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पुरुषोत्तपट्टनम लिफ्ट सिंचाई योजना | Purushothapatnam Lift Irrigation Scheme in hindi

पुरुषोत्तपट्टनम लिफ्ट सिंचाई योजना Purushothapatnam Lift Irrigation Scheme Andhra Pradesh in hindi

सूखे और पानी की कमी से वर्षों से जूझ रहे आन्ध्र प्रदेश में पानी से भरपूर गोदावरी नदी के जल का समुचित दोहन करने के लिए राज्य और केंद्र सरकार ने कई सिंचाई योजनाओं को शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है. इसी क्रम में बीते 5 जनवरी सन 2017 को आन्ध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चन्द्रबाबू नायडू ने पुरुषोत्तपट्टनम लिफ्ट सिंचाई योजना (PLIS) की शुरुआत की. यह एक छोटी सिंचाई परियोजना है परन्तु इस परियोजना का दायरा विस्तृत रखा गया है. इस परियोजना के द्वारा 23.44 टीएमसी फीट पानी को गोदावरी नदी से निकालकर 20,000 एकड़ जमीन को सिंचित करने और पीने के पानी को उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है. इसके लिए गोदावरी नदी के बायें तट पर 40.80 किलोमीटर की दूरी पर 10 पंप सेट लगाए जाएंगे और पानी को पोलावरम तटबंध से येलेरू और विशाखापत्तनम के जलाशयों में पहुंचाया जाएगा. इस संबंध में गौरतलब है कि येलेरू के जलाशय वर्षों से सूखे की चपेट में हैं और क्षेत्र के खेतों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है. माना जा रहा है कि इस परियोजना से सूखे की समस्या से निपटने में काफी हद तक सफलता मिल सकती है.

गौरतलब है कि आन्ध्र प्रदेश में एक बहु-उद्देशीय सिंचाई परियोजना पर काम चल रहा है जिसका नाम ‘पोलावरम परियोजना’ है. अपनी तरह की दुनिया की यह सबसे बड़ी सिचाईं परियोजना है. परन्तु निर्माणाधीन इस बहुप्रतिक्षित और महत्वाकांक्षी परियोजना को पूरा होने में अभी लगभग 8 वर्ष और लगने की संभावना है. इसलिए आन्ध्र प्रदेश सरकार ने इस परियोजना के साथ ही अन्य कई छोटी सिचाईं योजनाओं को शुरू करने की दिशा में कदम बढाए हैं. उन्हीं छोटी योजनाओं में से पुरुषोत्तपट्टनम लिफ्ट सिंचाई योजना (PLIS) एक परियोजना है.

Purushothapatnam Lift Irrigation Scheme

पुरुषोत्तपट्टनम लिफ्ट सिंचाई योजना की मुख्य विशेषताएं (Key Features of Purushothapatnam Lift Irrigation Scheme)

  • परियोजना के शुरू होने से लगभग 20,000 एकड़ खेती योग्य जमीन को समुचित सिचाईं सुविधा प्राप्त हो सकेगी.
  • परियोजना से आन्ध्र प्रदेश के तीन जिलों को लाभ पहुंचेगा. उम्मीद यह भी की जा रही है कि परियोजना से लाभान्वित होने वाले क्षेत्र का दायरा बढ़कर 67,000 एकड़ भी हो सकता है.
  • परियोजना को 9 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
  • परियोजना पर कुल अनुमानित लागत 1,638 करोड़ रुपये आँका गया है.
  • परियोजना को दो चरणों में पूरा किया जाएगा. पहले चरण में चार पम्पों का निर्माण किया जाएगा जिसमें से दो पंप पट्टीसीमा में होंगे और इससे लगभग 3,500 क्यूसेक पानी गोदावरी नदी से निकाला जा सकेगा.
  • परियोजना के अंतर्गत 80 किलोमीटर की दूरी पर 10 पंप सेट लगाए जाएंगे. प्रत्येक पंप से 350 क्यूसेक पानी को गोदावरी नदी से निकालकर निर्धारित नहरों और जलाशयों में पहुंचाया जाएगा.

