Oops! It appears that you have disabled your Javascript. In order for you to see this page as it is meant to appear, we ask that you please re-enable your Javascript!
ताज़ा खबर

रेल बजट 2017-18 की मुख्य बातें | Rail budget 2017 highlights in hindi

Rail budget 2017 in hindi यूँ तो भारतीय संसद में रेल बजट हर साल पेश किया जाता रहा है और इस वर्ष भी 1 फरवरी को संसद में भारतीय रेल का लेखा-जोखा भविष्य की योजना के साथ पेश किया गया. परन्तु इस बार रेलवे बजट पेश करने का अंदाज अलग रहा और साथ ही रेल बजट का स्वतंत्र अस्तित्व इतिहास के पन्नों का हिस्सा बन गया. रेल बजट यूँ ही इतिहास नहीं बना है. इसके स्वतंत्र अस्तित्व पर पिछले कई वर्षों से सवाल उठते रहे हैं. परन्तु इसके इतिहास बनने की कवायद तब शुरू हुई, जब वर्तमान नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा गठित नीति आयोग के सदस्य विवेक देबराय और किशोर देसाई की एक कमेटी ने रेल बजट को समाप्त करने की पिछले साल सिफारिश की थी. इस सिफारिश के बाद राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने रेल बजट को केंद्रीय आम बजट में विलय के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल की सिफारिश को मंजूरी दे दी थी. राष्ट्रपति की इसी मंजूरी के साथ रेल बजट का स्वतंत्र अस्तित्व समाप्त हो गया था. अब जब 1 फरवरी 2017 को वर्ष 2017-18 के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संसद में आम बजट पेश किया तो इसी बजट के एक अंग के रूप में रेल बजट का एक नया अवतार हमारे सामने आया है.

rail-budget-2017_1485939746

रेल बजट 2017-18 की मुख्य बातें

Rail budget 2017 in hindi

अगर समग्र तौर पर देखा जाए तो वर्ष 2017-18 के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जो बजट पेश किया है उसमें बुनियादी ढ़ांचे (Infrastructure) पर विशेष जोर दिया गया है और इस बुनियादी ढ़ांचे के  केंद्र में परिवहन व्यवस्था मुख्य है. ऐसे में परिवहन का मुख्य साधन रेलवे की भूमिका का महत्वपूर्ण होना लाजिमी है. बजट में रेलवे को कितना अधिक महत्व दिया गया है वह इस क्षेत्र को आवंटित भारी-भरकम धनराशि से ही समझा जा सकता है. बजट में कुल 1 लाख 31 हजार करोड़ रुपये रेलवे के मद में खर्च करने का प्रावधान किया गया है. ये खर्चे मुख्यतौर पर यात्री सुरक्षा, पूंजीगत व विकास कार्य, वित्त व लेखा सुधर तथा स्वच्छता पर होंगे.

इस वर्ष का रेल बजट पूर्व में पेश किए जाते रहे रेल बजट की खूबियों के एकदम विपरीत रहा है. पहले केवल यात्री किराए में बढ़ोतरी या फिर राहत और नए ट्रेनों की घोषणा ही रेल बजट का मुख्य आकर्षण हुआ करता था. परन्तु इस बार बजट में न तो किराए पर कोई चर्चा हुई और न ही कोई नए ट्रेन की सौगात का ऐलान हुआ. इस रेल बजट से मोटे तौर पर सरकार के दो लक्ष्य स्पष्ट होते हैं और वे हैं- सुरक्षा और आधुनिकीकरण. अब हम विस्तार से रेल बजट की मुख्य बातों को समझने का प्रयास करते है.

बजट का आवंटन (Budget Allocation)

बजट में कुल 1 लाख 31 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान रेलवे के लिए किया गया है. इसमें से 55 हजार करोड़ रुपये रेलवे को सरकारी अनुदान से मिलेंगे और बाकी की व्यवस्था अन्य स्त्रोतों से की जाएगी. इस वर्ष सरकार से मिलने वाला अनुदान पिछले साल मिले अनुदान से लगभग 9 हजार करोड़ रुपये अधिक है. हालाँकि इस बात का स्पष्ट खुलासा अभी नहीं हो सका है कि रेलवे के किस-किस प्रोजेक्ट के लिए कितनी-कितनी धनराशि का प्रावधान किया गया है. यहां उल्लेखनीय है कि रेल बजट का स्वतंत्र अस्तित्व खत्म होने से अब इसके बजटीय प्रावधान भी अन्य विभागों की तरह संसद में ‘डिमांड ऑफ ग्रांट’ पेश होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे.

