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वन धन योजना विकास केंद्र ट्राइबल स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम | Van Dhan Yojana Vikas Kendra Tribal [Skill Development Programs] in hindi

वन धन योजना विकास केंद्र ट्राइबल स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम | Van Dhan Yojana Vikas Kendra Tribal [Skill Development Programs] Scheme in hindi

भारत में मौजूद जनजातीय मामलों से संबंध रखने वाला मंत्रालय (Ministry of Tribal Affairs) ने अब देश में एक नये उद्यम की स्थापना की है, जिसका नाम वन धन विकास केंद्र रखा गया है. इसका लाभ मुख्यतः आदिवासियों को दिया जायेगा, और यहाँ आदिवासियों को प्रशिक्षण भी दिया जायेगा. यहाँ इस केंद्र में इन्हें कौशल विकास और अन्य औद्योगिक क्षेत्रोँ से संबंधित प्रशिक्षण दिया जायेगा. इस प्रकार का पहले वन धन केंद्र की स्थापना छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में की गयी है.

वन धन विकास केंद्र

लांच डिटेल (Launch Detail) :

सरकार ने इस उद्योग के संबंध में अप्रैल के पहले सप्ताह में जानकारी दी थी. इसके अलावा मंत्रालय ने यह भी कहा है की सर्वप्रथम इस योजना के संबंध में परीक्षण किये जायेंगे और इसके सफल होने पर ही इसे जनजातीय मंत्रालय के द्वारा इसे अधिकारिक तौर पर स्टार्ट किया जायेगा.

विकास केंद्र के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी (Key Detail Of the Van Dhan Vikas Kendra in hindi):

  • वन धन केंद्र के इस पहले मॉडल में 300 लाभार्थियों को प्रशिक्षण दिया जायेगा. इसमे मुख्यत 43 लाख 38 हजार रुपय खर्च किये जायेंगे और इसका उपयोग ट्रैनिंग, उपकरणों , अन्य प्राथमिक खर्चो और वन केंद्र की बिल्डिंग बनाने में किया जायेगा.
  • इस केन्द्र में टैमारिंड ईंट बनाने, महुआ फूलों के संरक्षण की सुविधा और चिरोंजी सफाई और पैकेजिंग के लिए प्रोसेसिंग सुविधा आदि का प्रशिक्षण दिया जायेगा.
  • इस योजना के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी ट्राईफ़ेड ने छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सीजीएमएफपी फेडरेशन और कलेक्टर को सौपी है.

यह योजना कैसे काम करेगी (How The Scheme Will Work) :

  • वैल्यू एडिशन फैसिलिटी : वैल्यू एडिशन से तात्पर्य आदिवासी क्षेत्र में उपलब्ध सामग्री में कुछ एडिशन कर उसके मूल्य में वृद्धि करने से है. इस स्कीम के अंतर्गत तीन चरण में वस्तुओं के मूल्य वृद्धि की जाएगी. इसका मुख्य उद्देश्य आदिवासियों की आय में वृद्धि करना है.
  • इस स्कीम के अंतर्गत ग्रास रूट लेवल की खरीदी कार्यान्वयन समितियों से जुड़े एसएचजी के माध्यम से की जाएगी.
  • यहाँ लाभार्थियों को वस्तुओं के प्राथमिक उपचार और मूल्य वृद्धि के लिए उचित रूप से प्रशिक्षित किया जायेगा और फिर इनके समूह बनाये जायेंगे, ताकि वे अपने स्टॉक को व्यापार योग्य मात्रा में एकत्र कर सकें और वन धन विकास केंद्र में प्राथमिक संसाधन की सुविधा के साथ जोड़ सकें.
  • प्राथमिक उपचार के बाद तैयार सामान एसएचजी के द्वारा स्टेट इम्प्लीमेंटिंग एजेंसीज को भेजा जायेगा या वे चाहे तो इसे डायरेक्ट व्यापारी को बेच सकते है.
  • जिला स्तर पर सेकंड्री लेवल वैल्यू एडिशन फैसिलिटी और राज्य स्तर पर तृतीय लेवल वैल्यू एडिशन फैसिलिटी के लिए बड़े उद्योगपति पीपीपी मॉडल के अंतर्गत शामिल होंगे.
  • यह एक तरह से निजी उद्यमियों द्वारा संचालित लार्ज वैल्यू एडिशन हब होंगे जिसके द्वारा आदिवासियों को प्रशिक्षित कर लाभ दिया जायेगा.

