शूटर दादी चन्द्रो एवं प्रकाशी तोमर का जीवन परिचय

शूटर दादी चन्द्रो एवं प्रकाशी तोमर का जीवन परिचय (Shooter Dadi Chandro and Prakashi Tomar Biography in hindi)

शूटर दादी (रिवॉल्वर दादी) के नाम से मशहूर प्रकाशी तोमर और चन्द्रो तोमर दोनों ही देवरानी जेठानी है. इन्होने अपने गाँव का ही नहीं भारत का नाम भी रौशन किया है. आज इन दोनों महिलाओं की चर्चा शूटर दादी के रूप में पुरे विश्व में होती है. आज हम शूटर दादी के जीवन का परिचय देने वाले है. इसमें आप प्रकाशी तोमर एंव चन्द्रो तोमर के जीवन की हर घटना एंव उन्होंने शूटिंग की दुनिया में कदम कैसे रखा इसके बारें में जानेंगे, तो आइये पढ़ते हैं शूटर दादी के जीवन के बारें में. जिन पर हाल ही में एक फिल्म बनी है जिसका नाम है ‘सांड की आँख’.

Shooter Dadi Biography in hindi

Table of Contents

शूटर दादी चन्द्रो तोमर के जीवन की जानकारी

नाम चन्द्रो तोमर
जन्म 1 जनवरी 1932
जन्म स्थान शामली, यूपी
विख्यात नाम शूटर दादी
पति का नाम भोर सिंह तोमर
पोती का नाम शेफाली तोमर
जीवन पर बनी फिल्म सांड की आँख
देवरानी प्रकाशी तोमर

शूटर दादी प्रकाशी तोमर के जीवन की जानकारी

नाम प्रकाशी तोमर
जन्म 1 जनवरी 1937 ( यूपी, मुजफ्फरनगर )
विख्यात नाम शूटर दादी ( रिवोल्वर दादी)
पति का नाम जय सिंह तोमर
गाँव जोहरी , बागपत, यूपी
बेटी का नाम सीमा एंव रेखा
जीवन पर बनी फिल्म का नाम सांड की आँख
जेठानी चन्द्रो तोमर

प्रकाशी तोमर एंव चन्द्रो तोमर दोनों ही देवरानी-जेठानी है. प्रकाशी तोमर का जन्म 1 जनवरी 1937 को यूपी के मुजफ्फरनगर में हुआ. प्रकाशी का विवाह यूपी के बागपत के जोहरी गाँव के जय सिंह से हुई. वहीँ चन्द्रो का जन्म यूपी के शामली गाँव में 1 जनवरी 1932 को हुआ और उनका विवाह भी जय सिंह के भाई भोर सिंह के साथ हुआ. दोनों ने अपनी जिंदगी के आधे से ज्यादा वर्ष पुरे कर लिए थे पर उनका शूटिंग में बिलकुल भी इंटरेस्ट नहीं था. यानि उनकी जिंदगी सिर्फ चूल्हे चौके तक सिमित थी. पर यह दोनों महिलाएं तो कुछ और ही करने दुनिया में आई थी. जिसका पता उस वक्त चला जब प्रकाशी जोहरी के शूटिंग क्लब में गई और वहां अपना कारनामा दिखाया. आइये पढ़ते है प्रकाशी एंव चन्द्रो का शूटिंग सफर..

प्रकाशी तोमर का शार्प शूटिग सफर – प्रारंभिक जीवन (Early life of Prakashi Tomar)

प्रकाशी तोमर से जब पूछा गया की उन्होंने शूटिंग करना कैसे शुरू किया ? प्रकाशी तोमर ने कहा की उन्हें शूटिंग में कोई ज्यादा इंटरेस्ट नहीं था उन्होंने तो अपनी बेटी को सिखाने के लिए सबसे पहले पिस्टल हाथ में लिया था. अपनी कहानी बताते हुए वह कहती है की उनकी बेटी सीमा शूटिंग सीखना चाहती थी इसलिए वह रोजरी शूटिंग क्लब में अपनी बेटी को लेकर गई और अपनी बेटी का मनोबल बढाने के लिए जैसे ही पिस्टल हाथ में लेकर निशाना लगाया और किस्मत से वह निशाना लग गया. ऐसे में वहां मौजूद सभी लोगों ने मुझे हैरत से देखा. वहां मौजूद कोच फारुख पठान ने दादी का यह कारनामा देखकर उन्हें रोजरी रायफल क्लब ज्वाइन करने के लिए कहा तो दादी ने क्लब ज्वाइन कर लिया.

