राष्ट्रीय एकता दिवस 2021 निबंध भाषण कविता | National Unity Day in hindi

31st October को राष्ट्रीय एकता दिवस क्यों कब मनाया जाता है ? 2021(महत्व, भाषण, कविता, अनमोल वचन, निबंध, स्लोगन, शपथ, नारे) (National Unity Day in hindi, Quotes, theme)

आज के युवाओं को ही एक होकर देश को एकता का सबब सिखाना होगा. सबसे पहले परिवारों में एकता को जगाना होगा, तभी ही हम देश से एकता की उम्मीद कर सकेंगे.

राष्ट्रीय एकता दिवस क्यों मनाया जाता है? (Why we celebrate Rashtriya Ekta Diwas)–

भारत की लोह पुरुष कहे जाने वाले सरदार वल्लभ भाई पटेल के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाता है. इस दिन की शुरुवात केन्द्रीय सरकार द्वारा सन 2014 में दिल्ली में की गई है. सरदार वल्लभ भाई पटेल द्वारा देश को हमेशा एकजुट करने के लिए अनेकों प्रयास किये गए, इन्ही कार्य को याद करते हुए उन्हें श्रधांजलि अर्पित करने के लिए इस दिन को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया गया है.

इस दिन का उद्घाटन नई दिल्ली में माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने किया था. मोदी जी ने सरदार पटेल जी की प्रतिमा पर मालार्पण किया, साथ ही ‘रन फॉर यूनिटी’ मैराथन की शुरुवात की. इस कार्यक्रम को इसलिए आयोजित किया गया, ताकि सरदार पटेल द्वारा देश को एकजुट करने के प्रयास को देश-दुनिया के सामने उजागर किया जा सके.

Rashtriya Ekta Diwas Kavita in Hindi

राष्ट्रीय एकता दिवस  एवम भाषण (Rashtriya Ekta Diwas Speech In Hindi)

किसी भी देश का आधार उसकी एकता एवम अखंडता में ही निहित होता हैं. भारत देश कई वर्षो तक गुलाम था. इसका सबसे बड़ा कारण था आवाम के बीच एकता की कमी होना. इस एकता की कमी का सबसे बड़ा कारण उस समय में सुचना प्रसारण के साधनों का ना होना था. साथ ही अखंड भारत पर कई संस्कृतियों ने राज किया. इस कारण भारत देश में विभिन्न जातियों का विकास हुआ. शासन बदलते रहने के कारण एवम विचारो में भिन्नता के कारण मतभेद उत्पन्न होता गया और देश में सबसे बाद में ब्रिटिश हुकूमत ने राज किया और इन्होने इसी कमी का फायदा उठाकर फूट डालों एवम राज करो की नीति अपनाई. इसी एक हथियार के कारण अंग्रेजों से भारत पर 200 वर्षो की गुलामी की.

इससे जाहिर होता हैं कि देश का विकास, शांति, समृद्धि एवम अखंडता एकता के कारण ही संभव हैं. कौमी लड़ाई देश की नींव को खोखला करती हैं. इससे न निजी लाभ होता हैं ना ही राष्ट्रीय हित. आज भी हम कहीं न कहीं एकता में कमी के कारण ही अन्य देशों से पीछे हैं. जाति वाद के दलदल में फँसकर हम देश की एकता को कमजोर कर रहे हैं. इसका सबसे बड़ा उदाहरण इतिहास के पन्नो में हैं. सन 1857 की क्रांति के विफल होने का कारण एकता में कमी ही था. मुगुलो ने भी भारत पर शासन एकता की कमी के कारण ही किया था.

इस मतभेद को समझ लेने के बाद ही देश के कई महान स्वतंत्रता सेनानियों ने सबसे पहले इस मुश्किल को कम करने की कोशिश की. कई बड़े- बड़े नेताओं ने आजादी के लिए पहले लोगो को एकता का महत्व बताया. इसके लिए आजादी से पहले रेडिओं प्रसारण एवम समाचार पत्रों का उपयोग किया गया. क्रांतिकारी वीर भले ही जेलों में होते थे,  लेकिन  उस वक्त अपनी कलम के जोर पर उन्होंने देश में एकता का विकास किया. इसी के कारण हमें 1947 में स्वतंत्रता मिली.

