कोरोना वायरस ने ताज़ा की स्पेनिश फ्लू की यादें , जाने क्या था स्पेनिश फ्लू, कैसे फैला था पूरी दुनिया में | Spanish Flu in hindi

स्पेनिश फ्लू क्या था और कैसे पूरी दुनिया में फैल गया था? (1918 फ्लू महामारी वायरस) (Spanish Flu in hindi, Vaccine, Cure, Symptoms, History, Death Toll, Origin, Spanish flu vs Coronavirus, Influenza virus)

साल 2020 में जिस तरह से कोरोनावायरस के चलते पूरी दुनिया भर में इमरजेंसी का माहौल पैदा हो गया है ठीक इसी तरह 19वीं सदी में एक और ऐसी ही महामारी के चलते पूरे विश्व में बहुत लोगों की मौत हो गई थी. उस महामारी का नाम स्पेनिश फ्लू था जिसके कारण एक देश से दूसरे देश तक महामारी के चलते बहुत सारे सैनिक और देश के नागरिकों को अपनी जान गवानी पड़ी थी. आज हम आपको बताएंगे स्पेनिश फ्लू के उस भयावह इतिहास के बारे में बतायेंगें.

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क्या है स्पेनिश फ्लू?

स्पेनिश फ्लू एक प्रकार का वायरस है जिसके सभी लक्षण कोरोनावायरस की तरह मिलते जुलते हैं, जैसे ठंड के साथ बुखार आना, गले में इन्फेक्शन, सांस लेने में तकलीफ होना, नाक से पानी बहना, सर्दी जुखाम और उसके साथ खांसी की परेशानी अचानक से शरीर में कमजोरी का महसूस होना और लंबे समय तक बुखार बने रहना. देखने में आज के समय में यह सारे लक्षण कोरोनावायरस के हैं लेकिन यही सारे लक्षण सन 1918 के दौरान भी लोगों में देखे गए थे जिसे स्पेनिश फ्लू का नाम दिया गया था.

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स्पेनिश फ्लू का इतिहास

डब्ल्यूएचओ के अनुसार सितंबर 1918 में स्पेनिश फ्लू की शुरुआत देखी गई थी, जब यूएस मिलिट्री का एक जवान इस फ्लू से पीड़ित पाया गया, जिसकी जांच पड़ताल के बाद इस वायरस की पहचान की गई, जिसके बाद बहुत सारे सैनिकों में यह बीमारी बहुत शीघ्रता से फैल गई. तब ऐसा समय था जब पूरे विश्व में यातायात के पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं थे, इसलिए एक देश से दूसरे देश तक एक बीमारी के फैलने में लगभग महीनों बीत जाते थे. सन 1918 के दौरान इस फ्लू की वजह से लगभग 7 से 10करोड लोगों ने अपनी जान गवा दी थी. लगभग 50 करोड़ लोगों को इस बीमारी ने अपनी चपेट में ले लिया था. इस वायरस की वजह से लगभग 3 महीने के अंदर दुनिया की एक तिहाई जनसंख्या को आघात पहुंच गया था.

फ्लू का नाम स्पेनिश फ्लू क्यों रखा गया?

स्पेनिश फ्लू का नाम सुनते ही ऐसा लगता है कि इस फ्लू का आरंभ स्पेन से हुआ, लेकिन इसके पीछे एक दिलचस्प बात यह है कि इसका आरंभ तो संयुक्त राज्य अमेरिका से हुआ लेकिन फिर भी इसको स्पेनिश फ्लू का नाम दिया गया. इसके पीछे ऐतिहासिक कहानी बताई जाती है जिसमें यह बताया गया कि प्रथम विश्व युद्ध के दौरान जो देश इस विश्व युद्ध में सम्मिलित थे उन सभी देशों के संचार साधन और रेडियो संसाधन को बंद कर दिया गया था, जिसके बाद एक स्पेन ही एक ऐसा देश था जिसके जरिए इस बीमारी की खबर पूरी दुनिया में रेडियो के जरिए फैलाई गई. जिसके बाद इसे स्पेनिश फ्लू का नाम दे दिया गया.

