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नकारात्मक सोच से छुटकारा कैसे पायें, अर्थ, निबंध | Negativity Kaise Door Karen in Hindi

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नकारात्मक सोच क्या है, निबंध, अर्थ, शायरी, कविता, लेख, कैसी होती है, नुकसान, क्यों आती है, पहचान, लक्षण, छुटकारा, मुक्ति, सकारात्मक सोच में परिवर्तन [Negativity Kaise Door karen in Hindi] (Symptoms, Quotes, Removal Mantra)

नकारात्मक सोच से छुटकारा पाने में आपकी मदद करेंगे मेरे अनुभव जो मैंने अपने इस आर्टिकल में लिखे हैं ताकि मेरे जैसे अन्य लोग नकारात्मक सोच से अपने आपको मुक्त कर सके.

आज के समय में नकारात्मक सोच जीवन को घेरे हुए हैं और यह जीवन प्रगति में बाधा उत्पन्न करती हैं. मनुष्य ईर्षा, द्वेष के जाल में बंधता चला जा रहा हैं, और यह सभी भाव मनुष्य की प्रगति में बाधक हैं. मनुष्य निरंतर इस तरह की सोच में अपने आप ही जीवन के स्वर्णिम पलो को खत्म कर रहा हैं. अगर आप खुद ऐसे नकारात्मक भाव से पीढित हैं या आपके दोस्त अथवा रिश्तेदार में आपको इस तरह के भाव दिख रहे हैं तब आप निम्न लिखे तरीके आजमा सकते हैं.

How to End Negativity In Hindi

Table of Contents

नकारात्मक सोच पर निबंध, लेख

नकारात्मक सोच क्या हैं (Negativity)

नकारात्मक सोच को सकारात्मक सोच में परिवर्तित करने से पहले आपको नकारात्मक सोच क्या है यह जानना होगा. आपको बता दें कि जब आप किसी के बारे में ऐसी धारणा बना लेते हैं कि आपको केवल उसके अन्दर बुरा ही नज़र आता है. तो यह सोच को ही नकारात्मक सोच कहते हैं. क्योकि यह केवल एक व्यक्ति तक ही सीमित नहीं होती. आप ये हर उस व्यक्ति के लिए सोचेंगे जिसे आप कहीं न कहीं पसंद नहीं करते हैं या कम पसंद करते हैं.  

नकारात्मक सोच कैसे बनती है

जब आप अपने आसपास ऐसे चीजों को देखते हैं जिससे आपको ईर्ष्या होती है. वहीँ से नकारात्मक सोच बननी शुरू हो जाती है. आपके मन में उस चीज या उस व्यक्ति के प्रति नकारात्मकता पैदा होने लगती है. यानी उसके बारे में आप बुरा सोचने लगते हैं. यदि आप इसे कंट्रोल नहीं करते हैं, तो फिर धीरे धीरे यह नफरत में परिवर्तित हो जाती है.

नकारात्मक सोच की पहचान

यदि आप यह समझना चाहते हैं कि आपके अंदर नकारात्मक सोच हैं इसकी पहचान कैसे की जा सकती है. तो इसके लिए सबसे पहले आप विचारों (Negativity) को समझे और जाने कि आपके मन में किस तरह के भाव आ रहे हैं. फिर उसे समझे कि क्या वह गलत विचार हैं या सही. और इसे स्वीकारने में हींचके नहीं. यह तुलना अपने तक ही सीमित रहकर कर सकते हैं. आपको नकारात्मक भाव से दूर होने के लिए स्वयं के अलावा किसी की जरुरत नहीं हैं.

