सुपर स्प्रेडर्स क्या होते है, कैसे इनके द्वारा कोरोना वायरस फैलता है | What are Super Spreaders Coronavirus in hindi

सुपर स्प्रेडर्स क्या होते है, कैसे इनके द्वारा कोरोना वायरस फैलता है (What are Super Spreaders Coronavirus in hindi, Meaning, How coronavirus is transmitted by Super Spreaders?) 

भारत में दिन प्रतिदिन कोरोनावायरस से संक्रमित केसों की संख्या बढ़ती जा रही है ऐसे में बात यह सामने आ रही है कि आखिरकार ऐसा हो क्यों रहा है? देशभर में पूरे लॉक डाउन के बावजूद लगातार मरीजों की संख्या बढ़ना देश के लिए बहुत ज्यादा दुख और चिंता की बात है ऐसे में यही बात सामने आती है कि यह सब सिर्फ सुपर स्प्रेडर्स के कारण हो रहा है. सुपर स्प्रेडर्स यह नाम शायद आपने पहली बार सुना होगा लेकिन एक यही कारण है जिसकी वजह से बड़ी तादाद में कोई महामारी कुछ ही पलों में सैकड़ों लोगों के बीच फैल जाती है. आज हम आपको सुपर स्प्रेडर्स के नाम से अवगत कराएंगे कि आखिर यह होता क्या है और महामारी फैलाने में इनका क्या योगदान होता है?

Super Spreaders Coronavirus hindi how transmitted

कोरोना का महासंकट

पिछले 24 घंटे में पूरे भारत के अंदर कोरोनावायरस से संक्रमण के 230 से भी ज्यादा मामले सामने आए हैं यह आंकड़ा सिर्फ 1 दिन का है जो आज तक का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है. पूरे भारत देश में तालाबंदी के बावजूद भी यदि इतना बड़ा आंकड़ा संक्रमित लोगों का सामने आता है तो इसका केवल एक ही कारण है और वह है सुपर स्प्रेडर्स. जिनको इस वायरस के तेज संक्रमण का मुख्य कारण माना जा रहा है.

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सुपर स्प्रेडर्स कौन होते हैं?

सामान्य भाषा में यदि बात करें तो संक्रमण फैलाने वाला वह व्यक्ति जिसे कोई संक्रमण लग गया हो और यदि उसके परिवार में 3 सदस्य रहते हो तो उन तीनों को भी वह संक्रमण अपने कब्जे में ले लेता है. ऐसे में उस व्यक्ति को एक नॉर्मल स्प्रेडर कहा जाएगा. एक स्प्रेडर को वैज्ञानिक भाषा में जिसे R0- Rनॉट से संबोधित किया जाता है. यदि एक संक्रमित व्यक्ति ने तीन व्यक्तियों को संक्रमण दिया तो उसका संबोधन R3 से किया जाएगा. यदि एक संक्रमित व्यक्ति दो या तीन व्यक्तियों को ही संक्रमित करता है तो उसे एक नॉर्मल स्प्रेडर कहा जाता है. परंतु जब एक संक्रमित व्यक्ति कई हजार और सैकड़ों व्यक्तियों को संक्रमित कर सकते हैं तो उन्हें उसी प्रकार से संज्ञा दी जाती है- जैसे R100 या R1000. ऐसे बहुत सारे केस कोरोनावायरस जैसी महामारी के दौरान देखे जा चुके हैं जिनका वर्णन हम हमारी इस पोस्ट के जरिए करने वाले हैं. आर नॉट के आंकड़े में कमी लाने के लिए ही सोशल डिस्टेंसिंग का फार्मूला अपनाया गया है ताकि एक संक्रमित व्यक्ति दूसरे स्वस्थ व्यक्ति को संक्रमित ना कर सके.

क्यों बनता है एक स्वस्थ व्यक्ति सुपर स्प्रेडर?

 अब सवाल यह आता है कि सुपर स्प्रेडर्स आखिरकार इतने ज्यादा संक्रमण कैसे फैला सकते हैं? क्या इनमे कोई जादुई शक्ति है?