  • वर्तमान में एकता का महत्त्व (Ekta Mahatv):

किसी भी देश की अर्थव्यवस्था, न्याय प्रणाली यह सभी चीजे तब ही सुचारू हो सकेंगी, जब आवाम में एकता हो और जिस दिन यह व्यवस्था सुचारू होगी, उस दिन देश के विकास में कोई कठिनाई नहीं होगी.

एकता में सबसे बड़ा बाधक स्वहित है, आज के समय में स्वहित ही सर्वोपरी हो गया हैं. आज जब देश आजाद हैं आत्म निर्भर हैं तो वैचारिक मतभेद उसके विकास में बेड़ियाँ बनी पड़ी हैं.

आजादी के पहले इस फुट का फायदा अंग्रेज उठाते थे और आज देश के सियासी लोग. हमें यह याद रखना चाहिये कि जिस जगह भी दरार होगी मौका परस्त लोग उसमे अपने लाभ खोजेंगे ही. ऐसी परिस्थती में हमारा ही नुकसान होता हैं.

देश में एकता के स्वर को सबसे ज्यादा बुलंद स्वतंत्रता सेनानी लोह पुरुष वल्लभभाई पटेल ने किया था. वे उस सदी में आज के युवा जैसी नयी सोच के व्यक्ति थे. वे सदैव देश को एकता का संदेश देते थे. उन्ही को श्रद्धांजलि देने हेतु उनके जन्म दिवस को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता हैं.

राष्ट्रीय एकता दिवस 2021 में है ? (Rashtriya Ekta Diwas 2021 Date) :

लोह पुरुष वल्लभभाई पटेल की स्मृति में उनके जन्मदिन 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में प्रति वर्ष मनाया जाता हैं.

राष्ट्रीय एकता दिवस का ऐलान 2014 में किया गया, इसे वल्लभभाई पटेल के राष्ट्र के प्रति समर्पण को याद में रखकर तय किया गया, इसका ऐलान गृहमंत्री राज नाथ सिंह ने किया.

राष्ट्रीय एकता दिवस मनाने का तरीका (Rashtriya Ekta Diwas Celebration)-

2014 के बाद से 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के बारे में जागरूकता बढ़ाने और महान व्यक्ति को याद करने के लिए राष्ट्रव्यापी मैराथन का आयोजन किया जाता है. इस दिवस के साथ देश की युवा पीढ़ी को राष्ट्रीय एकता का सन्देश पहुँचता है, जिससे आगे चलकर वे देश में राष्ट्रीय एकता का महत्व समझ सकें. इस मौके पर देश के विभिन्न स्थानों में कई कार्यक्रमों का आयोजन होता है. दिल्ली के पटेल चौक, पार्लियामेंट स्ट्रीट पर सरदार पटेल की प्रतिमा पर माला चढ़ाई जाती है. इसके अलावा सरकार द्वारा शपथ ग्रहण समारोह, मार्च फ़ास्ट भी की जाती है.

‘रन फॉर यूनिटी’ मैराथन देश के विभिन्न शहरों, गाँव, जिलों, ग्रामीण स्थानों में आयोजित की जाती है. स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी, अन्य शैक्षणिक संसथान, राष्ट्रीय कैडेट कोर,  राष्ट्रीय सेवा योजना के लोग बहुत बढ़ चढ़ कर इस कार्यक्रम में हिस्सा लेते है. दिल्ली में राजपथ में विजय चौक से इंडिया गेट के बीच सुबह 8:30 बजे मैराथन का आयोजन बहुत बड़े स्तर पर होता है, जिसमें कई नेता, अभिनेता हिस्सा लेते है. इसके अलावा सरकारी ऑफिस, पब्लिक सेक्टर में भी शपथ ग्रहण कार्यक्रम होता है. स्कूल कॉलेज में तरह तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम होते है, वहां बैनर, पोस्टर बनाने की प्रतियोगिता,  भाषण, पेंटिंग, कविता, वाद-विवाद, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आदि का आयोजन होता है.

सरदार पटेल जन्म31 अक्टूबर 1875
मृत्यु15 दिसम्बर 1950
राष्ट्रीय एकता दिवस की शुरुवात31 अक्टूबर 2014
किसके द्वारा शुरू हुआप्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के द्वारा

राष्ट्रीय एकता दिवस् का महत्व : (Rashtriya Ekta Diwas Importance)

आज देश के युवाओं को यह समझाने की जरुरत हैं कि एकता देश के लिए कितनी जरुरी हैं. ऐसे में राष्ट्रीय एकता दिवस का होना बेहद जरुरी हैं. ऐसे दिन ही युवाओं को इस दिशा में सोचने के लिए प्रेरित करते हैं.

