क्वारंटाइन का क्या मतलब है, घर पर खुद को क्वारंटाइन कैसे करें | How to quarantine yourself at home in hindi

कोरोना वायरस से संबंधी शब्द क्वारंटाइन का क्या मतलब है, घर पर खुद को क्वारंटाइन कैसे करें [How to quarantine yourself at home in hindi] (अर्थ, संगरोध, छूतरोग से पीड़ित व्यक्तियों को अलग रखने का प्रबंध, Meaning)

कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते लोगों को उनके घर में ही लॉक कर दिया जा रहा है. आज के समय में इस संक्रमण ने भारत के 562 लोगों को अब तक ग्रसित कर लिया है. ऐसे में भारत के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने पूरे भारत को पूरी तरह से 21 दिन के लिए लॉक डाउन कर दिया है. क्योंकि कोरोना वायरस को पूरी तरह से खत्म करने का और एक ही तरीका है और वह है एक दूसरे को खुद से दूर रखने का. बस यही कारण है जो प्रधानमंत्री जी ने 21 दिन का लॉक डाउन कर दिया है. ऐसे में कुछ लोगों को संदिग्ध होने पर उनके घर में नहीं रहने की सलाह दी जाती है जिसे क्वॉरेंटाइन कहा जाता है. पर क्वॉरेंटाइन होता क्या है आइए इसके बारे में विस्तार पूर्वक चर्चा करते हैं…

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क्वॉरेंटाइन क्या होता है?

भारत के बहुत से लोग विदेशों में जाते हैं पढ़ाई के लिए तो कुछ नौकरी के लिए. ऐसे में जब से कोरोनावायरस में अपना कहर पूरी दुनिया में बरसाना आरंभ किया है, उसके बाद से ही सभी भारतवासी तुरंत भारत लौटने के लिए निकल पड़े. और भारत में कोरोनावायरस का प्रवेश उन भारतीय लोगों के द्वारा ही हुआ है. आरंभ में तो इस बात पर ध्यान नहीं दिया लेकिन जैसे ही सरकार धीरे-धीरे सतर्क होती गई उन्होंने देश की सुरक्षा के लिए विदेश से आने वाले लोगों को उनके घर में ही रहने की सलाह दी जिसे क्वॉरेंटाइन कहा जाता है. ऐसे में वे लोग अपने घर पर ही रहते हैं और उनके परिवार के सदस्यों को भी उनसे अलग रहने की सलाह दी जाती है क्योंकि वह विदेश से आए हैं और यह संक्रमण भी विदेश से ही आया है. ऐसी परिस्थिति में उस व्यक्ति के परिवार वालों को सतर्क रहने की आवश्यकता होती है और साथ ही उनके पास पड़ोस वाले लोगों को सतर्क करने के लिए उनके घर के बाहर क्वॉरेंटाइन का टेंपलेट लगा दिया जाता है.

ऐसे में उस व्यक्ति के काम पर कोई असर नहीं पड़ता है वह घर बैठकर काम भी कर सकता है और यदि वह काम करने की परिस्थिति में नहीं है तब भी उसे उसकी कंपनी द्वारा उसकी मासिक सैलरी प्रदान की जाएगी. यदि संक्षेप में बात करें तो क्वॉरेंटाइन का सही अर्थ एक संदिग्ध और संक्रमित व्यक्ति को एक स्वस्थ मनुष्य से 6 फीट की दूरी पर रखना आवश्यक होता है.

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कैसे करें घर पर खुद को क्वॉरेंटाइन

यह महामारी जिस तेजी से फैल रही है ऐसे में देश की चिकित्सक सुविधा भी कम पड़ गई है. यदि आपको लगता है कि आपको कोरोना वायरस से जुड़े लक्षण का आभास हो रहा है तो आप खुद ही खुद को घर में क्वॉरेंटाइन कर सकते हैं. आइए जानते हैं संदिग्ध स्थिति में आप खुद को कैसे क्वॉरेंटाइन कर सकते हैं:-

