दिवाली 2020 में कब है व शुभ मुहूर्त क्या है

दिवाली 2020 में कब है व शुभ मुहूर्त क्या है (Deepawali Or Diwali Puja Shubh Muhurat Date In Hindi)

दीपावली का त्यौहार देश के बड़े त्यौहारों में से एक हैं. जीवन को अंधकार से प्रकाश में जाने का संकेत देने वाला यह त्यौहार जितने उत्साह से मनाया जाता हैं, उतने ही उत्साह से इसकी पूजा विधि संपन्न की जाती हैं . पुरे महीने लोग दीपावली के त्यौहार की तैयारी करते हैं, जिसकी शुरुवात साफ़ सफाई से की जाती हैं, क्यूंकि दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजा का महत्व होता हैं, और लक्ष्मी वहीँ निवास करती हैं जहाँ स्वच्छता होती हैं .

लक्ष्मी प्राप्ति मंत्र : ॐ हिम् महालक्ष्मै च विदमहै, विष्णु पत्नये च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात

कोई भी त्यौहार उसकी पौराणिक कथा के कारण अधिक लोक प्रिय होता हैं, ऐसे ही दीपावली क्यों मनाई जाती है, इस पर बहुत सी कथाएं प्रचलित है. हिन्दू संस्कृति में पंचाग का विशेष महत्व है, बिना शुभ समय देखे कोई कार्य नहीं किये जाते हैं, किसी भी पूजन का शुभ मुहूर्त देखकर ही शुभारम्भ किया जाता हैं .

दीपावली 2020 में कब से शुरू है (Diwali/ Deepawali Festival Dates)

क्र. दिनांक दीपावली के दिन विवरण
1 12 नवम्बर धन तेरस कुबेर देवता की पूजा की जाती हैं . घर में नयी वस्तु खरीदी जाती हैं . इस दिन बर्तन, सोने चांदी की खरीद का बहुत महत्व होता है. एक झाड़ू खरीदने का भी प्रावधान है, कहते है इससे लक्ष्मी घर में आती है.
2 13 नवम्बर नरक चौदस सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान का महत्व हैं . तिल से स्नान का महत्व हैं . कहते है सूर्योदय से पहले चिकसा, तिल लगाकर नहाते है तो स्वर्ग की प्राप्ति होती है.
3 14 नवम्बर दीपावली लक्ष्मी जी की पूजा की जाती हैं, दीप दान किया जाता हैं. व्यपारियों के लिए यह नव वर्ष होता हैं . नए बहीखाते इस दिन से शुरू किये जाते है.
4 15 नवम्बर गोवर्धन पूजा गोबर्धन की पूजा की जाती हैं . 56 भोग बनाकर अन्नकूट किया जाता हैं .
5 16 नवम्बर भाई दूज भाई बहन का त्यौहार होता हैं बहन भाई को तिलक करती हैं एवम भोजन के लिए घर पर आमंत्रित करती हैं .

साल 2020 में  दीपावली का शुभ मुहूर्त ( Diwali/ Deepawali Festival Dates and Muhurt )

साल 2020 में कब है दीपावली 14 नवम्बर
किस दिन रविवार
किसके द्वारा मनाया जाता है ये त्योहार हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध धर्म के लोगों द्वारा
लक्ष्मी पूजा मुहूर्ता का समय 17:57 लेकर 19:53 (5.57 से लेकर 7:53 तक)
प्रदोष काल 17:30 से 20:11 (5:30 से लेकर 8:11 तक)
वृषभ काल 17:57 लेकर 19:53 (5.57 से लेकर 7:53 तक)

 साल 2020 की दीपावली का शुभ मुहूर्त

इस दिन माँ धन लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है और हर कोई अपने परिवार की सुख और समृद्धि की कामना माँ से करतें हैं. इस शुभ दिन लोग अपने घरों की अच्छे से साफ सफाई करते हैं और अपने पूरे घर को दीयों और लाइटों की रोशीन से रोशन करते है. वहीं इस दिन केवल शुभ मुहूर्त के दौरान ही रात के समय भगवान की पूजा की जाती है. 