नकारात्मक सोच के लक्षण (Symptoms)

नकारात्मक सोच के लक्षण कुछ इस तरह के हो सकते हैं –

  • अपने आपको हमेशा दूसरों की तुलना में कम अथवा अधिक आंकना
  • दूसरों में हमेशा खामी निकालना
  • अपने आपको हमेशा अपमानित समझना जैसे घर में कार्यक्रम के वक़्त किसी ने आपसे खाने का ना पूछा हो, इस तरह के कई भाव जब आपको लगता हैं कि आपको आदर नहीं मिल रहा हैं.
  • हर व्यक्ति में कोई ना कोई कमी होती हैं लेकिन उसे दिल और दिमाग में बैठाकर अपने आपको हीन दृष्टि से देखना भी नकारत्मक भाव हैं.
  • असंतुष्ट रहना अर्थात अपने जीवन, अपने काम से लगाव ना होना और सदैव इस गलत ही सोचना.
  • छोटी सी बात में दुखी होना और अपने आपको और दुसरो को कष्ट देना.
  • किसी भी कार्य को करने से पहले उसके सकारात्मक पहलू को देखने के बजाय पहले नकारात्मक पहलू को देखना.
  • सामने आई कोई भी वस्तु जैसे भोजन अथवा वस्त्र आदि में बुराई ढूँढना.

ऐसे और भी कई कारण हो सकते हैं जो मनुष्य को नकारात्मक जीवन का गुलाम बनाते हैं.  ऊपर लिखे सभी बिन्दुओं के अनुसार अपने जीवन का अवलोकन करें कि कहीं आप भी तो नकारात्मक भाव से पीढित तो नहीं हैं ?

नकारात्मक सोच क्यों आती है

नकारात्मक सोच आना कोई आजकल की बात नहीं है यह बाबा आदम के जमाने से चली आ रही है. लेकिन अब वैज्ञानिकों ने इस पर रिसर्च की है कि आखिर नकारात्मक सोच आती क्यों है. तो आपको बता दें कि जब आप किसी चीज के बारे में सोचते हैं तो आपका दिमाग उस चीज को सुरक्षित रखता है. की इस चीज से आपको कुछ भी नुकसान नहीं होने वाला है. लेकिन जब कुछ बुरा होता है या कुछ बुरी चीज होती है. तो हमारा दिमाग एक्टिव हो जाता है वो इसलिए क्योकि दिमाग को लगता है कि यह उनके शरीर के लिए नुकसान दायक है. इसलिए उसके मन में नकारात्मक सोच घर करने लगती है.

नकारात्मक सोच से नुकसान

नकारात्मक सोच से सबसे बड़ा नुकसान आपकी लाइफ यानि आपके जीवन पर पड़ता है. आप नकारामत्क सोच के कारण अपने जीवन को भगवान का दिया हुआ श्राप मानने लगते हैं. लेकिन आपको ऐसा नहीं सोचना चाहिए, क्योकि भगवान का दिया हुआ जीवन यदि आप नकारात्मक सोच में व्यतीत कर देंगे. तो जीवन आपको दोबारा नहीं मिलेगा.  

नकारात्मक सोच वाले लोग कौन होते हैं

नकारात्मक सोच वाले लोग वे होते हैं. जिन्हें कभी किसी की अच्छाई नहीं दिखती. वे हमेशा सभी की खामियां ही ढूंढते रहते हैं. भले ही उसके अन्दर लाख अच्छाई क्यों न हो. लेकिन उनके अंदर यदि एक खामी है तो नकारात्मक सोच वाले व्यक्ति को वह एक खामी ही नज़र आती है.

नकारात्मक सोच बदलने का मूल मन्त्र

अपने जीवन को सही दिशा दे, अपने अन्दर की कमी को स्वीकार करते हुए अपने आपकी मदद करे. पुराणों में भी लिखा गया हैं कि मनुष्य सर्वप्रथम खुद के प्रति उत्तरदायी होता हैं, हमारा पहला कर्तव्य स्वयं के प्रति होता हैं. इसका मतलब यह नहीं हैं कि हम स्वार्थी बन जाए लेकिन जब तक आप अपने आप से प्यार नहीं करेंगे तब तक किसी को खुश नहीं रख सकते हैं. किसी का भी जीवन सामान्य नहीं हैं लेकिन अपने दुखो के लिए व्यक्ति की नकारात्मक सोच ज़िम्मेदार होती हैं. संघर्ष जीवन का एक अभिन्न हिस्सा हैं. इसे भार और दुःख की तरह लेंगे तो भगवान का दिया यह सुन्दर जीवन अभिशाप की तरह प्रतीत होगा. अतः आवश्यक हैं कि अपने भीतर झाँककर देखे और अपनी तकलीफों को दूर करें.

