भगवान राम का जन्म दिवस रामनवमी देश में किस तरह मनाया जाता है | Ram Navami Festival in hindi

भगवान राम का जन्म दिवस रामनवमी देश में किस तरह मनाया जाता है (पूजा विधि, कथा, मूहुर्त) (Ram Navami Festival in hindi, Date, Katha, Pooja vidhi)

भारत सांस्कृतिक और त्योहारों का देश है जहां पर किसी ना किसी त्यौहार की रौनक सदैव लगी रहती है. आज हम बात कर रहे हैं भारत के मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के बारे में. जैसा आप जानते ही हैं कि आने वाली 2 अप्रैल 2020 को रामनवमी का पावन त्यौहार है. इतिहास काल से ही यह पावन दिन भारत देश के हिंदुओं द्वारा बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता रहा है. आज हम इस त्यौहार के बारे में कुछ महत्वपूर्ण, अनसुनी और अनकही बातें बताने जा रहे हैं. तो चलिए भगवान राम का नाम लेते हैं और आरंभ करते हैं भगवान राम की उस ऐतिहासिक गाथा के बारे में:-

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कौन थे भगवान राम?

हमारे ग्रंथों के अनुसार ऐसा बताया जाता है कि भगवान विष्णु सातवें अवतार थे. भगवान विष्णु ने भगवान राम के रूप में अयोध्या के राजा दशरथ के घर जन्म लिया था. भगवान राम राजा दशरथ के सबसे बड़े पुत्र थे और उनकी पहली पत्नी कौशल्या के पुत्र थे.

रामनवमी की पूजा का शुभ मुहूर्त और तिथि

 रामनवमी की पूजा की तिथि:- 2 अप्रैल 2020

रामनवमी पूजा का शुभ मुहूर्त:- 11:10 से 13:38 तक

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रामनवमी का महत्व

हमारे ग्रंथ बताते हैं कि हिंदू पंचांग में बताए गए अनुसार चैत्र मास में शुक्ल पक्ष के दिन नवमी तिथि के पावन दिन पर भगवान राम का धरती पर प्राकट्य हुआ था. उसी पावन दिन से इस पृथ्वी पर चैत्र मास के शुक्ल पक्ष के दिन भगवान राम का जन्म दिवस रामनवमी के रूप में मनाया जाता है. युगों के अनुसार त्रेतायुग में भगवान राम ने इस धरती पर मानव अवतार में जन्म लिया था और अपना पूरा जीवन एक साधारण मनुष्य की तरह अपने आदर्शों और मर्यादा के अनुसार ही व्यतीत किया था. भगवान राम मानवीय रूप में एक ऐसा अवतार था जो पृथ्वी पर मौजूद प्रत्येक व्यक्ति को एक अलग संदेश देते हैं और साथ ही उनकी आत्मा को पूरी तरह से पवित्र करने का काम करते हैं.

कैसे मनाया जाता है रामनवमी का त्योहार?

रामनवमी का यह पावन त्योहार भारत देश में प्रत्येक हिंदू परिवार द्वारा मनाया जाता है. प्रत्येक हिंदू परिवार में इस दिन व्रत-उपवास, पूजा पाठ, बड़े बड़े धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं. बड़े पैमाने पर भगवान राम का जन्मोत्सव देश के अलग-अलग जगहों पर आयोजित किया जाता है और साथ ही सभी मंदिरों में बड़े पैमाने पर सात सज्जा भी की जाती है. राम नवमी के पावन दिन पर प्रत्येक हिंदू परिवार अपने घरों को साफ करने के बाद वहां पर पवित्र कलश स्थापित करते हैं और भगवान राम का पूजन वंदन करके भजन कीर्तन करके अपनी भक्ति व्यक्त करते हैं. मुख्य रूप से भगवान राम के साथ इस दिन माता जानकी और भगवान राम के छोटे भाई लक्ष्मण जी की भी पूजा की जाती है.

