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राम विवाह पंचमी 2018 उत्सव एवम कथा | Ram Vivah Panchami 2018 Festival and Katha In Hindi

विवाह पंचमी या राम सीता विवाह 2018 उत्सव एवम कथा ( Ram Vivah or Vivah Panchami Festival Katha, 2018 date In Hindi)

विवाह पंचमी एक उत्सव के तौर पर मनाया जाता है, यह दिन बहुत खास है क्यूंकि इस दिन भगवान राम और सीता का विवाह हुआ था. इस उत्सव को सबसे अधिक नेपाल में मनाया जाता है, क्यूंकि सीता मैया राजा जनक की पुत्री थी, जो कि मिथिला नरेश थे और मिथिला नेपाल का हिस्सा हैं. यह उत्सव एक परम्परानुसार मनाया जाता हैं.

vivah panchami

 

विवाह पंचमी 2018 कब मनाई जाती हैं ? (Vivah Panchami Date 2018)

पौराणिक युग का सबसे अनूठा स्वयंबर मार्गशीर्ष माह की शुक्ल पंचमी के दिन हुआ था. यह बहुत बड़ा स्वयंबर हैं जिसका वर्णन पुराणों में मिलता हैं. विवाह पंचमी इस वर्ष 2018 में 23 दिसंबर, दिन बुधवार को मनाया जायेगा.

विवाह पंचमी त्यौहार की कथा (Vivah Panchami Festival Katha in hindi)

राम एवम सीता भगवान विष्णु एवम लक्ष्मी माता के रूप थे, जिन्होंने पृथ्वी लोक पर राजा दशरथ के पुत्र एवम राजा जनक की पुत्री के रूप में जन्म लिया था. वैसे पुराणों के अनुसार माता सीता का जन्म धरती से हुआ था, जब राजा जनक हल जोत रहे थे, तब उन्हें एक नन्ही सी बच्ची मिली थी, जिसे उन्होंने सीता नाम दिया था, यही सीता मैया जनक पुत्री के नाम से जानी जाती हैं.

माता सीता ने एक बार मंदिर में रखे भगवान शिव के धनुष को उठा लिया था, जिसे भगवान परशुराम के अलावा किसी ने नहीं उठाया था, तब ही राजा जनक ने निर्णय लिया था, कि वे अपनी पुत्री के योग्य उसी मनुष्य को समझेंगे, जो भगवान विष्णु के इस धनुष को उठाये और उस पर प्रत्यंचा चढ़ाये.

स्वयंबर का दिन तय किया गया चारों और संदेश भेज दिया गया कई बड़े बड़े महारथी इस स्वयम्बर का हिस्सा बने जिसमें महर्षि वशिष्ठ के साथ भगवान राम और लक्षमण भी दर्शक के रूप में शामिल थे. कई राजाओं ने प्रयास किया लेकिन कोई भी उस धनुष को हिला ना सका प्रत्यंचा चढ़ाना तो दूर की बात हैं. इस प्रदर्शन से दुखी होकर राजा जनक ने करुण शब्दों में कहा कि क्या कोई राजा मेरी पुत्री के योग्य नहीं हैं. उनकी इस मनोदशा को देख महर्षि वशिष्ठ ने भगवान राम से प्रतियोगिता में हिस्सा लेने कहा. गुरु की आज्ञा का पालन करते हुये भगवान राम ने शिव धनुष को उठाया और उस पर प्रत्यंचा चढ़ाने लगे, लेकिन वह धनुष टूट गया और इस प्रकार स्वयम्बर को जीत उन्होंने माता सीता से विवाह किया. माता  प्रसन्न मन से भगवान राम के गले में वरमाला डाली.

इस विवाह से धरती,पाताल एवम स्वर्ग लोक में खुशियों की लहर दोड़ पड़ी. कहते हैं आसमान से फूलों की बौछार की गई.पूरा ब्रह्माण्ड गूंज उठा चारों तरफ शंख नाद होने लगा.

इसी प्रकार आज भी विवाह पंचमी को सीता माता एवम भगवान राम के विवाह के रूप में हर्षो उल्लास से मनाया जाता हैं.

कैसे मनाई जाती हैं विवाह पंचमी ? (How To Celebrate Vivah Panchami)

अघन की इस पंचमी के दिन मर्यादा पुरुषोत्तम राम एवम सीता का विवाह हुआ था, इस उपलक्ष में सभी मंदिरों में उत्सव होते हैं. मनुष्य जाति को मानव जीवन का पाठ सिखाने के लिये ही भगवान राम ने धरती पर जन्म लिया था. पत्नी कर्तव्य का बखान सीता माता के जीवन से मिलता हैं. विवाह पंचमी के दिन कई तरह से इस कथा को सुना एवम पढ़ा जाता हैं. नाटिका रची जाती हैं.

विवाह पंचमी उत्सव खासतौर पर नेपाल एवम भारत के अयोध्या में मनाया जाता हैं. पुरे रीती रिवाज के साथ आज भी लोग इस उत्सव का आनंद लेते हैं.

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Karnika

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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