आज के समय में एकता इस तरह खंडित हो चुकी हैं कि इसका महत्व सबसे पहले परिवार जो कि समाज की सबसे छोटी इकाई हैं, को समझना चाहिये, क्यूंकि आज परिवारों में ही एकता नहीं हैं. इसी कारण समाज में एकता नही हैं और अगर समाज में एकता नहीं होगी तो गाँव, शहर, राज्य एवम देश में कैसे हम एकता की उम्मीद रख सकेंगे.

एकता के लिए जरुरी हैं आज की पीढ़ी एवम पहले की पीढ़ी आपसी विचारों को व्यक्त करे, एवम एक दुसरे को अपनी-अपनी स्थिती से अवगत करायें. साथ ही एक हल की उम्मीद में ही बातचीत शुरू की जाये. पीढ़ियों में जो विवाद होता हैं उसका कोई हल नहीं होता हर व्यक्ति अपने आपको सही मानता हैं ऐसे में परिवार टूट जाते हैं इसलिए जरुरी हैं कि बातचीत हो एवम ऐसा वातावरण हो कि परिवार का हर एक सदस्य अपनी बात कह सके और हल ढूंढा जा सके. परिवारों का टूट जाना तो आसान हैं. उनका एक साथ रहना मुश्किल हैं और इन टूटे हुए परिवारों का प्रभाव देश पर भी पड़ता हैं.

अगर हम सभी विकास चाहते हैं तो प्रधानमंत्री मोदी जी के उस नारे को ध्यान में रखे जिसमे उन्होंने कहा हैं सबका साथ सबका विकास.

मैंने जो परिवार का उदाहरण आपके सामने रखा शायद आप उसे राष्ट्रीय एकता से न जोड़ पाये, लेकिन मेरा मानना तो यही हैं कि जब तक परिवारों में एकता नहीं होगी, तब तक देश में एकता नहीं हो सकती और जब तक एकता नहीं होगी, तब तक विकास की गति अवरुद्ध एवम दिशाहीन होती रहेगी.

इस प्रकार आज के समय में राष्ट्रीय एकता दिवस का होना जरुरी हैं.

राष्ट्रीय एकता दिवस स्लोगन नारे अनमोल वचन (Rashtriya Ekta Diwas Slogan Quotes)

  • एकता – मूलमंत्र हैं यह विकास का, देश के सौंदर्य और उद्दार का

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  • हर एक शब्द भारी हैं, जब एकता में देश की हर कौम सारी हैं.

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  • एकता ही देश का बल हैं, एकता में ही सुनहरा पल हैं.

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  • जब तक रहेगी साठ गाठ, होता रहेगा देश का विकास.

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  • याद रखो एकता का मान, तब ही होगी देश आन.

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  • एकता में ही संबल हैं जिस देश में नही वो दुर्बल हैं.

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राष्ट्रिय एकता दिवस पर कविता  (Rashtriya Ekta Diwas Poem)

राष्ट्र की एकता ही हैं उसका आधार
न थोपों उस पर सांप्रदायिक विचार
क्यूँ करते हो भेद ईश्वर के बन्दों में
हर मज़हब सिखाता हैं प्रेम बाँटो सब में
क्यूँ करते हो वैचारिक लड़ाई
बनता हैं यह भारत माँ के लिए दुखदाई
एक भूमि का टुकड़ा नहीं हैं मेरा देश
मेरी माँ का हैं यह सुंदर परिवेश
इसके उद्धार में ही हैं अलौकिक प्रकाश  
सबके साथ में ही हैं सबका विकास
एकता ही हैं अंत दुखों का
एकता में ही हैं कल्याण अपनों का

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मैं नहीं तू, तू नहीं मैं
कब तक चलेगा ये मतभेद
कैसे अनपढ़ हैं कहने वाले
जो देश को सांप्रदायिक सोच देते हैं
फूट डालो और राज करो
कैसे वो ये नारा भुला बैठे हैं
अंग्रेज हो या कोई हमने ही तो अवसर दिया
आपसी लड़ाई में हमने मातृभूमि को गँवा दिया
आज भी उसी सोच के गुलाम हैं हम
खुद ही अपने देश के शत्रु बन रहे हैं हम
फिर से कही मौका न दे बैठे
चलो सुलझाये और आज साथ आकर बैठे

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Karnika
कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं | यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं

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