कर्मों का फल

कहानी : कर्मों का फल

एक बार कृष्ण और अर्जुन ब्रह्माण  के भ्रमण पर निकले और ब्रह्माण  के लोगो के कार्यकलापों को देख रहे थे | तभी उनकी नज़र एक हलवाई की दुकान पर पड़ी हलवाई ने पुराना बासा खाना दुकान के पास में इक्कट्ठा कर रखा था | उस खाने के ढेर को देख एक कुत्ता बार- बार उसे खाने आता लेकिन हलवाई उसे पत्थर मार के भगा देता कुत्ता जोर-जोर से रोता और फिर खाने आता उसे फिर हलवाई भगा देता|

Karmon Ka Fal Kahani

 यह देख कर अर्जुन को दुःख हो रहा था लेकिन कृष्ण हँस रहे थे | तब अर्जुन ने आश्चर्य से उनके हँसने का कारण पूछा | तब कृष्ण ने कहा – अर्जुन ! यह दूकान एक नामी हलवाई की थी | उसने अपने इस काम से बहुत धन कमाया था पर उसका नौकर चाकर और नाते रिश्तेदारों से बहुत गंदा बर्ताव था | वो सभी की बहुत बेज्जती करता था | ये कुत्ता वही नामी हलवाई हैं और इस दुकान का वर्तमान मालिक उसी का बेटा हैं जो अपने ही पिता को पत्थर मार रहा हैं | ये जो भी इस कुत्ते के साथ हो रहा हैं ये उसके पिछले जन्मों का फल हैं |

शिक्षा  Moral Of The Story In Hindi

इन्सान को अपने कर्मों पर विशेष ध्यान देना चाहिए वो हर जन्म में अपने कर्मों का भोग करता ही हैं | कहावत हैं “जो जैसा बोता हैं वैसा ही काटता हैं” इंसान अपने कर्म से बड़ा नहीं होता जब तक उसकी खुद पर विजय नहीं होती वो कभी बड़ा नहीं बन सकता | पूजा धर्मिक आडम्बर व्यर्थ हैं इंसानी धर्म, सात्विक कर्म और मीठे वचन ही जीवन का आधार हैं |

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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