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गुड फ्राइडे 2019 व ईस्टर फेस्टिवल का इतिहास | Good Friday 2019 and Easter Festival history in hindi

गुड फ्राइडे 2019 व ईस्टर अंडे का महत्त्व, इतिहास (Good Friday 2019 and Easter Egg Meaning, history in hindi)

भारत एक ऐसा देश है जिसमे, हर तरह के हर जाति के लोग रहते है. सभी को संविधान मे, समान अधिकार प्राप्त है. हर जाति के लोग अपने, त्यौहार अपनी पद्धति से मनाते है. गुड फ्राइडे व ईस्टर बहुत महत्वपूर्ण त्यौहार है, क्रिश्चियन जाति के लोगो का. इसी के साथ गुड फ्राइडे शुक्रवार और ईस्टर रविवार को बनाया जाता है जो, क्रिश्चियन समाज के लिये बहुत पवित्र शुक्रवार व रविवार मे से एक है. 

हम आपको गुड फ्राइडे की सम्पूर्ण जानकारी इन मुख्य बिन्दुओ के माध्यम से देंगे-

  • गुड फ्राइडे का इतिहास
  • गुड फ्राइडे के तथ्य
  • गुड फ्राइडे सेलिब्रेशन के तरीके

 गुड फ्राइडे का इतिहास (Good Friday History or Facts in hindi)–

गुड फ्राइडे, एक ऐसा दिन था, जिस दिन, यीशु मसीह के सूली पर चड़ने और दफन होने की दुखद घटना घटित हुई थी. कहा जाता है कि, गॉड यीशु ने बहुत कठिन उपवास किये, त्याग व आत्म बलिदान किया. आज लोग उसी का अनुसरण करते हुए उनके इस बलिदान को याद करते है , और उनके लिये उपवास रखते है.

गुड फ्राइडे के तथ्य (What happened on good friday  or why is it called good friday)–

यीशु को मानवता की खातिर क्रूस पर चढ़ाया गया था. Paschal Triduum. गुड फ्राइडे पश्चल त्रिदूम (Paschal Triduum) का एक पार्ट है. गुड फ्राइडे का महत्व तो एक ही है, गॉड यीशु के इस बलिदान को ध्यान मे रखा जाता है. और उनकी याद मे बनाया जाता है परन्तु, तरीके कभी-कभी चर्च मे थोड़े बदल जाते है. काले कपडे पहन कर चर्च जाते है, इस दिन कैंडल नही जलाई जाती है. सभी अपने-अपने हिसाब से, गॉड को याद करते है. कोई बीजारोपण करता है, कोई प्रेयर करता है , कोई गॉड की बुक पढता है. इसके अलावा भी लोग कुछ ना कुछ करके यह दिन गॉड को समर्पित करते है.

गुड फ्राइडे सेलिब्रेशन के तरीके (How Good Friday celebration) –

गुड फ्राइडे एक तरह का शोक का दिन है, यह तीसरे पहर मे चर्च मे मनाया जाता है क्योंकि, कहा जाता यीशु के प्राण, तीन बजे के आस-पास निकले थे. यह तीन घंटे तक मनाया जाता है, इसमें गॉड के लिये प्रेयर कर उन्हें याद किया जाता है.

अब हम हम आपको ईस्टर की सम्पूर्ण जानकारी इन मुख्य बिन्दुओ के माध्यम से देंगे-

  • ईस्टर का इतिहास
  • ईस्टर के तथ्य
  • ईस्टर सेलिब्रेशन
  • भारत मे ईस्टर सेलिब्रेशन

ईस्टर फेस्टिवल का इतिहास (Easter Festival History)-

ईस्टर का इतिहास बहुत ही पुराना है. यह त्यौहार बसंत ऋतु मे मनाया जाता है. यह आठवी सदी मे, एक विद्वान सेंट बीड के द्वारा, प्रारंभ किया गया था. जिसमे अपने भगवान यीशु मसीह के, जी उठने पर उसी ख़ुशी के रूप मे मनाया जाता है. ईस्टर एक पगान (Pagan) या बुतपरस्त त्यौहार है जो, बसंत ऋतु की बहार के साथ ही, बसंत के पहले रविवार (Sunday) को मनाया जाता है. ईस्टर का मुख्य प्रतिक एक अंडा होता है. वर्तमान मे, ईस्टर नयी कायाकल्प, नया उत्सव, पुनर्जन्म, नवीनीकरण, और पृथ्वी पर रहने वाले लोगो, और हर एक प्राणी के लिये, उन्नति का प्रतिक है.

Good friday easter festival

 

ईस्टर फेस्टिवल के तथ्य (Easter Festival Facts and significance)–

ईस्टर के तथ्य, अपने आप मे काफी रोमांचक है. जिसमे हर चीज़ का अपना ही महत्व, और उसके सम्बन्ध मे, पौराणिक कथा है. जिस तरह एक उदासी से भरा माहोल रहता है परन्तु, बसंत की बहार के साथ माहोल ख़ुशनुमा हो जाता है. उसी प्रकार शैल (खोल) यीशु की कब्र का प्रतिनिधित्व करता है लेकिन, बसंत के फूल यीशु कीमृत्यु के बाद पुनः जीवन का प्रतिनिधित्व करते है.

ईस्टर अंडे का महत्त्व (Easter Egg Meaning)

ईस्टर मे, अंडे का बहुत महत्व है क्योंकि, जिस प्रकार चिड़िया सबसे पहले, अपने घोसले मे अंडा देती है. उसके बाद उसमे से, चूजा निकलता है उसी प्रकार, यहा अंडे को एक शुभ स्मारक माना है. और ईस्टर मे, बहुत तरीके से इसका उपयोग किया जाता है. कही चित्रकारी करके, कही दुसरे रूप मे सजा कर, उपहार के रूप मे ,एक दूसरे को दिया जाता है. यह एक शुभ संकेत होता है जो, लोगो को देकर उनके जीवन मे, नया उत्साह और उमंग भरता है, जीवन जीने के प्रति.

कनाड़ा विश्व की ,सबसे बड़ी ईस्टर एग्ग (अंडे) की साइट है. पय्संका (pysanka) मे, एक ईस्टर एग्ग की चित्रकला का अभ्यास किया जाता है.

ईस्टर सेलिब्रेशन (How Easter Festival Celebrated) –

ईस्टर एक बहुत बड़ा सेलिब्रेशन है. जिसमे ख़ुशी और जश्न होता है ,गॉड यीशु के जी उठने का. जिसे धार्मिक रूप से, क्रिश्चियन समाज मनाता ही है. उसके अलावा एक दूसरे को गिफ्ट्स जिसमे खासकर अंडे का आकार हो, देकर अलग-अलग रूप से पार्टी करके मिठाई बना कर गीत गाकर , बधाई देकर, और भी अन्य कई तरीकों से , भिन्न-भिन्न देशों मे बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है.

कहा जाता है कि ,ईस्टर के छियालीस दिन पूर्व, जो भी बुधवार आता है उस दिन से, यह प्रारंभ होता है और ,ईस्टर के दिन समाप्त होता है. जिसमे अंतिम सप्ताह पवित्र सप्ताह होता है और आखरी रविवार को, ईस्टर मना कर समाप्ति होती है. कहा जाता है छियालीस दिन मे से, एक गुरुवार को ऐसी भविष्यवाणी हुई थी कि, गॉड यीशु जी उठेंगे इसका लोगो को इन्तजार था. एक रविवार बिल्कुल ऐसा ही हुआ, तब से लोग ईस्टर को बहुत अच्छे से मनाते है.

विश्व मे गुड फ्राइडे व ईस्टर सेलिब्रेशन (Easter Festival Celebration in world)–

भारत मे ही नही बल्कि, सम्पूर्ण विश्व मे गुड फ्राइडे और ईस्टर को सेलिब्रेट किया जाता है. भारत मे भी आजादी के पूर्व , ब्रिटिश काल से यह सेलिब्रेशन चला आरहा है. देखा जाये तो, क्रिश्चियन लोग भारत मे, कुल आबादी के दो प्रतिशत ही थे उस समय तो. परन्तु फिर भी, यह त्यौहार जहा गुड फ्राइडे को शांति से बनाते है वही ईस्टर को उतनी ही धूम-धाम से बनाया जाता था. भारत मे मुख्य रूप से मुंबई , गोवा और पूरे भारत मे जहा भी , अधिकतर क्रिश्चियन लोग निवास करते है. यहा चर्च को विशेष रूप से, सजाया जाता है. गुड फ्राइडे व ईस्टर को बनाने वाले सभी लोग इस दिन चर्च मे जाते है, और उनके धर्म से संबंधित गीत गाते है, प्रार्थना करते है ,कही जगह नृत्य और ,अन्य कार्यक्रम के अयोजन होते है. सभी एक दूसरे को गिफ्ट्स, फ्लावर्स , कार्ड, चोकलेट, केक देकर विश करते है. सुबह से शाम तक पार्टी चलती है ईस्टर मे जिसमे, पारंपरिक लोकप्रिय लंच-डिनर होता है. इस प्रकार अन्य देशों की तरह भारत मे ,भी बड़े उत्साह के साथ गुड फ्राइडे और ईस्टर का सेलिब्रेशन होता है. तथा विश्व के सभी बड़े देश जैसे- आस्ट्रेलिया,ब्राजील,इटली,इंग्लैंड,जर्मनी जैसे सभी देशों मे जहा क्रिश्चियन समाज है गुड फ्राइडे और ईस्टर को बनाते है.

साल 2019 में गुड फ्राइडे व ईस्टर कब है? (Good Friday and Easter Festival 2019 Date)

इस साल 2019 में गुड फ्राइडे 19 अप्रैल, दिन शुक्रवार को व ईस्टर 21 अप्रैल, दिन रविवार को मनाया जायेगा.

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Priyanka

प्रियंका खंडेलवाल मध्यप्रदेश के एक छोटे शहर की रहने वाली हैं .
यह एक एडवोकेट हैं और जीएसटी में प्रेक्टिस कर रही हैं . इन्हें बैंकिंग, टेक्स्सेशन एवं फाइनेंस जैसे विषयों पर लिखना पसंद हैं ताकि उनका ज्ञान और अधिक बढ़ सके. उन्होंने दीपावली के लिए लिखना शुरू किया और इस तरह अपने ज्ञान को पाठकों तक पहुँचाने की कोशिश की.
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