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गोपाल कृष्ण गोखले का जीवन परिचय | Gopal Krishna Gokhale biography in hindi

Gopal Krishna Gokhale biography in hindi हमारा देश भारत गुलामी की जंजीरों में लगभग 200 सालों तक बंधा रहा और फिर न जाने कितने शहीदों के बलिदान के बाद हमारे देश को आज़ादी का दिन देखने मिला. इस आज़ादी को दिलाने में ऐसे कितने ही लोग हैं, जिन्हें हम नहीं जानते या जानते भी हैं तो केवल उनका नाम. उन लोगों ने देश की आज़ादी के लिए कैसे योगदान दिया, इस बारे में या तो हमे जानकारी नहीं होती और अगर है भी तो वह भी आधी – अधूरी होती हैं. ऐसे ही एक स्वतंत्रता सैनानी थे –गोपाल कृष्ण गोखले. आज हम इन्हीं के संबंध में आपसे जानकारी साझा करेंगे.

गोपाल कृष्ण गोखले का जीवन परिचय 

Gopal Krishna Gokhale biography in hindi

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गोपाल कृष्ण गोखले का संक्षिप्त परिचय निम्नानुसार हैं -:

नाम गोपाल कृष्ण गोखले
जन्म 9 मई, सन 1866
जन्म स्थान कोथलुक, जिला रत्नागिरी, भारत
मृत्यु 19 फरवरी, सन 1915
पिता का नाम कृष्णा राव गोखले
माता का नाम वालुबाई गोखले
भाई – बहन अज्ञात
विवाह 2 विवाह -:

  • प्रथम विवाह – सन 1880 में,
  • द्वितीय विवाह – सन 1887 में.
संतान 2 बेटियाँ
शिक्षा – दीक्षा सन 1884 में Elphinstone College से स्नातक [Graduation]
पेशा [Occupation] प्रोफ़ेसर और राजनीतिज्ञ
राष्ट्रियता [Nationality] भारतीय
संस्था [Organisation] इंडियन नेशनल कांग्रेस, डेक्कन एजुकेशन सोसाइटी
संस्थापक [FounderMember] सर्वेन्ट्स ऑफ़ इंडिया सोसाइटी
आंदोलन [Movement] भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन [Indian Nationalist Movement]
उल्लेखनीय कार्य भारतीय शिक्षण प्रणाली के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया.

गोपाल कृष्ण गोखले ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ लड़ने वाले भारतीयों में से एक थे. वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सामाजिक और राजनैतिक नेता भी थे. आज़ादी की लड़ाई के दौरान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, जो कि प्रमुख राजनैतिक पार्टी हुआ करती थी, गोपाल कृष्ण गोखले इस पार्टी के वरिष्ठ नेता [सीनियर लीडर] हुआ करते थे. इसके साथ ही साथ उन्होंने सर्वेन्ट्स ऑफ़ इंडिया सोसाइटी की भी स्थापना की थी.

गोपाल कृष्ण गोखले : प्रारंभिक जीवन [Gopal Krishna Gokhle Early Life] -:

गोपाल कृष्ण गोखले का जन्म 9 मई, सन 1866 को जिला रत्नागिरी, तालुका गुहागर के कोथलुक नामक गाँव में हुआ था, जो कि वर्तमान में बॉम्बे के अंतर्गत आता हैं. गोखले का परिवार गरीब था, इसलिए उनके परिवार – जन चाहते थे कि गोखले को अच्छी शिक्षा प्राप्त हो, ताकि वो ब्रिटिश राज में क्लर्क अथवा कोई छोटी – मोटी नौकरी प्राप्त कर सकें. गोखले ने सन 1884 में ElphinstoneCollege से स्नातक [Graduation] पूरा किया.