भारी-भरकम सेफ्टी फंड (Safety Fund)

वर्ष 2017-18 के लिए पेश किए गए बजट में सबसे अधिक 1 लाख करोड़ रुपये रेलवे के लिए बनाए गए सेफ्टी फंड के लिए दिए गए हैं. इस फंड में से हर वर्ष 20 हजार करोड़ रुपये रेलवे द्वारा सुरक्षा उपायों पर खर्च किए जाएंगे. इनमें 15 हजार करोड़ रुपये सेफ्टी फंड से होंगे जबकि बाकी 5 हजार करोड़ रुपये रेलवे खुद अपने फंड से खर्च करेगी. इस फंड का उपयोग सभी रेल फाटकों पर फुट ओवरब्रिज का निर्माण तथा रेल डब्बों के आधुनिकीकरण पर किया जाएगा. गौरतलब है कि अभी तक रेल डिब्बों को जोड़ने में जिस तकनीक का उपयोग किया जा रहा है वह सुरक्षा के लिहाज से नाकाफी है. इसमें डब्बों की कप्लिंग की मुख्य भूमिका होती है. मौजूदा आईसीएफ डब्बों की कप्लिंग की वजह से ही हादसा होने पर डब्बे एक दूसरे पर चढ़ जाते हैं और जान-माल की व्यापक हानि होती है. हालाँकि रेलवे अब आईसीएफ डब्बे के बदले आधुनिक सुरक्षा से लैश एलएचबी डब्बे लाने की तैयारी में जुटा हुआ है परन्तु अभी इस कवायद में लंबा वक्त लगेगा. इसलिए रेलवे तात्कालिक तौर पर रेल डब्बे की कप्लिंग तकनीक को बदलकर सुरक्षा को चुस्त-दुरुस्त करना चाहता है.

आधुनिकीकरण (Modernisation)

वर्तमान बजट में किए गए प्रावधानों के अंतर्गत रेलवे के आधुनिकीकरण का विस्तार किया जाएगा. गौरतलब है कि रेलवे के आधुनिकीकरण के कई प्रोजेक्ट पहले से ही चल रहे हैं. इनमें रेलवे स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं से लैश करना महत्वपूर्ण है. आने वाले वित्त वर्ष में 25 रेलवे स्टेशनों के कायाकल्प का लक्ष्य रखा गया है. स्टेशनों के कायाकल्प की सूची में दिव्यांगों की परेशानियों को ध्यान में रखते हुए लिफ्ट और एस्केलेटर की व्यवस्था को खासतौर पर केंद्र में रखा गया है. हालाँकि कई स्टेशनों पर इस सुविधा की शुरुआत हो चुकी है परन्तु इसका दायरा बढ़ाने के लिए बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं. इसके अलावा स्टेशनों सौंदर्यीकरण, खान-पान की उत्तम व्यवस्था, साफ़-सफाई आदि भी रेलवे बजट के प्रावधानों में शामिल किए गए हैं.

ट्रेन में अब होंगे ‘कोच मित्र’ (Deployment of ‘Coach Mitra”)

रेल बजट में किए गए प्रावधानों के अंतर्गत अगले वित्त वर्ष में रेलवे द्वारा शुरू की जानेवाली योजनाओं में ‘कोच मित्र’ सेवा सबसे खास है. इसके अंतर्गत ट्रेन में सफ़र के दौरान यात्रीयों की सभी समस्याओं को सुलझाने के लिए एक अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी. इन समस्याओं में ट्रेन टिकट से लेकर ट्रेन में सफाई तक के जैसे मुद्दे शामिल होंगे. अगर यात्रा के दौरान किसी यात्री को किसी प्रकार की असुविधा होती है तो वह तत्काल ट्रेन में मौजूद ‘कोच मित्र’ से संपर्क कर समस्या का समाधान करने के लिए कह सकता है. साथ ही ‘माई कोच सर्विस’ नामक सेवा के माध्यम से यात्री चलती ट्रेन में एसएमएस के माध्यम से सफाई की मांग भी कर सकते हैं. हालाँकि यह सुविधा ट्रेन में पिछले वर्ष से ही मौजूद हैं परन्तु आगे इस सेवा को और कारगर बनाने पर जोर दिया गया है.

