बाल विवाह क्या है इसके प्रभाव, कविता | Child Marriage effects, history, Poem In Hindi

बाल विवाह क्या है, इसे कैसे रोके व इसके प्रभाव, कविता  (How to stop Child Marriage or Bal Vivah Law Information, effects, history, Poem in Hindi)

हमारे भारत देश के अलावा विश्व के कई देशों में प्राचीन समय से कुछ ऐसी प्रथाएं चली आ रही हैं, जिसका लोगों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है खास कर लड़कियों पर. जिन पर यह अन्याय होता है और जिसके कारण उन्हें कई बार उनकी मृत्यु का सामना भी करना पड़ जाता है और कुछ की तो मृत्यु हो भी जाती है. इस लेख में आज हम ऐसी ही एक प्रथा के बारे में बात करने जा रहे हैं, जोकि सदियों से चली आ रही है. यह प्रथा हैं बाल विवाह. यह क्या है, इसके कारण, इसका प्रभाव एवं इसे कैसे रोका जा सकता हैं ये सभी जानकारी नीचे कुछ बिन्दुओं के आधार पर दर्शायी गई है.

child marriage

बाल विवाह क्या है ? (What is Child Marriage ?)

कानून के अनुसार किसी भी बच्चे की निश्चित आयु से पहले यानि बच्चों के नाबालिग उम्र में उनकी शादी करना बाल विवाह होता है. यह एक रुढ़िवादी प्रथा है, जिसे बाल विवाह नाम दिया गया है. यह बच्चों के मानवाधिकारों को ख़त्म कर देता है. जिसमें उनके बचपन को उनसे छीन कर उन्हें ऐसे बंधन में बढ़ दिया जाता है, जिसके बारे में उन्हें बिलकुल भी ज्ञान नहीं होता है. उन्हें यह तक नहीं पता होता है, कि उनके साथ क्या हो रहा है. इस प्रथा का शिकार अधिकतर कम उम्र की लड़कियां होती हैं. क्योंकि इसमें न सिर्फ कम उम्र की लड़की का विवाह कम उम्र के लड़के से कराया जाता है, बल्कि कम उम्र की लड़की का विवाह उनसे बहुत अधिक उम्र के बड़े लड़के से भी करा दिया जाता है. इससे उनके पूरे जीवन पर शारीरिक एवं मानसिक रूप से गंभीर दुष्प्रभाव पड़ता है.

इतिहास (History)

ऐतिहासिक रूप से बाल विवाह दुनिया भर में आम बात है. इस प्रथा का इतिहास कई सदियों पुराना है. कुछ लोगों का कहना हैं कि यह वैदिक काल से चली आ रही प्रथा हैं, तो कुछ का कहना हैं कि यह मध्यकाल से चल रही है. कुछ लोगों का कहना हैं कि जब विदेशी शासक भारत आये थे, तब वे धीरे – धीरे भारत पर राज करने लगे थे, उस समय अपने बेटियों की रक्षा के लिए उनका बाल विवाह कर दिया जाता था. दरअसल वे लोग उन विदेशी शासकों यानी अंग्रेजों से अपनी लड़कियों की यौन शोषण जैसे अत्याचारों से बचाने के लिए उनका कम उम्र में ही विवाह कर देते थे. ताकि वे यह अंग्रेजों के खिलाफ हथियार के रूप में उपयोग कर सकें. इसके अलावा कुछ इतिहासकारों का यह कहना है, कि इस बुराई को दिल्ली सल्तनत के समय से भी लागू किया गया है. अतः यह प्राचीन समय से चली आ रही प्रथा है, जिसे कई पीढ़ियों द्वारा आगे बढ़ाया जाता गया, और जिसके कारण यह अब भी कई स्थानों पर लागू हैं.

कारण (Causes)

बाल विवाह के सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक एवं धार्मिक रूप में कई कारण हैं. यहाँ हम आपके सामने बाल विवाह के कुछ प्रमुख कारणों के बारे में दर्शाने जा रहे हैं.