दिवाली में लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में होती है, जो सूर्यास्त के बाद शुरू होता है. महानिशिता काल में तांत्रिक और पंडित लोग पूजा करते है, ये वे लोग होते है, जिन्हें लक्ष्मी पूजा के बारे में अच्छे से जानकारी होती है. आम इन्सान लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में ही करते है. प्रदोष काल में भी स्थिर लग्न में पूजा करना सबसे उत्तम माना जाता है. कहते है, स्थिर लग्न में पूजा करने से लक्ष्मी घर में ही स्थिर रहती है, कहीं नहीं जाती है. इसलिए ये लक्ष्मी पूजन के लिए सबसे अच्छा समय है. वृषभ काल ही स्थिर लग्न होता है, जो दिवाली के त्यौहार में प्रदोष काल में ही आता है. अगर किसी कारणवश वृषभ काल में पूजा नहीं कर पाते है, तो इस दिन के किसी भी लग्न काल में पूजा कर सकते है.

दिवाली की पूजा के लिए चार मुहूर्त होते है –

  1. वृश्चिक लग्न – यह दिवाली के दिन की सुबह का समय होता है. वृश्चिक लग्न में मंदिर, हॉस्पिटल, होटल्स, स्कूल, कॉलेज में पूजा होती है. राजनैतिक, टीवी फ़िल्मी कलाकार वृश्चिक लग्न में ही लक्ष्मी पूजा करते है.
  2. कुम्भ लग्न – यह दिवाली के दिन दोपहर का समय होता है. कुम्भ लग्न में वे लोग पूजा करते है, जो बीमार होते है, जिन पर शनि की दशा ख़राब चल रही होती है, जिनको व्यापार में बड़ी हानि होती है.
  3. वृषभ लग्न – यह दिवाली के दिन शाम का समय होता है. यह लक्ष्मी पूजा का सबसे अच्छा समय होता है.
  4. सिम्हा लग्न – यह दिवाली की मध्य रात्रि का समय होता है. संत, तांत्रिक लोग इस दौरान लक्ष्मी पूजा करते है.

 

दिवाली बधाई सन्देश (Deepawali  Wishes)

 

दूर बैठे किसी कौने से,
अपनों को याद करते हैं .
छुट्टी नहीं मिली तो क्या हुआ,
यहीं से हैप्पी दिवाली कह देते हैं .

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  • बचपन की उस दीवाली में अपनों का मैला था आज कैसा ये दिन आया मैं अकेला बैठा दिवाली मनाया

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  • पहली दीपावली का आनंद हैं मेरी प्यारी बेटी मेरे संग हैं उसकी किलकारी में हैं जादू समझ नहीं आता आज ज़माने से क्या कह दू

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  • यारों का यारना था वो दिवाली का जमाना आज बैठे हैं दफ्तर की कुर्सी पर कभी नुक्ड़ पर बैठ पटाखे फोड़ा करते थे माँ की बनाई गुजिया लेकर घर से भागा करते थे आतिशबाजी का नजारा देखने छत पर बैठा करते थे कैसे बीत गये वो पल एक झपक में

    जब पड़ौसी के घर बम गिराने पर वो हमे घुरा करते थे

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  • दिवाली की मिठाई खाये जमाना बीत गया माँ के साथ रंगौली बनाये जमाना बीत गया हर पल याद आते हैं वो लम्हे जब दिवाली में नये कपड़े लाती थी खूब सुंदर सजकर दीपक जलाती थी पापा के साथ फुलजड़ी जलाकर भाई से लड़ फोड़ना सीखती थी

    याद आती हैं वो दिवाली

    जो बरसो पहले मैं मनाया करती थी

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Karnika

कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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