  • सबसे पहले आप एक ऐसे कमरे का चुनाव करें जो हवादार हो और साथ ही उसमें शौच आदि की सुविधा भी उपलब्ध हो.
  • यदि घर में एक से ज्यादा व्यक्ति संदिग्ध स्थिति में पाए जाते हैं तो ऐसे में आप दोनों ही एक कमरे में रह सकते हैं लेकिन आप दोनों के बीच में कम से कम 1 मीटर से ज्यादा की दूरी होनी आवश्यक है.
  • यदि आपको कोरोना वायरस के लक्षण स्वयं अपने आप में दिखाई पड़ते हैं तो कोशिश करें कि अपने घर में मौजूद बच्चे, बुजुर्ग और गर्भवती महिला से काफी हद तक दूर रहे.
  • कोरोणा संक्रमण का छोटा सा भी शक यदि आपको खुद में महसूस होता है तो अपने आसपास होने वाले किसी भी प्रकार के सार्वजनिक समारोह जैसे शादी या पार्टी में बिल्कुल भी सम्मिलित ना हो.
  • लगभग 14 दिनों तक खुद को क्वॉरेंटाइन करके रखें और ना ही किसी से मिले.
  • लगातार साबुन या सैनिटाइजर से हाथ धोते रहें और कोशिश करें अल्कोहल वाले हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
  • जो वस्तुएं आपके खान-पान और देखरेख में इस्तेमाल की जा रही हैं ध्यान रखें उन्हें प्रतिदिन साफ तरीके से उनको धोये और उन वस्तुओं को किसी और को इस्तेमाल ना करने दें.
  • सार्वजनिक (जो सबके द्वारा इस्तेमाल की जाती हो) वस्तुओं से दूर रहें और उनको बिल्कुल भी ना छुए.
  • सर्जिकल मास्क निरंतर लगाकर रखें और प्रत्येक 6 से 8 घंटे के बाद बदलते रहें और इस्तेमाल किए गए मास्क को अच्छी तरह से नष्ट कर दें.

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कौन कर सकता है खुद को होम क्वॉरेंटाइन?

यदि बात करें उन व्यक्तियों की जिन्हें खुद को होम क्वॉरेंटाइन करना चाहिए, उनमें निम्नलिखित लक्षण नजर आते ही उन्हें खुद को क्वॉरेंटाइन करने की सलाह दे देनी चाहिए.

  • सर्दी-खांसी, जुकाम या बुखार
  • शरीर में अकड़न
  • दस्त लगना या उल्टी जैसा अहसास होना
  • चक्कर आना या कमजोरी महसूस करना
  • सांस लेने में तकलीफ

आइसोलेशन और क्वॉरेंटाइन में क्या अंतर होता है?

आइसोलेशन उस व्यक्ति को किया जाता है जो कोरोना वायरस संक्रमित हो जाता है और उसके संक्रमण होने की पुष्टि डॉक्टर द्वारा कर ली जाती है. आइसोलेशन के दौरान उन्हें पूरी तरह की सुविधा दी जाती है उनका ख्याल रखा जाता है और साथ ही उन्हें सभी प्रकार की दवाइयां देकर स्वस्थ करने की प्रक्रिया 14 दिन तक अपनाई जाती है. आइसोलेशन वार्ड घर से दूर किसी एकांत स्थान पर होते हैं.

क्वॉरेंटाइन उन व्यक्तियों को किया जाता है जो किसी प्रकार की विदेश यात्रा करके आए हो या किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आये हो. क्वॉरेंटाइन के दौरान संदिग्ध व्यक्ति को भी 14 दिन तक देखभाल में रखा जाता है और साथ ही उसे भी आवश्यक उपचार व दवाइयां डॉक्टर की सलाह से दी जाती हैं. क्वॉरेंटाइन होने के लिए कोई व्यक्ति अपने घर का एक कमरे का चुनाव भी कर सकता है ताकि वह स्वस्थ लोगों से दूर रह सके.

आपको एक छोटी सी शंका हो और यदि सही समय पर उसका इलाज नहीं किया जाए तो वह आपके परिवार और आपके आस-पड़ोस के लिए बहुत ज्यादा नुकसानदायक साबित हो सकता है. ऐसे में तुरंत छोटी सी परेशानी के दौरान ही या तो खुद को डॉक्टर को दिखाएं या फिर खुद को घर में ही क्वॉरेंटाइन कर ले. प्रधानमंत्री मोदी जी के कहे का पालन करते हुए अपने घर के अंदर ही रहे ताकि सोशल डिस्टेंसिंग के जरिए कोरोनावायरस जैसी भयंकर लड़ाई पर हम जीत हासिल कर ले.

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Karnika

कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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