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रीमा लागू का जीवन परिचय | Reema Lagoo biography in hindi

Reema Lagoo biography in hindi रीमा लागू बहुत ही प्रतिभावान भारतीय अभिनेत्री, मॉडल और थियेटर कलाकार थी. वह हिंदी और मराठी फिल्मों के साथ ही टेलीविजन में किये गए अपने दमदार अभिनय की वजह से जानी जाती है. सबसे ज्यादा दर्शक उन्हें उनकी कॉमेडी और फ़िल्मों में किये गए माँ के किरदार से ज्यादा जानते है.

Reema lagoo biography

रीमा लागू का जीवन परिचय

Reema Lagoo biography in hindi

रीमा लागू का जन्म और शुरूआती जीवन (Reema Lagoo birth and early life)

रीमा लागू का जन्म 21 जून 1958 को भारत के राज्य महाराष्ट्र के मुम्बई में हुआ था. वह 1979 में मुम्बई के यूनियन बैंक ऑफ़ इण्डिया में 10 सालो तक एक कर्मचारी के रूप में कार्यरत रही थी. साथ ही वह टीवी, फिल्मों के अलावा इंटर बैंक सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेती रहती थी.

रीमा लागू की शिक्षा (Reema Lagoo education)

रीमा लागू ने हाई स्कूल की अपनी पढाई पुणे के एच. एच. सी. पी. हाई स्कूल से की है. इस स्कूल में पढाई के द्वारान ही उन्होंने अपनी अभिनय क्षमता को पहचान लिया था. उसके बाद उन्होंने मुम्बई के विल्सन कॉलेज से स्नातक की अपनी पढाई को पूरा की. अपनी स्नातक की डिग्री को लेने के बाद ही वह पेशेवर रूप से अभिनय को अपना ली.                

रीमा लागू का पारिवारिक जीवन (Reema Lagoo family)  

उनके परिवार में उनके माता पिता के अलावा उनकी बेटी और दामाद भी है. रीमा लागू की माता जी का नाम मन्दाकिनी भाधादे है, वो एक थियेटर आर्टिस्ट थी उन्हें मराठी मंच पर किये गए एक नाटक लेकुरे उदंड जाहली से ज्यादा जाना जाता है. रीमा लागू में मराठी अभिनेता विवेक लागु से शादी की थी इन दोनों को एक बेटी हुई जिसका नाम मृन्मयी है. मृन्मयी भी एक थियेटर आर्टिस्ट, निर्देशक और फ़िल्म अभिनेत्री है.     

रीमा लागू का करियर (Reema Lagoo career)  

रीमा लागू ने विविध क्षेत्रों में अभिनय किया है जिनका वर्णन निम्नलिखित है.

रीमा लागू का फिल्मों में करियर (Reema Lagoo filmography)  

रीमा लागू ने टीवी धारावाहिकों से अपने प्रारम्भिक करियर की शुरुआत की थी. वे हिंदी और मराठी दोनों ही भाषाओँ की फिल्मों में प्रमुखता से अभिनय की है. वे कई मशहुर कलाकारों के साथ अभिनय कर चुकी है. उन्होंने अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत 1979 से की थी. उनके फ़िल्मी करियर का वर्णन साल के अनुसार निम्नवत है: –