  • तो यदि बात करें जादुई शक्ति की तो वह तो किसी इंसान में नहीं है. परंतु हां इनके द्वारा संक्रमण से लाए जाने की गति उनके द्वारा काम करने लोगों से मिलने जुलने और उनकी दिनचर्या पर निर्भर करता है.
  • दूसरा कारण यह है कि कुछ लोग जब संक्रमित हो जाते हैं तो आरंभिक दौर में उन्हें अपने संक्रमण होने का पता ही नहीं चल पाता है जिसकी वजह से वे अपनी आम दिनचर्या के अनुसार लोगों के बीच घूमते फिरते हैं और काम करते रहते हैं जिसकी वजह से वे अपना संक्रमण दूसरे कमजोर लोगों को दे देते हैं.
  • तीसरा सबसे बड़ा कारण यह होता है कि कुछ लोगों की इम्युनिटी पावर बहुत अच्छी होती है वे संक्रमित होने के बाद भी जल्दी से बीमार नहीं पड़ते हैं जिसकी वजह से उन्हें पता नहीं चल पाता है कि वह संक्रमण से ग्रसित हो चुके हैं. हालांकि उनका संक्रमण कम इम्यूनिटी पावर वाले लोगों के अंदर बहुत जल्दी चला जाता है जिसकी वजह से वह व्यक्ति दूसरे स्वस्थ व्यक्तियों को शीघ्रता से अपना संक्रमण बिना पता लगे ही पहुंचा देता है.
  • एक कारण यह भी होता है कि कुछ लोग बहुत ज्यादा भीड़ भाड़ वाली जगह पर रहते हैं ऐसे में उन पर वायरस का अटैक बहुत बड़ी मात्रा में होता है. मतलब एक साथ उन पर बहुत ज्यादा वायरस का टाइप हो जाता है जिसकी वजह से वे तो बीमार नहीं पड़ते हैं लेकिन उनका वायरस दूसरे इंसानों में बहुत शीघ्रता से चला जाता है. ऐसी स्थिति में उनकी लाल और साथ ही में उनका मूत्र विसर्जन भी किसी स्वस्थ व्यक्ति के लिए हानिकारक साबित होता है.

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सुपर स्प्रेडर्स का नियम

विशेषज्ञों की मानें तो सुपर स्प्रेडर्स का नियम 80/20 के आंकड़े पर काम करता है. छोटे रूप में देखा जाए तो भी इस नियम को 20/80 के रूप में भी देखा जा सकता है. यह पूरा नियम लोगों की भीड़ भाड़ पर निर्भर करता है. यदि सरल शब्दों में इस नियम के बारे में बात की जाए तो हम यह कह सकते हैं कि किसी बीमारी से 20 लोग संक्रमित हुए और उन्होंने 80 लोगों को संक्रमित कर दिया यह एक साधारण सुपर स्प्रेडर्स का नियम है. ऐसा कोरोना वायरस के केस में ही नहीं बल्कि प्रत्येक प्रकार की महामारी के केस में कहा जाता है कि कुछ 10 से 15 लोग संक्रमित हो जाते हैं जिसकी वजह से सैकड़ों लोग संक्रमण की अवस्था में पहुंच सकते हैं.

सुपर स्प्रेडर्स की पहचान करना क्यों आवश्यक है?

अक्सर ऐसा होता है जब कोई बीमारी फैलना आरंभ होती है तब एक या दो व्यक्ति उस से ग्रसित होते हैं परंतु धीरे-धीरे जब 10 से पंद्रह और पंद्रह से सैकड़ों उसके बाद जब गिनती हजारों तक पहुंच जाती है तब ऐसी स्थिति में एक कॉमन स्प्रेडर्स की पहचान करना बेहद जरूरी होता है. जिस व्यक्ति को अपनी बीमारी के बारे में पता नहीं चलता है ऐसे में वह आम दिनचर्या के अनुसार काम करते हुए सैकड़ों लोगों को ग्रसित करता जाता है इससे पहले इस संक्रमण के प्रभाव को बढ़ने से रोका जा सकता है यदि हम सुपर स्प्रेडर्स की पहचान पहले से ही कर ले तो इस संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है. ऐसे सुपर स्प्रेडर्स केस पूरी दुनिया में बहुत सारे हुए जिनमें से कुछ मशहूर केस के बारे में हम आपको इस पोस्ट में अवश्य बताएंगे.

