पछतावा

हिंदी कहानी: छोटी- छोटी कहानियाँ जीवन के लक्ष्य को बदल सकती हैं दिशाहीन को दिशा दे सकती हैं ऐसी ही एक कहानी हैं पछतावा  इसे पढ़े | 

हिंदी कहानी पछतावा

पछतावा

एक संपन्न परिवार का लड़का रोहित जिसने मेहनत करके अपने माता पिता का सपना पूरा किया और engineer बन एक multinational company में job हासिल की | एक बहुत सीधे साधे परिवार का लड़का अब शादी लायक हो गया था | माता पिता ने उससे उसकी इच्छा पूछी रोहित ने कहा उसे एक house wife चाहिए और जो भी घर वाले तय करें वो उनके साथ है | घर वालो ने अपने ही शहर के संपन्न परिवार की लड़की राधा से रोहित की शादी तय की|

राधा बहुत ही सुंदर और घर के सभी कामो को अच्छे से करना जानती थी | राधा एक छोटी जगह रहने वाली लड़की थी जो कि खुश मिजाज़ बहुत व्यवहारिक थी पर शहरी चकाचोंद से बहुत दूर | रोहित उसे ज्यादा पसंद नहीं करता था शायद उसे एक modern house wife चाहिए थी | राधा रोहित को बहुत प्यार करती थी उसकी हर जरुरत का ख्याल रखती उसके लिए पूरी तरह से खुद को बदलने की कोशिश भी वो करती रहती | रोहित अपनी हर जरुरत के लिए उस पर निर्भर था पर उसे इस बात का कोई अहसास ना था वो हमेशा गुस्से में होता और उसकी हरकते यह बताती कि वह राधा को एक पल भी बर्दाश्त नहीं करना चाहता |

एक दिन रोहित ने राधा को डाइवोर्स देने का फैसला कर लिया | राधा बहुत upset थी पर जब रोहित उसे पसंद ही नहीं करता तो वो उसके साथ रह कर क्या करती | राधा ने रोहित को डाइवोर्स दे दिया और अपनी छोटी सी दुनिया में वापस चली गई जहाँ उसने गरीब और बीमारों की सेवा में अपना मन लगा लिया राधा को सभी ने बहुत प्यार दिया उसके प्यारे से nature ने सभी के दिलो को जीत लिया |

दूसरी तरफ रोहित को हर बात पर राधा की कमी feel होने लगी उसके हाथ के बनाये खाने को वो हर जगह तलाश करता उसे अहसास हुआ कि राधा वो नहीं थी जैसी उसे चाहिए थी पर राधा जो थी वो और कोई हो भी नहीं सकता था | राधा ने उसे जो प्यार दिया था उसे उसके बदले में कभी कुछ नहीं चाहिये था | रोहित को अहसास हुआ उसने राधा से माफ़ी मांग कर उसे घर वापस लाने की ठान ली और अपने पुरे घर को स्वर्ग सा सजाकर वह राधा को वापस लाने उसके पास गया |

राधा जिन लोगो की सेवा कर रही थी उनमे एक महामारी फ़ैल रही थी जिस कारण राधा भी बहुत बीमार हो गई उसे एक बंद room में  रखा गया जहाँ से उसे बस दूर से ही देखा जा सकता था रोहित जब वहां पहुंचा तो उसे सब पता चला जिसे सुन उसके होश उड़ गए | अब राधा उसके सामने थी पर ना वो उससे बात कर सकता था ना उसे छू सकता था | राधा उसे छोड़ कर चली गई | राधा के जाने से रोहित बस पछताता ही रहा |

Moral Of The Story :

“वक्त किसी का बंधक नहीं, वक्त रहते काम हो जाए तो वह अमूल्य है, वरना पछताने के अलावा कुछ नहीं रह जाता | ”  जीवन में जो भी मिले उसे स्वीकारने की कोशिश करे जरुरी नहीं हर चीज जो आप चाहते है वहीँ आपको मिलेगा | लेकिन जो आपको मिला है वह आपकी किस्मत है जिसे अच्छा बुरा बनाना केवल आपके हाथ में है |

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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