  • 1979 से 1989 तक का करियर  : 1980 में उनकी पहली हिंदी फ़िल्म आई ‘आक्रोश’. वे जब महज 31 वर्ष की थी, तब से ही उन्होंने फिल्मो में माँ के किरदार को करना शुरू कर दिया था. 1988 में इनकी फ़िल्म आई ‘हमारा खानदान’. इसी वर्ष उनकी दो और फिल्मे आई, जिसमें एक का नाम ‘रिहाई’ था, इस फिल्म में उन्होंने एक विवादस्पद भूमिका निभाई थी और दूसरी ‘कयामत से कयामत तक’ इस फ़िल्म में उन्होंने जूही चावला के माँ के किरदार को किया था. 1989 में उनकी फिल्म आई ‘मैंने प्यार किया’, जिसमे उन्होंने सुपरस्टार सलमान खान की माँ की भूमिका की थी. सलमान खान की जीवनी यहाँ पढ़ें.
  • 1990 से 1995 तक का करियर : 1990 में उनकी फ़िल्म ‘आशिकी’ आई थी. 1991 में उनकी फ़िल्म आई ‘आग लगा दो सावन को’, ‘बहारों के मंजिल’, ‘रामवती’, ‘बलिदान’ इसके बाद फिल्म ‘हीना’ आई. इस वर्ष की उनकी सबसे मशहुर फ़िल्म रही ‘साजन’, जिसमे उन्होंने सलमान खान की माँ की भूमिका को किया था. यह फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर काफी सफल फिल्म रही थी. 1992 में उनकी फ़िल्में ‘सपने साजन के’, ‘जीना मरना तेरे संग’, ‘दो हंसो का जोड़ा’, ‘प्रेम दीवाने’, ‘निश्चिय’, ‘कैद में है बुलंदी’, ‘वंश’, ‘सोला और शबनम’ आदि आई. 1993 में उनकी फ़िल्में आई थी ‘श्री मान आशिक’, ‘संग्राम’, ‘महाकाल’, ‘आज की औरत’, ‘गुमराह’. जिसमें से फिल्म ‘गुमराह’ में उन्होंने श्री देवी की माँ के किरदार को निभाया था. यह एक अपराधिक थ्रिलर फ़िल्म थी, यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फ़िल्म थी. 1994 में उनकी फ़िल्में आई ‘पथरीला रास्ता’, ‘दिलवाले’ यह फ़िल्म सफल रही थी. उसके बाद सूरज बर्जत्या की फ़िल्म आई ‘हम आपके है कौन’. यह फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपर हिट रही थी. इस फ़िल्म ने बहुत अच्छा व्यवसाय किया था. यह फ़िल्म उनके यादगार फिल्मों में से एक है. फिर 1995 में उनकी फ़िल्म ‘जय विक्रान्ता’ और ‘रंगीला’ आई. फिल्म रंगीला में उन्होंने उर्मिला मांतोडकर की माँ के किरदार को किया था. यह फ़िल्म सफल रही थी.
