Oops! It appears that you have disabled your Javascript. In order for you to see this page as it is meant to appear, we ask that you please re-enable your Javascript!
ताज़ा खबर

बचपन के स्वाद | Taste Of Childhood in hindi

बचपन के स्वाद ( Taste Of Childhood in hindi)

बचपन हमारी जिन्दगी का एक ऐसा वक्त है जिसे हर कोई फिर से जी लेना चाहता है. एक ऐसा समय जो हमारी जिन्दगी की खूबसूरत सी याद है. इस समय के अपने अलग बचपन के खेल, अलग स्वाद और अपना अलग रूटीन होता था. आज जब वक्त करवट ले चुका है, हमारा बचपन भी बीत चुका है, क्यू ना हम अपने बचपन को पुनः एक बार याद करें, और अपने बचपन के स्वादों को यादों के माध्यम से पुनः चख ले.

taste of childhood

हालांकि हर पीढ़ी के साथ बचपन के स्वादों में भी अंतर आता गया, जहां हम अपने बचपन में चॉकलेट, बोरकुट, किस्मी बार के दीवाना हुआ करते थे, वहीं आज कल के बच्चे पिज्जा, बर्गर और सेंडविच के अलग अलग फ्लेवर समझते है. जिस ऑरेंज, रसना और रूह अफजा को हम खुश होकर पीते थे, उसकी जगह आज चॉकलेट शेक और विभिन्न तरह  फ्लेवर के माकटेल्स ने ले ली है. हमारे बचपन के कुछ खास यादगार स्वाद इस प्रकार है.

90’s के दशक में मिलने वाली बच्चों की पसंदीता चॉकलेटस

  • किस्मी बार – मात्र 2 रूपय 50 पैसे में आने वाली यह किस्मी बार बच्चों की फेवरेट हुआ करती थी. हालांकि आज इसकी जगह डेरीमिल्क और फाइव स्टार जैसी कई आधुनिक चॉकलेटस ने ले ली है. परंतु उस समय इसी का स्वाद सबकी जुबान पर चढ़ा था.
  • पोपीन्स- एक पैकीट में कई रंग की मीठी गोलियां अक्सर बच्चों का मन मोह लेती थी. और यह उस समय की बहुत बिकने वाली चॉकलेट में से एक थी, जिसे बच्चे बड़े चाव से सबके साथ बाटकर खाते थे.
  • स्वाद – स्वाद नाम सुनकर आप शायद थोड़े कन्फ्युज हो गए होंगे, कि कही इसका संबंध टेस्ट से तो नहीं, परंतु यह भी एक छोटी से पैकेट में आने वाली टॉफी थी. जिसे बच्चों के साथ बड़े भी चटकारे लेकर खाते थे.
  • बूमर – बूमर वैसे तो एक च्विंगम थी, परंतु इसे बच्चे बैलून फुलाकर मजे लेने के लिए ज्यादा खाते थे. उस समय हर किसी में बड़े से बड़ा बलून फुलाने की होड़ मची होती थी, जिसका अपना एक अलग मजा होता था.

बचपन के पेय (कोलड्रिंकस)-

आज के समय में विभिन्न शेक, लेमन टी, और मोकटेल्स चलन में है, परंतु जब हम छोटे थे, तब ये सब मार्केट में विरले ही दिखते थे. हमारे बचपन मतलब 90 के दशक के ड्रिंक्स इस प्रकार थे .

