विश्वामित्र ओल्ड दूरदर्शन टी वी सीरियल | Vishwamitra Old Doordarshan Serial In hindi

Vishwamitra Old Doordarshan Serial In hindi पुराने समय में जब टेलीविजन पर सिर्फ दूरदर्शन आया करता था, तब यही लोगों के मनोरंजन का साधन था. दूरदर्शन में उस समय बहुत से सीरियल प्रसारित होते थे. उसमें कुछ ज्ञानात्मक, मनोरंजक और हिन्दू पौराणिक कथाओं के बारे में  बताया जाता था. दूरदर्शन उस समय का सबसे ज्यादा प्रचलित टीवी चैनल था जिसे लोग बहुत पसंद करते थे. हिन्दू पौराणिक कथाओं में बहुत से ऐसे पात्र है जिनकी कहानी के बारे में भी इस चैनल में प्रसारण किया गया है. उन्हीं में से एक है ब्रम्हाऋषि विश्वामित्र, जिनके जीवन के बारे में बताते हुए दूरदर्शन चैनल में एक सीरियल प्रसारित किया गया था, जोकि काफी लोकप्रिय रहा. लोगों ने उसे बहुत पसंद किया. इस सीरियल में मुकेश खन्ना ने इस पात्र को बहुत ही अच्छे तरीके से निभाया, लोगों ने इसे काफी सराहा.

विश्वामित्र सीरियल में उनके क्षत्रिय से ब्राम्हण बनने तथा उन्हें ब्रम्हाऋषि की उपाधि मिलने तक की कहानी को दर्शाया गया है. ब्रम्हाऋषि विश्वामित्र उन 24 महर्षि में से एक थे, जिन्होंने गायंत्री मन्त्र को जाना और वे उनमें से पहले ब्रम्हाऋषि भी थे. उन्होंने घोर तपस्या कर वेदों तथा ॐ का भी ज्ञान प्राप्त किया. इन सभी के बारे में इस सीरियल की कहानी में बताया गया है.

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विश्वामित्र ओल्ड दूरदर्शन टी वी सीरियल

Vishwamitra Old Doordarshan Serial In hindi

“विश्वामित्र” ओल्ड दूरदर्शन टीवी सीरियल –

“विश्वामित्र” ओल्ड दूरदर्शन टीवी सीरियल की कुछ जानकारी निम्न सूची के आधार पर दर्शाई गई है-

क्र.म. जानकारी बिंदु जानकारी
1. सीरियल नाम विश्वामित्र
2. मुख्य किरदार मुकेश खन्ना (विश्वामित्र), मुलराज राजदा(वशिष्ठ)
3. चैनल दूरदर्शन
4. रचना यामिनी सरस्वती
5. डायलॉग डॉ. राही मासूम रजा
6. कहानी : संशोधन आधार कमलाकर कामेश्वर राव
7. सम्पादक (editor) राजू
8. प्रोडक्शन डिज़ाइनर टी.वी.एस. शास्त्री
9. निर्देशन विभाग प्रधान दुर्गा नागेश्वर राव
10. कार्यकारी निर्देशक धवल सत्यम
11. कार्यकारी निर्माता दासरि पदमा
12. निर्माता – निर्देशक दासरि नारायण राव
13. सन 1995

“विश्वामित्र” सीरियल की कहानी (Vishwamitra Serial Story) –

विश्वामित्र सीरियल की कहानी यह है कि इस सीरियल में विश्वामित्र के चरित्र के बारे में बताया गया है, जिसमे ये एक क्षत्रिय राजा ब्रम्हाऋषि कैसे बने यह बताया गया है. युगों पहले एक कौशिक नाम के क्षत्रिय राजा थे जोकि की बहुत ही बलशाली थे. वे अपनी प्रजा के बहुत करीब थे. एक बार वे वन में अपनी विशाल सेना के साथ जा रहे थे, तभी बीच में गुरु वशिष्ठ का आश्रम पड़ा. वहाँ गुरु वशिष्ठ ने राजा कौशिक और उनकी विशाल सेना का बहुत ही अच्छे तरीके से आदर सत्कार किया. उनको भोजन भी कराया. यह देख राजा कौशिक ने सोचा कि  गुरु वशिष्ठ ने मेरी इतनी बड़ी विशाल सेना की पूर्ती कैसे कर ली. तब गुरु वशिष्ट ने उन्हें अपनी कामधेनु गाय के बारे में बताया जोकि उन्हें स्वयं इंद्र ने उपहार में दी थी.

यह सुनकर राजा कौशिक ने गुरु वशिष्ठ से उस कामधेनु गाय को माँगा, किन्तु गुरु वशिष्ठ ने उन्हें वह गाय देने से मना कर दिया. जब राजा कौशिक गाय को अपने साथ ले जाने के लिए जबरदस्ती करने लगे, तब उस गाय ने राजा कौशिक को ही बंधी बना लिया और गुरु वशिष्ठ के सामने खड़ा कर दिया. उनके बीच युद्ध शुरू हो गया जिससे गुरु वशिष्ठ ने राजा कौशिक के एक पुत्र को छोड़ कर सारे पुत्रों को भस्म कर दिया. राजा कौशिक इस बात से बहुत क्रोधित हुए, उन्होंने अपना राज पाठ अपने पुत्र को सौंप कर तपस्या करने चले गए. उन्होंने तपस्या से भगवान शिव को प्रसन्न किया और उन्होंने उनसे दिव्यास्त्र की मांग की. अपने पुत्रों की हत्या का बदला लेने के लिए राजा ने गुरु वशिष्ठ से युद्ध करने की शुरुआत की और राजा एवं गुरु वशिष्ठ के बीच फिर से युद्ध छिड़ गया. इस युद्ध में फिर से गुरु वशिष्ठ की ही जीत हुई. उन्होंने क्रोधित होकर ब्रम्हास्त्र निकाला जिससे सारी पृथ्वी हिल गई और देवताओं ने उनसे यह वापस लेने को कहा. इस युद्ध में फिर से राजा कौशिक की ही हार हुई जिससे वे संतुष्ट नहीं हुए.

