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श्रावण सोमवार महत्व एवम कथा | Sawan Somvar Mahatva, Katha In Hindi

श्रावण सोमवार महीने का महत्व एवम कथा ( Shravan (Sawan) Somvar vrat , Month Mahatva, Katha, 2018 date In Hindi

यह महीना शिव जी का अत्यंत प्रिय महीना हैं. पुरे माह धार्मिक रीति रिवाजों का ताता लगा रहता हैं. कई विशेष त्यौहार श्रावण के इस महीने में मनाये जाते हैं. हमारे देश की परम्परायें हमें हमेशा ईश्वर से जोड़ती हैं, फिर उसमें एक दिन का त्यौहार हो या महीने भर का जश्न. सभी का अपना एक महत्व हैं. यहाँ ऋतुओं को भी पूजा जाता हैं. उनका आभार अपने तरीके से व्यक्त किया जाता हैं. हिन्दू कैलेंडर के महीनों के नाम व उनका महत्व जाने.

वर्षा ऋतू से ही चार महीने के त्यौहार शुरू हो जाते हैं, जिनका पालन सभी धर्म, जाति और अपनी मान्यताओं के अनुरूप करते हैं. उसी प्रकार सावन का हिन्दू समाज में बहुत अधिक महत्व हैं. इसे कई विधियों एवं परम्पराओं के रूप में देखा एवं पूजा जाता हैं.  

हमारे देश में ऋतुओं का समान आकार हैं मुख्य तीनों मुख्य ऋतुयें 4-4 माह के लिए आती हैं. सभी का होना हमारे देश की जलवायु पर विशेष प्रभाव डालता हैं. भारत देश कृषि प्रधान होने के कारण यहाँ वर्षा ऋतू का महत्व अधिक होता हैं, और उसमें सावन का महीना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता हैं.

Shravan Sawan somwar

साल 2018 में सावन सोमवार कब- कब है? ( Sawan Somvar 2018 date)

इस साल 2018 में सावन का महिना 28 जुलाई, दिन शनिवार से शुरू हो कर 26 अगस्त दिन रविवार को ख़तम होगा.

30 जुलाई सोमवार सावन सोमवार व्रत
6 अगस्त सोमवार सावन सोमवार व्रत
13 अगस्त सोमवार सावन सोमवार व्रत
20 अगस्त सोमवार सावन सोमवार व्रत

 

सावन का महीना महत्त्व  (Shravan / Sawan  Month Mahatva)

श्रावण यह हिंदी कैलेंडर में पांचवे स्थान पर आता हैं. यह वर्षा ऋतू में प्रारंभ होता हैं. शिव जो को श्रावण के देवता कहे जाते हैं, उन्हें इस माह में भिन्न- भिन्न तरीकों से पूजा जाता हैं. पुरे माह धार्मिक उत्सव होते हैं शिव उपासना, व्रत, पवित्र नदियों में स्नान एवं शिव अभिषेक का महत्व हैं. विशेष तौर पर सावन सोमवार को पूजा जाता हैं. कई महिलायें पूरा सावन महीना सूर्योदय के पूर्व स्नान कर उपवास रखती हैं. कुवारी कन्या अच्छे वर के लिए इस माह में उपवास एवं शिव की पूजा करती हैं. विवाहित स्त्री पति के लिए मंगल कामना करती हैं. भारत देश में पुरे उत्साह के साथ सावन महोत्सव मनाया जाता हैं.

श्रावण / सावन माह से जुडी धार्मिक कहानियाँ  (Shravan Ki Katha)

क्यूँ हैं सावन भगवान शिव का प्रिय महीना ?

कहा जाता हैं श्रावण भगवान शिव का अति प्रिय महीना होता हैं. इसके पीछे की मान्यता यह हैं कि दक्ष पुत्री माता सति ने अपने जीवन को त्याग कर कई वर्षों तक श्रापित जीवन जिया. उसके बाद उन्होंने हिमालय राज के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया. पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए पुरे श्रावण महीने में कठोरतप किया, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनकी मनोकामना पूरी की. अपनी भार्या से पुनः मिलाप के कारण भगवान् शिव को श्रावण का यह महीना अत्यंत प्रिय हैं. यही कारण हैं कि इस महीने कुमारी कन्या अच्छे वर के लिए शिव जी से प्रार्थना करती हैं.

यही मान्यता हैं कि श्रावण के महीने में भगवान शिव ने धरती पर आकार अपने ससुराल में विचरण किया था, जहाँ अभिषेक कर उनका स्वागत हुआ था इसलिए इस माह में अभिषेक का महत्व बताया गया हैं.

धार्मिक मान्यतानुसार श्रावण मास में ही समुद्र मंथन हुआ था, जिसमे निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने ग्रहण किया, जिस कारण उन्हें नील कंठ का नाम मिला और इस प्रकार उन्होंने श्रृष्टि को इस विष से बचाया, और सभी देवताओं ने उन पर जल डाला था इसी कारण शिव अभिषेक में जल का विशेष स्थान हैं.

वर्षा ऋतू के चौमासा में भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और इस वक्त पूरी श्रृष्टि भगवान शिव के आधीन हो जाती हैं. अतः चौमासा में भगवान शिव को प्रसन्न करने हेतु मनुष्य जाति कई प्रकार के धार्मिक कार्य, दान, उपवास करती हैं.

बैल पत्र का महत्व (Bel Patra Ka Mahatva)

शिव उपासना में बैल पत्र का विशेष महत्व हैं. कहा जाता हैं एक डाकू अपने जीवन व्यापन के लिए राहगीरों को लुटता हैं. एक बार वो रात्रि के समय एक पेड़ पर बैठ कर अपने शिकार का इंतजार करता हैं लेकिन समय बितता जाता हैं कोई नहीं आता. तभी डाकू के हृदय में अपनी करनी को लेकर पश्चाताप का भाव उत्पन्न होता हैं और वो खुद को कोसता हुआ उस पेड़ के पत्तो को तोड़- तोड़ कर नीचे फेकता रहता हैं. वह वृक्ष बैल पत्र का होता हैं और उसके नीचे शिव लिंग स्थापित होता हैं. डाकू के द्वारा फेका गया पत्ता शिव लिंग पर गिरता हैं और उसके करुण भाव के कारण उसमें एक सच्ची श्रद्धा का संचार होता हैं, जिससे प्रसन्न होकर भोलेनाथ उसे दर्शन देते हैं और उसकी पीढ़ा को समाप्त कर उसे सही राह पर लाते हैं. इस प्रकार बैल पत्र का विशेष महत्व होता हैं.

श्रावण/ सावन सोमवार व्रत का महत्व  (Savan Somvar Mahatva)

सोमवार का स्वामी भगवान शिव को माना जाता हैं. पुरे वर्ष में सोमवार को शिव भक्ति के लिए उत्तम माना जाता हैं. अत: शिव प्रिय होने के कारण श्रावण के सोमवार का महत्व अधिक बढ़ जाता हैं. श्रावण में पाँच अथवा चार सोमवार आते हैं, जिनमे एक्श्ना अथवा पूर्ण व्रत रखा जाता हैं. एक्श्ना में संध्या काल में पूजा के बाद भोजन ग्रहण किया जाता हैं. शिव जी की पूजा का समय प्रदोषकाल में होती हैं. कई जगहों पर श्रावण सोमवार के दिन शाला का अर्धावकाश होता हैं.

काँवर यात्रा का उल्लेख  (Savan Kaanvar Yatra Mahtva)

श्रावण में काँवर यात्रा का बहुत अधिक महत्व हैं. इसमें लोग भगवा वस्त्र धारण करके पवित्र नदियों के जल को एक काँवर में बाँधकर पैदल चलकर शिवलिंग पर उस जल को चढ़ाते हैं. काँवर एक बाँस का बना होता हैं जिसमे दोनों तरफ छोटी सी मटकी होती हैं जिसमे जल भरा होता हैं और उस बाँस को फूलों एवं घुन्घुरों से सजाया जाता हैं. साथ ही “बोल बम” का नारा लिए कई काँवर यात्री श्रृद्धा पूर्वक पद यात्रा कर पवित्र जल को शिवलिंग पर अर्पण करते हैं. श्रावण का पुराणों में बहुत महत्व हैं. कहते हैं रावण ने सबसे पहले काँवर यात्रा की थी एवं भगवान राम ने भी काँवडी के रूप में शिवलिंग पर जल चढ़ाया था. इस तरह से यह कार्य पुरुषों द्वारा भी किया जाता हैं. अतः श्रावण का यह महीना स्त्री एवं पुरुषों दोनों के द्वारा अपने- अपने तरीकों से मनाया जाता हैं.

भुजरिया का महत्व  (Shravan Bhujariya Mahtva)

शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा नाग पंचमी के दिन से भुजरिया बोई जाती हैं. इसमें घर में टोकनी में मिट्टी डालकर कर गेहूँ बोते हैं. इस दिन से पूर्णिमा के दिन तक इसकी पूजा की जाती हैं. श्रावण पूर्णिमा अर्थात रक्षाबंधन के दुसरे दिन इस भुजरियाँ को सभी को बाँटा जाता हैं. आसपास के घरों एवं रिश्तेदारों को भुजरिया दी जाती हैं.

श्रावण व्रत का विवरण  (Sawan Somwar Vrat Mahtva)

श्रावण के महीने में शिव जी के लिए व्रत रखे जाते हैं जिनमे सोमवार का विशेष महत्व हैं. शिव जी की पूजा कैसे की जाती हैं जाने क्रमबध्द तरीके से. सर्वप्रथम गणेश जी की पूजा की जाती हैं क्यूंकि उन्हें वरदान प्राप्त हैं कि किसी भी कार्य में सबसे पहले गणेश का आव्हान किया जाता हैं. उसके बाद शिव जी की पूजा की जाती हैं.

शिव पूजन का विवरण  (Shiv poojan Details)

शिव पूजा में अभिषेक का विशेष महत्व हैं जिसे रुद्राभिषेक कहा जाता हैं. प्रति दिन रुद्राभिषेक करने का नियम पालन किया जाता हैं. रुद्राभिषेक करने की विधि इस प्रकार है.

  • सर्वप्रथम जल से शिवलिंग का स्नान कराया जाता हैं फिर क्रमशः दूध, दही, शहद, शुद्ध घी, शक्कर इन पांच अमृत जिन्हें मिलाकर पंचामृत कहा जाता हैं के द्वारा शिवलिंग को स्नान कराया जाता हैं. पुनः जल से स्नान कराकर उन्हें शुद्ध किया जाता हैं.
  • इसके बाद शिव लिंग पर चन्दन का लैप लगाया जाता हैं. तत्पश्चात जनैव अर्पण किया जाता हैं अर्थात पहनाया जाता हैं.
  • शिव जी पर कुमकुम एवं सिंदूर नहीं चढ़ाया जाता. उन्हें अबीर अर्पण किया जाता हैं.
  • बैल पत्र, अकाव के फूल, धतूरे का फुल एवं फल चढ़ाया जाता हैं. शमी पत्र का विशेष महत्व होता हैं. धतूरे एवं बैल पत्र से भी शिव जी को प्रसन्न किया जाता हैं. शमी के पत्र को स्वर्ण के तुल्य माना जाता हैं.
  • इस पुरे क्रम को ॐ नम: शिवाय मंत्र के जाप के साथ किया जाता हैं.
  • इसके पश्चात् माता गौरी का पूजन किया जाता हैं.

श्रावण माह एकदशी विवरण (Sawan Ekadashi Mahatva)

श्रावण के महीने में एकादशी का भी महत्व होता हैं इस माह में दो एकादशी होती हैं जिसमें –

  • पुत्रदा एकादशी : यह एकदशी शुक्ल पक्ष में आती हैं.
  • कामिका एकादशी : यह कृष्ण पक्ष एकदशी कही जाती हैं.

श्रावण के विशेष त्यौहार (Festival in Shravan/ Sawan)

क्रमांक श्रावण के त्यौहारों के नाम विस्तार
1 हरियाली तीज श्रावण शुक्ल पक्ष की तृतीया को तीज का यह त्यौहार मनाया जाता हैं. इसमें नव विवाहिता अपने घर आती हैं. कुमारी कन्या वर की कामना हेतु यह व्रत करती हैं. इसे निराहार किया जाता हैं. माता गौरी को सोलह श्रृंगार चढ़ाया जाता हैं. हर्ष के साथ संगठित होकर महिलायें एवं कन्या यह त्यौहार मनाती हैं.
2 नाग पंचमी यह शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाई जाती हैं. इसमें नाग देवता की पूजा की जाती हैं.
3 रक्षाबंधन श्रावण की पूर्णिमा पर राखी का त्यौहार मनाया जाता हैं. जिसे भाई-बहन का विशेष त्यौहार माना जाता हैं.
4 श्रावणी मेला इसे झारखण्ड तरफ मनाया जाता हैं. इसमें पवित्र नदियों के स्नान का महत्व हैं.
5 कजरी तीज  शुक्ल पक्ष की नवमी में मनाया जाता हैं इसे खासतौर पर किसान एवं महिलाओं द्वारा मनाया जाता हैं. यह विशेषकर मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ में मनाया जाता हैं.

श्रावण माह में अन्य रिवाज (Shravan Month Customs)

  • ऐसे कई त्यौहार मान्यतानुसार श्रावण माह में मनाये जाते हैं. सबका महत्व होता हैं प्रेम और अपनेपन से मिलकर ईश्वर में अपनी आस्था को बनाये रखना.
  • कहते हैं श्रावण की पूजा हमेशा परिवार जनों के साथ मिलकर की जानी चाहिये, इससे आपसी मन मुटाव कम होते हैं, और एकता बनी रहती हैं. खुशियाँ आती हैं.
  • श्रावण में हिन्दू धर्म में पूजा का बहुत महत्व हैं साथ ही श्रावण में मांसाहार खाना वर्जित माना गया हैं. श्रावण में कई लोग प्याज, लहसुन भी नहीं खाते. कई पुरुष श्रावण में दाड़ी एवं बाल कटवाना गलत मानते हैं.
  • श्रावण के महीने में शिव के सभी ज्योतिर्लिंगों में रथयात्रा निकलती हैं. खासतौर पर यह यात्रा प्रति श्रावणी सोमवार को निकलती हैं. आखरी सोमवार शिव जी की बारात निकाली जाती हैं जिसमे नंदी भी लाये जाते हैं.
  • श्रावण के महीने में सुंदर कांड, रामायण, भागवत कथा का वाचन एवं श्रवण किया जाता हैं. इसे पुण्य का कार्य समझा जाता हैं. इसके अलावा घरो में भजन, शिव अभिषेक एवं सत्यनारायण की कथा की जाती हैं. पूरा महीने दान का भी महत्व होता हैं.

इस तरह से हिन्दू धर्म के लोगों के द्वारा श्रावण माह विशेषरूप से त्योहारों का माह होता है. जिसे लोग बहुत ही उत्साह के साथ मनाते हैं.

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Karnika

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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3 comments

  1. wow bhot acha lga apka article dil khus ho gya

  2. दीपक कुमार

    हालांकि बिल्वपत्र को हमेशा नहीं तोड़ सकते।
    – शिव उपासना के प्रमुख दिन सोमवार को बिल्वपत्र नहीं तोड़ना चाहिए।
    – चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या को बिल्वपत्र नहीं तोडऩा चाहिए।
    – किसी माह में संक्राति के दिन भी बिल्वपत्र तोड़ना उचित नहीं है।अगर इन तिथियों में शिवपूजा में बिल्वपत्र की आवश्यकता हो तो उसके लिए यह नियम है कि आप शिव पूजा में उपयोग किए गए बिल्वपत्र को फिर से धोकर शिव को अर्पित कर सकते हैं।

  3. दीपक कुमार

    बिल्व वृक्ष को महादेव का रूप माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि बिल्व वृक्ष के जड़ में महादेव का वास रहता है इसलिए इस पेड़ की जड़ में महादेव की पूजा की जाती है। इतना ही नहीं, कहते हैं बिल्व वृक्ष को सींचने से सभी तीर्थों का फल मिल जाता है।

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