झारखण्ड के महान नेता हेमंत सोरेन के जीवन को करीब से जाने | Hemant Soren in Hindi

हेमंत सोरेन की जीवनी (Hemant Soren Biography in hindi) [Religion, Father, Family, Wife, Jharkhand Politics, Party Name, Age, Caste, Constituency]

भारतीय राजनीति में एक से बढ़कर एक दिग्गज बैठे हुए हैं जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान पूरे  भारतवर्ष में अपने नाम के झंडे लहराए हैं जिनमें से एक हैं झारखंड के वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन। वह एक ऐसे दिग्गज नेता हैं जिन्होंने अकेले ही अपने दम पर पार्टी की 81 सीट को साथ लेकर चुनावी मैदान में उतर गए। आज हम आप को उनके जीवन से जुड़े कुछ अनकही तथ्यों के बारे में बताने वाले हैं।

hemant soren bio in hindi

परिचय बिंदु परिचय
पूरा नाम (Full Name) हेमंत सोरेन
पेशा (Profession) राजनीति
जन्म (Birth) 10 अगस्त 1975
उम्र 44 साल
जन्म स्थान (Birth Place) नेमारा, राजगढ़ जिला झारखण्ड
राष्ट्रीयता (Nationality) भारतीय
पार्टी का नाम झारखण्ड मुक्ति मोर्चा (JMM)
गृहनगर (Hometown) नेमारा
धर्म (Religion) हिन्दू
जाति (Caste) ST
पसंद (Hobbies) खेल देखना, खाना बनाना
शैक्षिक योग्यता (Educational Qualification) स्कूल पास
वैवाहिक स्थिति (Marital Status) विवाहित
प्रेरणा स्त्रोत (Role Model) बिरसा मुंडा
बालों का रंग (Hair Color) काला
आँखों का रंग (Eye Color) काला
विधानसभा क्षेत्र (Constituency) बरहेट

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कौन है हेमंत सोरेन?

झारखंड के मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष के रुप में हेमंत सोरेन को देखा जाता है। वह पूर्व केंद्रीय मंत्री और आदिवासी नेता शिबू सोरेन के बेटे हैं।  झारखंड में मुख्यमंत्री के रूप में उन्हें पांचवी बार देखा जा रहा है और अपनी भारी जीत के साथ वे झारखंड के चुनावी मैदान में साल 2019 की भी जीत हासिल कर चुके हैं। उनके पिताजी भी बहुत बड़े राजनीतिज्ञ रह चुके हैं जिसके चलते उन्हें झारखंड में राजनीति का गुरु माना जाता है।

हेमंत सोरेन परिवार (Family)

पत्नी का नाम कल्पना सोरेन
पिता का नाम शिबू सोरेन
माता का नाम रुपी सोरेन
2 भाई ·        दुर्गा सोरेन

·        बसंत सोरेन

1 बहन अंजलि सोरेन
बच्चे 2 बेटे

हेमंत सोरेन का प्रारंभिक जीवन

 10 अगस्त 1975 को एक महान राजनीतिज्ञ का जन्म रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में हुआ था। जिनके माता-पिता का नाम शिबू सोरेन और रूपी सोरेन था। उन्होंने बचपन में कभी एक राजनीतिक के बनने का सपना तो नहीं देखा था लेकिन बड़े होकर एक बेहतर राजनीतिक बनकर उन्होंने झारखंड में अपना बखूबी परचम लहराया।

हेमंत ने 1990 के दशक में पटना के एमजी हाई स्कूल से अपनी मेट्रिक की परीक्षा पास की थी।  उसके बाद उन्होंने रांची के बीआईटी मैकेनिकल इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लिया। कुछ कारणों के चलते वे अपनी कॉलेज की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए।  कुछ समय पश्चात कल्पना नाम की एक लड़की के साथ उनकी शादी हो गई जिस के बाद उनके दो बेटे भी हुए। हेमंत सोरेन के दो भाई और एक बहन भी उनके परिवार में शामिल है।

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राजनैतिक करियर

  • हेमंत सोरेन ने अपनी जीवन में राजनैतिक रुख साल 2005 में किया जब उन्होंने पहली बार विधानसभा चुनावों में दुमका नाम जगह से चुनाव लड़ा था। इस चुनावी प्रक्रिया में उन्हें निराशाजनक हार का सामना करना पड़ा।
  • उसके बाद में वे पूरी तरह से राजनीति में तब उतरे जब उनके बड़े भाई दुर्गा की अचानक मृत्यु हो गई थी। उस समय साल 2009 के दौरान उन्हें वरिष्ठ जेएमएम नेता के रूप में राजनीति का मुख्य केंद्र बना दिया गया।
  • 24 जून 2009 को वे राज्यसभा के एक महत्वपूर्ण सदस्य बन चुके थे जिस के बाद 23 सितंबर 2009 को वे एक विधायक के रूप में निर्वाचित हो चुके थे।
  • 11 सितंबर सन 2010 को जनता के प्यार ने उन्हें झारखंड के डिप्टी सीएम के पद पर आसीन कर दिया। इस पद पर वे लगातार 8 जनवरी साल 2013 तक बने रहे।
  • जिस समय अर्जुन मुंडा ने भाजपा, gnm, jda, jsu का गठबंधन किया था उस समय सितंबर में हेमंत झारखंड के उप मुख्य मंत्री के रूप में उभर कर सामने आए।
  • सन 2013 में वे झारखंड राज्य के युवा मुख्यमंत्री बन गए और दिसंबर 2014 तक किसी पद पर आसीन रहे। 13 जुलाई 2013 को भारी बहुमत से जीत कर उन्होंने सीएम की कुर्सी को संभाल लिया था।
  • उसी साल जनवरी में ही हेमंत के विपक्षी दलों जिनमें कांग्रेस, जेवीएम्पी और आर जेडी के साथ महा गठबंधन की योजनाएं बनाए जाने लगी लेकिन वे सभी योजनाएं धराशाई हो गई।
  • एक बार फिर से झारखंड चुनाव के मैदान में वह लड़ाई जीत गए हैं और फिर से झारखंड में अपनी सरकार बनाकर मुख्यमंत्री की कुर्सी को संभालने के लिए फिर से पूरी तरह से तैयार है।
  • हेमंत सोरेन इस बार झारखंड के सातवें मुख्यमंत्री के रूप में मुख्यमंत्री के पद पर आसीन होने वाले हैं वह दूसरी बार झारखंड के मुख्यमंत्री बनने वाले हैं।
  • उनके पूरे राजनीतिक कैरियर में उनकी पत्नी कल्पना ने उनका बहुत ज्यादा सहयोग दिया है। वह बराबर से उनके साथ सदैव खड़ी रहती हैं, और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती रहती हैं। इसलिए उनकी राजनैतिक कार्यों में उनकी पत्नी की सबसे बड़ी हिस्सेदारी मानी जाती है।

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हेमंत सोरेन पर विवाद

हेमंत सोरेन ने साल 2017 में एक विवादों में आकर सुर्खियों में छा गए. यह उस समय की बात है जब सीएम रघुवर दास ने हेमंत को ‘झारखंड ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट’ के लिए आमंत्रित किया था। उस समय रघुवर दास को यह कहते हुए कि यह शिखर सम्मेलन भूमि हड़पने वालों का महा चिंतन शहर है जहां पर आदि-वासियो, मूल वासियों और राज्य किसानों की भूमि को लूटने के लिए यह शिखर सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है इसलिए उन्होंने इस निमंत्रण को अस्वीकार कर दिया।

हेमंत सोरेन के बारे में कुछ रोचक तथ्य

  • जिस समय हेमंत सोरेन के पिता शिबू सोरेन मुख्यमंत्री थे उस समय उनके कार्यकाल के दौरान वह केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्यरत रह चुके हैं।
  • झारखंड के पांचवे मुख्यमंत्री के रूप में वह इस बार 28 दिसंबर के दिन शपथ लेने वाले हैं।
  • वह नई तकनीकों के बहुत ज्यादा जानकार हैं उन्हें नए-नए इलेक्ट्रॉनिक गेजेट्स तलाश कर उन्हें चलाना और उनकी तकनीक के बारे में जानने का बेहद ज्यादा शौक है। वे अपने पास आईपैड जैसे हैंडहेल्ड गैजट भी रखना पसंद करते हैं।
  • एक बार उन्होंने अपने एक इंटरव्यू के दौरान यह भी कहा था कि उन्हें खाली समय के दौरान नए-नए प्रकार की डिश बनाना बेहद पसंद है।
  • 13 जुलाई साल 2013 को वह झारखंड के पांचवे वह सबसे कम उम्र वाले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करते हुए नजर आए थे।

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हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री के रूप में अपना पूरा योगदान अपने राज्य को दिया है। उस दौरान उन्होंने योजना और विकास केबिनेट, (चुनाव सतर्कता), समनवय सूचना और जनसंपर्क प्रशासनिक सुधार और राजभाषा और कानून विभागों को अपने अंतर्गत रखते हुए पूरी तरह से देख रेख की है। एक प्रभावशाली नेता है जो झारखंड को आने वाले समय में विकास की ओर ले जाते हुए नजर आने वाले हैं।

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Priyanka

प्रियंका खंडेलवाल मध्यप्रदेश के एक छोटे शहर की रहने वाली हैं .
यह एक एडवोकेट हैं और जीएसटी में प्रेक्टिस कर रही हैं . इन्हें बैंकिंग, टेक्स्सेशन एवं फाइनेंस जैसे विषयों पर लिखना पसंद हैं ताकि उनका ज्ञान और अधिक बढ़ सके. उन्होंने दीपावली के लिए लिखना शुरू किया और इस तरह अपने ज्ञान को पाठकों तक पहुँचाने की कोशिश की.
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