  • लिंग असमानता एवं भेदभाव :- कई समुदायों में जहाँ बाल विवाह का प्रचलन हैं, वहां लड़कियों को लड़कों की तरह महत्व नहीं दिया जाता है. लड़कियों को उनके परिवार वालों द्वारा बोझ के रूप में देखा जाता हैं. उनका मानना होता है कि अपनी बेटी का कम उम्र में विवाह कर अपना बोझ उसके पति के ऊपर डाल देना चाहिए, ताकि वे अपनी आर्थिक कठिनाई को कम कर सके. इसेक अलावा लड़कियों को कैसे व्यवहार करना चाहिए, उसे कैसे कपड़े पहनने चाहिए, शादी करने के लिए किसको देखने की अनुमति होनी चाहिए. लड़कियों को इन सभी चीजों के लिए नियंत्रित करना भी बाल विवाह के लक्षण हैं. लड़कियों के साथ भेदभाव कर उन पर घरेलू हिंसा, जबरदस्ती और साथ ही उन्हें भोजन से वंचित कर उन्हें विवाह करने के लिए मजबूर किया जाता है. और यह सब सूचना, शिक्षा एवं स्वास्थ्य तक उनकी पहुँच न होने के कारण होता है.
  • परंपरा :- कुछ लोग इसे एक परंपरा के रूप में देखते हैं. कई जगहों पर यह सिर्फ इसलिए होता है, क्योकि लोगों का कहना होता है कि, यह पीढ़ीयों से चली आ रही प्रथा है. जब लड़कियों को मासिक चक्र शुरू होता हैं, तो वे समुदाय की नजर में महिला बन जाती है. और वे कम उम्र में ही उनका विवाह कर उन्हें एक पत्नी और माँ का दर्जा दे देते हैं.
  • गरीबी :- बाल विवाह का मुख्य कारण गरीबी भी है. गरीब परिवार के लोगों में यह ज्यादा देखा जाता है, कि वे अपनी बेटियों की शादी जल्दी से जल्दी कर देते हैं. क्योकि वे आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं, इसलिए वे सोचते हैं कि लड़की की शादी जल्द से जल्द करने से उन्हें उसकी शिक्षा, स्वास्थ्य एवं शादी में ज्यादा खर्च नहीं करना पड़ेगा. गरीब परिवार के लोग लड़कियों के बजाय लड़कों को शिक्षित करने पर ज्यादा ध्यान देते हैं. यह भी बाल विवाह का एक कारण है. गरीब परिवार के लोग अपना घर चलाने के लिए ऋण लेते हैं, या वे किसी विवाद में पड़ जाते हैं, तो इस तरह के मामलों से निपटने के लिए वे लोग अपनी लड़कियों का विवाह ऐसे घर में एवं कम उम्र में ही देते हैं. इसके अलावा यदि गरीब परिवार की लड़की युवा एवं अशिक्षित हो, तो उन्हें दहेज के लिए कम पैसे देने होते हैं. इसलिए भी वे लड़कियों का विवाह जल्दी कर देते हैं.
  • असुरक्षा :- कई माता – पिता अपनी बेटियों का विवाह किसी युवा या उससे अधिक उम्र वाले लड़के से कर देते हैं, क्योकि उन्हें लगता हैं कि यह उनके हित में है. वे लड़कियों को उत्पीढ़न और शारीरिक या यौन शोषण जैसे खतरे से उनकी सुरक्षा करने के लिए यह कदम उठाते हैं.
  • अपर्याप्त कानून :- कई देश ऐसे हैं, जहाँ बाल विवाह के खिलाफ कानून तो हैं, लेकिन वह पूरी तरह से लागू नहीं होता है. मुस्लिमों में शिया एवं हजारा जैसे कुछ कानून होते हैं, जिसमें बाल विवाह भी शामिल है. इसी तरह कुछ समुदाय के लोग अपने अनुसार कानून का निर्माण कर भी बाल विवाह जैसी प्रथाओं को बढ़ावा देते हैं.         

