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होटल व रेस्तरां में सर्विस चार्ज देना जरूरी नहीं |Service charge in Restaurants is illegal in hindi

Service charge in Restaurants और Hotel is illegal in hindi हम अपने आर्टिकल में आपको बताएंगे कि किस तरह सरकार ने उपभोगता संरक्षण कानून 1986 के अंतर्गत यह फैसला किया है कि होटल हो या रेस्तरां, कही भी सर्विस चार्ज देना किसी भी ग्राहक व उपभोगता के लिए जरूरी नहीं है. परन्तु इसके पहले हम आपको बताएंगे कि क्या है सर्विस चार्ज और सर्विस टैक्स में अंतर?

सर्विस चार्ज और सर्विस टैक्स में अंतर (Service Charge and Service Tax Difference)

अक्सर लोग सर्विस टैक्स (Service Tax) और सर्विस चार्ज (Service Charge) में अंतर नहीं कर पाते हैं और सेवा प्रदाताओं (Service Provider) की मनमानी का शिकार होते रहते हैं. वास्तव में सर्विस टैक्स एक केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर (Central Indirect Tax) है, जिसे निर्धारित क्षेत्रों के सेवा प्रदाताओं द्वारा सरकार को चुकाया जाता है. सेवा प्रदाता इस टैक्स की रकम को सेवा प्राप्तकर्ता (Customer) से वसूलते हैं और एक निर्धारित अवधि में वसूली गई रकम को पूर्ण विवरण के साथ सरकार के खाते में जमा करते हैं. रेस्तरां का कारोबार भी सेवा कर (Service Tax) के दायरे में आता है. जब आप किसी रेस्तरां में खाना खाते हैं और आपको उसका बिल दिया जाता है तो उस बिल में सर्विस टैक्स, उसकी दर और रकम का उल्लेख होता है. साथ में राज्य सरकार द्वारा लगाया जानेवाला एक टैक्स भी बिल में होता है, जिसे वैट (VAT-Value Added Tax) के नाम से जाना जाता है. इसके बाद कई रेस्तरां के बिल में एक और प्रभार (Charge) का उल्लेख होता है जिसे रेस्तरां सेवा प्रभार (Service Charge) के नाम से वसूलते हैं. सर्विस चार्ज रेस्तरां का अपना होता है जो वह आपकी खातिरदारी और सेवा के बदले वसूलता है. हालाँकि यह अव्यवहारिक होता है इसलिए सर्विस चार्ज वसूलने पर आए दिन ग्राहकों और रेस्तरां प्रबंधन के बीच तकरार की स्थिति बनती रही है. रेस्तरां द्वारा वसूले जाने वाले इसी सर्विस चार्ज को अनुचित बताते हुए, केंद्रीय उपभोक्ता मंत्रालय ने उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम, 1986 के प्रावधानों के अंतर्गत इसे ग्राहकों द्वारा चुकाने की अनिवार्यता को ख़त्म कर दिया है.

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होटल व रेस्तरां में सर्विस चार्ज देना जरूरी नहीं

Service charge in Restaurants is illegal in hindi

क्या है सर्विस चार्ज? (What is Service Charge?)

सरल शब्दों में कहें तो किसी भी होटल या रेस्तरां में ग्राहकों से खातिरदारी और सेवा के बदले में लिया जाने वाला चार्ज ‘सर्विस चार्ज’ कहलाता है. परंतु ज्यादातर ग्राहक जानकारी के अभाव में ‘सर्विस चार्ज’ को ‘सर्विस टैक्स’ समझकर इस पर ध्यान नहीं देते या फिर जो रेस्तरां के इस गड़बड़ झाले को जानते भी हैं वे छोटी रकम मानकर अन्यथा में नहीं लेते. हालाँकि अमीर लोगों के लिए वह रकम भले ही कोई मायने नहीं रखता हो, परंतु मध्य वर्ग के लिए सर्विस चार्ज लंबे समय से एक दुखदायी विषय रहा है. इस दुःख के पीछे की वजह है, इस मद में वसूला जाने वाला भरी-भरकम दर (Rate). सर्विस चार्ज के मद में होटल और रेस्टोरेंट कुल बिल की रकम का 5 फीसदी से 20 फीसदी तक देने के लिए ग्राहकों को बाध्य करते हैं.