  • 1996 से 2000 तक का करियर : 1996 में उनकी फिल्मे आई ‘पापा कहते है’, ‘प्रेम ग्रन्थ’, ‘माहिर’, ‘दिल तेरा दीवाना’. 1997 में उनके द्वारा अभिनीत फ़िल्में थी ‘उफ्फ ये मोहब्बत’, ‘रुई का बोझ’, ‘जुड़वाँ’. जिसमें से फिल्म ‘जुड़वां’ में उन्होंने सलमान खान की माँ का रोल किया था. फिल्म ‘यस बॉस’ में उन्होंने शाहरुख़ खान की माँ का रोल किया था. इसके अलावा ‘बेताबी’, ‘दीवाना’ मस्ताना जैसी फिल्म भी इन्होने की. शाहरुख़ खान का जीवन परिचय यहाँ पढ़ें. 1998 में उनके द्वारा अभिनीत फ़िल्में ‘तिरछी टोपी वाले’, ‘दीवाना हूँ पागल नहीं’, ‘प्यार तो होना ही था’, ‘मेरे दो अनमोल’, ‘आंटी नम्बर 1’, ‘कुछ कुछ होता है’ आदि थीं. फिल्म ‘कुछ कुछ होता है में इन्होंने काजोल की माँ का रोल किया था. यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर काफी हिट रही थी, उसके बाद इनकी फ़िल्म ‘झूठ बोले कौवा काटे’ आई. 1999 में उनकी द्वारा अभिनीत फ़िल्में ‘दिल्लगी’, ‘हम साथ साथ है’ थी. फिल्म ‘हम साथ साथ है’ बॉक्स ऑफिस पर काफ़ी सफल रही थी. इसके अलावा फिल्म ‘आरजू’, ‘वास्तव: द रियलिटी’ में भी इन्होने अभिनय किया. 2000 में उनकी फ़िल्में आई ‘क्या कहना’, ‘निदान’, ‘दीवाने’, ‘जिस देश में गंगा रहता है’, ‘कही प्यार ना हो जाए’. ये सारी फिल्मे सफ़ल रही थी.
  • 2001 से 2005 तक का करियर : 2001 में उनकी फ़िल्में आई ‘हम दीवाने प्यार के’, ‘सेसर’, ‘इन्डियन’, ‘तेरा मेरा साथ रहे’. 2002 में उनकी फ़िल्में ‘हथियार’, ‘रेशमगाठ’ आदि आई. 2003 में फिल्म ‘कविता महाकाल’, ‘मै प्रेम की दीवानी हूँ’ आई. इस फ़िल्म में उन्होंने अभिषेक बच्चन की माँ की भूमिका निभाई थी. इसके अलावा ‘चुपके से’, ‘कल हो न हो’भी इन्होने काम किया. इसमें उन्होंने मिसेज माथुर के किरदार को किया था. यह फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर सफ़ल रही थी, इस फिल्म में वे शाहरुख़ खान की माँ की भूमिका में थी. 2004 में उनकी फिल्म आई ‘हत्या’. 2005 में आई उनकी फिल्मे है ‘हम तुम और मोम’, ‘शादी करके फस गया यार’, ‘सैंडविच’, ‘डिवोर्स नॉट बिटवीन हस्बैंड एंड वाइफ’ आदि.
  • 2006 से 2017 तक का करियर : 2006 में उनकी एक फ़िल्म ‘आई शप्पथ’ आई. 2008 में उनकी फ़िल्म ‘हमने जीना सिख लिया’, ‘सुपरस्टार’, ‘महबूबा’, ‘किडनैप’ आईं. 2010 में उनकी फिल्म आई ‘मित्तल वर्सेज मित्तल’, 2011 में मुम्बई कटिंग, ट्रैप्ड इन ट्रेडिशन: रिवाज इसमें उन्होंने रणजीत सिंह की बीवी का किरदार किया था, 2012 में फिल्म ‘ॐ अल्लह’, ‘498 ए : द वेडिंग गिफ्ट’, 2014 में ‘उँगली’, 2015 में ‘मैं हूँ रजनीकांत’, ‘आई लव एनवाई’ आई. उनकी फ़िल्मों में किये गए योगदान को हम उनकी फिल्मों के नामों से अनुमानित कर सकते है. इन फ़िल्मों के नाम उनके अभिनय सक्रियता को दर्शाते है.