ये सभी बाल विवाह के कुछ मुख्य कारण हैं जिसका परिणाम बहुत ही घातक हो सकता है.

प्रभाव (Effects)

यह एक ऐसी प्रथा हैं, जिसका प्रभाव नाकारात्मक ही होता है. इसके दुष्प्रभाव निम्न हैं –

  • अधिकारों से वंचित :- बाल विवाह का सबसे बड़ा प्रभाव यह होता है, कि इससे लड़कियों को जो अधिकार मिलने चाहिए, उन्हें उनसे वंचित कर दिया जाता है. उन्हें छोटी उम्र में ही घर के कामों को सीखने के लिए मजबूर किया जाता है.
  • बचपन का छिनना :- यह प्रथा ऐसी हैं, जहाँ बच्चों से उनका बचपन छिन जाता है. जब उनके खेलने कूदने के दिन होते हैं, तब उन्हें एक ऐसी जिम्मेदारी सौंप दी जाती हैं, जिसके बारे में उन्हें कुछ भी नहीं पता होता है. जहाँ उन्हें खेल खिलौने एवं गुड्डे – गुड़ियों की शादी जैसे खेल खेलने चाहिए. वहां उन्हें ही गुड्डे गुड़ियाँ बना कर उनका विवाह कर दिया जाता हैं और उन पर जिम्मेदारियां डाल दी जाती है. जिससे उनका मानसिक एवं भावनात्मक विकास नहीं हो पाता है.
  • निरक्षरता :- बाल विवाह के चलते लड़कियों को अशिक्षित ही रखा जाता हैं या उन्हें बीच में ही शिक्षा छोडनी पड़ती है. उन्हें घरेलू काम काज की जिम्मेदारी सौंप दी जाती है. और लडकियाँ शिक्षित नहीं होने के कारण उन्हें स्वतंत्र एवं खुद को सशक्त बनाने के अवसर प्राप्त नहीं होते हैं. इसका परिणाम यह होता है कि वे जीविका के लिए अपने परिवार पर निर्भर हो जाती हैं और खुद को शक्तिहीन बना देती हैं, जिससे उनका आसानी से शोषण हो सकता है. इसके अलावा यदि वे शिक्षित नहीं रहती हैं, तो वे वित्तीय कठिनाइयाँ में अपने परिवार की सहायता करने में भी सक्षम नहीं होती, साथ ही वे अपने बच्चों को भी शिक्षित नहीं कर पाती हैं.
  • बीमारियाँ :- यदि छोटी उम्र में लड़कियों का विवाह कर दिया जाता हैं, तो इससे वे एचआईवी जैसे यौन बीमारियों का शिकार भी हो सकती हैं. कम उम्र में विवाह होने से लड़कियाँ कम उम्र में ही गर्भवती हो जाती हैं जबकि उन्हें इसके बारे में कुछ जानकारी भी नहीं रहती है. इसके अलावा कम उम्र में लड़कियों के साथ जबरन यौन संबंध बनाये जाने के कारण भी लड़कियों पर इसका बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है. शोषित लडकियाँ अपने बचाव के लिए किसी से संपर्क भी नहीं कर पाती है. इससे उन्हें कई बीमारियाँ भी हो सकती हैं, यहाँ तक कि उनकी मृत्यु भी हो जाती है.
  • जल्दी माँ बनना :- जल्दी माँ बनना बाल विवाह के सबसे प्रमुख प्रभावों में से एक हैं. माँ बनने के लिए मानसिक एवं शारीरिक रूप से स्वस्थ्य रहना बहुत जरुरी होता है, ऐसे में लड़कियों के जल्दी विवाह होने से वे जल्दी माँ बन जाती है, जिससे माँ और बच्चे दोनों का स्वास्थ्य खतरे पड़ सकता है. इससे उनके बच्चे कुपोषित भी पैदा होते हैं जिससे उन्हें कई बीमारियाँ हो सकती हैं. शोध के अनुसार यह पता चला है कि 15 वर्ष से कम उम्र की लडकियाँ में 20 वर्ष से अधिक उम्र की लड़कियों की तुलना में डेलिवरी के दौरान मरने की संभावना 5 गुना अधिक होती है. ऐसे मामलों में शिशु मृत्यु दर भी बहुत अधिक है.