रामनवमी का यह पावन त्यौहार माता रानी के नवरात्रि के नौवें दिन मनाया जाता है ऐसे में बहुत से भक्त ऐसे होते हैं जो पूरे 9 दिन का उपवास बहुत ही श्रद्धा पूर्वक रखते हैं. रामनवमी के आरंभ होते ही राम भक्त सुबह उठते ही सूर्य भगवान को जल चढ़ा कर सूर्य नमस्कार करते हैं. वैदिक मंत्रों का जाप करते हुए ही साधु जन इस दिन भगवान राम का स्मरण करते हुए व्यतीत करते हैं.

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क्यों लिया भगवान ने धरती पर जन्म?

पौराणिक कथाओं के अनुसार धरती पर जब भी पाप का प्रभाव अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाता है तब भगवान धरती पर प्रकट होते हैं और उस पाप का समूल विनाश करते हैं. एक ऐसे ही विशेष कारण की वजह से भगवान राम का प्राकट्य इस धरती पर हुआ था. हमारे ग्रंथ बताते हैं कि धरती पर रावण का प्रकोप और अत्याचार बहुत ज्यादा बढ़ गया था जिसकी वजह से भगवान राम ने रावण के विनाश के लिए ही धरती पर प्रकट होकर मर्यादा पुरुषोत्तम राम की भूमिका अदा की थी.

भगवान राम के साथ माता जानकी और लक्ष्मण की पूजा क्यों की जाती है?

आपने अक्सर भगवान राम की मूर्ति के साथ उनके छोटे भाई लक्ष्मण और उनकी पत्नी माता जानकी की भी तस्वीर देखी होगी. अक्सर इसे राम परिवार का नाम दिया जाता है और इन सबकी एक साथ पूजा की जाती है. क्या आप जानते हैं ऐसा क्यों? तो चलिए हम बताते हैं:-

ग्रंथों के अनुसार भगवान राम की सहायता के लिए ही उनके छोटे भाई लक्ष्मण का अवतार भी इस धरती पर हुआ था. ग्रंथों के अनुसार लक्ष्मण शेषनाग है जिस पर भगवान विष्णु विराजमान रहते हैं. सरल शब्दों में कहें तो शेषनाग ही थे जो लक्ष्मण के अवतार में भगवान राम के छोटे भाई बनकर पृथ्वी पर प्रकट हुए. आपने भगवान राम की कथा तो सुनी होगी जिसमें बताया जाता है कि माता कैकई के वरदान की वजह से भगवान राम को अयोध्या का राजपाट छोड़कर 14 वर्षों की लंबी अवधि के लिए पूरी तरह से वनवास ग्रहण करना पड़ा था.

उस वनवास के दौरान भगवान राम का साथ उनकी पत्नी माता जानकी और उनके छोटे भाई लक्ष्मण ने दिया था. भगवान की इस वनवास यात्रा के दौरान भगवान राम ने पृथ्वी पर मौजूद बहुत सारे असुरों का संहार किया था. इसी अवधि के दौरान भगवान राम ने लंका पर विजय प्राप्त कर अहंकारी रावण अभी संहार कर डाला था और इस पृथ्वी को पाप मुक्त कर दिया था. 14 वर्ष के लंबे वनवास के बाद भगवान राम और लक्ष्मण और सीता माता अपनी वनवास की अवधि को पूरा करने के बाद वापस अयोध्या लौटे थे जिसके बाद से ही उन तीनों की पूजा एक साथ होने लगी.

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भारत के विभिन्न प्रदेशों में विभिन्न तरीके से मनाई जाती है रामनवमी

भारत विविधताओं से भरपूर एक ऐसा देश है जहां पर प्रत्येक त्योहारों को विभिन्न तरीकों से मनाया जाता है. ठीक इसी प्रकार रामनवमी को मनाने का भी भारत के प्रत्येक प्रदेश का एक अलग अपना अनोखा तरीका है. जैसे:-

