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हिंदी कविता बाल विवाह | Child Marriage Kavita Poem In Hindi

Child Marriage Kavita Poem In Hindi हमारे समाज में कई बुराईयों हैं जिनमें से एक हैं बाल विवाह | जहाँ एक तरफ शादी से यूवा तक घबरा जाता हैं वहीँ इन छोटे-छोटे बच्चो को जीवन के इस बंधन में कैसे बाँधा जा सकता हैं | बाल विवाह बच्चो से उनका बचपन छीन लेते हैं एक सफल जीवन के लिए स्वस्थ खुशहाल बचपन बहुत जरुरी हैं |शादी का बंधन जिम्मेदारी से दबा हुआ हैं ऐसे बोझ को उस उम्र में बच्चो पर डालना जब उन्हें अपना भविष्य बनाना हैं, गलत हैं |

बाल विवाह एक अभिशाप हैं इसे खत्म करना ही सुखद भविष्य की शुरुवात है |

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हिंदी कविता बाल विवाह 

Child Marriage Kavita Poem In Hindi

कैसा अजब ये नियम बना दिया
कोमल फूलों को रिवाजो तले मुरझा दिया

जिन्हें जीवन क्या हैं मालूम नहीं
रिश्ते जिन्हें मालूम नहीं

अच्छा बुरा मालूम नहीं
अपना पराया मालूम नहीं

ऐसे नाज़ुक कन्धों पर
शादी का बोझ डाल दिया

जैसे दो खुले परिंदों को
किसी खूटे से बाँध दिया  

छोटी सी उम्र के भोले भाले भाव 
अनजाने में खेल गये शादी के ये दांव

पति पत्नी क्या हैं कोई पूछो इनसे
रिश्ते निभाना क्या हैं कोई पूछो इनसे

एक जश्न की तरह जो ये मना गये
जीवन-बंधन खेल-खेल में रचा गये

रिवाजो के नाम पर इन्हें यूँ ना बाँधों
बाल विवाह अभिशाप हैं  नन्हो पर ये बोझ ना डालो|

बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाना जरुरी हैं जिस तरह कन्या भ्रूणहत्या, दहेज़ प्रथा एक अपराध हैं वैसे ही बाल विवाह भी एक जघन्य अपराध हैं जिसमे मासूमों का बालपन खत्म होता हैं उनकी नींव कमजोर होती हैं |

बाल विवाह के प्रति जागरूक होकर उसके खिलाफ लड़ाई लड़ें यह हमारा कर्तव्य है |

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Karnika

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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2 comments

  1. Nice post, thankz

  2. nice poem

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