  • रसना – पानी में फ्लेवर और चीनी डालकर बना ऑरेंज रसना सबको पसंद होता था. गर्मी में इसे देखकर हर किसी के चेहरे पर मुस्कान आ जाती थी, हालांकि धीरे धीरे इसके फ्लेवर बढ़ते गए और ये कई कलर और स्वादों में आने लगा. परंतु उस ऑरेंज खट्टे मीठे रसना की बात और स्वाद अलग ही था.
  • रूहफजा – रसना की ही तरह रूहफजा भी पानी में फ्लेवर और चीनी मिलाकर बनाता है, ये पेय अब भी चलन में है परंतु उस समय इसका स्वाद मन को खुश कर जाया करता था.
  • गुरुजी की ठंडाई – पानी की जगह दूध में बनने वाला यह पेय गर्मियों का खास ड्रिंक होता था, जिसके चलते बच्चे दूध खुशी से पी लिया करते थे. आज भी यह चलन में है परंतु कई जगह इसकी जगह बच्चों के मन में चॉकलेट शेक और अन्य आधुनिक पेय ने अपना घर कर लिया है.

बचपन के कुछ अलग स्वाद (Taste Of Childhood )–

हमारे बचपन से कई ऐसे स्वाद भी जुड़े है जो शायद अब नजर नहीं आते या अब मिलना मुश्किल है. आइये आज पुनः उन स्वादों को याद करके पुनः अपने बचपन में लौट चलते है.

  • बोरकुट – कुछ खट्टा कुछ मीठा सा बोरकुट आज शायद ही कही मिलता होगा परंतु उस समय यह बहुत आसानी से मिला करता था. आज भी जब इसका ध्यान आ जाता है तो ऐसा लगता है कि काश पुनः बचपन में लौट जाए और यह स्वाद पुनः चख ले.
  • संतरे की गोली – नारंगी रंग कि इन खट्टी मीठी गोलियों का चलन उस समय बहुत अधिक था और इसकी खास बात यह थी की मात्र 1 रूपय में इसकी 4 गोलियां मिला करती थी. आज भी ये गोलियां बाजार में दिख जाती है परंतु इसके स्वाद में अंतर आ गया है.
  • गटागट – 1 रूपय में कुछ 5 मिलने वाली यह गोल गोलियां कुछ खट्टे कुछ मीठे बेर के चूर्ण से बनी होती थी. आज ये गोलियां ढूँढे नहीं मिलती और अगर मिले भी तो उस बचपन के स्वाद को टक्कर देना मुश्किल होगा.
  • खट्टी मीठी इमली – यह खट्टी मीठी इमली पेड़ से तोड़ी गई इमली से अलग होती थी, जो दुकानों में मिलती थी. यह इमली से स्वाद में भी अलग होती थी, इसका स्वाद कुछ खट्टा तो कुछ मीठा भी होता था और बच्चे इसके दीवाने होते थे.
  • मैगी – साल 1982 में पहली बार आई मैगी ने 90 के दशक तक अपनी एक खास जगह बना ली थी. बच्चे तब भी इसके दीवाने थे और आज भी इसके दीवाने है, परंतु वक्त के साथ इसमें भी कई परिवर्तन आए और यह कई स्वादो में आने लगी जिसे लोगों द्वारा पसंद भी किया गया.

इस तरह से हम सब का बचपन कुछ अलग स्वादों से भरा हुआ और एक अलग अनुभव लिए हुये था. आज ऐसे स्वाद विरले ही होंगे, जो जीवन भर के लिए अपनी जगह लोगों की जुबान पर बना ले या ऐसा भी कहा जा सकता है कि आज के आधुनिक दौर में चिजों के साथ लोगों के स्वाद भी बदलते रहते है, और कुछ ही समय में बाजार में उपलब्ध एक स्वादिष्ट पदार्थ दूसरे की जगह ले लेता है. इस प्रकार से आपके बचपन की भी कुछ यादगार चीजें होंगी, जिसे आप याद करते होंगे.

अन्य पढ़े:

Ankita

Ankita

अंकिता दीपावली की डिजाईन, डेवलपमेंट और आर्टिकल के सर्च इंजन की विशेषग्य है| ये इस साईट की एडमिन है| इनको वेबसाइट ऑप्टिमाइज़ और कभी कभी आर्टिकल लिखना पसंद है|
Ankita

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *