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तीन तलाक़ विधेयक की सम्पूर्ण जानकारी | Triple Talaq Bill Details in Hindi

तीन तलाक़ विधेयक की सम्पूर्ण जानकारी   | Triple Talaq Bill  Details in Hindi (Latest News) [#TripleTalaqBill]

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने गुरुवार को निचले सदन (लोकसभा) में तीन तलाक़ बिल या मुस्लिम महिला विधेयक 2017 पेश किया. रविशंकर प्रसाद ने इसे गैर क़ानूनी बताते हुए मुस्लिम महिलाओ को उनके अधिकारों की रक्षा के लिए तीन तलाक़ का अंत करने के लिए विधेयक संसद में पेश किया, और कहा कि तीन तलाक़ विश्वास और धर्म का मामला नहीं है बल्कि यह लिंग (जेंडर) न्याय, लिंग समानता और लिंग गरिमा का मुद्दा है. इससे पीड़ित महिलाओं का दर्द उनके आलावा और कोई नहीं समझ सकता. उनके लिए आज का दिन बहुत बड़ा दिन है, अब मुस्लिम औरतों पर ज़ुल्म और मनमानी नहीं चलेगी. आज का दिन भारत सरकार का महिला सशक्तीकरण की ओर बढ़ता एक और कदम.

Triple Talaq Bill

22 अगस्त 2017 को सुप्रीम कोर्ट का फैसला (Supreme Court judgements on triple talaq)

22 अगस्त 2017 को उच्च न्यायालय ने तीन तलाक़ को लेकर अपना रूख साफ कर दिया था, कि भारत में तीन तलाक़ असंवैधानिक है. ऐसा करते हुए कोई पाया गया तो उस पर क़ानूनी कार्यवाही होगी.

तीन तलाक़ के तहत सजा एवं नियम (triple talaq punishment and rules)

इसके पहले हम आपको बता चुके है, कि तीन तलाक क्या हैतीन तलाक़ को गैर कानूनी बनाने वाले इस बिल में सरकार ने सजा का प्रावधान रखा है, किसी व्यक्ति को तीन तलाक़ करते पाए जाने पर तीन साल तक की सजा देने का प्रावधान सम्मलित है. इसके अलावा अगर किसी महिला का पति उसे फिर भी तीन तलाक दे देता है और जिसके चलते अगर उसके पति को सजा हो जाती है. तो ऐसी सूरत में उस महिला को उसके पति की सम्पत्ति में हक दिया जाएगा. अगर उसके पति के पास कोई भी सम्पति नहीं होती है, तो ऐसे हालात में उस महिला और उसके बच्चों की सहायता सरकार द्वारा किए जाने का नियम भी इस बिल में जोड़ा जा सकता है.

वहीं बिल के नियम के अनुसार यदि कोई भी पति अपनी पत्नी को फोन पर या फिर लिखित में के जरिए तलाक़ देता है, तो इसको अवैध माना जायेगा एवं कानूनी कार्यवाही में भी सख्ती बरती जाएगी. इस नियम के चलते पीड़ित महिला अपने पति से संपत्ति की मांग कर सकती है, जो वहां के मजिस्ट्रेट के द्वारा पूरा मामला सुनने के बाद ही निर्धारित की जाएगी.   

तीन तलाक़ पर क्या कहती है पवित्र ‘कुरान’ (triple talaq in quran in hindi)

पवित्र ग्रन्थ कुरान में इस तरह से किसी भी नियम का उल्लेख नहीं किया गया है. कालिफ उमर नाम के एक शख्स द्वारा इसका इजात किया गया था जिसको कुरान में कोई जगह नहीं मिली थी. हालांकि कुरान में तलाक़ देने की प्रक्रिया को जरूर बताया गया है. कुरान के अनुसार तलाक़ देने के बाद भी जब महिला सक्षम हो जाये उसकी पूरी जिम्मेदारी उसके पति ऊपर ही रहती है. इतना ही नहीं तलाक़ तभी पूरा माना जायेगा जब तक की उसकी पत्नी का निकाह किसी अन्य व्यक्ति से ना हो जाये. इस समय इसका गलत फायदा उठाया जा रहा है, जिससे महिलाओं का शोषण हो रहा है.

क्यों हो रहा है विरोध (triple talaq opposition)

विरोधी पक्ष के अनुसार सरकार को किसी के धर्म एवं व्यक्तिगत मामले में दखल नहीं देना चाहिए, इतना ही नहीं विपक्ष ने विरोध करते हुए कहा कि भाजपा सरकार इस नियम से मुस्लिम जाति के मौलिक अधिकारों को खत्म करने पर तुली हुई है.

जबकि कुछ नेताओं द्वारा आरोप है कि भाजपा इस बिल की मदद से मुस्लिम महिलाओं के वोट पर कब्ज़ा करना चाहती है. अगर बिल लाना ही है तो इसमें सरकार द्वारा पीड़ित महिलाओं को कुछ पैसे देने का भी नियम होना चाहिए.

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