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कोरोना वायरस के दौरान पाये गए कुछ सुपर स्प्रेडर्स:-

सुपर स्प्रेडर्स के के इतिहास के समय से ही देखे जा रहे हैं इनका सबसे बडे और सबसे मशहूर कुछ उदाहरण हम आपको यहां पर बताने वाले हैं.

  • ऐतिहासिक केस :- सबसे पुराना और बड़ा केस टाइफाइड मैरी का था जो सन 1859 से लेकर 1938 तक चला था. यूनाइटेड स्टेट में रहने वाली हरी नाम की महिला एक कुक का काम किया करती थी और जिस घर में भी वह खाना बनाने जाया करती थी उस घर का व्यक्ति बीमार पड़ जाता था. ऐसे में वह बहुत सारे घरों के साथ जुड़ी हुई थी लेकिन टाइफाइड होने की वजह से वह कभी भी बीमार नहीं पड़ी और ना ही उसे किसी भी प्रकार का लक्षण टाइफाइड होने का महसूस हुआ. ऐसे में वह अपने समय के हिसाब से काम करती रही और लोगों में टाइफाइड की बीमारी फैलाती रही. जब विशेषज्ञों ने जांच की तब सबके बीच की एक कॉमन कड़ी मैरी को पाया गया जिसकी जांच करने के बाद उसे तुरंत आइसोलेट कर दिया गया. 1900 से लेकर 1907 तक मैरी मेलन के रक्त में टाइफाइड के विषाणु थे लेकिन उन्हें ही इस बात का पता नहीं था. उसके बाद जब उन्हें आइसोलेट किया गया तो उन्हें जिंदगी भर के लिए उस अस्पताल में ही रहना पड़ा लगभग 30 साल तक मेरी मेलन ने उस अस्पताल में रहकर आइसोलेशन वार्ड में अपनी जिंदगी गुजारी. इसके बाद मैरी मेलन का नाम सुपर स्प्रेडर्स में दर्ज कर दिया गया. हालांकि यह केस 100 साल पुराना हो चुका है लेकिन अब तक का सबसे बड़ा और मशहूर के यही जाना जाता है.
  • ऐसा ही एक मशहूर के साउथ कोरिया में हुआ जिसको नाम दिया गया पेशेंट 31. यह कोई पुराना केस नहीं है हाल ही के कोरोनावायरस जैसी महामारी का एक मशहूर सुपर स्प्रेडर्स है जिसे पेशेंट 31 नाम दिया गया है. आंकड़ों के अनुसार देखा जाए तो 18 फरवरी तक साउथ कोरिया में एक भी व्यक्ति कोरोनावायरस से संक्रमित नहीं था. अचानक से 19 फरवरी के दिन दो या तीन लोगों को कोरोनावायरस से संक्रमित पाया गया और उसके बाद 20 फरवरी को चौंका देने वाला आंकड़ा सामने आया जब कोरोनावायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 30 हो गई. और कुछ ही दिनों में वह संख्या सैकड़ों को पार कर गई. जब विशेषज्ञों ने इसकी जांच पड़ताल की तब यह बात सामने आई कि डेगू नामक स्थान पर स्थित चर्च में शिंचेनजी नाम का व्यक्ति वुहान शहर होकर वापस लौटा था और चर्च में वह कई लोगों में आया जिसके बाद लगभग 51 लोगों को उसने संक्रमित किया. सरकार द्वारा उन्हें क्वॉरेंटाइन में रहने की हिदायत दी गई लेकिन उन्होंने क्वॉरेंटाइन को ना मानते हुए अपनी दिनचर्या जारी रखी जिसकी वजह से साउथ कोरिया में मरीजों की संख्या बढ़ गई.
  • अगला और सबसे बड़ा सुपर स्प्रेडर्स साबित हुआ जो सेंट्रल यूरोप में मौजूद एक रिजॉर्ट टाउन कित्ज़लोच में काम करने वाला एक व्यक्ति था. यह एक बहुत मशहूर स्किंग रिसोर्ट है जहां पर काफी सारे लोग प्रत्येक वर्ष सर्दियों के मौसम मे स्किंग का आनंद लेने आते हैं. अधिकतर बहुत सारे देशों के लोग यहां पर स्किंग का आनंद उठाने आते हैं. इस रिजॉर्ट में काम करने वाला एक 36 वर्षीय व्यक्ति कोरोनावायरस से संक्रमित था लेकिन उसे इस बात का पता भी नहीं था. वह बारटेंडर के रूप में इस रिसोर्ट में काम करता था जिस के संपर्क में रोज सैकड़ों लोग आया करते थे. इस रिसॉर्ट में काम करने