पुरुषोत्तपट्टनम लिफ्ट सिंचाई योजना से लाभान्वित होने वाले क्षेत्र (Areas which may benefited from PLIS)

इस परियोजना से सबसे अधिक पूर्वी गोदावरी के इलाके और विशाखापत्तनम जिला के क्षेत्र को लाभ पहुंचेगा. गौरतलब है कि इस इलाके में उपजाऊ भूमि के अलावा विशाखापत्तनम में उद्योगों का भी जाल बिछा हुआ है. विशाल ‘विजाग स्टील प्लांट’ (Vizag Steel Plant) यहीं उपस्थित है. पानी की कमी के कारण एक तरफ जहाँ यहां के उद्योग अपनी क्षमता से कम उत्पादन करने के लिए मजबूर थे वहीँ गर्मी के मौसम में विशाखापत्तनम शहर में पानी की आपूर्ति (Supply) पर भी असर पड़ता था. परन्तु अब इस परियोजना के द्वारा विशाखापत्तनम शहर को 23 टीएमसी फीट पानी की आपूर्ति का लक्ष्य रखा गया है. इससे शहर की रोजाना 85 लाख गैलन पानी की मांग को पूरा करने में सफलता मिलने की उम्मीद की गई है. इसके साथ ही पानी की कमी से जूझ रहे येलेरू के जलाशयों में भी पानी भरपूर मात्रा में पहुंचाया जा सकेगा. शहर और उद्योगों को पानी की पर्याप्त आपूर्ति के अलावा इस परियोजना से क्षेत्र के किसानों को भी खेतों की सिचाईं के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सकेगा.

आन्ध्र प्रदेश में सिचाईं योजनाओं का इतिहास (History of Irrigation Projects in A.P.)

सूखे की समस्या से जूझ रहे राज्य आन्ध्र प्रदेश में सिंचाई योजनाओं पर मंथन का इतिहास काफी पुराना है. पुरुषोत्तपट्टनम लिफ्ट सिंचाई योजना (PLIS) इसी मंथन का एक छोटा सा हिस्सा है. इससे पूर्व राज्य में दुनिया की सबसे बड़ी सिचाईं परियोजना की शुरुआत हो चुकी है जिसका नाम ‘पोलावरम परियोजना’ (Polavaram Project) है. यह एक बहु-उद्देशीय सिंचाई परियोजना है. इस परियोजना को केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिया गया है. परियोजना के अंतर्गत आन्ध्र प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी गोदावरी जिले के बीच गोदावरी नदी पर एक विशाल बाँध का निर्माण किया जा रहा है. इस परियोजना के पूरा हो जाने पर न केवल आन्ध्र प्रदेश को बल्कि कर्नाटक, तमिलनाडु, उड़ीसा और छत्तीसगढ़ को भी लाभ होगा.

इस संबंध में यहाँ उल्लेखनीय है कि देश में सूखे की समस्या से निपटने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल में जल संसाधन मंत्रालय (Ministry of Water Resources) ने देश की नदियों को जोड़ने की एक महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत की थी. इस योजना का उद्देश्य जल से भरपूर नदियों के पानी को कम पानी वाली नदियों में पहुँचाने का है. गौरतलब है कि हिमालय पहाड़ से निकली नदियों में सालों भर पानी का तेज बहाव बना रहता है जबकि देश के दक्षिणी भाग की नदियों में केवल बरसात के मौसम में पानी की उपलब्धता रहती है. बरसात के मौसम में हिमालय से निकली उत्तर भारत की नदियों में बाढ़ से एक तरफ जहाँ जान-माल का नुकसान होता है वहीँ भारी मात्रा में पानी की बर्बादी भी होती है. इसलिए नदियों के पानी के समुचित उपयोग और सालों भर देश की लगभग सभी नदियों में पानी की उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार ने नदियों को जोड़ने की महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत की थी. योजना के तहत कुल 14,900 किलोमीटर लंबे 30 नदियों को जोड़कर नदियों का एक समग्र जाल (Combined Network) बनाना था. ‘पोलावरम परियोजना’ भी इसी नेटवर्क का एक हिस्सा है. इस योजना के तहत पानी से भरपूर गोदावरी नदी के पानी को सूखे से जूझ रहे कृष्णा नदी तक पहुँचाना था. वर्ष 2008 के आंकड़ों के अनुसार गोदावरी नदी का लगभग 644 टीएमसी फीट पानी बिना किसी उपयोग के बंगाल की खाड़ी में समुद्र में बह जाया करता था. इसको मद्देनज़र रखते हुए जब इस पानी के उपयोग के विकल्प का अध्ययन किया गया तो स्पष्ट हुआ कि अगर गोदावरी नदी के इस अतिरिक्त पानी को कृष्णा नदी में बहाया जाता है तो इस इलाके की वर्ष 2025 तक की पानी की जरूरत को पूरा किया जा सकता है.