  • उत्तर प्रदेश में मौजूद अयोध्या शहर, भद्राचलम (तेलंगाना), रामेश्वरम (तमिलनाडु) और बिहार के सीतामढ़ी सहित इन स्थानों पर भगवान के जन्म दिवस के शुभ अवसर पर बड़े पैमाने पर रथ यात्रा आयोजित की जाती है.
  • कर्नाटक में भी यह एक ऐसा महत्वपूर्ण त्योहार है जिस पर भक्तों द्वारा मुफ्त में कस्तूरी का रस और गुड़ भंडारे के रूप में बांटा जाता है.
  • बेंगलुरु में श्री राम सेवा मंडली आरसीटी चामराजपेट द्वारा लगभग 1 महीने तक शास्त्रीय संगीत समारोह का आयोजन कराया जाता है. यह एक ऐसा आयोजन होता है जो बेंगलुरु और कर्नाटक के लिए अविस्मरणीय उत्सव होता है.
  • यदि भारत पूर्ववर्ती हिस्से के उड़ीसा, झारखंड, पश्चिम बंगाल सहित सभी प्रदेशों में रामनवमी के त्योहार को एक ऐसा वार्षिक त्योहार के रूप में मनाया जाता है जिसमें वहां पर मौजूद सभी जगन्नाथ मंदिरों से भगवान जगन्नाथ को निकाल कर बहुत बड़ी रथ यात्रा का आयोजन किया जाता है जो उन प्रदेशों के कई सारे क्षेत्रों में घूमते हुए भक्तों की टोलीओं के साथ नाचते गाते हुए भगवान का जन्म दिवस मनाते हैं.
  • भारत के प्रत्येक इस्कॉन मंदिर से जुड़े भक्त इस दिन उपवास रखते हैं और धूमधाम के साथ नाच गाना करते हुए इस पवित्र त्यौहार को मनाते हैं।
  • चैत्र मास की नवरात्रि के दौरान देश भर एक कई प्रदेशों में रामनवमी के सुनहरे अवसर पर विभिन्न प्रकार के मेलों का भी आयोजन किया जाता है जिनमें लाखों लोग सम्मिलित होते हैं।

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भारत के बाहर भी मनाया जाता है रामनवमी का पावन त्यौहार

 भारत में ही नहीं बल्कि भारत के समेत कुछ विदेशी देशों में भी रामनवमी का यह पावन त्यौहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।

  • भारतीय गिरमिटिया सेवकों के जो वंशज 1910 से पहले औपनिवेशिक दक्षिण अफ्रीका में रहने लगे थे वह दक्षिण अफ्रीका के बागानों और कानों में काम करने के लिए वहां पर गए थे। उनकी वजह से दक्षिण अफ्रीका में प्रत्येक वर्ष रामायण का पाठ किया जाता है और भजन गाए जाते हैं इस प्रकार वे रामनवमी का पावन त्यौहार वहां पर मनाते हैं।
  • इसके अलावा त्रिनिदाद और टोबैगो, गुयाना, सुरीनाम, जमैका, कैरेबियाई, मॉरीशस और मलेशिया के साथ-साथ सिंगापुर में भी रहने वाले सभी प्रकार के हिंदुओं द्वारा यह त्योहार पारंपरिक रूप से मनाया जाता है।
  • फिजी में भी यह त्यौहार हिंदुओं द्वारा बहुत ही धूमधाम के साथ प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है जिसमें सीधी में रहने वाले सैकड़ों हिंदू शामिल होते हैं।

प्रत्येक वर्ष भगवान राम का यह जन्म दिवस पूरे भारत वासियों के लिए बहुत ज्यादा हर्षोल्लास लेकर आता है जिसे भारत का प्रत्येक भक्त बहुत ज्यादा भक्ति भाव के साथ मनाता है और भगवान को याद करते हैं और उन्हें धन्यवाद देते हैं. इस बार कोरोना वायरस के चलते इस त्यौहार में ज्यादा हर्षोल्लास तो नहीं होगा परंतु भक्ति में कमी बिल्कुल भी नहीं आएगी भारत की जनता अपने घरों में बैठकर ही भगवान का धन्यवाद करते हुए इस त्यौहार को धूमधाम और भक्ति भाव से मनाएंगे।

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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