वाले बारटेंडर की वजह से जर्मनी आईसलैंड नॉर्वे और डेनमार्क सहित कई सारे देशों में हजारों लोग संक्रमित पाए गए. डेनमार्क में जब शुरुआती दौर में 1400 के संक्रमित पाए गए तो उनमें से 298 के ऐसे थे जिन्होंने ऑस्ट्रिया के उस रिजल्ट में विजिट किया था. वे सभी लोग उस बारटेंडर की वजह से संक्रमित हुए थे. इसके अलावा जर्मनी में 300 के उस बारटेंडर की वजह से संक्रमित हुए. वही नॉर्वे में 1742 के में से 549 केस ऑस्ट्रिया के उस रेस्टोरेंट से जुड़े हुए थे जिनको संक्रमण का शिकार होना पड़ा. तो यदि बात करें सुपर स्पाइडर की तो एक बार टेंडर ने लगभग 1100 से ऊपर लोगों को अपने संक्रमण का शिकार बना दिया जबकि उसे ही अपने संक्रमण का पता नहीं था. जब बाकी देशों को पता चला कि उनके देश में यह वायरस सेंट्रल ऑस्ट्रिया से आया है तब उन्होंने ऑस्ट्रिया की सरकार को अपने देश में संदिग्ध ढूंढने के लिए कहा तब उन्होंने यह जवाब दिया कि यह हमारा कमाई का अच्छा समय है हम इस समय कुछ भी बंद नहीं कर सकते हैं. 10 मार्च तक वे रेसॉर्ट बिल्कुल भी बंद नहीं किए गए उसके बाद 13 मार्च को सब कुछ पूरी तरह से बंद कर दिया गया और उस रिजॉर्ट को क्वॉरेंटाइन कर दिया गया.
  • भारत के जम्मू कश्मीर में भी एक ऐसा ही कोरोनावायरस व्यक्ति था जिसने कई सारे लोगों को संक्रमित कर दिया. वह व्यक्ति भारत के कई हिस्सों जैसे उत्तर प्रदेश से होते हुए दिल्ली और यूपी गया और फिर जम्मू-कश्मीर पहुंचा. जिसकी वजह से उस व्यक्ति ने कई सारे लोगों को संक्रमित कर दिया था.
  • वर्तमान समय का एक सबसे ज्यादा सुपर स्प्रेडर्स माने जाने वाला केस पंजाब में देखा गया जिसमें लगभग 40000 लोगों की जान को खतरे में डाल दिया. वह एक 70 साल का व्यक्ति था जो हाल ही में इटली और जर्मनी घूम कर वापस अपने देश पंजाब में आया था. वह एक धार्मिक और माननीय अध्यापक था जिसकी वजह से कई सारे लोग उससे मिलने जुलने आया करते थे. उसकी विदेश यात्रा के पता चलते ही सरकार ने उसे क्वॉरेंटाइन में रहने की सलाह दी परंतु उसने उनके क्वॉरेंटाइन को तोड़कर और सरकार के नियमों का उल्लंघन करके अपनी दिनचर्या को जारी रखा. विदेश यात्रा से वापस आकर वह व्यक्ति एक बहुत बड़ी सभा में भी गया था जिसमें काफी सारे लोग आए थे. उस व्यक्ति की वजह से पंजाब के 20 गांव को पूरी तरह से क्वॉरेंटाइन कर दिया गया है क्योंकि उस व्यक्ति की मृत्यु के बाद पता चला कि वह कोरोनावायरस से संक्रमित था. जब तक वह जीवित था तब तक उसमें कोरोनावायरस के किसी भी संक्रमण के लक्षण को नहीं पाया गया था जिसकी वजह से उसकी कोई जांच नहीं की गई और वह निरंतर लोगों से मिलता रहा जिसकी वजह से कई सारे लोगों में संक्रमण फैलने की आशंका जताई गई जिसके बाद 20 गांव में रहने वाले 40000 लोगों को पूरी तरह से उनके घर में क्वॉरेंटाइन कर दिया गया. बाद में जब उसके रिश्तेदारों की जांच की गई तो उसके परिवार के 19 लोग कोरोना से संक्रमित पाए गए. यह भारत देश के लिए एक बहुत बड़ा सुपर स्प्रेडर्स साबित हुआ जिसने 40000 लोगों को उनके घर में ही बंद करवा दिया अगर वह समय रहते ही सरकार की बात को मान लेता और खुद को क्वॉरेंटाइन कर लेता तो शायद आज ऐसा नहीं होता.
  • भीलवाड़ा में भी कुछ डॉक्टर और नर्स की लापरवाही से राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में कोरोनावायरस से कई लोग संक्रमित हो गए.