इस तरह ज्यादातर फ़िल्मों में उन्होंने मध्यम उम्र की माँ की भूमिका को ही निभाया है. मीडिया ने उन्हें हिंदी सिनेमा की नई उम्र की माँ के रूप में सम्बोधित किया जाता है. साथ ही वो बॉलीवुड के तीनों खान अमीर खान, सलमान खान और शाहरुख़ खान के साथ काम कर चुकी है.  रीमा लागू का मराठी फिल्मों में करियर (Reema Lagoo marathi films)  

रीमा लागू जितनी हिंदी फिल्मों में सक्रिय थी, उतनी ही मराठी फिल्मों में भी सक्रीय थी. उनकी कुछ मराठी फ़िल्मों के नाम  है- आपली मन्से, श्यामची आई, सेल, ये शप्पथ, शुभ मंगल सावधान, नवसाचा. साल 1979 में उनकी पहली मराठी फ़िल्म सिंहासन आई थी, 2002 में उनकी फिल्म ‘रेहगाथा’ आई थी, इस फिल्म के लिए उन्हें पुरस्कार भी प्राप्त हुआ था. 2009 में फिल्म ‘मी शिवाजीराजे’ आई थी, 2011 में ‘धूसर’, इसी वर्ष उनकी एक और फिल्म आई थी जिसका नाम ‘जन्मा’ था, इस फिल्म में उन्होंने वन्धना सरपोतदार की भूमिका को निभाया था. इसको उन्होंने अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ भूमिकाओं में से एक कहा था और इसकी प्रशंसा की थी. 2017 में देवा उनकी मराठी अंतिम फ़िल्म रही. इसी तरह से कुछ और भी मराठी फ़िल्मों में उन्होंने अपने अभिनय क्षमता का प्रदर्शन किया था.   

रीमा लागू का टेलीविजन में करियर (Reema Lagoo serials)  

हिंदी, मराठी फिल्मों के अलावा रीमा लागू  हिंदी और मराठी टेलीविजन अभिनेत्री के रूप में भी काफ़ी सक्रिय रही थी. 1985 में उन्होंने हिंदी सीरियल खानदान से अपने टेलीविजन करियर की शुरुआत की थी. फिर 1994 में उनका सीरियल ‘श्रीमान श्रीमती’ आया, जिसमे उन्होंने कोकिला कुलकर्णी की भूमिका को निभाया था. फिर इसी वर्ष में ही उनका एक और सीरियल आया था, जिसका नाम ‘तू तू मै मै’ था, जिसमे उन्होंने देवकी वर्मा नाम के किरदार को जीवंत किया था. यह सीरियल दर्शकों को खूब पसंद आया था. इसमें उनके द्वारा किये गए अभिनय की बहुत प्रसंशा हुई थी. इस सीरियल में उन्होंने सुप्रिया पिल्गओंकर के सास की भूमिका की थी. इसके लिए उन्हें पुरस्कार भी प्राप्त हुआ था. तू-तू-मैं-मैं ओल्ड टीवी धारावाहिक यहाँ पढ़ें.

2013 में उनका एक सीरियल ‘तुज़ा मज़ा जमना’ आया, इसमें उनके पात्र का नाम रीमा लिमये था. इसके अलावा रीमा लागू मराठी शो ‘मानाचा मुर्ज्रा’ में भी दिख चुकी हैं. इस शो के माध्यम से उनके मराठी व्यक्तित्व को सम्मानित किया जाता है. उनके द्वारा अंतिम बार किया गया अभिनय 2017 में स्टार प्लस चैनल पर आने वाला सीरियल ‘नामकरण’ था, जो की हाल में अपना 200 एपिसोड पूरा होने की खुशी मना रहे थे. वह इस शो में फ़ातिमा बानो के किरदार को निभा रही थी यह शो महेश भट्ट द्वारा सह निर्देशित है. अचानक हुई उनकी मौत से इस शो के सभी स्टार कास्ट काफी आहत हुए है.                           

रीमा लागू के अवार्ड और उपलब्धियां (Reema Lagoo achievement)  

  • रीमा लागू फ़िल्म ‘मैंने प्यार किया’, ‘आशिकी’, ‘हम आपके है कौन’, ‘वास्तव’ के सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए नामांकित हुई थी.
  • उन्होंने टेलीविजन के सीरियल ‘तू तू मै मै’ के लिए सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेत्री के लिए इंडियन टेल्ली अवार्ड को जीता था.
  • इसके अलावा उन्हें मराठी फिल्मों में दिए गए उनके योगदान के लिए महाराष्ट्र सरकार के द्वारा वी शांताराम पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. 

रीमा लागू का व्यक्तिगत जीवन (Reema Lagoo personal life)

रीमा लागू का पहले नाम नयन खाद्बदे था, लेकिन विवेक लागू से शादी करने के बाद उन्होंने अपना नाम बदल कर रीमा लागू कर लिया था. शादी के कुछ सालों के बाद ही वह अपने पति से तलाक लेकर अलग रहने लगी थी. रीमा लागू व्यक्तिगत जीवन में ध्रूमपान नहीं करती थी लेकिन वो शराब का सेवन करती थी.