लघु वन उत्पाद (Minor Forest Products (MFP)) :

  • माइनर फॉरेस्ट प्रोडक्ट्स (एमएफपी) में निम्न को शामिल किया गया है और इसमें बांस, ब्रशवुड, स्टंप, कैन्स, टसर, कोकून, शहद, मोक्स, लैक, तेंदु / केंडू पत्ते, औषधीय पौधों और जड़ी बूटी, जड़,आदि शामिल है.
  • एमएफपी वन क्षेत्र में जनजातीय लोगों के लिए जीवन चलाने का प्रमुख स्रोत है, लगभग 100 मिलियन वन निवासियों को भोजन, आश्रय, दवाओं और पैसों की पूर्ति के लिए एमएफपी पर ही निर्भर रहना होता है.

केंद्र का सिलेक्शन और शुरुआत (Selection & Starting of centre 🙂

  • इस केंद्र की शुरुआत 10 अप्रैल 2018 से की जा चुकी है. शुरुआत में यह केंद्र जिले की पंचायत बिल्डिंग में चालू किया जायेगा. और वन धन विकास केंद्र की स्थापना के बाद इसे वहाँ शिफ्ट कर दिया जायेगा.
  • इसमे प्रशिक्षण के लिए शुरुआत में 300 लोगों का चयन किया जायेगा. यह चयन की प्रक्रिया ट्रिफ़ेड द्वारा की जाएगी. इनके द्वारा चयन के बाद चयनित लाभार्थी इस केंद्र में मौजूद सुविधाओं का लाभ ले सकते है.

वन धन केंद्र का महत्व (Significance  Of The Kendra:)

  • वन धन विकास केंद्र का मुख्य उद्देश्य आदिवासी क्षेत्रो का आर्थिक विकास करना है. इसके लिए उन्हें वन्य क्षेत्रों में उपलब्ध माइनर फूड प्रोडक्ट को इकट्ठा कर उसके द्वारा अपनी जीविका चलाने और अधिक लाभ कमाने का प्रशिक्षण दिया जायेगा.
  • आजीविका का स्त्रोत : माइनर फारेस्ट प्रोडक्ट्स आदिवासियों को दुर्बल मौसम में आजीविका का साधन प्रदान करते है. इन प्रोडक्ट्स के जरिये आदिवासियों की वार्षिक आय का 20 से 40 प्रतिशत तक का खर्चा निकला जाता है. परंतु इसपर वे अपना बहुत अधिक समय व्यर्थ गवाते है.
  • महिला सशक्तिकरण : यह फारेस्ट प्रोडक्ट आदिवासी महिलाओं को वित्तीय मजबूती प्रदान करते है, क्योंकि इनमे से अधिक्तर चीजें महिलाओं के ही द्वारा एकत्रित करके बेची जाती है.
  • इन प्रोडक्ट्स के द्वारा आदिवासियों के लिए वर्ष में अधिक काम उपलब्ध होता है. जिससे वे वर्ष भर व्यस्त रहते है और अपनी जीविका आसानी से चलाते है.

यह भारत का पहला वन केंद्र है जो इस तरह की सुविधा उपलब्ध करवा रहा है. इस तरह के केन्द्रों को जल्द ही अधिक संख्या में संचालित किया जायेगा ताकि वे देश में मौजूद प्रतिस्पर्धा में शामिल हो सके और योग्य बन  सके.

Update 

29/6/2018

अभी हाल ही में केंद्र सरकार ने वन धन योजना के तहत 3000 वन धन केंद्र खोलने का प्रस्ताव रखा है. इसके अंतर्गत आदिवासी विकास मंत्रालय लगभग 30,000 स्वयं सहायता समूहों की स्थापना करेंगे. इसका मुख्य उद्देश्य वन्य संपदा का उपयोग कर आदिवासी लोगों का विकास करना है. इस योजना के द्वारा आदिवासियों के पारंपरिक ज्ञान और स्किल्स पर ध्यान केन्द्रित किया जायेगा. और इनकी वस्तुओं में मूल्य वृध्दि के उद्देश्य से उसे टेक्नोलॉजी और आईटी से कनेक्ट किया जायेगा. इस योजना के अंतर्गत वन्य क्षेत्र में उपस्थित जिलों में वन धन केंद्र खोलने के लिए सरकार हर संभव प्रयास करेगी. इस तरह से प्रत्येक केंद्र में 10 आदिवासी स्वयं सहायता समूह शामिल होंगे और प्रत्येक समूह में 30 आदिवासी एनटीएफपी जमाकर्ता और कारीगर शामिल होंगे. और यह प्रत्येक केंद्र लगभग 300 लाभार्थी को सुनिश्चित करेगा.

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Ankita

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अंकिता दीपावली की डिजाईन, डेवलपमेंट और आर्टिकल के सर्च इंजन की विशेषग्य है| ये इस साईट की एडमिन है| इनको वेबसाइट ऑप्टिमाइज़ और कभी कभी आर्टिकल लिखना पसंद है|
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