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बाल श्रम के खिलाफ विश्व दिवस व कविता | World Day Against Child Labour Poem In Hindi

World Day Against Child Labour Poem In Hindi तात्कालिक समय में विश्व एक साथ कई परेशानियों से जूझ रहा है. कई ऐसे मुद्दे सामने आ रहे हैं, जिनका समाधान आने वाले समय के लिए बहुत ज़रूरी है. इन मुद्दों के बीच जो मुद्दा अक्सर सामने आ कर भी अनदेखा रह जाता है, वह है ‘बाल श्रम’. हर तरह की नीतियों और योजनाओं के बाद भी हर वर्ष लाखों बच्चों का बचपन उनसे बाल श्रम की वजह से छिन जाता है. सिर्फ बचपन ही छिनता है, ऐसा नहीं है बल्कि इन बच्चों को अपनी जान जोखिम में डाल कर तरह तरह के खतरों में काम करना पड़ता है. इसलिए इसके खिलाफ विश्व दिवस मनाया जा रहा है. इसके बारे में यहाँ दर्शाया गया है.

बाल श्रम के खिलाफ विश्व दिवस का इतिहास (History of world day against Child Labour in hindi)     

इस सामाजिक समस्या के विरोध में और जागरूकता फैलाने के लिए ‘इंटरनेशनल लेबर आर्गेनाईजेशन’ ने साल 2002 में “वर्ल्ड अगेंस्ट चाइल्ड लेबर” यानि “बाल श्रम के खिलाफ विश्व दिवस” की शुरुआत की थी. यह दिवस प्रत्येक वर्ष 12 जून को मनाया जाता है. यूनिसेफ़ के सर्वेक्षण के अनुसार विश्वभर में 150 मिलियन बच्चे बाल श्रम में पड़े हुए अपना भविष्य गँवा रहे हैं. भारत में बाल श्रमिकों की संख्या लगभग 33 मिलियन की है. बाल दिवस महत्व पर निबंध एवं कविता यहाँ पढ़ें.

बाल श्रम के खिलाफ विश्व दिवस का उद्देश्य (World day against Child Labour objectives)

इस दिवस के पालन का सर्वप्रथम उद्देश्य ये है कि लोगों को इस मुद्दे पर जागरूक किया जाए और बालश्रम जल्द से जल्द रोका जाए. बालश्रम जो कि बच्चों और बचपन के लिए अभिशाप बन गया है, उसे सिर्फ और सिर्फ तभी तोडा जा सकता है जब समाज के जागरूक लोग एक साथ मिलकर आगे आयें. अतः इस दिन का उद्देश्य समय के बेहतर लोगों को साथ लाना है और एक पारस्परिक सहयोग से इस समस्या से जूझ रही नन्ही जिंदगियों को आज़ाद कराना है ताकि वे एक नयी दिशा में बढ़ सकें, और यहीं बच्चों को बढ़ावा देने का सही तरीका है.

बाल श्रम निरोध दिवस (World Day Against Child Labor 2017 date)

इसलिए प्रतिवर्ष 12 जून को बाल श्रम निरोध दिवस के रूप में मनाया जाता है. इस साल 2017 में यह 12 जून 2017, दिन सोमवार को मनाया जायेगा.

Child Labor Poem Hindi

बाल श्रम की मुख्य वजहें (Child Labour Reasons)

गरीबी को बाल श्रम का मुख्य कारण माना जा सकता है. विकसित होते देशों में ये समस्या अधिक है. अधिकतर मामलों में यह देखा गया है कि गरीब परिवार के बच्चों को उनके माँ बाप द्वारा ही काम करने भेजा जाता है. नीचे कुछ मुख्य तथ्य द्रष्टव्य हैं.

  • कई गरीब परिवारों की रोज़ की आमदनी उनके खर्चे से काफी कम है. ऐसी स्तिथि में वे अपने बच्चों को स्कूल भेजने की बात सोच तक नहीं पाते. उन्हें कम से कम मजदूरी पर दिहाड़ी काम करना पड़ता है ताकि उनके रोज़ का जीवन- यापन का ख़र्च चल सके.
  • कई बार बच्चे स्वयं इस बात को समझ लेते हैं कि उनका परिवार किन परेशानियों से जूझ रहा है. घर की हालत ठीक न होने की वजह से वे खुद ही बिना अपने माता- पिता की राय लिए काम पर लग जाते हैं.
  • कई क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों और मुफ्त शिक्षा की सही व्यवस्था नहीं होती. शिक्षा व्यवस्था के ठीक न होने पर और सरकारी स्कूल कम होने की वजह से कई बच्चों को नियमित रूप से शिक्षा नहीं मिल पाती. अतः उनका मन जल्द ही शिक्षा से उठ जाता है और सामने भविष्य बनाने का कोई रास्ता न पा कर वे बहुत कम पैसे मे काम पर लग जाते हैं.
  • कई जगहों पर कुछ लोग बच्चों से इस वजह से काम करवाते हैं, कि इन्हें एक वयस्क मजदूर की अपेक्षा कम पैसा देना होता है. अतः लोग मुश्किल से मुश्किल कामों को कम पैसे में कराने और अधिक मुनाफा कमाने के लिए बालश्रम को बढ़ावा देते रहते हैं.
  • वयस्कों की बेरोज़गारी की वजह से भी बाल श्रम को बढ़ावा मिलता है. देश में कई ऐसे घर हैं जहाँ पर वयस्कों के पास ढंग की नौकरी नहीं है. वे अपनी तथा घर की ज़रूरतों को पूरी करने के लिए अपने बच्चों को नौकरी पर लगा देते है.