स्पेनिश फ्लू का शिकार कौन हुए थे ?

आमतौर पर किसी भी वायरस का शिकार छोटे बच्चे या फिर कोई बुजुर्ग या किसी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति हुआ करते हैं परंतु स्पेनिश फ्लू एक ऐसा वायरस था जो 5 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के बीच फेल रहा था जिसमें 20 साल से लेकर 40 साल तक के जवानों को यह वायरस अपना शिकार बना रहा था. इस घटना को देखकर दुनिया भर के सभी विशेषज्ञ बेहद हैरानी में पड़ गए थे क्योंकि आमतौर पर एक वायरस उन्हीं व्यक्तियों पर अपना आक्रमण करता है जिनकी इम्यूनिटी शक्ति बहुत कम होती है परंतु इस वायरस के मामले में कुछ उल्टे ही लक्षण देखे गए.

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स्पेनिश फ्लू ने कौन-कौन से देश को प्रभावित किया था –

यह वायरस एक युवक से आरंभ होकर बहुत जल्द अपना असर लेकर जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस, स्पेन, यूनाइटेड स्टेट्स और भारत में भी पहुंच चुका था. भारत देश में भी लगभग 1000 लोगों को इस बीमारी ने अपना शिकार बनाया था, जिसके बाद पीड़ित लोगों में से 40 लोग अपनी जान गवा चुके थे. विशेषज्ञों द्वारा धीरे-धीरे इस वायरस को लेकर जब रिसर्च की गई तो यह बात सामने आई कि यह एक ऐसी महामारी है जो एक व्यक्ति के छींकने और खाँसने से दूसरे व्यक्ति को संक्रमित कर रही है. जिसके बाद धीरे-धीरे सभी देशों के संक्रमित और संक्रमित लोगों ने मुंह पर मास्क पहनना आरंभ कर दिया.

यह एक ऐसा भयावह है वायरस था जो धीरे-धीरे पूरी दुनिया में फैल कर अपनी तबाही मचाता रहा और लोगों को अपनी चपेट में लेकर मृत्यु के हवाले कर दिया. विशेषज्ञों ने गहरी खोज के बाद धीरे-धीरे इस वायरस पर काबू पाना आरंभ कर दिया, जिसके बाद लगभग 2 साल के अंदर इस बीमारी पर काबू पाया गया. दुनिया की यह सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदा मानी गई थी जिसके अंतर्गत दुनिया में बहुत बड़ी तबाही से पूरे विश्व को गुजरना पड़ा था. ब्रिटिश सेना का लगभग आधा भाग इसकी चपेट में आ चुका था. जिसके बाद 54 हजार से ज्यादा सैनिक इस बीमारी की चपेट में आकर गंभीर रूप से पीड़ित हुए जिसके बाद 1100 सैनिकों ने अपनी जान गवा दी.

स्पेनिश फ्लू कैसे काम करता था 

उस समय संपूर्ण संसाधन ना होने की वजह से इस बीमारी के कारण का पता नहीं लग पाया लेकिन बाद में 1978 के दौरान कुछ वैज्ञानिकों ने उस समय की मृत शरीरों के जरिए इस बात का पता लगाया कि स्पेनिश फ्लू से किस तरह इंसान की मौत हो रही थी. विशेषज्ञों ने बताया कि उन मृत शरीरों की नसों की जांच करने के बाद बात सामने आई कि यह फ्लू जिस व्यक्ति को संक्रमित करता था उसके शरीर में जाकर खून के थक्के जमा देता था जिसकी वजह से उसे सांस लेने में तकलीफ होती थी और धीरे-धीरे वह शरीर के सभी नसों को जाम कर देता था जिसकी वजह से इंसान की मौत हो जाती थी.