गोपाल कृष्ण गोखले : परिवार [Gopal Krishna Gokhle : Family] -:

गोपाल कृष्ण गोखले के परिवार के बारे में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं हैं. गोखले का जन्म चितपावन ब्राह्मण परिवार में हुआ था. उनके पिता का नाम कृष्णा राव गोखले और माता वालुबाई गोखले थी. गोखले ने 2 बार शादी की थी. गोखले का प्रथम विवाह सन 1880 में सावित्रीबाई से हुआ, तब गोखले की उम्र ज्यादा नही थी. उनकी पहली पत्नि किसी असाध्य रोग [Incurable ailment] से ग्रसित थी. इसके बाद सन 1887 में उनका द्वितीय विवाह हुआ, तब उनकी पहली पत्नि सावित्रीबाई जीवित थी. उनकी दूसरी पत्नि ने 2 बेटियों को जन्म दिया और सन 1899 में उनकी दूसरी पत्नि की मृत्यु हो गयी. इसके बाद गोखले ने विवाह नहीं किया और उनकी संतानों का पालन – पोषण और देखभाल उनकी रिश्तेदारों ने ही की. उनकी एक बेटी का नाम काशी [आनंदीबाई] था.

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और बाल गंगाधर तिलक से प्रतिद्वंद्विता [Indian National Congress And Rivalry With BalGangadharTilak] -:

सन 1889 में गोखले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य बने. वे हमेशा आम जनता की परेशानियों के लिए कार्यरत रहे. उनके विचार हमेशा संतुलित होते थे, जिसमें समन्वय का गुण हमेशा व्याप्त रहा. कुछ समय बाद वे बाल गंगाधर तिलक के साथ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के जॉइंट सेक्रेटरी बन गये.गोखले और तिलक दोनों में ही काफी समानताएँ थी, जैसे-:

  • दोनों ही चितपावन ब्राह्मण परिवार से थे,
  • दोनों ने ही Elphinstone College से शिक्षा प्राप्त की,
  • दोनों ही गणित के प्रोफ़ेसर थे,
  • दोनों ही डेक्कन एजुकेशन सोसाइटी के प्रमुख सदस्य थे.

जब ये दोनों कांग्रेस में साथ आये तो दोनों का उद्देश्य भारत को आज़ादी दिलाने के साथ – साथ आम भारतीय को मुश्किलों से उबारना भी था. उस दौरान बाल विवाह के संबंध में ब्रिटिश सरकार ने जो कानून पास किया था, उस बारे में गोखले और तिलक एक मत नहीं थे और यहीं से दोनों में प्रतिद्वंद्विता का प्रारंभ हुआ. सन 1905 में गोखले कांग्रेस के प्रेसिडेंट बन गये और अब कांग्रेस दो गुटों में बंट गयी थी -: जहाँ एक ओर तिलक ब्रिटिश सरकार को क्रांतिकारी कार्यों के साथ खदेड़ना चाहते थे, तो वही दूसरी ओर गोखले शांतिपूर्ण वार्ता और समन्वयवादी नेता थे. गोखले की मृत्यु के बाद ही सन 1916 में ये दोनों गुट एक हो सकें और कांग्रेस फिर से और भी ही मजबूत पार्टी बन गयी. बाल गंगाधर तिलक जीवन के बारे में जानने के लिए यहाँ पढ़ें

सर्वेन्ट्स ऑफ़ इंडिया सोसाइटी की स्थापना [Establishment of Servants of India Society] -:

सन 1905 में गोखले जब कांग्रेस के प्रेसिडेंट बने तो वे राजनैतिक ताकत के चरम पर थे और इसी समय उन्होंने सर्वेन्ट्स ऑफ़ इंडिया सोसाइटी की स्थापना की. इसकी स्थापना के पीछे उनका मत था कि भारतीयों को शिक्षित किया जाये. गोखले के अनुसार, “जब भारतीय शिक्षित होंगे तो वे अपने देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी को समझेंगे और इसका निर्वाह भली – भांति करेंगे”. उनके अनुसार तत्कालीन शिक्षण प्रणाली और इंडियन सिविल सर्विसेस भारतीयों के विकास के लिए पर्याप्त नहीं थी. इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए उन्होंने सर्वेन्ट्स ऑफ़ इंडिया सोसाइटी की स्थापना की थी ताकि भारतीयों का संपूर्ण विकास हो सकें और वे राजनीतिक शिक्षा ग्रहण कर, इस क्षेत्र में भी अपना पूर्ण योगदान देने में सक्षम हो, जिससे भारत को आज़ादी दिलाई जा सकें. इस सोसाइटी ने कई स्कूल, कॉलेज की स्थापना की, इनके द्वारा रात्रि में कक्षाएं लगायी जाती थी, ताकि कार्यरत लोग भी सुविधा के साथ शिक्षा प्राप्त कर सकें. हालाँकि ये सोसाइटी आज भी कार्यरत हैं, परन्तु अब इसके सदस्यों की संख्या बहुत कम रह गयी हैं.