वैसे आम बोलचाल की भाषा में कहा जाय तो, होटल या रेस्टोरेंट द्वारा वसूला जाने वाला सर्विस चार्ज एक प्रकार से संगठित ‘टिप’ है. यह टिप पहले ग्राहक उस वेटर को दिया करते थे, जो उन्हें खाना परोसते थे और खाने के दौरान उनकी सुविधाओं का ख्याल रखते थे. स्पष्ट है, इस अतिरिक्त आमदनी पर केवल वेटर का ही हक़ होता था, जबकि रेस्तरां के संचालन में मुख्य भूमिका निभाने वाले शेफ (Chef) या फिर प्रबंधन या अन्य कामों से जुड़े कर्मचारियों को कोई अतिरिक्त लाभ नहीं होता था. ऐसे में होटल और रेस्तरां प्रबंधन ने ‘सर्विस चार्ज’ के नाम पर ‘संगठित टिप’ वसूलने का नायाब तरीका निकाला और दलील दी कि इस पैसे को सभी कर्मचारियों में बांटा जाता है. हालाँकि ऐसा होता नहीं है. ग्राहकों से सर्विस चार्ज वसूलने के बावजूद रेस्तरां के मालिक या उसका प्रबंधन उस पैसे को कर्मचारियों के कल्याण पर खर्च करने के बदले उसे अपनी जेब में डाल लेते हैं.

सर्विस चार्ज पर क्यों है आपत्ति? (Objection on Service Charge)

गौरतलब है कि आज के महंगाई के ज़माने में किसी अच्छे रेस्तरां में खाना सबके बूते की बात नहीं रही है. खाने की ऊँची कीमत के साथ-साथ कई प्रकार के बाध्यकारी टैक्स जैसे, सर्विस टैक्स, वैट, स्वच्छ भारत सेस और कृषि कल्याण सेस का बिल में जुड़ने से वैसे ही बिल लंबा-चौड़ा हो जाता है और ऊपर से सर्विस चार्ज का बोझ ग्राहकों के घर से बाहर खाने की ख़ुशी को तनाव में बदलने के लिए काफी है. तनाव के इसी मौके पर कई बार ग्राहकों और रेस्तरां प्रबंधन के बीच झड़प की घटना होती रहती हैं. होटल और रेस्तरां में खाने वाले ज्यादातर जागरूक ग्राहक सर्विस चार्ज को अवैध मानते हैं. इस संबंध में एक लंबे समय से ग्राहक सरकार के संबंधित विभाग और उपभोक्ता फोरम में शिकायत करते रहे हैं. इस संबंध में शिकायत बढ़ने के बाद उपभोक्ता मंत्रालय ने होटल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (HAI) से जवाब और स्पष्टीकरण मांगा था.

सर्विस चार्ज पर क्या कहते हैं रेस्तरां मालिक? (Restaurant Owner’s Stand on Service Charge)

सर्विस चार्ज के मुद्दे पर उपभोक्ता मंत्रालय द्वारा सवाल-जवाब किए जाने पर होटल एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने अपनी तरफ से सफाई देते हुए मंत्रालय को कहा था, कि सर्विस चार्ज देना या न देना पूरी तरह से ग्राहकों की इच्छा पर निर्भर करता है. अगर ग्राहक उनके खाने या फिर अन्य किसी सर्विस से असंतुष्ट होते हैं तो वे सर्विस चार्ज को बिल से हटवा सकते हैं. एसोसिएशन की इस स्पष्टीकरण के बाद उपभोक्ता मंत्रालय द्वारा सार्वजनिक तौर पर सर्कुलर जारी कर दिया गया कि होटल और रेस्तरां में ग्राहक ‘सर्विस चार्ज’ देने के लिए बाध्य नहीं होंगे. हालाँकि सरकार को दिए अपने स्पष्टीकरण से मुकरते हुए होटल एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने सरकारी सर्कुलर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. एसोसिएशन का कहना है कि उसके संघ में शामिल सभी होटल और रेस्तरां अपने मेनू कार्ड में सर्विस चार्ज का उल्लेख करते आए हैं, जिसे ग्राहक अपना आर्डर देने से पहले देखते हैं और बिल चुकाते समय बिना किसी आपत्ति के सर्विस चार्ज देते भी आए हैं. फिर सरकार को सार्वजनिक तौर पर सर्कुलर निकालने की क्या जरूरत थी. सरकार के इस कदम से ग्राहकों में संशय पैदा होगा और वे इस सर्कुलर के आधार पर बेहतर सेवा देने के बावजूद सर्विस चार्ज देने से इंकार करेंगे और इससे हमारे यहां अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होगी.

