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Jay Prakash Narayan Lok Nayak Jeevan Parichay Introduction In Hindi

Jay Prakash Narayan Jeevan Parichay Life Introduction In Hindi जय प्रकाश नारायण  भारत की स्वतंत्रता के महत्वपूर्ण बिंदु थे जिन्हें लोकनायक कहा जाता था उनके बारे में विस्तार से पढ़े |

Jay Prakash Narayan Jivan Parichay Introduction In Hindi
जय प्रकाश नारायण प्रारंभिक जीवन  Initial Life Of Jay Prakash Narayan In Hindi

जय प्रकाश नारायण (Jay Prakash Narayan) एक स्वतंत्रता सेनानी थे यह भी गाँधीवादी विचारधारा के गाँधीवादी नेता थे | Indira Gandhi के शासन के समय उनका विरोध करने वाले नेताओ के leader थे Jay Prakash Narayan| सरल साधारण, न्यायसंगत नेता एवम समाज सेवक जिन्हें “लोक नायक” की उपाधि प्राप्त हुई | 1998 में जय प्रकाश नारायण (Jay Prakash Narayan) को “Bharat Ratna” से नवाजा |

जय प्रकाश नारायण पारिवारिक परिचय Family Of Jay Prakash Narayan In Hindi

जय प्रकाश नारायण (Jay Prakash Narayan) का जन्म 11 October 1902 को Sitabdiyara Bihar में हुआ था इनके पिता Harsudayal Shrivastav एवम माता Phul Rani Devi थी | 9 year की age में अपनी studies के लिए यह Patana आ गए | जय प्रकाश नारायण (Jay Prakash Narayan) एक मेधावी छात्र थे 1918 में इन्होने अपनी पढाई पूरी की | अपनी studies के दौरान इन्होने कई books and novel पढ़े | जिनमें से कुछ Saraswati, Prabha, Pratap और Maithilisharan Gupta की भारत भारती और साथ ही भारतेंदु हरिश्चंद्र जिनसे प्रेरित होकर इन्होने आजादी की लड़ाई में भाग लिया |1920 में जय प्रकाश नारायण (Jay Prakash Narayan) का विवाह Brija Kishor की daughter Prabhavali Devi से हुआ|

जय प्रकाश नारायण शिक्षा  Education  Of Jay Prakash Narayan In Hindi

विवाह के बाद यह Patana में ही कार्यरत रहे जहाँ स्वतंत्रता की लड़ाई जोरो पर थी जिस कारण उनकी पत्नी को उनके साथ रहने में बहुत परेशानी से गुजरना पड़ा, इसलिए उन्होंने गाँधी आश्रम में रहना स्वीकार किया | 1922 में जय प्रकाश नारायण (Jay Prakash Narayan) higher education के लिए विदेश गए जहाँ इन्होने समाज शास्त्र में M.A किया लेकिन कुछ कारणों से इन्हें वापस स्वदेश लौटना पड़ा और वे Ph,D complete नहीं कर पायें | इस वक्त उनकी पत्नी प्रभावती  साबरमती आश्रम में कस्तूरबा गाँधी  के साथ रहीं थी|

जय प्रकाश नारायण स्वतंत्रता संग्राम में योगदान Jay Prakash Narayan As A Freedom Fighter In Hindi

1929 में जय प्रकाश नारायण (Jay Prakash Narayan) भारत वापस आये जिस वक्त स्वतंत्रता की लड़ाई जोरो पर थी इन्होने भी Gandhi ji के साथ इस लड़ाई में सभागी बनाना स्वीकारा तब इनकी मुलाकात Javahar Lal Nehru से हुई | 1934 में Madras में स्वतंत्रता की लड़ाई के दौरान कई नेताओं को गिरफ्तार किया गया उनमे से एक जय प्रकाश नारायण (Jay Prakash Narayan) भी थे उस वक्त जेल में रह कर कई दिग्गज नेताओ ने Congress Socialist Party का गठन किया उन नेताओ में थे M.S. Masani, Achyut Patvardhan, N.C. Gore, Ashok Mehata, M.H. Dantwala, C.K.Narayanswami|

1939 की second world war के दौरान जय प्रकाश नारायण (Jay Prakash Narayan) ने देश में Britishers के खिलाफ़ आन्दोलन का नेतृत्व किया | इन्होने Gandhi Ji एवम Subhash Chadra Bos को एक साथ करने का भी प्रयास किया |1942 के भारत छोड़ो आन्दोलन के समय यह जेल से भाग निकले|

जय प्रकाश नारायण (Jay Prakash Narayan) गांधीजी से पभावित थे लेकिन इन्हें Subhash chandra ji की लड़ाई ने भी प्रभावित किया था इसलिए हथियारों का उपयोग उन्होंने जरुरी समझा| अत : Nepal में Azad Daste का गठन किया परन्तु फिर 1943 में गिरफ्तार कर लिए गये| समझोते के वक्त Gandhi ji ने British government को बाध्य किया कि Dr. Lohia और J.P. Narayan के बिना कोई बात नहीं की जाएगी इसके बाद 1946 में इन्हें रिहाई मिली |

जय प्रकाश नारायण राजीनति में योगदान  Political Life Of Jay Prakash Narayan In Hindi

1947 में देश को आजादी मिली उसके बाद जय प्रकाश नारायण (Jay Prakash Narayan) ने 1948 में Samajavadi Party की बागडौर सम्भाली 1954 में Vinobha Bhave के कार्यो में सम्मिलित हो गए और 1957 में राजनीति से विदा ली|

जय प्रकाश नारायण (Jay Prakash Narayan) एक सच्चे देश भक्त थे जिन्होंने भारत भूमि को महज एक सत्ता नहीं समझा था अपितु माँ का पद दिया था जिस कारण देश में हो रहे भ्रष्ट्राचार को देख कर उन्होंने 1960 में जय प्रकाश नारायण (Jay Prakash Narayan) ने पुन : राजनीति में आना स्वीकार किया और सच्चाई के लिए देश के भ्रष्ट नेताओ के खिलाफ़ देश की जनता का साथ दिया |

जय प्रकाश नारायण (Jay Prakash Narayan) ने 1960 से 1974 तक Bihar Movement एवम Total Revolution के तहत देशवासियों का साथ दिया यह आन्दोलन भ्रष्ट्राचार और बेरोजगारी के लिए गया था | इस महा आन्दोलन के वजह से ही इन्हें “लोकनायक ” की उपाधि मिली | 1975 के आपातकाल के वक्त इन्होने Indira और उनकी सरकार का पुरज़ोर विरोध किया और कई नेताओ के साथ जय प्रकाश नारायण (Jay Prakash Narayan) को भी जेल में डाल दिया गया पर इनके और दुसरे दिग्गज नेताओ के सानिध्य में इन्होने Indira को election में हरा दिया | इस वक्त तक इनके स्वास्थ्य में काफी कमजोरी आ गई थी |

8 October 1979 को जय प्रकाश नारायण (Jay Prakash Narayan) ने देश से विदा ली |1999 में जय प्रकाश नारायण (Jay Prakash Narayan) को “भारत रत्न” से नवाजा गया साथ ही इन्हें राष्ट्रभुषण एवम 1965 में Ramon Magsaysay Award मिला |

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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