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OBC बिल 2021 क्या है (OBC Bill full form) आरक्षण संशोधन

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हालही में आप न्यूज़ में OBC बिल के बारे में सुन रहे हैं, यह बिल ओबीसी सूची बनाने का अधिकार राज्य सरकार को देने को लेकर हैं. जिसे आज यानि 10 अगस्त को लोक सभा में पास करा दिया गया है. इसका फायदा सबसे ज्यादा राज्यों को मिलेगा. दरअसल साल 2018 तक ओबीसी आरक्षण पर केंद्र और राज्य सरकार दोनों के द्वारा ही OBC लिस्ट बनाई जाती थी, लेकिन 2018 में हुए विवाद के कारण और विरोधी दलों के दबाव के कारण यह बात सुप्रीम कोर्ट में चली गई थी। 5 मई 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर अपना फैसला सुनाया। परंतु कोर्ट के इस फैसले से केंद्र सरकार सहमत नहीं हुई. इसीलिए उन्होंने नया ओबीसी बिल बनाया है। यह बिल क्या है और इससे क्या – क्या बदलाव आएंगे, पूरी जानकारी आपको इस लेख में प्राप्त हो जाएगी।

OBC Bill kya hai in hindi

OBC बिल 2021

नामओबीसी आरक्षण बिल
बिल पासकेंद्रीय कैबिनेट के द्वारा
बिल पास सदनलोकसभा
बिल पास की तारीख4 अगस्त 2021
लाभराज्य सरकार को
ओबीसी सूची बनाने का
मिलेगा पूरा अधिकार  

OBC बिल क्या है

बीते महीने सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी आरक्षण लिस्ट बनाए जाने पर अपना जो फैसला सुनाया था वह 102 वे संशोधन को ध्यान में रखकर सुनाया गया था। इसलिए इस बिल में सबसे पहले संविधान के 102 वे कानून में संशोधन करने की बात स्पष्ट की गई है। इसमें यह कहा गया है कि जैसे ही बिल पास होगा वैसे ही राज्य सरकार को वापस एक बार फिर से ओबीसी ग्रुप लिस्टिंग करने का अधिकार प्राप्त हो जाएगा। यानि यह बिल 102 वे संविधान में संशोधन हैं जोकि राज्य सरकार को ओबीसी सूची तैयार करने का अधिकार प्रदान करेगा. इसे 127 वां संविधान संशोधन कह सकते हैं.

1993 से केंद्रीय सरकार और राज्य सरकार दोनों मिलकर ओबीसी लिस्ट बनाया करते थे, लेकिन 2018 में हुए संविधान में संशोधन के कारण यह कार्य सही से नहीं हो पा रहा था। इसीलिए केंद्रीय सरकार ने पुरानी व्यवस्था को एक बार फिर से लागू करने के लिए इस बिल को पास किया है, ताकि 2018 में संविधान में हुए बदलाव को फिर से एक बार ठीक किया जा सके। इस बिल को पास करने के पीछे सरकार का बस यही कहना है कि इसके बाद फिर से एक बार पुरानी व्यवस्था लागू हो जाएगी। इस बिल के अंतर्गत आर्टिकल 342A और 338B व 366 में भी बदलाव होंगे।

OBC बिल क्यों लाया जा रहा है  

इस बिल को इतनी जल्दी और इतनी गंभीरता से लाने के पीछे सरकार का बस यही कारण है कि वह सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनाए गए फैसले में सुधार ला सकें। दरअसल 5 मई 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी के लिस्टिंग और आरक्षण के विषय में एक ऑर्डर पास किया था। जिसके तहत अब राज्यों को उन लोगों को नौकरी और एडमिशन में आरक्षण देने का अधिकार नहीं होगा जो सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े हैं। अपनी बात की पुष्टि करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में मराठों को ओबीसी में शामिल कर आरक्षण देने पर भी रोक लगा दी थी। इस सुप्रीम कोर्ट द्वारा उठाए गए कदम का असर न सिर्फ राज्य सरकार पर बल्कि केंद्र सरकार पर भी पड़ा, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पास किए गए इस आर्डर से ना तो राज्य सरकार सहमत थी और ना ही केंद्रीय सरकार! सुप्रीम कोर्ट का यह ऑर्डर 102वें संविधान संशोधन और आर्टिकल 342A को ध्यान में रखकर जारी किया था। इन दोनों कानून के अंतर्गत नेशनल कमीशन फॉर बैकवर्ड क्लासेज की शक्तियों और जिम्मेदारियों को 102वें संविधान संशोधन में बताया गया है। इतना ही नहीं आर्टिकल 342A तो संसद को पिछड़ी जाति का लिस्ट बनाने यानी की ओबीसी की लिस्ट बनाने का अधिकार भी देता है।