बाल श्रम का बच्चों और समाज पर नकारात्मक प्रभाव (Child Labour negative impacts)

एक उन्नत और जागरूक समाज के निर्माण में बच्चों की बहुत बड़ी भूमिका होती है, क्योंकि उनके ही चरित्र से भविष्य के समाज का चरित्र और उसकी रूपरेखा निर्धारित होती है. बाल श्रम का कुप्रभाव समाज पर सीधे सीधे पड़ता है. इसके दुष्प्रभावों का संक्षेप वर्णन नीचे दिया जा रहा है.

  • बाल श्रम में लिप्त बच्चों को अपना भविष्य बनाने का किसी तरह से भी मौक़ा नहीं मिल पाता है. 
  • जो बच्चे इस जाल में फंस जाते हैं, उनका रिश्ता पढाई- लिखाई से ख़त्म हो जाता है. वे या तो अपनी पढाई मन से नहीं करते या पूरी तरह छोड़ ही देते हैं. कभी कभी उन्हें अपने प्राथमिक कक्षाओं को भी पुरा कर पाने का मौक़ा नहीं मिलता है.
  • इससे देश की आर्थिक व्यवस्था और विकास पर बहुत बुरा असर पड़ता है.
  • अक्सर कम उम्र के बच्चों से कुछ लोग बड़े बड़े ग़ैरक़ानूनी काम निकलवाते हैं. इन कामों में गांजा बेचने से कट्टा बेचने तक का काम जुड़ा रहता है. बच्चों पर किसी का शक नहीं जाता अतः उनसे ऐसे काम कराये जाते हैं. इस तरह बच्चे कच्ची उम्रों में अपराधों और अपराधियों के साथ निकल जाते हैं.
  • कम उम्र से काम करने वाले बच्चों को जल्द किसी न किसी नशे में लिप्त पाया जाता है. नशे से उनकी ज़िन्दगी और बिगड़ जाती है.
  • इससे बालश्रमिकों का दिमाग़ी, शारीरिक और चारित्रिक विकास नहीं हो पाता है.

बाल श्रम से बच्चों के स्वास्थ पर कुप्रभाव (Child Labour health problems)

अक्सर वे वातावरण जो वयस्कों के काम करने के लिए अनुकूल होते हैं, ज़रूरी नहीं कि वे बच्चों के लिए भी अनुकूल हों. क्योंकि बच्चों और वयस्कों की शारीरिक बनावट में बहुत फर्क होता है. अतः ऐसी जगहों पर काम करते हुए बच्चों को निम्न तरह की स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का सामना करना पड़ता है.

  • तंत्रिका तंत्र में अनियमित वृद्धि
  • श्रवण क्षमता में कमी
  • शरीर का विकास रुक जाना.
  • दुर्घटना का शिकार होना.

इसके अलावा लम्बे समय तक लगातार काम करने पर और भी तरह के कई रोग बच्चों को होने लगते हैं.

देश में बाल श्रम के विरोध में उठाये जाने वाले क़दम (Steps taken against Child Labour in India)

देश में कई लोग सरकारी और ग़ैर-सरकारी तौर पर बालश्रम के विरोध में काम कर रहे हैं. कई ग़ैर सरकारी संस्थाएं इस समस्या को समाप्त करने की कोशिश में निरंतर लगी रहती हैं. इन ग़ैर सरकारी संस्थानों ने निम्न महत्वपूर्ण क़दम उठाये हैं.

  • समाज के विभिन्न तबको में जाकर ये कार्यकर्ता लोगों को इससे होने वाली हानियों के बारे में बताते हैं, और उन्हें अपने बच्चों को काम पर भेजने से रोकते हैं.
  • जगह जगह पर शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाते हुए अधिक से अधिक बच्चों को शिक्षा से जोड़ते हैं. ताकि बच्चे स्कूल जाएँ और वहाँ ठहरें भी.
  • कई जगहों पर ‘ब्रिज स्कूल’ का भी निर्माण किया जाता है ताकि, इन बाल श्रमिकों की बुद्धि का विकास किया जा सके और उन्हें स्कूलिंग के लिए तैयार किया जा स्क्साके.
  • सरकार धीरे धीरे शिक्षा के लिए नए नए स्कूलों का निर्माण करा रही है, ताकि अधिक से अधिक बच्चों को शिक्षा की व्यवस्था मिल सके. साथ ही इन शिक्षाओं को सरकार निशुल्क रख रही है, जिससे ग़रीब से ग़रीब बच्चे भी पढाई कर सकें.
  • सरकार ने बालश्रम के विरोध में कई कानून बनाएं हैं. इन कानूनों में बच्चों से काम करवाने वाले लोगों के खिलाफ जेल तक का दंड भी निहित है.
  • वे लोग जो बच्चों से तरह तरह के ग़ैर क़ानूनी काम कराते हैं और बच्चों का ख़रीद फ़रोख्त करते हैं, उन्हें पकड़ने के लिए भी पुलिस हर समय कार्यरत है.