नई रेलवे लाइन का विकास (Development of New Railway Lines)

रेलवे बजट में नई रेलगाड़ी चलाने के बदले रेलवे लाइन के समुचित विकास और उसका दायरा बढ़ाने का प्रावधान किया गया है. बजट में कहा गया है कि रेलवे द्वारा यात्री और माल ढुलाई के आंकड़ों को 10 फीसदी की रफ़्तार से बढ़ाने के इरादे से 2016-17 के 2,800 किलोमीटर के मुकाबले आने वाले वित्तीय वर्ष में 3,500 किलोमीटर नई लाइनों का निर्माण किया जाएगा.

मेट्रो रेल का विस्तार (Development of Metro Trains)

दिल्ली सहित अन्य महानगरों में मेट्रो रेल की सफलता से उत्साहित सरकार ने रेल बजट में मेट्रो रेल के विस्तार के लिए एक नई नीति लाने का प्रस्ताव किया है. इसके संबंध में जल्दी ही एक नीति का ऐलान किया जाएगा. इस नीति के तहत मेट्रो रेल के स्वदेशीकरण पर जोर होगा. इसमें वित्तपोषण से लेकर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर जैसी आधारभूत बातें शामिल होंगी. बजट में इस संबंध में उल्लेखित बिंदुओं से स्पष्ट होता है कि रोज़गार सृजन के मामले में भी मेट्रो रेल की अहमियत को सरकार ने माना है. साथ ही धन संबंधी समस्या को दूर करने और बेहतर क्रियान्वयन के लिए मेट्रो रेल में निजी भागीदारी को भी  नई नीति में शामिल करने पर बल दिया गया है. वित्त मंत्री के अनुसार मेट्रो रेल के परिचालन को और भी अधिक तर्कसंगत बनाने के लिए इस संबंध में एक नया कानून भी बनाया जाएगा.

ई-टिकट कराने पर राहत (Relief on E-Ticket)

रेल बजट में इंटरनेट से टिकट लेने वालों को एक बड़ी राहत का ऐलान किया गया है. सरकार के कैशलेस और डिजिटल लेनदेन के मौजूदा अभियान के दौर में ऐसा होना स्वाभाविक माना जा सकता है. बजट में ऐलान किया गया है कि अब इंटरनेट से ख़रीदे जाने वाले ई-टिकट पर लगने वाला सर्विस चार्ज नहीं लगेगा. सरकार के इस ऐलान के बाद इंटरनेट से टिकट लेने वाले यात्रीयों को स्लीपर क्लास के टिकट पर लगने वाला 20 रुपये और वातानुकलित क्लास के टिकट पर लगने वाला 40 रुपये का सर्विस टैक्स नहीं देना होगा. हालाँकि इससे ऑनलाइन रेलवे टिकट बुक करने वाली संस्था आईआरसीटीसी को सालाना लगभग 550 करोड़ रुपये का नुकसान होगा, इसके वाबजूद सरकार ने अपने डिजिटल इंडिया अभियान की सफलता के लिए इस जोखिम को लिया है. डिजिटल इंडिया प्रोजेक्ट के बारे में यहाँ पढ़ें.

रेलवे की कंपनियों का शेयर बाज़ार में सूचीकरण (Listing of Railway’s Companies in Share Market)

रेलवे की विभिन्न महत्वाकांक्षी योजनाओं के लिए वित्त जुटाने के उद्देश्य से सरकार ने बजट में एक और बड़ा फैसला लिया है. इस फैसले के अंतर्गत रेलवे अपनी तीन कंपनियों को शेयर बाज़ार में सूचीबद्ध कराएगी. ये तीनों कंपनियां हैं – आईआरसीटीसी, आईआरएफसी और ईरकोन. शेयर बाज़ार में इन कंपनियों के सूचीबद्ध होने से निवेशकों के लिए भी इन सरकारी कंपनियों में निवेश करने का रास्ता खुल जाएगा और रेलवे को समुचित धन उपलब्धता की संभावना बढ़ जाएगी.