बाल विवाह को कैसे रोका जा सकता है ? (How to Stop Child Marriage?)

लोगों को इसके प्रति जागरूक करने एवं उन्हें ऐसी प्रथाओं का त्याग करने के लिए कई प्रयास किये गए हैं. और आज भी किये जा रहे हैं कुछ प्रयासों के बारे में जानकारी हम यहाँ प्रदर्शित कर रहे हैं –

  • लड़कियों को शिक्षित करना :- लड़कियों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए यह जरुरी हैं, कि उन्हें शिक्षित किया जाये. क्योंकि इससे वे समझ पाएंगी, कि उनकी जबरन शादी उनके भविष्य को नकारात्मक रूप से कैसे प्रभावित करेगी. इसके साथ ही उन्हें इसके बारे में पूरी जानकारी भी प्राप्त होगी, जिससे यदि उन पर शादी करने के लिए दबाव डाला जा रहा होगा, तो उन्हें यह पता होगा, कि उन्हें इसके खिलाफ लड़ने के लिए किससे संपर्क करना हैं.
  • लड़कियों का सशक्तिकरण :- इस प्रथा के खिलाफ लड़ने के लिए यह आवश्यक है कि लड़कियाँ सशक्त बने, उनके अंदर आत्मविश्वास हो. उन्हें अपने साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ लड़ने के लिए खुद को मजबूत करना होगा. क्योकि उन्हें अपना भविष्य तय करने का पूरा हक़ होता है. और साथ ही लड़कियों को आत्मनिर्भर भी होना चाहिए ताकि कोई उन्हें अपने ऊपर बोझ न समझें. इसके लिए जरुरी है, कि लड़कियां शिक्षा प्राप्त करें और खुद को सशक्त बनाने की दिशा में काम करें.
  • अभिभावकों एवं समुदाय के लोगों का शिक्षित होना :- किसी भी लड़की का विवाह तय करने का काम लड़की के माता – पिता या समुदाय के लोगों द्वारा किया जाता है, कि वे किससे और कब विवाह करें. उन्हें इसके कानून के बारे में भी जानकारी नहीं होती और वे अपने बेटियों का विवाह कम उम्र में ही तय कर देते हैं. किन्तु यदि वे शिक्षित होंगे, तो उन्हें सभी चीजों के बारे में जानकारी होगी. उन्हें यह समझने में भी आसानी होगी, कि बाल विवाह के कई नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं. अतः यदि अभिभावक एवं समुदाय के लोग शिक्षित होंगे, तो वे अपने विचारों को बदलने, लड़कियों के अधिकारों के लिए बोलने और दूसरों को ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए प्रेरित हो सकते हैं.
  • इसके खिलाफ बने कानून का समर्थन करना :- आज के समय में बाल विवाह के खिलाफ लड़ने के लिए कई कानून बनाये गये हैं. जैसे लड़के एवं लड़कियों के विवाह की आयु सीमा तय कर दी गई हैं, इसके अलावा कानून तोड़ने वालों को सजा भी दी जाती हैं. इसके लिए समर्थन करना बहुत आवश्यक है. जितने ज्यादा लोग इसका समर्थन करेंगे, इस तरह की प्रथाओं को खत्म करने में उतनी ही आसानी होगी.   
  • आर्थिक रूप से सहायता :- आज के समय में कई ऐसी योजनायें बनाई जा रही हैं, जिससे गरीब परिवार वालों को उनकी लड़की की देखरेख एवं शादी के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, ताकि वे अपने लड़कियों को बोझ न समझें. आज लड़कियों की शिक्षा से लेकर विवाह एवं उनके बच्चे होने तक के लिए सरकार द्वारा वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है. इससे बाल विवाह में पहले की तुलना में काफी कमी भी आई है.
  • बाल विवाह विरोधी संगठनों का समर्थन करना :- इस तरह की बुराई को समाप्त करने के लिए कई जगहों पर इसके विरोध में संगठन बनाये गये हैं, जो लोगों में इसके दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाते हैं, इसका समर्थन भी किया जा सकता हैं. मीडिया, एवं अन्य कार्यक्रमों के माध्यम से भी लोगों को इसके दुष्प्रभाव के बारे में जानकारी देकर उन्हें इससे बचने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है. टेलीविज़न पर भी बाल विवाह जैसी बुराइयों से लड़ने एवं उसे समाप्त करने के लिए कार्यक्रमों प्रदर्शित किये गये हैं, इससे भी लोगों को इसके प्रति जागरूक किया जा रहा है.

