आईपीएल 2017 के सबसे महंगे क्रिकेटर थंगरासू नटराजन का जीवन परिचय | T Natarajan biography in Hindi

Cricketer T Natarajan biography in Hindi गेंदबाज टी नटराजन भारतीय क्रिकेटर हैं. तामिलनाडू के रहने वाले इस तेज गेंदबाज का जन्म 27 मई 1991 को एक गरीब परिवार में हुए था. हाल में ही 2017 के लिए आईपीएल नीलामी में उन्हें पंजाब की टीम ने 3 करोंड में खरीद कर सबको चौंका दिया, साथ ही वे सुर्खियों में भी आ गये.  इस खिलाड़ी का बेस प्राईस 10 लाख था, मीडिया ने इस खबर को फैला कर इस 25 वर्षीय लड़के को लेकर अप्रत्याशित अपेक्षाएं जगा दी है. कैरियर के आंकड़ो को देखे तो ऐसा भी नहीं था कि इन्हें इतना महत्व मिले किन्तु वीरेन्द्र सहवाग ने जब 30 गुणा बोली लगायी तो इस क्रिकेटर को लेकर लोगों की धारणाएं बदल गयी. वीरेंद्र सहवाग जीवन परिचय उनका इतिहास यहाँ पढ़ें.

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आईपीएल 2017 के सबसे महंगे क्रिकेटर थंगरासू नटराजन का आरंभिक जीवन परिचय ( T Natarajan biography in Hindi )

मीडिया और सोशल साईट पर टी नटराजन के चर्चा के बाद उनके बारे में कई नये खुलासे भी सामने आये. नटराजन का बचपन काफी गरीबी में बीता था. तामिलनाडू के सूदूर में स्थित चिन्नप्पमपट्टी जैसे अविकसित  गांव में जन्मे नटराजन को बचपन से गरीबी और अभाव को सहना पड़ा. उनके पिता नीचले दर्जे के कर्मचारी है, जो कि साड़ियों की प्रिटिंग की देखभाल करते हैं और मां भी रास्ते में कपड़े के मोबाइल की शॉप चलाती है. एक संवाद पत्र से वार्तालाप करते हुए नटराजन ने कहा बचपन में उनके परिवार ने काफी तकलीफ सही है. नटराजन के अलावा इनका एक भाई और तीन बहने है. परिवार की जिम्मेदारी भी नटराजन के ऊपर  है. 3 करोड़ रुपये की बोली से उनके परिवार का कल्याण होगा. अक्सर गांव के दूसरे लड़के से किताब उधार लेकर पढ़ने वाले नटराजन ने कभी भी स्कूल में नया ड्रेस नहीं पहना. अक्सर वो ड्रेस उधार का ही होता था. बचपन में खेल कूद को लेकर उत्साहित न रहने वाले इस खिलाड़ी को भी नही पता था कि वो एक दिन इस मुकाम पर आयेगा.

खेलने के लिए नहीं थी क्रिकेट बॉल (Did not play cricket ball)

नटराजन ने क्रिकेट खेल के बारे में जब से जानना शुरू किया, उनके लिए खेल उनका पैशन हो गया. लेकिन उनके पास सीमित संसाधन थे. क्रिकेट खेलने के लिए आवश्यक किट तक नहीं था. लगभग पांच साल पहले तक वे गेंदबाजी की प्रैकिट्स टेनिस बाल से करते थे. यहाँ तक कि वे कभी खेल के मैदान भी नहीं गये,  खेलना तो दूर की बात है. लेकिन उन्हें भी एक द्रोणाचार्य ए. जयप्रकाश के रूप में मिला, इस गुरू ने नटराजन को खेलने के लिए चेन्नई भेजा. सिर्फ भेजा नहीं बल्कि कुछ दिनों तक उनकी वहाँ रहने के लिए व्यवस्था भी की. 2011 में तामिलनाडू में होने वाले घरेलू क्रिकेट की प्रतियोगिता में नटराजन को खेलने का पहला मौका मिला. उस प्रतियोगिता में उनसे अपने आप को न सिर्फ योग्य साबित किया बल्कि खेल प्रेमियों के साथ साथ आयोजकों के भी नजर में आ गये. ए. जयप्रकाश आज भी उनके जीवन में एक महत्व रखते हैं. नटराजन का मानना है कि अगर वे उनके जिंदगी में नहीं होते तो शायद उनका खेल एक दिन गाँव में ही दम तोड़ देता और वे भी किसी कारखाने में बतौर कर्मचारी काम कर रहे होते.

वर्ष 2013 ब्रेकिंग ईयर ( year 2013 the breaking year)

2012 में एक खेल प्रतियोगिता के दौरान नटराजन के उपर  ‘जोली रोवर्स’ क्रिकेट क्लब के प्रशिक्षक की नजर पड़ी. उन्होंने नटराजन को क्लब की तरफ से खेलने के लिए बुलाया. यह नटराजन के लिए सुनहरा मौका साबित हुआ. यहां नटराजन को विधिवत ट्रेनिंग और सहुलियत भी मिली. यहीं से अश्विन की तरह वे भी आज सुर्खियों में आ गये.

खेलने का तरीका (Playing style)

नटराजन ने अपने प्रशिक्षण के दौरान यार्कर की एक लेंथ खोजी जिसे वे लगातार फेंक सकते हैं और सामने वाले बल्लेबाज को परेशान कर सकते हैं. नटराजन का मानना है कि खेलते समय वे बल्लेबाज के कदमों को देखते हैं फिर उसको फॉलो करते हैं. इतना ही नहीं वे दूसरों गेंदबाजों के गेंदबाजी के समय बल्लेबाज पर नजर रखते हैं जिससे उन्हें पता चल जाता है कि बल्लेबाज किस मूड से और कहां से गेंद के साथ खेल रहा है.

 अब तक (Till now)

नटराजन मूलत: गेंदबाज हैं और अबतक उन्होंने 9 मैंचों में 27 विकेट 33.44 के औसत रन से चटकाया है, जो कि बहुत ज्यादा आकर्षक नहीं है. टी 20 के पांच मैंचो में इन्होंने सिर्फ 4 विकेट लिये हैं. बल्लेबाजी में इन्होंने मात्र 22 रन बनाये हैं. पहला रणजी मैच इन्होंने कोलकाता में खेला था. इन आंकड़ों के आधार पर इन्हें कोई अच्छा गेंदबाज नहीं मानेगा पर प्रतिभा है तो आज नहीं तो कल वे अपना रंग दिखायेंगे ही.           

आलोचना (Criticism)

जब से तमिलनाडु के बाएं हाथ के तेज गेंदबाज़ टी. नटराजन के बारे में यह पढ़ा कि उनको आईपीएल की नीलामी के तीन करोड़ रुपये मिले. किंग्स एलेवन पंजाब की टीम से वीरेन्द्र सहवाग ने उनके नाम की तीन करोड़ की बोली लगाई. तमिलनाडु की तरफ से रणजी में 9 मैच खेलकर उन्होंने महज 27 विकेट लिए. टी ट्वेंटी के पांच मैचों में महज चार विकेट लिए. अभी हाल में ही हुए सैयद मुश्ताक अली ट्रोफी, जो टी टवेंटी मुकाबलों की थी, में वे कोई विकेट नहीं ले पाए. तब से प्रख्यात समीक्षक और क्रिकेट समीक्षकों का कहना है कि “फिर आखिर क्या था उनमें? क्या दिखा होगा 25 साल के इस गेंदबाज़ में? यह तो सब देख रहे हैं कि वे समाज के बहुत निम्न तबके के  हैं. असल में यह आईपीएल में किसी अनजान खिलाड़ी को स्टार बनाकर उसके नाम पर कमाई करने के किसी बड़े घपले की तरफ इशारा किया जा रहा है. बाजार को ऐसे एक्जाटिक खिलाड़ी भाते हैं. वरना क्या कारण है कि इशांत शर्मा, इरफ़ान खान जैसे खिलाडियों को ठीक ठाक खेलने के बावजूद कोई खरीदार नहीं मिलता और एक औसत प्रतिभा का खिलाड़ी तीन करोड़ ले जाता है”. ये सभी सवाल तो वाजिब है पर जबाव तो नटराजन को अपने खेल के प्रदर्शन के साथ ही देना होगा. क्रिकेट के इस बाजार में नटराजन की रौनक कहाँ तक ठहरती है ये देखना दिलचस्प होगा. फिलहाल तो वे सुर्खियों में है.

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