नाम रीमा लागू
वास्तविक नाम नयन खाद्बदे
व्यवसाय अभिनेत्री
आँखों का रंग हल्का ग्रे
ऊंचाई 5 फीट 3 इंच
वजन 65 किलो ग्राम
बालों का रंग काला
धर्म हिन्दू
वैवाहिक स्थिति विवाहित
पसंदीदा अभिनेता सलमान खान
पसंदीदा रेस्टोरेंट्स गोवा पोर्तुगुएसा, गजाली, नेबुलस, पॉप तटेस मुम्बई का, चाइना का लिगेसी    
जूते का साईज 8 नंबर
शारीरिक बनावट सीना – 34 इंच, कमर – 25, हिप्स – 36 इंच   
पसंदीदा खाना बेक्ड कीमा आलू डिलाइट, एप्पल पाई, कारमेल कस्टर्ड, बनाना स्प्लिट   
राशि मिथुन राशि
नागरिकता भारतीय

रीमा लागू की मृत्यु (Reema Lagoo death)  

17 मई को शाम में रीमा लागू करीब 7 बजे टेलीविजन कार्यक्रम नामकरण की शूटिंग करके लौटी थी, तब वह बिल्कुल ठीक थी. उनको कोई भी और किसी भी तरह की स्वास्थ्य समस्या नहीं थी. अचानक उन्होंने घर वालों से रात 1 बजे सीने में दर्द होने की शिकायत की, तब उनके दामाद विनय वैकुल और बेटी मृन्मयी ने उन्हें कोकिलाबेन धीरुभाई अंबानी अस्पताल में भर्ती कराया. इसके बाद अस्पताल के कार्यकारी निदेशक राम नारायण ने उनके परिवार से परामर्श के बाद एक रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि ह्रदय गति के रुक जाने से 18 मई की सुबह 3:15 बजे पर उनकी मृत्यु हो गयी. इस ख़बर के फैलते ही दर्शकों से लेकर पूरा बॉलीवुड और टेलीविजन की दुनिया के लोग सदमे में है. सबने अचानक से हुए इस घटना के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की है. इसके बाद उनका अंतिम संस्कार दोपहर 2:45 बजे के करीब ओशिवरा श्मशान में उनकी बेटी के द्वारा किया गया. उनकी अंतिम यात्रा में बहुत सी फ़िल्मी हस्तियों के साथ ही टेलीविजन से जुड़े हुए लोग भी शामिल हुए थे.      

रीमा लागू के चर्चित वचन (Reema Lagoo quotes)

  1. किसी भी रिश्ते में कोई आमिर गरीब नहीं होता है और न ही कोई बड़ा, रिश्ता चाहे कितनी भी नजदीकी का क्यों न हो और आप उसे कितना भी प्यार क्यों न करते हो, सिर्फ़ उस एक रिश्ते के चले जाने से जिंदगी खत्म नहीं होती है हमे किसी भी हाल में जीना ही पड़ता है.
  2. किसी भी रिश्ते के सफल होने के लिए ये सबसे ज्यादा जरुरी हो जाता है कि उनकी सोच और समझ आपस में किस तरह की है. किसी भी रिश्ते की सफ़ल होने की सम्भावना तभी हो सकती है जब दो लोगों के बीच बराबरी का मामला हो.
  3. आप जीतने अमीर बनते जाते हो आपकी संवेदनशीलता कम होती जाती है, अमीर ज्यादातर अपने स्वार्थवश नफ़रत को ही फैलाता है. दुनिया में भले ही गरीबों के पास कुछ भी न हो लेकिन वे सबको प्यार और सम्मान जरुर देना जानता है.
  4. किसी भी बात को तुम माँ से नहीं छुपा सकते हो माँ का दिल बना ही ऐसा होता है कि भले ही तुम अपने बारे में उसे कोई भी बात न बताओ, लेकिन तुम्हारे न बताने के बावजूद भी माँ सब कुछ जान लेती है उसे ये भी पता रहता है कि उसका बेटा कब सुख में है और कब दुःख में है. इसके लिए उसे कभी भी किसी से पूछने या जानने की जरुरत नहीं पड़ती है.
  5. हमारी आँखे और हमारा दिल कुछ बातों को बिना कहे भी समझ जाता है लेकिन कभी कभी अपने मन को हल्का करने के लिए कुछ बातों को कहना भी जरुरी होता है बिना कहे ऐसी बातों को नहीं समझा जा सकता है.
  6. किसी भी औरत के इज्जत को कम आंकने की गलती नहीं करनी चाहिए ये दुनिया के हर चीज से कीमती होता है इसकी हिफ़ाजत करना सीखनी चाहिए.
  7. हम हमेशा सच नहीं बोल सकते है कभी कभी हमारे सामने ऐसी परिस्थितियां आ जाती है जिसमें हमे इन्सान के रिश्तो में दूरी न आये इसलिए झूठ भी बोलना पड़ता है और ये कभी कभी बहुत जरुरी भी होता है.
  8. कभी भी किसी के भी साथ रहने के लिए उससे किसी भी तरह के रिश्तों में बधे होना चाहिए, क्योकि दुनिया किसी भी रिश्तों के नाम से लोगों को पहचानती है.
  9. मै जब अभिनय को करना शुरू की तब मैंने अपने अभिनय करियर में सबसे पहले एक मुस्लिम के किरदार को निभाया था, इसके पहले मै कभी भी अपनी फिल्मों में आने से पहले थिएटर के करियर में इस तरह के पात्र के लिए अभिनय नहीं की थी और उस फ़िल्म को राहुल कपूर के द्वारा निर्देशित किया गया था.
  10. मुझे कभी भी कोई भी टॉपिक मिलता है मै उसमे हमेशा नया ढूढने की कोशिश करती हूँ. मै हमेशा कुछ नया करने के बारे में सोचती रहती हूँ मुझे ये सब करना और सोचना बहुत अच्छा लगता है.
  11. अगर मै सोशल मीडिया जैसी किसी भी वेवसाइट पर नहीं हूँ मेरा कोई अपना ब्लॉग नहीं है और ना ही मै कभी भी कोई ट्वीट करती हूँ, तो इसका मतलब ये बिल्कुल भी नहीं है कि मै इन सब चीजों से अंजान हूँ मै किसी भी तरह के ख़बर से अंजान हूँ या वर्तमान में क्या हो रहा है ये सब नहीं जानती. मै हर एक ख़बर पर अपनी नज़र रखती हूँ.
  12. मै हमेशा ऐसे किरदार को निभाना चाहती हूँ जिसको मैंने पहले कभी भी नहीं किया हो, ऐसे किरदार के लिए उसके अभिनय को करने के लिए आपको अतिरिक्त ध्यान लगाने की जरुरत पड़ती है जोकि बहुत अच्छा होता है. इस तरह से हमेशा आप में सुधार करने का प्रयास करते रहना पड़ता है जिससे आपको सीख मिलती है.
  13. डिजिटल मनोरंजन मीडिया बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है इसके साथ हम भी अपने आप को हमेशा आगे बढ़ाने की सीखने की कोशिश कर रहे है. यह एक बहुत ही दिलचस्प मंच लोगों को प्रदान कर रहा है इसके तरीके को सीखना भी बहुत ही मजेदार है.

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Ankita

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अंकिता दीपावली की डिजाईन, डेवलपमेंट और आर्टिकल के सर्च इंजन की विशेषग्य है| ये इस साईट की एडमिन है| इनको वेबसाइट ऑप्टिमाइज़ और कभी कभी आर्टिकल लिखना पसंद है|
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