सर्विस चार्ज पर क्या कहा है सरकार ने? (Government Stand on Service Charge)

ग्राहकों की आपत्ति और होटल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के स्पष्टीकरण के बाद सरकार ने एक सर्कुलर के जरिए कहा कि रेस्तरां में खाने के बिल में जोड़ा गया सर्विस चार्ज देना ग्राहकों के लिए अनिवार्य नहीं है. अगर कोई होटल या रेस्तरां सर्विस चार्ज लेते हैं तो उसे इस बात की स्पष्ट जानकारी सूचनापट (Display Board) के माध्यम से ग्राहकों को देना आवश्यक है. उपभोक्ता मंत्रालय ने राज्य सरकारों से भी इस नियम को कड़ाई से लागू करने के लिए कहा है. साथ ही उपभोक्ता मंत्रालय ने उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम, 1986 के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा है कि अगर किसी उपभोक्ता को अनुचित तरीके से भुगतान करने के लिए मजबूर किया जाता है तो वह इस बात की शिकायत उपभोक्ता फोरम (Consumer Forum) में कर सकता है.

अन्य देशों में सर्विस चार्ज की स्थिति (Service Charge in another countries)

सर्विस चार्ज पर भारत सरकार के उपभोक्ता मंत्रालय की अधिसूचना के बाद भारत दुनिया के उन गिने-चुने देशों में शामिल हो गया है जहां होटल और रेस्तरां में सर्विस चार्ज देने की अनिवार्यता को समाप्त किया गया है. अगर नज़र डालें तो दुनिया के कई देशों में होटल या रेस्तरां में सर्विस चार्ज देने का एक निश्चित प्रावधान है तो कई देशों में अपनी स्वेच्छा से ‘टिप’ देने का रिवाज़ है. अगर हम फ्रांस की बात करें तो वहां के रेस्तरां में बिल का कम से कम 15 फीसदी सर्विस चार्ज के तौर पर वसूला जाता है. इसी तरह आयरलैंड में 10 फीसदी का प्रावधान है और अगर ग्राहक इससे ज्यादा देना चाहें तो अपनी ख़ुशी से ज्यादा भी दे सकते हैं. ब्राज़ील और स्वीडन में भी सर्विस चार्ज का लगभग ऐसा ही प्रावधान है.  

इसके विपरीत कुछ देशों में ‘टिप’ का प्रचलन है जो ग्राहकों की इच्छा पर निर्भर करता है. अमेरिका और यूरोप के ज्यादातर देशों में वेटर को टिप देना अनिवार्य तो नहीं है परंतु लोग शिष्टाचारवश टिप देते हैं. देखा गया है कि अमेरिका के रेस्तरां या होटल में ग्राहक बेहतर सेवा (Service) से खुश होकर अपने बिल का लगभग 20 फीसदी टिप के तौर पर देते हैं परंतु साथ में सर्विस में सुधार के लिए लिखित में सुझाव भी देते हैं. ऐसा ही कुछ रिवाज़ इटली और स्पेन में है.

बहरहाल, भारत में सरकार द्वारा सर्विस टैक्स देने की अनिवार्यता को समाप्त करने की अधिसूचना और इसके विरोध में होटल एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा खोले गए मोर्चे से ग्राहक भ्रम और असमंजस की स्थिति में हैं. उम्मीद करनी चाहिए कि असमंजस का यह दौर जल्दी ही ख़त्म होगा और लोग बिना किसी तनाव के घर से बाहर रेस्तरां में खाने का लुफ्त उठा सकेंगे.

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Ankita

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अंकिता दीपावली की डिजाईन, डेवलपमेंट और आर्टिकल के सर्च इंजन की विशेषग्य है| ये इस साईट की एडमिन है| इनको वेबसाइट ऑप्टिमाइज़ और कभी कभी आर्टिकल लिखना पसंद है|
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