इस तरह के प्रयासों के चलते बाल विवाह को रोकना बहुत आसान हो गया है. आज के समय में बाल विवाह पहले की तुलना में काफी कम हो गए हैं.

बाल विवाह के लिए बनाये गए कानून की जानकारी (Basic Law Information for Child Marriage)

बाल विवाह को रोकने के लिए अलग – अलग देशों में अलग – अलग कानून बनाये गये हैं. हम यहाँ भारत में बाल विवाह के लिए बनाये गये कानून के बारे में बात करने जा रहे हैं जोकि इस प्रकार है –

बाल विवाह अधिनियम 1929 :-

बाल विवाह के खिलाफ सबसे पहले सन 1929 में कानून बनाया गया था. जिसे सन 1930 में अप्रैल माह की पहली तारीख को पूरे देश में लागू किया गया था. इस कानून का लक्ष्य लड़कियों पर इसके कारण होने वाले दुष्प्रभावों को समाप्त करना था. इस कानून में निम्न नियम लागू किये गये थे –

  • इस कानून के तहत विवाह के लिए पुरुष की आयु सीमा न्यूनतम 21 वर्ष एवं महिलाओं की आयु सीमा न्यूनतम 18 वर्ष तय की गई थी. इससे पहले शादी करने पर उसे बाल विवाह समझा जाता था. और इसके लिए उन्हें सजा भी दी जाती थी.
  • 18 से 21 वर्ष की उम्र के पुरुष को नाबालिग लड़की से बाल विवाह करने पर उसे 15 दिन की सजा एवं 1000 रूपये का जुर्माना देना होता था.
  • इसके अलावा 21 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों द्वारा नाबालिग लड़की के साथ विवाह करने पर पुरुष को, बाल विवाह को आयोजित करने वाले लोगों को, और लड़के एवं लड़की के अभिभावकों को 3 महीने की जेल की सजा और कुछ निश्चित किया हुआ जुर्माना देना होता था.

हालाँकि इस कानून के लागू होने के बाद इसमें कई बार संशोधन भी किया गया था.

बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 :-

बाल विवाह के लिए बनाये गये कानून की कुछ कमियों को दूर करने के लिए भारत सरकार ने 2006 में बाल विवाह निषेध अधिनियम बनाया था, जिसे 1 नवंबर सन 2007 को लागू किया गया था. इस अधिनियम के अनुसार बाल विवाह को न सिर्फ रोकना था, बल्कि इसे पूरी तरह से खत्म करना था. पिछले अधिनियम में बाल विवाह के खिलाफ कार्यवाही करना कठिन और समय लेता था, साथ ही इसे पूर्ण रूप से लागू नहीं किया गया था. इसलिए सन 2006 के अधिनियम के अनुसार इसमें आयु सीमा में कोई बदलाव नहीं किया, किन्तु इसमें बच्चों की सुरक्षा को लेकर कुछ बदलाव किये गये थे. जोकि इस प्रकार हैं –