नकारात्मक सोच से छुटकारा (How to End Negativity)

जीवन को नकारात्मक सोच से कैसे मुक्ति पाये, इसके लिए आसान तरीके लिखे गये हैं जिन्हें आप अपने डेली रूटीन के साथ आसानी से जीवन में शामिल कर सकते हैं. लेकिन इसके लिए आपको अपने आपको जगाना होगा साथ ही आपकी सोच नकारात्मक हैं इसे स्वीकार करना होगा जो कि बहुत बड़ी बात नहीं हैं. आज कल क्राइम और धोखा धडी के साथ परिवारों में बढ़ती दूरियों के कारण नकारात्मकता बढ़ती ही जा रही हैं. इससे निम्न उपायों को अपनाकर छुटकारा पाया जा सकता है –

सुबह की शुरुवात

दिन की शुरुवात प्रसन्नचित्त मन से करे जिसके लिए सुबह जल्दी उठे. पर्यावरण का वह समय जब सूर्य पूर्व की ओर होता हैं और पक्षियों कि आवाज़ से आकाश गुंजायामान होता हैं उस वक्त घर से बाहर निकल कर घांस पर नंगे पैर चले और जीवन के सुखद पलो को याद करे.  

कुछ पल के लिए ईश्वर में ध्यान लगाये

हालाँकि आज के वक्त में कोई इस बात पर विश्वास नहीं करता लेकिन आप अपने मन को एकाग्र बनाने के लिए ही यह कर सकते हैं. आध्यात्म भी विज्ञान का एक रूप हैं, उसे बहुत अधिक नहीं लेकिन दिन के 5 मिनिट ईश्वर की उपासना में देने से व्यक्ति के जीवन में उत्साह आता हैं. क्यूंकि हम जाने अनजाने अपनी सारी परेशानी को ईश्वर को सौंप देते हैं जिससे हमें आत्म शांति का अनुभव होता हैं.

व्यायाम अथवा योगा को जीवन हिस्सा बनाये

व्यायाम अथवा योगा हमेशा शारीरिक स्वास्थ्य के लिए ही उपयोगी नहीं हैं इससे मानसिक विकास भी होता हैं. दिन में 30 मिनिट्स वाक करना, प्राणायाम करना, योगा करना एवम जिम जैसी जगहों पर दिन का एक घंटा अपने शरीर को देना अनिवार्य होना चाहिये इससे जीवन में सकारात्मक भाव उत्पन्न होते हैं. मिजाज़ खुश रहता हैं मानसिक संतोष बना रहता हैं.

ध्यान लगाये

दिन भर में 15 मिनिट ध्यान की मुद्रा में बैठे जिसमे आपके हाथ की तर्जनी एवम अंगूठे को जोड़कर हाथ की कलाई को घुटनों पर रखे . और सुखासन अर्थात आलती पालती मारकर बैठे. इस मुद्रा में बैठ कर लंबी लंबी श्वास के साथ ॐ का उच्चारण करें.

मांसाहार ना खाये अथवा कम खायें

मांस खाने वाले व्यक्ति उग्र एवम शैतानी दिमाग के हो जाते हैं जैसे जंगली जानवर. हमारा मानव शरीर इस तरह के खाद्य पदार्थ को पचाने के लिए नहीं बना हैं अगर हम अधिक मात्रा में इस तरह का खाना खाते हैं तो हमारे विचारों के नकारात्मकता का आना स्वाभाविक हैं. अगर आप मांस खाना पसंद करते हैं तो उसे कभी कभी ले जिससे आपका मन भी संतुष्ट होगा और उसका दुष्प्रभाव भी कम होगा.

मदिरा पान ना करे

मदिरा भी नकारात्मक विचारो को जन्म देती हैं रोजाना उसके इस्तेमाल से मनुष्य जानवर की तरह बर्ताव करने लगता हैं उसका अपनी इन्द्रियों पर से कण्ट्रोल खत्म होने लगता हैं. अतः मदिरा/ अल्कोहल का इस्तेमाल ना अथवा कम से कम करें.

सात्विक भोजन करे

भोजन मनुष्य के विचारो के लिए उत्तरदायी होता हैं अगर हम हल्का सात्विक बिना लहसन, प्याज का भोजन करते हैं तो हमें हल्का महसूस होता हैं और हमारे विचारो पर भी इसका प्रभाव पड़ता हैं .सात्विक भोजन मनुष्य की सोच को सकारात्मक दिशा देता हैं.

हँसने की आदत डाले

यह एक तरह की थेरेपी हैं बिना किसी वजह के रोजाना 5 से 10 मिनट जोर जोर से हँसे. इससे मिजाज खुशनुमा होता हैं. ब्लड प्रेशर कण्ट्रोल रहता हैं और विचारो में सकर्त्मकता आती हैं. हँसने के लिए किसी मौके की तलाश ना करे बस यूँही जोर जोर से हँसे अपने आप ही यह आपकी आदत में आ जायेगा.

बच्चो के साथ समय व्यतीत करें

बच्चे बहुत ही प्यारे होते हैं अगर आपके घर में कोई बच्चे हैं तो उनके साथ खेले, बाते करें उनके सवालों का जवाब दे और उनकी बाते को उनके नज़रिये को सुने, समझे. तब आपको अहसास होगा कि दुनिया में कितना भोलापन भी हैं. अगर घर में बच्चे नहीं हैं तो कॉलोनी के बच्चो के साथ दोस्ती करे और उनसे मिले. चाहे कोई कुछ भी कहे पर आप अपनी ख़ुशी के लिए जो करना चाहे करें.

दोस्त बनाये

आमतौर पर लड़कियों की शादी होने के बाद उनके दोस्त छुट जाते हैं और वे इस कारण बहुत अकेली और उदासीन हो जाती हैं इसलिए सभी उम्र के व्यक्तियों को अपना एक सर्कल बनाना चाहिये. हम उम्र दोस्तों के साथ समय बिताना अच्छी – अच्छी बाते करना यह जीवन का हिस्सा होना चाहिये .

टेलिविज़न, अख़बार की खबरों को मन में ना बैठाये

आज कल क्राइम बढ़ता ही जा रहा हैं जिसके बारे में हम दिन रात टीवी शो, न्यूज़ चैनल और अख़बार में पढ़ते हैं. वे न्यूज़ आपको सतर्क बनाने के लिए ही दिखाई या पढाई जा रही हैं जो जरुरी हैं पर इन बातों से नकारात्मकता बढ़ती हैं. व्यक्ति में शक का भाव बढ़ने लगता हैं अतः सतर्क रहना ठीक हैं लेकिन उन सब बातों को मन में बैठा लेना गलत हैं इससे जीवन का सुख ख़त्म हो जाता हैं. इसलिए बड़े बुजुर्ग हमेशा कहते हैं जो होना हैं वो होगा ईश्वर पर यकीन रखे. यह सुनकर आज कि पीढ़ी हँसती हैं लेकिन हमेशा तनाव में रहने से तो कई गुना बेहतर हैं .