चूंकि यह आर्डर सुप्रीम कोर्ट ने अपने अनुसार पास किया है इसमें केंद्रीय सरकार का कोई हाथ नहीं है, लेकिन विपक्ष पार्टी फिर भी केंद्र सरकार को ही आरोपी मान रही है और उन पर सिस्टम को बिगाड़ने का आरोप लगा रही है। इसलिए यह भी एक कारण माना जा रहा है कि केंद्रीय सरकार आरोप को मिटाने के लिए इस बिल को पास कर रही है।

OBC बिल से फायदे (Benefits)

इस बिल के पास होने से सबसे ज्यादा लाभ या यू कहे कि फायदे राज्य सरकार को प्राप्त होंगे। इस बिल के पास होने से निम्न फायदे होंगे –

  1. राज्य सरकार स्वतंत्र रूप से अपने राज्य के अनुसार अलग-अलग जातियों के आधार पर लोगों को ओबीसी कोटे में डाल पाएगा।
  2. इस बिल के पास हो जाने से पुराना कानून एक बार फिर से लागू कर दिया जाएगा जिसके अंतर्गत राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों को ही ओबीसी लिस्ट बनाने का अधिकार मिल जाएगा।
  3. इस बिल के बाद महाराष्ट्र में मराठा, हरियाणा में जाट, गुजरात में पटेल, राजस्थान में गुर्जर, कर्नाटक में लिंगायत आदि जातियों को OBC आरक्षण प्राप्त को सकेंगा।
  4. इस बिल के पास हो जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट आरक्षण पर किसी भी तरह का कोई हस्तक्षेप नहीं कर पाएगा।
  5. चूकी इस बिल के पास करने के लिए राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों को फायदा होगा इसलिए इस बिल का समर्थन विपक्षी दल भी कर रहे हैं.

OBC बिल के नुकसान (Side Effects)

वैसे तो इस बिल के जारी किए जाने के बाद किसी तरह की अतिशयोक्ति नहीं दिखाई जा रही है लेकिन कुछ विपक्ष पार्टी और सुप्रीम कोर्ट को अभी इससे परेशानी हो सकती है। क्योंकि राज्य सरकार को इस बिल से फायदा हो रहा है इसलिए वे इस बारे में अपना कोई भी मत नहीं रख रहे हैं।

OBC बिल पास होने पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

बिल पास होने पर सुप्रीम कोर्ट का अब तक कोई फैसला नहीं आया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपना अंतिम फैसला 5 मई 2021 में केंद्र की याचिका को खारिज कर दिया था फिर राज्य सरकार से ओबीसी लिस्ट बनाने का अधिकार चुनकर संसद को दे दिया था।

OBC बिल का Current Status

सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनाए गए फैसले पर अपनी ना मंजूरी जताते हुए 4 अगस्त को केंद्रीय कैबिनेट ने एक संविधान संशोधन बिल बनाया जिसे 9 अगस्त को लोकसभा में पेशा किया था. और उसे 10 अगस्त को बहुमत के साथ लोकसभा में पारित कर दिया गया है। जल्द ही इसे राज्यसभा एवं राष्ट्रपति द्वारा की पारित करा कर कानून बना दिया जायेगा.

अतः इस तरह से इस बिल के अंतर्गत केंद्रीय सरकार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपनी-अपनी ओबीसी लिस्ट बनाने की शक्ति वापस दे रही है, जो उनके पास 2018 में हुए संविधान में बदलाव से पहले थी।

FAQ

Q : OBC बिल 2021 क्या है ?

Ans : राज्य सरकारों को अपने राज्य की ओबीसी सूची तैयार करने का अधिकार देना.

Q : OBC बिल में संविधान के किस कानून में सुधार किया गया है ?

Ans : इस बिल के पास होने से संविधान 102 वे कानून में सुधार किया गया है।

Q : OBC बिल को किसने पास किया है ?

Ans : इस बिल को केंद्रीय सरकार ने पास किया है।

Q : ओबीसी बिल में संविधान के किन आर्टिकल्स पर संशोधन किया जा रहा है ?

Ans : इस बिल के पास हो जाने से संविधान के 342A, 338B और 366 आर्टिकल पर संशोधन किया जाएगा।

Q : संसद में कितने ओबीसी सांसद हैं ?

Ans : लगभग 39 %

Q : ओबीसी को कितना आरक्षण प्रदान किया गया है ?

Ans : 50%

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