  • इस कानून के तहत बाल विवाह के लिए मजबूर किये गये नाबालिग लड़कों एवं लड़कियों को उनके वयस्क होने के पहले या उसके बाद 2 साल तक उनकी शादी तोड़ने का विकल्प दिया गया है.
  • इसके साथ ही शादी ख़त्म होने पर लड़की के ससुराल वालों को दहेज में मिले सभी कीमती सामान, पैसा और उपहार वापस करना होता है, और लड़की को तब तक रहने के लिए स्थान प्रदान किया जाता है, जब तक कि वह वयस्क नहीं हो जाती और उसकी शादी नहीं हो जाती.
  • इसके अलावा बाल विवाह से पैदा हुए बच्चे को जायज माना जाता है, और अदालतें भी बच्चे के हित को ध्यान में रखते हुए उसके माता-पिता को उसकी कस्टडी दें, ऐसी उम्मीद की जाती है.
  • इसके अलावा इसमें जेल की सजा को 3 महीने से बढाकर 2 साल कर दिया गया है और साथ ही कुछ निश्चित जुर्माना भी लगाया गया है.

हालाँकि इस कानून के लागू होने के बाद मुस्लिम संगठनों ने इसे मानने से इंकार कर दिया था. किन्तु इसके बाद भी यह कानून पूरे देश में लागू है.

विवाह समाज का ऐसा भाग हैं जिसके बिना समाज कुछ नहीं है अर्थात विवाह समाज की एक ऐसी परम्परा हैं जोकि सभी लड़के एवं लड़कियों के जीवन में अहम भूमिका निभाती हैं. किन्तु विवाह अगर सही उम्र में किया जाये तो बेहतर होता हैं, यदि उम्र से पहले कर दिया जाये, तो यह एक अभिश्राप भी बन सकता है. अतः बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाने एवं इस प्रथा को ख़त्म करने के प्रयासों के चलते आज के समय में इसमें काफी कमी भी आई हैं. उम्मीद है कि आने वाले समय में यह पूरी तरह से ख़त्म हो जायेगा.

हिंदी कविता बाल विवाह  ( Child Marriage Kavita or Poem )

कैसा अजब ये नियम बना दिया
कोमल फूलों को रिवाजो तले मुरझा दिया

जिन्हें जीवन क्या हैं मालूम नहीं
रिश्ते जिन्हें मालूम नहीं

अच्छा बुरा मालूम नहीं
अपना पराया मालूम नहीं

ऐसे नाज़ुक कन्धों पर
शादी का बोझ डाल दिया

जैसे दो खुले परिंदों को
किसी खूटे से बाँध दिया  

छोटी सी उम्र के भोले भाले भाव 
अनजाने में खेल गये शादी के ये दांव

पति पत्नी क्या हैं कोई पूछो इनसे
रिश्ते निभाना क्या हैं कोई पूछो इनसे

एक जश्न की तरह जो ये मना गये
जीवन-बंधन खेल-खेल में रचा गये

रिवाजो के नाम पर इन्हें यूँ ना बाँधों
बाल विवाह अभिशाप हैं  नन्हो पर ये बोझ ना डालो|

बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाना जरुरी हैं जिस तरह कन्या भ्रूणहत्या, दहेज़ प्रथा एक अपराध हैं, वैसे ही बाल विवाह भी एक जघन्य अपराध हैं, जिसमे मासूमों का बालपन खत्म होता हैं उनकी नींव कमजोर होती हैं.

अन्य पढ़े :

Karnika

कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
Karnika

2 comments

  1. Nice post, thankz

  2. nice poem

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *