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शिलाजीत आयुर्वेदिक औषधि के फ़ायदे | Benefits of Ayurvedic Medicine Shilajit in hindi

Benefits of Ayurvedic Medicine Shilajit in hindi संस्कृत के ‘शिलाजतु’ शब्द से बने शब्द “शिलाजित” का अर्थ चट्टानों पर विजय करना है. यह एक तरह का मोटा चिप-चिपा पदार्थ है, जोकि यह हिमालय, तिब्बत, अल्ताई, गिलगिट आदि पहाड़ों पर प्रचूर मात्रा में पाया जाता है. अध्ययनों से पता लगा है कि शिलाजीत किसी मिनरल से नहीं बल्कि वनस्पति से प्राप्त होता है और ये वनस्पति एक कैक्टस की तरह का पौधा होता है. पहाड़ो में पाए जाने वाला यह पदार्थ हलके भूरे या काले रंग में पाया जाता है. आयुर्वेद में काले रंग के शिलाजीत का प्रयोग बहुत बड़े पैमाने पर होता है. कई जगहों पर इसका वर्णन मिनिरल आयल या रॉक स्वेट के नाम से पाया जाता है. इसकी उत्पति के बारे में कई कहानियाँ में बताया गया है और इसका इस्तेमाल कई तरह से किया गया है. इसमें से सभी अशुद्धियाँ हटा देने के बाद ये एक सजातीय काले या भूरे रंग के पेस्ट के रूप में बदल जाता है, जो एक निश्चित गंध के साथ कडवी स्वाद लिए होता है. कम तापमान पर ये संघनित ठोस वस्तु के रूप में रहता है और गर्म करने पर ये फैलने लगता है. इसमें कई तरह के विटामिन्स और एमिनो अम्ल पाए जाते हैं. शिलाजीत कोल-तार के अलावा पाउडर के रूप में भी पाया जाता है.

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शिलाजीत में पाए जाने वाले अवयव (Components of shilajit)

शिलाजीत में कई तरह के अवयव पाए जाते हैं. प्रत्येक अवयव अपने अंदर कई गुणों को संजोय रखता है जिसका लाभ इसके सेवन के बाद प्राप्त होता है. शिलाजीत में निम्न अवयव पाए जाते है-

  • एल्डागीक अम्ल
  • ट्राईटरपेनेंस
  • स्तेरोल्स
  • एरोमेटिक कार्बोज़िलिक अम्ल
  • एमिनो अम्ल
  • फेनोइक लिपिड्स आदि.

शिलाजीत : आयुर्वेदिक औषधि के  इस्तेमाल के फ़ायदे (Benefits of Ayurvedic Medicine Shilajit in hindi)

शिलाजीत आयुर्वेद में एक अहम् भूमिका अदा करता है. इसके इस्तेमाल के कई फायदे हैं. ये मनुष्य के शरीर के कत्याकल्प को संवारने और शरीर के अन्दर ऊर्जा पैदा करने में अतिसहायक है. ये शरीर की कोशिकाओं तक आवश्यक पोषक तत्व और ऊर्जा पहुंचाता है. शिलाजीत को योग वाही भी कहा गया है, जिसका अर्थ है कि इसके साथ जो भी ग्रहण किया जाए वो इसके गुण से प्रभावित होकर समस्त पोषक तत्व को कोशिकाओं तक पहुंचाता है. इसके इस्तेमाल से होने वाले मुख्य फायदे निम्नलिखित हैं :

  • इसके इस्तेमाल से मनुष्य के अंदर फर्टिलिटी स्तर की वृद्धि होती है, जिससे वीर्य अधिक मात्रा में बनता है. इसके लगातार इस्तेमाल से नपुंसकता पर क़ाबू पाया जा सकता है और स्पर्म की गतिविधियों में भी ख़ासी बढ़त होती है. कई इस तरह की दवाओं को बनाने में इसका प्रयोग होता है.
  • इसके इस्तेमाल से मनुष्य के शरीर में टेस्टोस्टेरोन स्तर की वृद्धि होती है, जो मांसपेशियों के उत्तकों की रक्षा, मोटापे को स्वयं से दूर रखने और एक दुरुस्त सोच बनाने के लिए अति आवश्यक है.
  • इसके प्रयोग का एक और महत्त्वपूर्ण लाभ है, जिसका सीधा सम्बन्ध मनुष्य के ह्रदय से है. इसका सेवन करने से ह्रदय में होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है.
  • टेस्टोस्टेरोन स्तर की वृद्धि हमारे सोचने की क्षमता को भी बढ़ती है. इस वजह से हमारी स्मरण शक्ति में भी वृद्धि होती है.
  • अध्ययन से ये पता चला है कि शिलाजीत मनुष्य के शरीर में एक एंटीओक्सीडेंट की तरह काम करता है, जो हमारी कोशिकीय क्षति की पूर्ती करता है. उम्र के साथ मनुष्य के शरीर में कोशिकीय क्षति बढ़ने लगती है, जिसका प्रभाव हमारे ह्रदय, फेफड़ो और कलेजे में होता है. जिसकी पूर्ती के लिए शरीर में एंटी ओक्सीडेंट का होना अति आवाश्यक है. शिलाजीत शरीर को इससे लड़ने की क्षमता देता है.
  • इसके सेवन से ब्लडशूगर संतुलित रहती है.
  • इसके सेवन से आदमी में यौन क्षमता की वृद्धि होती है, जिस वजह से इसे “इंडियन वियाग्रा” के नाम से भी जाना जाता है. यह बहुत वर्षों पहले से ही यौन शक्ति को बढाने के लिए प्राकृतिक रूप से प्रयोग में लाया जाता रहा है.
  • शिलाजीत के सेवन से अथराइटीस के उपचार में मदद मिलती है. इसके साथ ही इसका प्रयोग तनाव के उपचार के लिए भी होता है.
  • जौंडिस यानि पीलिया के समय इसके प्रयोग से रोगी को आराम मिलता है.
  • इसके सेवन से पाचनतंत्र स्वस्थ रहता है, और ये स्टैमिना बढ़ाने में मदद करता है.
  • शारीरिक रूप से कमज़ोर लोग इसके सेवन से तंदुरुस्त रहते हैं. ये वजन बढ़ने में भी सहायता करता है.
  • इन सबके अलावा नर्वस डिसऑर्डर, अनेमिया, किडनी में पथरी, अस्थमा, इडिमा आदि के उपचार में भी इसका सेवन किया जा सकता है.

शिलाजीत के इस्तेमाल के पार्श्व प्रभाव (नुकसान) (Side effect of shilajit)

  • सही मात्रा में चिकित्सकों के परामर्श लेने के साथ इसका सेवन करने पर इसके कुछ ख़ास नुकसान नहीं होते हैं, लेकिन यदि कोई इसके साथ किसी लौह तत्त्व युक्त चीज़ों का सेवन करता है तो रक्त में लौह तत्व की मात्रा बढ़ जाती है.
  • लौह तत्व मनुष्य के शरीर के लिय एक माइक्रो तत्व है जिसकी मात्रा शरीर में अधिक होने से वह अस्वस्थता का कारण बन जाता है.
  • कभी-कभी इसके अधिक इस्तेमाल से निम्न रक्तचाप की समस्या भी हो सकती है.
  • इन सबके बावजूद शीलाजीत के सेवन का कोई अधिक नुकसान नहीं है. यदि एक बार में इसकी एक बहुती बड़ी मात्रा ली जाए, तो ये शरीर में यूरिक एसिड लेवल को भी बढ़ा देता है.

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