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गोवर्धन पूजा कथा विधि अन्नकूट महत्व एवम शायरी | Govardhan Festival Puja Katha Vidhi Shayari In Hindi

Govardhan Festival Puja Katha Muhurat Vidhi Shayari In Hindi गोवर्धन पूजा महत्व कथा पूजा विधि महत्व मुहूर्त एवम शायरी का समावेश इस आर्टिकल में किया गया हैं | पौराणिक कथा के जरिये इस त्यौहार का महत्व एवम उद्देश्य जाने|

दिवाली के अगले दिन यह पूजा की जाती हैं | किसान परिवार इस पूजा को बड़े चाव से करते हैं | इसके जरिये जलवायु एवम प्राकृतिक संसाधन का धन्यवाद दिया जाता हैं | इस पूजा के कारण मानवजाति में इन प्राकृतिक साधनों के प्रति भावना का विकास होता हैं |

गोवर्धन पूजा कथा विधि अन्नकूट महत्व एवम शायरी

Govardhan Festival Puja Katha Vidhi Shayari In Hindi

Govardhan Festival Puja Katha Muhurat Vidhi Shayari In Hindi

  • गोवर्धन पूजा कब हैं एवम शुभ मुहूर्त क्या हैं ? (Govardhan Festival Puja 2016 Date Muhurat)

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार गोवर्धन पूजा दिवाली के दुसरे दिन अर्थात कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाई जाती हैं| वर्ष 2016 में यह पूजा 31 अक्टूबर दिन सोमवार को की जाएगी |

शुभ मुहूर्त :

गोवर्धन पूजा प्रातः काल मुहूर्त 06:58 से 08:52
गोवर्धन पूजा सांय काल 14:34 से 16:28
  • गोवर्धन पूजा का महत्व (Govardhan Puja Mahatva)

गोवर्धन पूजा में गोवर्धन पर्वत की पूजा की जाती हैं | यह दिवस यह सन्देश देता हैं कि हमारा जीवन प्रकृति की हर एक चीज़ पर निर्भर करता हैं जैसे पेड़-पौधों, पशु-पक्षी, नदी और पर्वत आदि इसलिए हमें उन सभी का धन्यवाद देना चाहिये | भारत देश में जलवायु संतुलन का विशेष कारण पर्वत मालायें एवम नदियाँ हैं | इस प्रकार यह दिन इन सभी प्राकृतिक धन सम्पति के प्रति हमारी भावना को व्यक्त करता हैं |

इस दिन विशेष रूप से गाय माता की पूजा का महत्व होता हैं | उनके दूध, घी, छांछ, दही, मक्खन यहाँ तक की गोबर एवम मूत्र से भी मानव जाति का कल्याण हुआ हैं | ऐसे में गाय जो हिन्दू धर्म में गंगा नदी के तुल्य मानी जाती हैं, को इस दिन पूजा जाता हैं |

गोवर्धन पूजा को अन्न कूट भी कहा जाता हैं | कई जगहों में भंडारा होता हैं | आजकल यह अन्नकूट महीनो तक चलता हैं | इसे आधुनिक युग में पार्टी की तरह मनाया जाने लगा हैं |

  • गोवर्धन पर्वत पूजा की कथा (Govardhan Puja Katha)

इस त्यौहार के पीछे एक पौराणिक कथा हैं : भगवान कृष्ण का जन्म गौकुल में हुआ था | सभी ग्वालों के बीच रहकर भगवान कृष्ण ने कई लीलायें अपने बाल्यकाल में रची | कईयों का उद्धार किया तो कईयों का घमंड तोड़ा | उन्ही में से एक कहानी थी इंद्र देव की |

गौकुल में सभी गाँव वासी अच्छी फसल, अच्छी जलवायु के लिए इंद्र देव की पूजा करते थे | प्रति वर्ष वे सभी मिलकर नाचते गाते एवम इंद्र देव की पूजा अर्चना करते थे | उनके इस पूजन का कारण जानने के लिए बाल कृष्ण ने अपने पिता नन्द से पूछा कि यह पूजा क्यूँ और किसके लिए की जाती हैं | तब नन्द बाबा ने अपने पुत्र को बताया यह पूजा इंद्र देव के अभिवादन के लिए की जाती हैं | इस पर बाल कृष्ण ने नन्द बाबा एवम सभी गाँववासी को बताया कि हमारे गाँव की जलवायु के लिए इन्द्रदेव का नहीं बल्कि गोवर्धन पर्वत का अभिवादन करना चाहिये | सभी को बाल कृष्ण की बात अच्छी लगी और सभी ने इंद्र देव की बजाय गोवर्धन पर्वत की पूजा की | हर्षोल्लास के साथ जश्न हुआ | यह सब देख इंद्र देव रुष्ठ हो गये, उन्होंने नागरिको के इस वर्ताव को खुद का अपमान समझ लिया |और नाराज होकर गौकुल में आंधी तूफान खड़ा कर दिया जिससे त्राहि मच गई | सभी गाँववासी विलाप करने लगे | सभी का जीवन खतरे में था |  ऐसे समय में बाल कृष्ण ने महान गोवर्धन पर्वत को अपने छोटी सी ऊँगली पर उठा लिया और सभी गांववासी को संरक्षण प्रदान किया | इंद्र देव के साथ युद्ध भी किया जिसमे इंद्र देव की करारी हार हुई औत उनका घमंड टूट गया | उन्हें अहसास हुआ कि जिस जलवायु के लिए वो खुद को महान समझते हैं यह उनका कर्तव्य हैं जिसके लिए उनका अभिमान गलत हैं | तब ही से दीवाली के दुसरे दिन गोवर्धन पर्वत की पूजा गोवर्धन पूजा की जाती हैं |

  • गोवर्धन पूजा विधि (Govardhan Puja Vidhi)

इस दिन भगवान कृष्ण एवम गोवर्धन पर्वत की पूजा की जाती हैं | खासतौर पर किसान इस पूजा को करते हैं| इसके लिए घरों में खेत की शुद्ध मिट्टी अथवा गाय के गोबर से घर के द्वार पर,घर के आँगन अथवा खेत में गोवर्धन पर्वत बनायें जाते हैं | और उन्हें 56 भोग का नैवेद्य चढ़ाया जाता हैं |

विधि :

  • सुबह जल्दी स्नान किया जाता हैं |
  • घर की रसौई में ताजे पकवान बनाये जाते हैं |
  • घर के आँगन में अथवा खेत में गोबर से भगवान गोवर्धन की प्रतिमा बनाई जाती हैं |
  • साथ में गाय, भैंस, खेत खलियान, बैल, खेत के औजार, दूध दही एवम घी वाली, चूल्हा आदि को गोबर अथवा मिट्टी से बनाया जाता हैं | इस पूजा के जरिये खेती से जुड़ी सभी चीजो एवम जलवायु प्राकृतिक साधनों की पूजा की जाती हैं इस लिए जितना संभव हो उतना बनाकर पूजा में शामिल किया जाता हैं |
  • इसके बाद पूजा की जाती हैं |
  • नैवेद्य चढ़ाया जाता हैं |
  • कृष्ण भगवान की आरती की जाती हैं |
  • इस दिन पूरा कुटुंब एक साथ भोजन करता हैं |

इस प्रकार गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja) घरों में की जाती हैं |  

  • गोवर्धन पर्वत परिक्रमा  (Govardhan Parvat Parikrama)

इस दिन कई लोग मथुरा वृन्दावन उत्तरपदेश के समीप स्थित गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करते हैं | हिन्दू धर्म में परिक्रमा का बहुत अधिक महत्व होता हैं | घर में पूजा से ज्यादा इस परिक्रमा का महत्व होता हैं |

गोवर्धन पूजा शायरी

Govardhan Puja Shayari

  • घमंड तोड़ इंद्र का
    प्रकृति का महत्व समझाया
    ऊँगली पर उठाकर पहाड़
    वो ही रक्षक कहलाया
    ऐसे बाल गोपाल लीलाधर को
    शत शत प्रणाम ||

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  • हैं मेरी संस्कृति महान
    सिखाया हमें गाय का मान
    प्रकृति का हर अंग हैं वरदान
    करो सबका सम्मान सम्मान और सम्मान
    ===========
  • गोकुल का ग्वाला बनकर वो
    गैया रोज चराता था
    ईश्वर का अवतार था वो
    लेकिन गाय माता की सेवा करता था
    ऐसा महान हैं यह त्यौहार
    जिसने बढ़ाया प्रकृति का मान

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गोवर्धन पूजा कविता

Govardhan Puja Kavita or Poem

हे! काह्ना

तेरी लीला अपरम्पार
किया तूने सबका उद्धार

तोड़ कर घमंड इन्द्र का तूने
गोवर्धन का महत्व बताया

ऊंगली पर पहाड़ उठाकर तूने
जिन्दगी का सच्चा पाठ पढ़ाया

पद से ना होता कोई महान
परोपकार ही सच्चा ज्ञान

तब से ही गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया
नदी,पहाड़ का महत्व बढ़ाया ||

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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One comment

  1. भगवान मीना

    Very fine

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