विश्व हिंदू धर्म की ओर उन्नति करेगा। हिंदू धर्म की मान्यता बहुत अधिक बढ़ जाएगी।
  • साल 2009 और 2013 के बीच हुई कई सारी क्रांतियों का जिक्र भी अपनी कविताओं के जरिए उन्होंने अपनी पुस्तक में किया।
  • यहां तक कि उन्होंने अपनी मृत्यु की भविष्यवाणी भी पहले से ही कर ली थी जिसके चलते उन्होंने 17 जून 1566 को अपनी वसीयत बनाकर तैयार कर दी थी। 1 जुलाई को उन्होंने पादरी को बुला लिया और अपने अंतिम संस्कार के सभी दिशानिर्देश उन्हें पहले से ही दे दिए। ठीक अगले ही दिन 2 जुलाई 1566 को उनकी मृत्यु हो गई।
  • अपनी मृत्यु के अलावा उन्होंने एक और भविष्यवाणी खुद से ही जुड़ी पहले ही कर दी थी जिसके अनुसार उन्होंने कहा कि मेरी मृत्यु के 225 साल बाद मेरी कब्र को कुछ समाज विरोधी तत्वों द्वारा खोदने और मेरे अवशेष निकालने का प्रयास किया जाएगा परंतु उनकी तुरंत ही मृत्यु हो जाएगी। उनकी भविष्यवाणी के अनुसार कुछ ऐसा ही हुआ फ्रांसीसी क्रांति के बाद 1791 के दौरान तीन व्यक्तियों ने उनकी कब्र को खोद के उनके अवशेष निकालने की कोशिश की और उस कोशिश तुरंत बाद ही उन तीनों व्यक्तियों की मृत्यु हो गई।

नास्त्रेदमस की किताब द सेंचुरीज में नास्त्रेदमस द्वारा लगभग 12 शताब्दियों का जिक्र किया गया था हर शताब्दी के लिए उन्होंने लगभग 100 छंद लिखें। लगभग 1200 उन्होंने अपनी किताब में लिखें जिनमें से अब तक 800 छंद से संबंधित सभी भविष्यवाणियां सही सिद्ध हो चुकी है। इस पुस्तक को सेंचुरीज नाम दिया गया जिसमें 3797 तक की भविष्यवाणियां सम्मिलित है। अब तक इस पुस्तक को कई भाषाओं में लिखा जा चुका है इसका हिंदी अनुवाद भी आपको बाजार में उपलब्ध मिल जाएगा।

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