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कैसे दिया एक दराती (चाकू) ने काबिलियत का परिचय

Kaise Diya Ek Chaku ne Kabiliyat Ka Parichay कैसे दिया एक दराती (चाकू) ने काबिलियत का परिचय | महानता व्यक्ति के कर्मो में निहित हैं | उसके लिए बाहरी आडम्बर व्यर्थ हैं | यह कहानी विवेकानंद जी के जीवन से जुड़ी अत्यंत सूक्ष्म घटना है जिसने उनकी काबिलियत की पूर्व भविष्यवाणी की | आइये जाने कैसे एक चाकू ने विवेकानंद जी के चरित्र को प्रमाणित किया |

कैसे दिया एक दराती (चाकू) ने काबिलियत का परिचय

स्वामी विवेकानंद अपने प्रवास के लिए निकल रहे थे | उसके पहले आशीर्वाद लेने माता शारदा के पास गये | उस वक्त माता अपने गृह कार्य में व्यस्त थी | विवेकानंद जी ने चरण स्पर्श कर माता से आशीर्वाद माँगा | परन्तु माता ने उन्हें दूर पड़ी एक दराती उठाकर देने को कहा | विवेकानंद जी ने दराती उठाकर माता को दी जिसके बाद माता के चहरे पर प्रसन्नता के भाव थे और उन्होंने विवेकानंद जी को आशीर्वाद दिया | साथ ही कहा – बेटा ! जाओ परदेश में देश का नाम रोशन करो | अपने माता- पिता एवम गुरु को गोरवान्वित करों | विवेकानंद जी ने एक प्रश्न पूछने की आज्ञा मांगी | माता ने सहर्ष आज्ञा दी | उन्होंने कहा – माता ! मेरी प्रगति एवम इस दराती में क्या संबंध हैं ? तब माता शारदा ने मुस्कुराकर उत्तर दिया – बेटा ! तुमने मुझे दराती देते वक्त उसका धारधार सीरा अपनी तरफ रखते हुए , मुझे उसका हत्था हाथ में दिया जो कि एक महान संत का परिचय हैं जो खुद तकलीफ सहकर दूसरों को सुख देता हैं वो ही सच्चा संत होता हैं | जिस व्यक्ति में परहित का भाव सर्वोपरि हैं वही महान संत हैं |

Kaise Diya Ek Chaku ne Kabiliyat Ka Parichay

इस तरह छोटी- छोटी घटनायें, कर्म व्यक्ति के चरित्र को उजागर करती हैं | मनुष्य कितना ही महान बने उसके कर्म उसके गुणों को व्यक्त कर देता हैं | ऐसे ही जो जन्म से महान हैं, वे सहज ही ऐसे कार्य कर जाते हैं जो कि प्रेरणादायक होते हैं जो उनके गुणों को उजागर करते हैं |

महानता दिखाने के लिए दिखावा करने की आवश्यक्ता नहीं होती मनुष्य का कर्म, उसकी वाणी उसके स्वाभाव को भलीभांति रूप से उजागर कर देती हैं |

कैसे दिया एक दराती (चाकू) ने काबिलियत का परिचय इस कहानी में माता ने किस तरह अपने पुत्र के गुणों को भाप लिया और एक संदेश भी दिया कि किसी की महानता का पता उनके व्यवहार अर्थात जीवन शैली से ही चल जाता हैं | उसके लिए पुछ्ताज करने की अथवा किसी प्रमाण की आवश्यक्ता नहीं होती | जीवन की छोटी- छोटी घटनायें ही चरित्र के गुणों एवम अवगुणों का परिचय कराती हैं |

अगर किसी को जानना हैं तो इसी तरह उसके व्यवहार एवम बोलचाल के जरिये जाना जा सकता हैं | भले ही वो कितना ही अपने गुणों का बखान करें लेकिन उसके नित्य व्यवहार एवम कार्यों से उसके चरित्र को जाना जा सकता हैं |

आपको स्वामी विवेकानंद जी के जीवन से जुड़ी यह कहानी कैसी लगी ? कमेंट अवश्य करें |

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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