नकारात्मक सोच को सकारात्मक सोच में परिवर्तन करें

  • जैसे सिक्के के दो पहलु होते हैं वैसे ही हर परिस्थती के भी दो पहलु होते हैं अगर मन में नकारत्मक भाव हैं जो आप में गुस्सा पैदा कर रहा हैं तब उसे शांत करे और दुसरे के नजरिये से परिस्थती का अवलोकन करें.
  • आपके पास हैं जो हैं जैसा हैं अगर आप मोटे, पतले या शारीरिक रूप से आपमें कोई भी कमी हैं तो उसे प्यार से स्वीकार करें. हमेशा उसके बारे में ना सोचे जीवन में सबको सब कुछ नहीं मिलता हैं जो आपके पास हैं वो कईयों के पास नहीं हैं.
  • अपनी क्वालिटी को जाने और उसे बढ़ाये. जॉब और रेगुलर काम के अलावा कोई एक चीज़ को हॉबी बनाये और रोजाना उसमे वक्त दे. इससे आपको अपने आपसे प्यार होगा और नकारात्मक सोच में बदलाव आएगा.
  • समय व्यतीत करने के लिए हमेशा किसी चीज़ पर डिपेंड ना करे रोज कुछ न कुछ नया करे. अपने आपके साथ खुश रहने का तरीका ढूंढे.
  • सबके साथ पार्टी या फॅमिली फंक्शन में दिल से एन्जॉय करे किसी भी बात में कमी ना निकाले जो हैं उसके खुश रहे अगर नकारात्मक भाव आते हैं तो उसी वक्त खुद को टोके और गहरी सांस ले और मन में कहे भाड़ में जा और वापस अपने काम या एन्जोयेमेंट में लग जाए.
  • अगर आपके सामने कुछ नया काम करने का मौका हैं तो उसके नकारात्मक हिस्से को ना सोचे हमेशा सकारत्मक भाव से किसी भी काम को करे.
  • अपने आपको अकेला या दुखी ना समझे क्यूंकि अगर आप खुद के लिए सहानुभूति का भाव चाहते हैं तो यह सबसे बड़ा नकारात्मक गुण हैं. परिस्थिती के अनुरूप ढाल लेना अच्छी बात हैं लेकिन उसके लिए सदैव दुखी रहना सही नहीं. ऐसी सोच से खुद को दूर रखे अपने आपको समझाए क्यूंकि यह एक अँधेरा हैं इससे बाहर सुकुन की जिंदगी हैं इसलिए ऐसे भाव को मन में ना आने दे. हमेशा अपने आपको शक्तिशाली एवम हिम्मत वाला बनाये और खुद को याद दिलाये कि आप बहुत strong हैं.
  • कभी भी अपने आपको को अपने से ज्यादा अमीर से कमपेयर ना करें जबकि हमेशा अपने से कम वालो से तुलना करे इससे आपको जीवन के हर पहलु को समझने में आसानी होगी. और आप ईश्वर से धन्यवाद कहेंगे कि आपके पास जो हैं वो बहुत हैं उस वक्त आपको अपने आपसे कोई तकलीफ नहीं रहेगी.
  • नकारात्मकता कोई बीमारी नहीं हैं यह एक भाव हैं जिन पर अपने आप ही सैयम बनाया जा सकता हैं बस खुद को समझने की जरुरत हैं.
  • नकारात्मक विचार के कारण व्यक्ति गुस्सेल भी हो जाता हैं. अतः किसी भी क्रिया की प्रतिक्रिया देने से पहले दो मिनीट सोचे फिर जवाब दे ऐसा करने से आप खुद में शांति महसूस करेंगे.

ऊपर लिखे सभी बिंदु आपके स्वाभाव के अन्दर किये जाने वाले परिवर्तन के बारे में थे जिन्हें आप धीरे- धीरे अपने अन्दर ला सकते हैं. और खुद को नकारात्मकता से दूर कर सकते हैं.

यह आर्टिकल मैंने अपने अनुभव के आधार पर लिखा हैं मैं खुद किन्ही निजी कारणों से बहुत अधिक नकारात्मक सोच के घेरे में आ फसी थी और आये दिन घर के सभी लोगो से लड़ लिया करती थी लेकिन जब मैंने ऊपर लिखे पॉइंट्स को धीरे- धीरे खुद में शामिल किया आज उन्ही परिस्थितियों में मैं अपने आपको खुश और संतुष्ट मानती हूँ.

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