रहीम दास के दोहे हिंदी अर्थ सहित | Rahim Das Dohe and Poem in Hindi
रहीम दास के दोहे हिंदी अर्थ सहित आपकी रूचि अनुसार लिखे गये हैं. महाकवि रहीम अकबर काल के कवी थे, जिनकी सभी रचनाये प्रिय हैं. सद्मार्ग को दिखाने वाले इनके दोहे उच्च विचार और जीवन शैली को इंगित करते हैं.
रहीम दास जीवन परिचय एवम दोहे ( Rahim Das Short Biography )
SN | जीवन परिचय बिंदु | रहीम दास जीवन परिचय |
1 | पूरा नाम | अब्दुल रहीम खाने खाना |
2 | जन्म | 1556 लाहौर अकबर काल |
3 | मृत्यु | 1627 |
4 | पिता | मरहूम बैरम खाने खाना |
5 | प्रसिद्धी | कवी |
6 | रचनाये | रहीम दोहावली, रहीम सतसई, मदनाश्टक, रहीम रत्नावली |
रहीम दास के दोहे हिंदी अर्थ सहित
Rahim Das Dohe and Poem with meaning in Hindi
दोहा 1:
रहिमन देख बड़ेन को लघु न दीजिये डार।
जहाँ काम आवे सुई कहा करै तलवार।।
हिंदी अर्थ :
रहीम कहते हैं कि अगर कोई बड़ी वस्तु मिल जाए तो छोटी को नहीं छोड़ना चाहिए क्यूंकि जो काम एक छोटी सुई कर सकती हैं उसे बड़ी तलवार नहीं कर सकती. अर्थात जो आपके पास हैं उसकी कद्र करे उससे अच्छा मिलने पर जो हैं उसे ना भूले.
दोहा 2:
जो रहीम उत्तम प्रकृति का करि सकत कुसंग।
चंदन विष व्यापत नहीं लपटे रहत भुजंग।।
हिंदी अर्थ
रहीम कहते हैं जो व्यक्ति योग्य एवम अच्छे चरित्र का होता हैं उस पर कुसंगति भी प्रभाव नहीं डाल सकती जैसे जहरीला नाग अगर चन्दन के वृक्ष पर लिपट जाए तब भी उसे जहरीला नहीं बना सकता.
दोहा 3:
खीरा सिर से काटिये मलियत नमक बनाय।
रहिमन करूए मुखन को चहियत इहै सजाय।।
हिंदी अर्थ
रहीम कहते हैं जिस तरह खीरे को काटकर उसमे नमक लगा कर उसके कड़वेपन को दूर किया जाता हैं उसी प्रकार कड़वे व्यक्ति वचन बोलने वाले को भी यही सजा मिलनी चाहिए.
दोहा 4:
रहिमन धागा प्रेम का मत तोरउ चटकाय।
टूटे से फिर से ना मिलै, मिलै गांठि परि जाय।।
हिंदी अर्थ
रहीम कहते हैं प्रेम का धागा अर्थात रिश्ता कभी तोड़ना नहीं चाहिए. अगर एक बार यह प्रेम का धागा टूटता हैं तो कभी नहीं जुड़ता और अगर जुड़ भी जाए तो उसमे गांठ पड़ जाती हैं. कहने का मतलब यह हैं कि रिश्तों में दरार आ जाये तो खटास रह ही जाती हैं.
दोहा 5:
रूठे सुजन मनाइये जो रूठे सौ बार।
रहिमन फिर फिर पोइये टूटे मुक्ताहार।।
हिंदी अर्थ
रहीम कहते हैं अगर आपका कोई खास सखा अथवा रिश्तेदार आपसे नाराज हो गया हैं तो उसे मनाना चाहिए अगर वो सो बार रूठे तो सो बार मनाना चाहिए क्यूंकि अगर कोई मोती की माला टूट जाती हैं तो सभी मोतियों को एकत्र कर उसे वापस धागे में पिरोया जाता हैं.
दोहा 6:
रहिमन थोरे दिनन को, कौन करे मुहँ स्याह
नहीं छलन को परतिया, नहीं कारन को ब्याह
हिंदी अर्थ
रहीम कहते हैं थोड़े दिन के लिए कौन अपना मूंह काला करता हैं क्यूंकि पर नारि को ना धोखा दिया जा सकता हैं और ना ही विवाह किया जा सकता हैं.
दोहा 7:
गुन ते लेत रहीम जन, सलिल कूप ते काढि।
कूपहु ते कहूँ होत है, मन काहू को बाढी ।
हिंदी अर्थ
रहीम कहते हैं जिस तरह गहरे कुंए से भी बाल्टी डालकर पानी निकाला जा सकता हैं उसी तरह अच्छे कर्मों द्वारा किसी भी व्यक्ति के दिल में अपने लिए प्यार भी उत्पन्न किया जा सकता हैं क्यूंकि मनुष्य का ह्रदय कुएँ से गहरा नहीं होता.
दोहा 8:
जैसी परे सो सहि रहे, कहि रहीम यह देह।
धरती ही पर परत है, सीत घाम औ मेह।
हिंदी अर्थ
रहीम कहते हैं जिस तरह धरती माँ ठण्ड, गर्मी और वर्षा को सहन करती हैं उसी प्रकार मनुष्य शरीर को भी पड़ने वाली भिन्न- भिन्न परिस्थितियों को सहन करना चाहिए.
दोहा 9:
वे रहीम नर धन्य हैं, पर उपकारी अंग।
बांटन वारे को लगे, ज्यों मेंहदी को रंग।|
हिंदी अर्थ
रहीम कहते हैं जिस प्रकार मेहँदी लगाने वालों को भी उसका रंग लग जाता हैं उसी प्रकार पर नर सेवा करने वाले भी धन्य हैं उन पर नर सेवा का रंग चढ़ जाता हैं.
दोहा 10:
रहिमन मनहि लगाईं कै, देखि लेहू किन कोय।
नर को बस करिबो कहा, नारायन बस होय।|
हिंदी अर्थ
रहीम कहते हैं कि शत प्रतिशत मन लगा कर किये गए काम को देखे उनमें कैसी सफलता मिलती हैं. अगर अच्छी नियत और मेहनत से कोई भी काम किया जाए तो सफलता मिलती ही हैं क्यूंकि सही एवम उचित परिश्रम से इंसान ही नहीं भगवान को भी जीता जा सकता हैं.
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Hindi translation of Jaal pare jal jaat bahi, Taji minan ko moh, rahiman machari neer ko tau na chandati choh
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