घर वालों से छिपकर करती थी निशानेबाजी की तैयारी – निशानेबाजी की शुरुआत (Shooter Dadi Career)

प्रकाशी तोमर कहती है की मैं एक साधारण गृहणी थी और इस उम्र में (उस वक्त प्रकाशी तोमर की उम्र 65 वर्ष थी) निशानेबाजी सीखना लोगों के लिए मजाक जैसा था इसलिए मैं खेत में सबसे छुपकर निशानेबाजी सिखा करती थी. इसमें उनकी जेठानी चन्द्रो तोमर ने भी उनका साथ दिया और वह दोनों ही निशानेबाजी सिखने लगी. साथ में उनकी बेटी सीमा भी उन्हें सिखाने लगी. पर कहते है ना की झूठ ज्यादा दिन नहीं चलता और जैसे ही लोगों को पता चला तो लोगों ने मजाक बनाना शुरू कर दिया. किसी ने तो कहा की ‘फ़ौज में जायेगी’ तो किसी ने कहा की ‘अब यह कारगिल युद्ध जीतकर आएगी’ पर मेरे घर वालों ने मेरा साथ दिया. और हम दोनों देवरानी जेठानी दोनों ही रोजरी राइफल क्लब में जाने लगी वह हफ्ते में एक दिन जाती और बाकी दिन घर का काम करती थी.

मिलने लगी पहचान – निशानेबाजी में मिली सफलता

प्रकाशी तोमर का कहना है की 15 पोते-पोतियों एंव 8 बच्चों की माँ जब अचानक शूटिंग करने लगे तो लोगों को कैसा लगेगा इसका अंदाजा आप लगा सकते है. पर निशानेबाजी हम हमारी पहली पंसद बन चुकी थी. यही वजह है की दिल्ली में डीआईजी के साथ निशानेबाजी करते हुए हमने डीआईजी को ही हरा दिया था और वहां से गोल्ड मेडल भी हासिल किया. यहीं से हमें एक पहचान मिली और अनेक प्रतियोगिता में भाग लिया और अभी तक उन्होंने 25 से भी ज्यादा मेडल जीत लिए है. धीरे-धीरे लोगों में पहचान मिलने लगी और इन दोनों महिलाओं को दुनिया ‘शूटर दादी या रिवोल्वर दादी’ के नाम से जानने लगी. दोनों ही देवरानी-जेठानी ने पूरी दुनिया में अपनी अनोखी निशानेबाजी से एक ख़ास पहचान बना ली है.

चन्द्रो और प्रकाशी तोमर दोनों ही एक साथ निशानेबाजी में सफल हुई

आपको यह सोचकर हैरानी होगी की दोनों देवरानी-जेठानी है और दोनों ने ही जब निशानेबाजी शुरू की तो उनकी उम्र 60 वर्ष से भी ज्यादा थी. इस उम्र में राइफल उठाना भी मुश्किल हो जाता है पर यह दोनों शूटर दादी एक हाथ से बंदूक उठाकर सही निशाना लगाती है. इनकी जिंदगी पर एक फिल्म हाल ही में रिलीज हुई है जिसका नाम है ‘सांड की आँख’ इस फिल्म में तापसी पन्नू एंव भूमि पेडनेकर चन्द्रो तोमर एंव प्रकाशी देवी का किरदार निभाया है.

शूटर दादी के जीवन पर बनने वाली फिल्म का नाम ‘सांड की आँख’ क्यों रखा गया ? (Saand Ki Aankh Movie)

आपको यह जानकार हैरानी हुई होगी की शूटर दादी यानि दो निशानेबाज महिलाओं की जिंदगी पर बनी फिल्म का नाम ‘सांड की आँख’ क्यों रखा गया तो इसके पीछे भी एक कहानी है. प्रकाशी तोमर एंव चन्द्रो तोमर बताती है की क्लब में निशानेबाजी की दौरान उन्हें बार बार कहा जाता था की हिटिंग द बुल्स आई जिसे चन्द्रो और प्रकाशी ‘सांड की आँख’ कहते थे इसी वजह से यह नाम फिल्म की स्क्रिप्ट में बार-बार दोहराया जा रहा था इसलिए निर्देशक ने इस फिल्म का नाम ‘सांड की आँख’ रखा गया. हालाँकि इस फिल्म का पहले नाम वूमनिया रखा गया जो बाद में बदल दिया गया.

शूटर दादी पर बनी फिल्म भूमिकाएं
फिल्म का नाम सांड की आँख
चन्द्रो तोमर का किरदार भूमि पेडनेकर
प्रकाशी तोमर का किरदार तापसी पन्नू
फिल्म का निर्देशन तुषार हीरानंदानी

शूटर दादी को मिले सम्मान (Shooter Dadi Awards and Achievements)

शूटर दादी को मिले अवार्ड
गूगल इंडिया वुमेन विल प्रोग्राम सम्मानित किया गया
प्रणव मुखर्जी द्वारासम्मानित किया
बाल विकास मंत्रालयआइकन लेडी अवार्ड
टीवी शो में नजर आईसत्यमेव जयते, इंडियाज गोट टैलेंट
अन्य25 मैडल भी मिल चुके हैं.
  • शूटर दादियों ने अपना कमाल टीवी शो में भी दिखाया है उन्हें इंडिया गोट टैलेंट में भी बुलाया गया और उन्हें सम्मानित किया गया है.
  • पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी द्वारा भी उन्हें सम्मानित किया गया है, राष्ट्रपति जी ने उन्हें अपने साथ दोपहर के भोजन में भी आमंत्रित किया था.
  • शूटर दादी को आइकन लेडी पुरस्कार भी दिया जा चूका है.
  • शूटर दादी के उपर हिस्ट्री चैनल के omg प्रोग्राम में भी स्टोरी सुनाई जा चुकी है.

प्रकाशी तोमर की बेटी-पौती ने भी किया है कमाल

बेटियांउपलब्धी
सीमाअन्तर्राष्ट्रीय विश्वकप निशानेबाजी में रजत पदक हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला एंव भारतीय सेना में कार्यरत हैं.
रेखानिशानेबाजी में कुछ अवार्ड मिले पर अब निशानेबाजी छोड़ चुकी है.
रूबी (पौती)पंजाब पुलिस में कार्यरत है.

 प्रकाशी तोमर की बेटी सीमा पहली महिला है जिसने अन्तर्राष्ट्रीय विश्व कप निशानेबाजी प्रतियोगिता में रजत पदक हासिल किया है. उन्होंने यह कारनामा 2010 में किया था. इतना ही नहीं अभी वह भारतीय सेना में कार्यरत है. उनकी पौती रूबी भी पंजाब पुलिस में कार्यरत है. उनकी एक और बेटी रेखा अब निशानेबाजी छोड़ चुकी है पर उनका भी निशाना अपनी माँ की तरह बहुत शानदार है. इनका जिक्र इनकी फिल्म ‘सांड की आँख’ में भी किया गया है.

मजाक बनाने वालों की बेटियों-पोतियों को सिखाती है शूटर दादी

शूटर दादी कहती है की एक समय था जब गाँव वाले हमारा मजाक बनाते थे, पर अब अपनी बेटियों और पोतियों को निशानेबाजी सिखाने के लिए हमारे पास भेजते हैं. हम सब कुछ भुलाकर उन्हें सिखाते है और आज यहाँ पर अनेक बड़े-बड़े निशानेबाज मौजूद है और पूरा गाँव निशानेबाजी को बहुत ज्यादा तवज्जु देता है. आटा-चक्की से पहचाना जाने वाला गाँव रोजरी अब शूटर दादी के नाम से जाना जाता हैं.

शूटर दादी चंद्रो तोमर मृत्यु

अपनी शूटिंग के हुनर से लोगों को अचंभित करने वाली शूटर दादी चंद्रो तोमर का कोरोना महामारी के चलते निधन हो गया है. दरअसल वे कुछ दिनों पहले कोरोना पॉजिटिव पाई गई. जिसके बाद उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगी और फिर उन्हें’ मेरठ के एक निजी अस्पताल में भर्ती किया गया. किन्तु ऑक्सीजन लेवल नहीं बढने के कारण उन्होंने 30 अप्रैल 2021 को दम तोड़ दिया. और 89 वर्ष की उम्र में वे स्वर्गवासी हो गई.

कहते है ना की हर एक सफल व्यक्ति की एक अलग सोच होती है, और वह अपनी सोच के अनुसार ही सफलता का परचम लहराता है. वैसे ही शूटर दादी का भी कहना है ‘इंसान कभी बूढा नहीं होता है, उसकी सोच बूढी हो जाती है’ इसलिए कभी भी अपने आप को कमजोर मत समझना अगर आप सोच सकते हो तो वह कर भी सकते हो. आपको हमारे द्वारा लिखा गया यह आर्टिकल कैसा लगा हमें जरुर बताएं.

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Karnika
कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं | यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं

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