महात्मा गाँधी और जिन्ना के परामर्शदाता अथवा गुरु [Mentor to both Gandhi and Jinnah] -:

महात्मा गाँधी के शुरूआती वर्षों में गोखले उनके परामर्शदाता रहे. सन 1912 में गांधीजी के आमंत्रण पर गोखले ने दक्षिण अफ्रीका की यात्रा की. उस समय गाँधी नए – नए बैरिस्टर बने थे और दक्षिण अफ्रीका में अपने आंदोलन के बाद भारत लौटे थे. तब उन्होंने भारत के बारे में और भारतीयों के विचारों के बारे में समझने के लिए गोखले का साथ चुना और उनके परामर्श के अनुसार कार्य भी किये. सन 1920 में गांधीजी भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के लीडर बन गये. गाँधी ने अपनी आत्मकथा [ऑटोबायोग्राफी] में गोखले को अपना परामर्शदाता और मार्गदर्शक [Mentor and Guide] कहकर संबोधित किया हैं. गाँधी के अनुसार गोखले उनके पसंदीदा लीडर थे और एक निपुण राजनीतिज्ञ भी. वे क्रिस्टल के समान शुद्ध, सभ्य, शेर के समान बहादुर और राजनैतिक क्षेत्र में सर्वोचित व्यक्ति थे. गोखले के प्रति इतनी श्रद्धा होने के बावजूद भी गाँधी उनके वेस्टर्न इंस्टिट्यूशन के विचार से सहमत नहीं थे और इसीलिए उन्होंने गोखले की सर्वेन्ट्स ऑफ़ इंडिया सोसाइटी का सदस्य बनने से इंकार कर दिया. महात्मा गाँधी जीवनी को यहाँ पढ़ें.

गोखले पाकिस्तान के संस्थापक ‘मोहम्मद अली जिन्ना’ के भी परामर्शदाता रहे और रोल मॉडल भी.जिन्ना को एक तरह से ‘मुस्लिम गोखले’ भी कहा जाता था. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और मुस्लिम लीग के लखनऊ समझौते के बाद सरोजिनी नायडू द्वारा जिन्ना को ‘हिन्दू – मुस्लिम एकता’ का ब्रांड एम्बेसेडर कहा गया. सरोजनी नायडू जीवन परिचय को यहाँ पढ़ें.

भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन पर गोखले का प्रभाव [Impact of Gokhle on Indian Nationalist Movement] -:

गोखले का भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा था. चूँकि वे एक समन्वयवादी नेता थे, जिस कारण उनका ब्रिटिश इंपीरियल के साथ सामंजस्य पूर्ण व्यवहार था, जिसका प्रभाव भी पड़ा. परन्तु सबसे गहरा प्रभाव पड़ा, उनके शिक्षा के प्रति झुकाव के कारण. गोखले का मानना था कि जब भारतीय शिक्षित होंगे तो ही उनका विकास हो पाएगा और साथ ही साथ वे पश्चिमी शिक्षण प्रणाली से भी बहुत प्रभावित थे. हालाँकि गाँधीजी उनके इस पश्चिमी शिक्षण प्रणाली के विचार से सहमत नहीं थे और उन्होंने इसे अस्वीकार किया था, परन्तु स्वतंत्रता के पश्चात् सन 1950 में यहीं प्रणाली अपनाई गयी. इस प्रकार गोखले का हमारे शिक्षण संस्थानों और भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन पर व्यापक प्रभाव पड़ा था.