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एक व्यक्ति सुपर स्प्रेडर्स कैसे बनता है?

विशेषज्ञों द्वारा इस बात पर कई सारी थ्योरी प्रस्तुत की गई है जो निम्नलिखित हैं:-

  • शोधकर्ताओं का कहना है कि कुछ व्यक्तियों की इम्यून पावर बहुत ज्यादा अच्छी नहीं होती है जिसकी वजह से वह वायरस को अपने अंदर लेने की बजाय दूसरों में बहुत जल्दी फैला देते हैं.
  • कुछ लोगों की इम्युनिटी पावर इतनी ज्यादा अच्छी होती है कि वायरस उन पर अटैक कर दे तो उसके बाद भी उनमें कोई बीमारी वाले लक्षण नजर नहीं आते वह बिल्कुल स्वस्थ व्यक्ति की तरह रहते हैं और ऐसे में भी अपनी दिनचर्या जारी रखते हुए कई लोगों को संक्रमित कर सकते हैं.
  • सुपर स्प्रेडर बनने के कई सारे विकल्प हो सकते हैं जिनमें से कुछ भीड़भाड़ वाले इलाकों को भी बताया गया है. यदि कोई व्यक्ति संक्रमित हो जाता है और उसे नहीं पता चलता है ऐसे में वह अपना ध्यान नहीं रखता है जिसकी वजह से वह दूसरे व्यक्तियों को भी संक्रमित करता चला जाता है.
  • संक्रमित होने के बाद यदि कोई व्यक्ति लगातार कुछ सार्वजनिक वस्तुओं को छूता है ऐसे में दूसरा व्यक्ति जब उन वस्तुओं को छूता है तो वह वायरस उनमें भी तुरंत प्रवेश कर जाता है.
  • शुरुआती चरण के दौरान भी संक्रमित व्यक्ति कई सारे व्यक्तियों को संक्रमित करने की शक्ति रखता है. ऐसे में वे उस बीमारी के लक्षणों को पहचान नहीं पाता है जिसकी वजह से वह लगातार दूसरे लोगों को भी संक्रमित करता जाता है.

यही सबसे बड़ा कारण है कि सरकार भारत की जनता से लगातार सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने के लिए निवेदन कर रही है. क्योंकि कोविड-19 एक ऐसा वायरस है जिसके लक्षण आरंभ में नजर नहीं आते हैं परंतु यह संक्रमण बहुत जल्दी फैला देता है. भारत में लोक डाउन की परिस्थिति यही दर्शाती है कि सरकार सतर्क है इसलिए जनता को भी सतर्क होना बेहद आवश्यक है ताकि कोविड-19 के और ज्यादा केस भारत में ना बढ़े. भारत के लोक डाउन के दौरान भी निजामुद्दीन की दरगाह में सोमवार के दिन 1500 लोगों की एक बहुत बड़ी सभा बुलाई गई थी जिसमें 250 विदेशी लोग भी सम्मिलित थे. जिनमें से 300 लोगों को बुखार, खांसी, जुखाम जैसे लक्षण देखे जाने के बाद उन्हें आइसोलेट कर दिया गया और निजामुद्दीन का पूरा इलाका क्वॉरेंटाइन कर दिया गया है. उन लोगों ने बिल्कुल भी देश के बारे में नहीं सोचा कि यदि वहां पर मौजूद प्रत्येक व्यक्ति को संक्रमण हो जाए तो उसके बाद पूरे देश का क्या हाल होगा.

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Karnika

कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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