एक नज़र में रेल बजट 2017 (Rail Budget 2017 : In a Glance) –

  • रेलवे का कुल परिव्यय पिछले साल के मुकाबले 1 लाख 21 हजार करोड़ रुपये से बढाकर 1 लाख 31 हजार करोड़ रुपये किया गया है.
  • रेलवे सेफ्टी फंड में अगले पांच वर्ष के लिए 1 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम प्रावधान.
  • रेलवे के ब्रॉडगेज लाइनों पर बने फाटकों (Crossing) को वर्ष 2020 तक मानव रहित बनाने का लक्ष्य.
  • अगले वित्त वर्ष में 3500 किलोमीटर नई रेल लाइन बिछाने का लक्ष्य.
  • धार्मिक यात्रीयों के लिए विशेष ट्रेनें शुरू करने का प्रावधान.
  • दिव्यांगों के लिए 500 रेलवे स्टेशनों पर लिफ्ट और एक्सलेटर लगाने का लक्ष्य.
  • 7000 रेलवे स्टेशनों को सौर उर्जा से प्रकाशित करने का प्रावधान.
  • मार्च 2019 से रेलवे में एकाउंटिंग रिफ़ॉर्म लाने का संकल्प.
  • वर्ष 2019 तक सभी ट्रेनों में बायो टॉयलेट लगाने का लक्ष्य.
  • ई-टिकट पर सर्विस टैक्स समाप्त करने का फैसला.
  • नौकरी सृजन के उद्देश्य से मेट्रो रेल से संबंधित नई नीति लाने का ऐलान.
  • वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए रेलवे की तीनों कंपनियों आईआरसीटीसी, आईआरएफसी और ईरकोन को शेयर बाज़ार में सूचीबद्ध करने का फैसला.

रेल बजट से वित्तीय आंकड़े नदारद (Non-disclosure of Railway’s Financial Data) –

अन्य वर्षों के मुकाबले इस वर्ष रेल बजट में जो बात सबसे अधिक अखरी वह थी, रेलवे के वित्तीय लेखा-जोखा का उपलब्ध न होना. पहले के बजटों में बीते साल में कितना पैसा किस मद से आया और कितना किस मद में खर्च किया गया, उसका आंकड़ा देश के सामने प्रस्तुत किया जाता था. परन्तु इस वर्ष वह लेखा-जोखा बजट से नदारद रहा. साथ ही सरकार ने अपने पिछले साल की घोषणाओं के आलोक में अपनी सफलता और विफलता का भी कोई जिक्र बजट में नहीं किया. वित्तीय आंकड़े और प्रदर्शन (Performance) के अभाव में सरकार के कामकाज का विश्लेषण करना संभव नहीं हो सकता है.

रेलवे बजट से संबंधित कुछ ऐतिहासिक तथ्य (Historical Data of Railway Budget)

  • भारतीय रेल बजट को दुनिया के संसदीय प्रणाली में एक अनोखी मिशाल माना जाता रहा है.
  • सर्वप्रथम वर्ष 1924 में तत्कालीन अर्थशास्त्री विलियम मिशेल एक्वोर्थ कि अध्यक्षता में गठित 10 सदस्यों की समिति की अनुशंसा पर रेल बजट को पेश किया गया था.
  • रेल बजट के सन्दर्भ में सबसे रोचक तथ्य ये है कि इसका संविधान में कहीं उल्लेख नहीं है. इसलिए संसदीय भाषा में इसे अब तक धन विधेयक के रूप में पेश किया जाता रहा है.
  • पूर्व रेलमंत्री और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने सबसे अधिक 6 बार संसद में रेल बजट पेश किया है. वह कांग्रेस नीत संप्रग सरकार में वर्ष 2004 से 2009 तक रेल मंत्री रहे हैं.
  • पूर्व रेल मंत्री और वर्तमान में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नाम एकमात्र महिला मंत्री के तौर रेल बजट पेश करने का रिकॉर्ड है. उन्होंने वर्ष 2002 में संसद में रेल बजट पेश किया था.

भारतीय रेल : कुछ अनोखे तथ्य (Indian Railway : Some Unique Facts) –

  • भारतीय रेल दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क है.
  • भारतीय रेल दुनिया का सबसे बड़ा नियोक्ता (Employer) है. यहां 16 लाख से अधिक स्थाई और अस्थाई कर्मचारी काम करते हैं.
  • वर्ष 1986 में पहली बार दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित रेलवे सूचना प्रणाली (CRIS) से रेलवे में कंप्यूटरीकृत आरक्षण प्रणाली की शुरुआत की गई थी.

बहरहाल, अपने पुराने स्वरुप को छोड़कर रेल बजट एक नए अवतार में हमारे सामने है. परन्तु हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि रेल बजट का 92 साल पुराना एक गौरवशाली इतिहास रहा है. आने वाला समय इतिहास के उस गौरवशाली परंपरा को जरूर याद रखेगा.

अन्य पढ़ें –

Ankita

Ankita

अंकिता दीपावली की डिजाईन, डेवलपमेंट और आर्टिकल के सर्च इंजन की विशेषग्य है| ये इस साईट की एडमिन है| इनको वेबसाइट ऑप्टिमाइज़ और कभी कभी आर्टिकल लिखना पसंद है|
Ankita

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *