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अय्यप्पा मंडला पूजा 2018 कथा महत्व एवम सबरीमाला मंदिर इतिहास | Ayyappa Mandala Pooja Katha and Sabarimala Temple history in Hindi

अय्यप्पा मंडला पूजा 2018, कथा, महत्व एवम सबरीमाला मंदिर इतिहास ( Ayyappa Mandala Pooja Vidhi 2018, Katha and Sabarimala Temple Case history in Hindi ) 

कई अद्दभुत कथायें हमारे पुराणों में समाहित हैं, जो कि रीतीरिवाजो एवम त्यौहार के माध्यम से हमारे सामने आती हैं उन्ही में से एक हैं अय्यप्पा मंडला पूजा. भारत में सबसे प्रसिद्ध तीर्थ स्थानों  में से एक हैं सबरीमाला टेम्पल. सबरीमाला मंदिर पथानामथिट्टा जिले में पूर्व की ओर सबरी हिल्स में स्थित है. सबरी माला मंदिर वर्ष भर खुला नहीं रहता. इस मंदिर में कई तरह के नियमों का पालन किया जाता हैं एवम साफ़ सफाई का बहुत ध्यान रखा जाता हैं. सबरीमाला मंदिर में तीर्थ यात्रियों द्वारा मंडला पूजा की जाती हैं. केरल में इसका बहुत ज्यादा महत्व हैं.

Ayyappa Mandala Pooja Katha Vidhi Date Sabarimala Temple history Hindi

सबरीमाला मंदिर का इतिहास (Sabarimala Temple History in hindi)

यह मंदिर अठारह पहाड़ी पर स्थित भगवान अय्यप्पा का मंदिर हैं. सभी मंदिरों की तरह यह पुरे वर्ष खुला नहीं रहता. यह मंदिर मलयालम पंचाग के अनुसार प्रति माह के पहले पांच दिनों तक ही खुला रहता हैं. इसके अलावा यह मंदिर केवल मंडला पूजा के लिए खुलता हैं.और खास पूजा एवम फेस्टिवल पर भी सबरीमाला मंदिर खुला रहता हैं. मंडला पूजा के दौरान सबरीमाला में कई हजार भक्तजन एकत्र होते हैं.

मान्यताओं के हिसाब से भगवान अय्यपा शिव एवं विष्णु की सन्तान हैं. साथ ही मकर संक्रांति के दिन कतामाला पर्वत पर एक दिव्य प्रकाश ज्योति प्रज्जवलित हुई थी तब ही से यह स्थान पवित्र सबरीमाला मंदिर के रूप में प्रकट हुआ.

सबरीमाला मंदिर विवाद और वर्तमान न्यूज़ (Sabarimala Temple issue and current news) –

अयोध्या स्थित राम मंदिर हो या काशी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर हम आए दिन तीर्थ स्थानों के संबंध में गहराते विवादो को न्यूज़ चैनल पर देखते रहते है. इसी कड़ी में केरल स्थित सबरीमाला मंदिर का विवाद भी थमने का नाम नहीं ले रहा है, इस मंदिर के संबंध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गए फैसले और हिंदू मान्यता फिर एक दूसरे के सामने आकर खड़ी है. इस विवाद को देखकर ऐसा कहाँ जा सकता है कि आज का आधुनिक और मेडिकल साइन्स वाला ज्ञान पुराने रीति रिवाजों को मानने के लिए तैयार नहीं है और यही यहाँ के विवाद का कारण है.

क्या है पूरा मामला (Sabarimala Temple Case) –

केरल स्थित इस मंदिर में भगवान अयप्पा की आराधना की जाती है. और यह मान्यता है कि भगवान अय्यप्पा ब्रह्मचारी थे, इसलिए यहाँ छोटी बच्चियाँ एवम वृद्ध महिलायें ही जा सकती हैं और अन्य सभी महिलाओं के लिए इसमें दर्शन निषेध है. इसके आलावा किसी भी जाति धर्म के लोग इस मंदिर में जा सकते हैं

परंतु अभी कुछ समय पूर्व उच्च न्यायालय द्वारा इस संबंध में यह निर्णय दिया गया था, कि यहाँ दर्शन के लिए सभी महिलाओं को प्रवेश दिया जाए. परंतु मंदिर प्रशासन और मंदिर से जुड़े अन्य लोग इस निर्णय को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है. और आज 16 नवंबर जब इस मंदिर के द्वार अगले 2 महीनों के लिए दर्शन के लिए खुलने वालें है, तो वहाँ यह विवाद गहराया हुआ है. इस समय वहाँ हालत पर काबू पाने के लिए कडा पुलिस बल मौजूद है इस मुद्दे पर केरल के मुख्यमंत्री ने भी 15 नवंबर एक बैठक ली थी, परंतु उसमें भी सहमति नहीं बन पाई और इसमें मौजूद कुछ पार्टियों के वरिष्ठ कार्यकर्ता बीच में ही यह बैठक छोड़कर चले गए. 

इस मंदिर से जुड़ा तृप्ति देसाई का मामला (Trupti Desai Sabarimala Temple news )–

इस मंदिर में उच्च न्यायालय के फैसले के बाद, आज यहां महिला अधिकार कार्यकर्ता तृप्ति देसाई अपनी सहयोगियों के साथ दर्शन के लिए पहुंची. वे अल सुबह ही दर्शन के उद्देश्य से पुणे से रवाना होकर कोच्चि हवाई अड्डे पर पहुंच गई, परंतु उन्हे यहां कड़े विरोध का सामना करना पड़ा. वे पिछले कई घंटो से यहां फंसी हुई है और बाहर भाजपा और संघ के कार्यकर्ता उनका कडा विरोध कर रहें है. परंतु तृप्ति जी ने बिना दर्शन के वापस लौटने से इंकार कर दिया है और उन्होने राज्य सरकार से कड़ी सुरंक्षा की मांग भी की है.

कैसे और कब से चालू हुआ ये विवाद (When Sabarimala Temple Case Started)–

वर्ष 2006 में सबरीमाला मंदिर के मुख्य पूजारी ने यह दावा किया, कि इस मंदिर के भगवान की शक्ति क्षीण हो रही है, उनका यह दावा था कि यह सब इसलिए हो रहा है, क्योंकि यहां किसी महिला ने प्रवेश किया है. इसके बाद एक कन्नड अभिनेता की पत्नी ने यह बात कबूल करी, कि भूल से उन्होने भगवान आयप्पा को छुआ इस कारण यह सब हुआ और वे इसका पश्चाताप करना चाहती है. और इसी घटना के बाद लोगों का ध्यान इस मंदिर में महिलाओं के प्रवेश वर्जित होने पर गया, और यहां के युवा अधिवक्ता एसोसिएशन ने उच्च न्यायालय में इस संबंध में याचिका दायर की. लगभग 10 साल बाद उच्च न्यायालय ने इस संबंध में अपना फैसला देते हुए कहा, कि महिलाओं के मौलिक अधिकार को देखते हुए हम उन्हे मंदिर में प्रवेश से वर्जित नहीं कर सकते और न्यायालय ने यहां महिलाओं को प्रवेश कि अनुमति दी.

अब आज जब इस मंदिर में दर्शन शुरू हो चुका है तो यह देखना है कि यहां महिलाओं को प्रवेश मिलता है कि नहीं. यहां मंदिर की मान्यताओं को तव्व्जों मिलती है या उच्च न्यायालय के निर्णय को मंदिर प्रशासन स्वीकार करता है.

मंडला पूजा 2018 में कब है? (Mandala or sabarimala padi pooja 2018 Date)

मंडला पूजा में अय्यप्पा भगवान की पूजा की जाती हैं, यह दक्षिण भारत का विशेष फेस्टिवल हैं, जिसमे पुरे 41 दिनों तक विधि विधान से पूजा होती हैं. दक्षिण भारत के आलावा पुरे देश और विदेश में जहाँ भी दक्षिणी भारतीय मूल के निवासी रहते है, वहां इस पूजा का आयोजन पुरे उत्साह से किया जाता हैं.

सबरीमाला मंदिर में मंडला पूजा बहुत उत्साह से की जाती हैं, यह पूरा व्रत पुरे विधान से 41 दिन चलता हैं और इन्ही 41 दिनों में सबरीमाला टेम्पल के पट अर्थात दरवाजे खुले होते हैं. वर्ष 2018 में यह पर्व 27 दिसंबर , दिन गुरुवार को हैं. मंडला पूजा व्रत 17 नवम्बर, शनिवार को शुरू हो रहा है.

मंडला अय्यप्पा पूजा कथा एवं महत्व (Ayyappa Mandala Pooja Katha Mahatva)

मंडला पूजा में भगवान अय्यप्पा की पूजा का महत्व हैं. भगवान अय्यप्पा को हरिहर के नाम से भी जाना जाता हैं जिसका अर्थ हैं भगवान शिव एवं विष्णु का अंश. यहाँ हरी महत्व विष्णु एवम हर मतलब भगवान शिव से हैं. मान्यता यह हैं कि भगवान हरिहर मोहिनी जो कि विष्णु भगवान का नारी रूप थी की संतान हैं.

कथा इस प्रकार हैं राजा ने भगवान हरिहर को गोद लिया, लेकिन हरिहर इस बात से नाखुश होकर महल त्याग देते हैं, इसलिए पूजा के दौरान भगवान हरिहर की रथ यात्रा आज भी निकाली जाती हैं और मकर संक्रांति के दिन सबरीमाला तक लाई जाती हैं.

मंडला अय्यप्पा पूजा विधि (Ayyappa Mandala Pooja Vidhi)

मंडला पूजा में भगवान अय्यप्पा की पूजा की जाती हैं यह पूजा पुरे 41 दिनों तक चलती हैं जिसमे सबसे पहले भगवान गणेश का आव्हान किया जाता हैं. इन दिनों में भजन कीर्तन किये जाते हैं एवम दक्षिणी सभ्यता के अनुसार सांस्कृतिक उत्सव भी होते हैं.

  • इस पूजा के दौरान भक्त तुलसी माला अथवा रुद्राक्ष माला धारण करते हैं जो कि भगवान अय्यप्पा को अतिप्रिय हैं.
  • माला धारण करने के बाद मनुष्य को इस दिन अपने मन एवं कर्मो को नियंत्रित कर पूरा ध्यान पूजा में लगाना होता हैं.
  • मन की शुद्धता के साथ तन की शुद्धता का भी ध्यान रखा जाता हैं. पूजा के दौरान अलग तरह के वस्त्र धारण किये जाते हैं. और पूरी सफाई के साथ पूजा की जाती हैं.
  • मंडला पूजा के दौरान भक्तो को सुबह जल्दी उठकर स्नान करके शुद्ध पूजा के वस्त्र धारण करना होता हैं. नियमित कार्यो के बाद भगवान अय्यप्पा की पूजा की जाती हैं. भक्त जन अपने मस्तक पर चंदन और भभूती का लेप लगाते हैं.
  • यह पूरा पूजा विधान शाम के वक्त भी किया जाता हैं.
  • मंडला पूजा 41 से 56 दिनों की होती हैं. इसका पालन सभी अपनी मान्यतानुसार करते हैं.पूजा के दिनों में भक्त जन सबरी माला मंदिर में दर्शन के लिए जाते हैं.
  • कई भक्त मंडला पूजा मकर संक्रांति के दिन तक करते हैं.

मंडला पूजा में सबरी माला मंदिर के दर्शन का महत्व होता हैं. बड़े विधि विधान से इस पूजा का आयोजन किया जाता हैं. इसके नियम बहुत कठिन हैं जिनका सावधानी से ध्यानपूर्वक पालन किया जाता हैं.

भारत के हर एक प्रान्त में भगवान के अलग-अलग रूपों को पूजा जाता हैं. कई लोगो को इस बात में संदेह हैं कि भगवान का कोई अस्तित्व नहीं लेकिन इतनी बड़ी संख्या में दुनियाँ के हर एक देश में भगवान का कोई न कोई रूप मौजूद हैं केवल भारत ही नहीं हर जगह त्यौहार मनाये जाते हैं ऐसे में इस दिव्य शक्ति को झुठला पाना असंभव सा लगता हैं.

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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One comment

  1. ek bar mandir jana chahenge

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