बाल श्रम के खिलाफ विश्व दिवस कैसे मनाएं (World day against Child Labour celebration)

बाल श्रम के खिलाफ विश्व दिवस बाल श्रमिकों को श्रम से मुक्त करने तथा लोगों को बालश्रम के विरुद्ध जागरूक करने के लिए है. इस दिन कई सरकारी तथा ग़ैर सरकारी संस्थानों द्वारा कई कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं, जिनमे बाल श्रमिकों को उनके बचपन का और शिक्षा का महत्व बताते है. साथ ही उन बच्चों के माता पिता से बच्चों को काम पर न भेजने की अपील करते हैं. उन्हें कला के माध्यम से जीवन सन्देश देने के कार्यक्रम किये जाते हैं. इस तरह के आयोजनों में समाज के जागरूक नागरिक होने की हैसियत से कई लोग शामिल होते हैं.

बाल श्रम के खिलाफ विश्व दिवस पर कुछ अनमोल वचन (World day against Child Labour quotes)

बाल श्रम के विरोध में कुछ अनमोल वचन इस प्रकार हैं –

  • बच्चों को पढ़ाने भेजिए न कि कमाने, बालश्रम बंद करें.
  • सभी बच्चों का उनके बचपन पर पूरा हक़ है, अतः बालश्रम ख़त्म करो.
  • बच्चों को उनकी जेब से अधिक उनका दिमाग भरने की आवश्यकता होती है.
  • बालश्रम से समाज में अशिक्षा, बेरोज़गारी और जनसँख्या में वृद्धि होती है. अतः बालश्रम ख़त्म करने की कोशिश होनी चाहिए.
  • बालश्रम से मानवता का हनन होता है.

बाल श्रम के खिलाफ विश्व दिवस पर नारे (World day against Child Labour slogans)

  • बाल श्रम बंद करो, या लज्जा में डूब मरो.
  • बचपन वरदान है, बालश्रम अभिशाप है.
  • बाल मजदूरी को मजबूरी न बनने दें.
  • बच्चे स्कूल के हैं कारखानों के नहीं.
  • संसाधन रहित बच्चों को पढ़ायें और समाज निर्माण में हाथ बंटाएँ.

बाल श्रम के खिलाफ विश्व दिवस पर विषय (World day against Child Labour themes)

बाल श्रम के खिलाफ विश्व दिवस पर पिछले कुछ सालों के कुछ विषय इस प्रकार हैं –

  • बालश्रम ख़त्म करो, क्यों कि देश का भविष्य इन्हीं के हाथ है. जिन हाथों में आने वाला कल हो उन हाथों में औज़ार नहीं कलम होना ज़रूरी है.
  • बालश्रम बचपन और समाज के लिए अभिशाप है.
  • बच्चों से काम करवाना क़ानूनी तौर पर एक संगीन जुर्म है. जिसके लिए बच्चे के माता पिता के साथ काम करवाने वाले को भी सजा हो सकती है.
  • बाल श्रमिकों को बाल कलाकार होना चाहिए. एक स्वस्थ समाज और स्वस्थ कल के निर्माण में बच्चों का विकास करना अति आवश्यक है. 

बाल श्रम पर कविता  (Child Labor Day Poem)

किस गुमनाम अँधेरे में
ऐ भारत तू पनप रहा

जहाँ यूवा बल ही हैं शक्ति
कैसे अँधेरा गहरा रहा

जिन हाथों होना था कलम दवात
वो कैसे ईट गारों में सन रहा

कैसे मासूम सा फ़रिश्ता
दो वक्त की कमाने निकल रहा

किन कंधो पर बोझ डाल
ऐ जीवन तू गुजर रहा

जो ममता के आँचल में खिलना था
वो कैसे कीचड़ से लिपट रहा

जिन मासूम की आँखों में
कोई सपना भी भूल कर ना आये

जिन नन्हों के जीवन में
कोई अक्षर ज्ञान भी ना छाये  

जिनके कोमल बचपन पर
बस मज़बूरी ही लहराए

ऐसे अभागे बचपन ही
बाल श्रमिक कहलाये
  बाल श्रमिक कहलाये.

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Karnika

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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