उनके व्यापक प्रभाव को हम निम्नलिखित शिक्षण संस्थानों और अन्य स्थानों के नामकरण के आधार पर और अच्छी तरह से जान सकते हैं -:

  • गोखले इंस्टिट्यूट ऑफ़ पॉलिटिक्स एंड इकोनॉमिक्स इन पुणे,
  • गोखले मेमोरियल गर्ल्स कॉलेज इन कोलकाता,
  • गोखले हॉल इन चेन्नई,
  • गोखले सेंटेनरी कॉलेज इन अंकोला,
  • गोपाल कृष्ण गोखले कॉलेज इन कोल्हापुर,
  • गोखले रोड इन मुंबई,
  • गोखले रोड इन पुणे,
  • गोखले इंस्टिट्यूट ऑफ़ पब्लिक अफेयर्स इन बंगलोर,
  • गोखले होस्टल [ऑफ़ मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय] इन भोपाल.

इन सभी के अलावा गोखले एजुकेशनल सोसाइटी 50 से ज्यादा शिक्षण संस्थान चला रही हैं, जो मुंबई, नासिक, कोंकण, आदि स्थानों पर स्थित हैं. इन सबसे बढ़कर हम उनके कार्यों के लिए वर्ष 2015 – 2016 को गोखले की 150वीं जयंती [birth anniversary] के रूप में मना रहे हैं.

गोपाल कृष्ण गोखले के प्रमुख 6 अर्थशास्त्र संबंधी विचार [Top 6 Economic Ideas Of Gopal Krishna Gokhle] -:

चूँकि गोखले विद्वान और शिक्षित थे. साथ ही साथ वे गणित के उत्तम प्रोफ़ेसर भी थे. उनका रुझान देश की अर्थव्यवस्था की ओर भी रहा, इसलिए उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने और इसके विकास के लिए कुछ क्षेत्रों के लिए अपने कुछ आईडिया दिए थे, जो निम्नानुसार हैं -:

  • इंडियन फाइनेंस,
  • डीसेंट्रलाइजेशन ऑफ़ पॉवर,
  • लैंड रेवेन्यु,
  • पब्लिक एक्सपांडीचर,
  • एजुकेशन,
  • ट्रेड.

गोपाल कृष्ण गोखले की मृत्यु [Death of Gopal Krishna Gokhle] -:

गोखले अपने जीवन के अंतिम वर्षों में भी राजनैतिक रूप से सक्रीय रहे. जिसमें उनकी विदेश यात्राएं और विदेशों में होने वाले आंदोलनों और सुधार कार्यक्रमों में योगदान भी शामिल हैं. इसके साथ – साथ वे स्वयं के द्वारा स्थापित सर्वेन्ट्स ऑफ़ इंडिया सोसाइटी के कार्यों में और शिक्षण प्रणाली के विकास और उत्थान हेतु भी कार्यरत रहे. उनकी मृत्यु 19 फरवरी, सन 1915 को हुई, उस समय उनकी आयु मात्र 49 वर्ष थी. उनके अंतिम संस्कार के समय उनकी आजीवन प्रतिद्वंदी रहे बाल गंगाधर तिलक ने कहा था –भारत का हीरा, महाराष्ट्र का आभूषण, श्रमिकों का राजकुमार.. यहाँ इस स्थान पर परालौकिक विश्राम ग्रहण कर रहा हैं. उनकी ओर देखिये और उनके जैसा आचरण करने का प्रयास कीजिये.

इस प्रकार गोखले का संपूर्ण जीवन भारतीयों के विकास में लगा रहा.

Ankita

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अंकिता दीपावली की डिजाईन, डेवलपमेंट और आर्टिकल के सर्च इंजन की विशेषग्य है| ये इस साईट की एडमिन है| इनको वेबसाइट ऑप्टिमाइज़ और कभी कभी आर्टिकल लिखना पसंद है|
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