विशेषज्ञों द्वारा ऐसा अंदाजा लगाया जा रहा है कि कोरोनावायरस जिस तरह से पूरे विश्व में अपना प्रकोप फैला रहा है, आने वाले समय में स्पेनिश फ्लू फिर से विश्व में दस्तक देने वाला है और लोगों के बीच उसी महामारी का भयावह मंजर उत्पन्न करने वाला है. उस समय तो विश्व के अंदर ऐसी महामारियों से निजात पाने के लिए प्रचुर मात्रा में संसाधन उपलब्ध नहीं थे. परंतु आज के समय में विशेषज्ञों ने जहां इतनी प्रगति कर ली है उसके बावजूद भी जब वह कोरोनावायरस का कोई तोड़ नहीं ढूंढ पाए हैं तो ऐसे में इस फ्लू से जूझने के लिए खुद को कैसे तैयार कर पाएंगे. विपदा चाहे कैसी भी हो दुनिया भर के सभी नागरिकों और विशेषज्ञों को उनसे जूझने के लिए पहले से प्रबंध करना आवश्यक है ताकि उनके प्रकोप की वजह से पूरी दुनिया को इतनी तबाही का सामना ना करना पड़े.

कोरोना वायरस और स्पेनिश फ्लू में क्या अंतर है? (Spanish flu vs Coronavirus in hindi)

  • कोविद 19 का फैलने का कारण कोरोना वायरस है, जबकि स्पेनिश फ्लू जिसे इन्फ्लुएंजा भी कहते है, उसके फैलने का कारन इन्फ्लुएंजा वायरस था. ये दोनों ही वायरस अलग-अलग परिवार से आते है. दोनों में कोई संबंध नहीं है, दोनों का फैलने का कारण, तरीका और काम भी पूरी तरह अलग है.
  • कोरोना वायरस ने अपना शिकार उन लोगों को बनाया है, जो अधिक उम्र के है, या पहले से किसी अन्य बीमारी से ग्रसित है, जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो गई है. इसके विपरीत स्पेनिश फ्लू ने दुनिया के जवानों और नवजात शिशुओं को अपना शिकार बनाया था. स्पेनिश फ्लू में ज्यादातर लोग जो मारे गए थे, उनकी उम्र 18 से 40 साल के बीच थी.
  • आज से 100 साल पहले संचार या वाहन का विअस उतना नहीं था, उस समय स्पेनिश फ्लू को एक जगह से दूसरी जगह पहुँचने में बहुत समय लगा था, जिससे यह तक़रीबन 2 साल तक प्रभावशाली रही. जबकि आज के समय में इतने साधन है कि मिनटों में लोग लम्बी दुरी तय कर लेते है, जिससे यह बीमारी एक देश से दुसरे देश बड़ी आसानी से फ़ैल रही है.
  • 100 साल पहले स्वास्थ्य संबंधी जानकारी, इलाज भी इतना पुख्ता नहीं था, जितना आज के समय में है. लोगों तक बीमारी को लेकर सही जानकारी ही नहीं पहुँच सकी थी, लेकिन आज ऐसा नहीं है. सरकार आम जनता तक सही जानकारी पहुंचा रही है, आम जनता भी इतनी जागरूप है, और पूरी सावधानी बरत रही है.
  • स्पेनिश फ्लू में करोड़ों लोगो के मरने का एक कारन यह भी था कि लोगों को इसके बारे में जानकारी ही नहीं थी, लोग किसी भी बीमारी को लेकर इतने जागरूप या सतर्क नहीं हुआ करते थे. लेकिन आज ऐसा नहीं है, लोग अब पूरी सतर्कता रखते है. हम परमेश्वर से यही कामना करते है, कि कोरोना वायरस, स्पेनिश फ्लू की तरह भयानक न हो और जल्द से जल्द इस पर काबू भी पा लिया जाये.

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Karnika

कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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