इसके बाद उन्होंने एक त्रिशंकु नामक राजा की इच्छा पर नए स्वर्ग का निर्माण किया, इस दौरान विश्वामित्र ने गुरु वशिष्ठ के पुत्रो की हत्या कर दी. जिससे गुरु वशिष्ठ उन पर बहुत क्रोधित हुए. इसके बाद विश्वामित्र ने ब्रम्हाऋषि की उपाधि पाने की इच्छा जताई. और उन्होंने इसके लिये कठिन से कठिन तप करना शुरू कर दिया, जिससे उन्होंने ब्रम्हा जी को प्रसन्न किया. ब्रम्हा जी ने उन्हें ब्रम्हाऋषि की उपाधि दी. विश्वामित्र ने अपने क्रोध पर विजय प्राप्त की और साथ ही इन्होंने ब्रम्हा जी से ॐ का ज्ञान प्राप्त किया इसके अलावा इन्होंने गायंत्री मन्त्र को भी जाना. इस दौरान गुरु वशिष्ठ ने भी उन्हें ब्राम्हण की तरह स्वीकार कर लिया. एक बार जब विश्वामित्र तपस्या में लीन थे तब देवराज इंद्र ने सोचा कि वे वरदान में स्वर्ग लोक मांगेंगे जिससे उन्होंने उनकी तपस्या को भंग करने के लिए मेनका नामक अप्सरा को भेजा. वह बहुत ही खूबसूरत थी, जिससे विश्वामित्र की भी तपस्या भंग हो गई और वे उसके प्रेम में दीवाने हो गए. मेनका को भी विश्वामित्र से प्रेम हो गया. इससे उनकी एक सन्तान भी थी, जिसका नाम शकुन्तला था. गायत्री जयंती मन्त्र के बारे में यहाँ पढ़ें.

बाद में जब ब्रम्हाऋषि विश्वामित्र को यह पता चला कि मेनका स्वर्ग से आई अप्सरा है जिसे इंद्र ने भेजा था तो उन्होंने उसे श्राप दे दिया. इसके बाद विश्वामित्र के पात्र को रामायण की कथा में भी बताया गया है. विश्वामित्र ने अपने शस्त्रों का त्याग कर दिया था, जिससे उन्होंने ताड़का नामक राक्षसी को मारने के लिए राम को कहा और उन्हीं के कहने पर राम देवी सीता के स्वयंवर में पहुंचे. इस तरह ब्रम्हाऋषि विश्वामित्र के एक क्षत्रिय होने से ले कर ब्राम्हण होने तक का सफर इस सीरियल में दिखाया गया है. सीता का स्वयम्वर के बारे में यहाँ पढ़ें.

विश्वामित्र सीरियल के किरदार और उनके नाम (Vishwamitra serial cast) –

विश्वामित्र सीरियल के किरदार और उनके नाम इस प्रकार हैं-

  • विश्वामित्र – विश्वामित्र सीरियल में विश्वामित्र का किरदार मुकेश खन्ना जी ने निभाया था. यह किरदार उन्होंने बहुत ही उम्दा तरीके से निभाया. मुकेश खन्ना उस समय के बहुत ही लोकप्रिय अभिनेता थे. उन्होंने इसके अलावा और भी धार्मिक सीरियल्स में काम किया था. लोगों ने उनके अभिनय को बहुत सराहा. इस सीरियल में भी उन्होंने अपने बेहतरीन अभिनय से लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाई. मुकेश खन्ना के शक्तिमान सीरियल के बारे में यहाँ पढ़ें.
  • गुरु वशिष्ठ – इस सीरियल में गुरु वशिष्ठ का किरदार मुलराज राजदा ने निभाया. यह किरदार भी बहुत लोकप्रिय रहा. उस समय इन्होंने भी कुछ और धार्मिक सीरियल्स में भी काम किया. इसलिए इन्हें इस सीरियल में भी काम मिला और उन्होंने इसका अभिनय बाखूबी निभाया.
  • नारद – इस सीरियल में नारद जी का किरदार धर्मेश तिवारी ने निभाया. यह किरदार बहुत ही चंचल स्वभाव वाला किरदार है. जिसमें धर्मेश तिवारी ने बहुत ही अच्छे से अभिनय किया.
  • इंद्र – यह किरदार इस सीरियल में चक्रपाणी जी ने निभाया. जोकि बहुत ही अच्छा था.
  • मेनका – इस सीरियल में मेनका का किरदार भानुप्रिया ने निभाया. भानुप्रिया उस समय की बहुत ही खूबसूरत अभिनेत्री थी, जिसे लोगों ने बहुत पसंद किया. इस सीरियल में उनका अभिनय एक स्वर्ग लोक की अप्सरा का था. लोगों ने उसे बहुत पसंद किया.
  • ब्रम्हा – यह किरदार भवानी शंकर ने निभाया.

इसके अलावा और भी बहुत से किरदार थे जिसे लोगों ने बहुत पसंद किया. यह सीरियल दूरदर्शन चैनल में प्रसारित होने वाले सभी लोकप्रिय सीरियल्स में से एक था. 

Ankita

अंकिता दीपावली की डिजाईन, डेवलपमेंट और आर्टिकल के सर्च इंजन की विशेषग्य है| ये इस साईट की एडमिन है| इनको वेबसाइट ऑप्टिमाइज़ और कभी कभी आर्टिकल लिखना पसंद है|
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