हालाँकि गोदावरी नदी में बहने वाले अतिरिक्त पानी के समुचित उपयोग पर किया जाने वाला चिंतन कोई वर्तमान का विषय नहीं है. आज़ादी से पूर्व जब यह पूरा इलाका मद्रास प्रेसीडेंसी के अंतर्गत आता था तब वर्ष 1941 में इस संबंध में एक परियोजना का प्रस्ताव तत्कालीन सरकार के पास आया था. उस समय मद्रास प्रेसीडेंसी के सिचाईं विभाग के मुख्य अभियंता (Chief Engineer) दीवान बहादुर एल. वेंकटकृष्णा अय्यर ने इस इलाके का सर्वे कर पोलावरम नामक स्थान पर एक जलाशय (Reservoir) के निर्माण का प्रस्ताव दिया था. अय्यर के इस प्रस्ताव में न केवल गोदावरी इलाके के 3,50,000 एकड़ खेती योग्य जमीन को सिंचित करने की रुपरेखा खिंची गई थी बल्कि इसके तहत एक 40 मेगावाट की पनबिजली प्लांट को भी स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया था.  उस समय प्रस्तावित योजना का नाम ‘रामपदा सागर परियोजना’ रखा गया था. हालाँकि उस समय यह योजना धरातल पर तो नहीं उतर सकी परन्तु बाद के वर्षों में ऐसी योजनाओं पर मंथन चलता रहा. अंततः वर्ष 1980 में आन्ध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री टी अंजैया द्वारा एक वृहद् सिंचाई योजना की आधारशिला रखी गई जिसका नाम ‘पोलावरम परियोजना’ रखा गया. परन्तु वर्ष 2004 तक इस परियोजना पर कोई विशेष प्रगति नहीं हुई. आगे जाकर वर्ष 2005 में केंद्र सरकार द्वारा इस परियोजना को मंजूरी दी गई और फिर वर्ष 2008 में पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी के साथ परियोजना के रास्ते में आने वाली सभी बाधाओं को दूर कर दिया गया. वर्ष 2013 में ‘पोलावरम परियोजना’ को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा प्रदान किया गया.

आन्ध्र प्रदेश की अन्य सिचाईं परियोजनाएं (Other Irrigation Project of A.P.)

यहां उल्लेखनीय है कि आन्ध्र प्रदेश में 40 छोटे-बड़े नदियों का जाल फैला हुआ है. अधिकांश इलाकों में जमीन के समतल न होने की वजह से इन नदियों के पानी का समुचित उपयोग नहीं हो पाता है और इन नदियों के पानी का अधिकांश हिस्सा समुद्र में बह जाता है. राज्य के लिए यह एक बहुत बड़ी विडंबना है कि नदियों के एक बड़े नेटवर्क का होने के वाबजूद राज्य को सूखे का सामना करना पड़ता है. हालाँकि आज़ादी के बाद से राज्य में सूखे की समस्या से निपटने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं और इसमें सबसे बड़ा कदम रहा है बांधों और नहरों का निर्माण. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार आन्ध्र प्रदेश में अभी तक लगभग 50 बाँध, नहर और जलाशयों का निर्माण किया जा चुका है और इतनी ही संख्या में कई निर्माणाधीन भी हैं. इनमें से कुछ प्रमुख हैं –

  • नागार्जुन सागर डैम
  • तेलुगु गंगा परियोजना
  • ब्रह्मम सागर परियोजना
  • नारायणन पुरम परियोजना
  • कल्याणी डैम, तिरुपति
  • प्रकाशम बैराज
  • पट्टीसीमा लिफ्ट सिचाईं परियोजना
  • अन्नाम्या (चेयरू) सिचाईं परियोजना
  • लंकासागर सिचाईं परियोजना
  • पुष्करम लिफ्ट सिचाईं परियोजना

बहरहाल कहा जा सकता है कि आन्ध्र प्रदेश सरकार राज्य में सूखे की समस्या से निजात पाने के लिए जिस प्रकार से भागीरथ प्रयास कर रही है और विभिन्न परियोजनाओं को आगे बढ़ा रही है उससे जल्दी ही राज्य में पानी का प्रबंधन सुचारू तरीके से होने की संभावना है. नदियों में बहने वाले अतिरिक्त पानी के उचित प्रबंधन से न केवल खेत लहलहाएंगे बल्कि उद्योगों की पानी की मांग को पूरा करने के साथ पीने के पानी की समस्या से भी छुटकारा मिल सकेगा.

Update –

5/9/2018

पुरुषोत्तपट्टनम लिफ्ट सिंचाई योजना का दूसरा चरण माननीय मुख्यमंत्री जी ने मल्लावरम गांव से सितम्बर से शुरू कर दिया है.

अन्य योजना –

Ankita

अंकिता दीपावली की डिजाईन, डेवलपमेंट और आर्टिकल के सर्च इंजन की विशेषग्य है| ये इस साईट की एडमिन है| इनको वेबसाइट ऑप्टिमाइज़ और कभी कभी आर्टिकल लिखना पसंद है|
Ankita

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