ज़िन्दगी (जीवन) पर शायरी कविता | jeevan par shayari kavita in hindi

जिन्दगी पर लिखी कुछ बाते शायद आपको अपनी ही जिन्दगी का आईने उनमें दीख जाये, वैसे तो मैं भी नहीं जानती जीवन का सच लेकिन फिर भी कहती हूँ, जन्दगी हर पल बदलती हैं, हर पल सिखाती हैं, कभी सहेली, तो कभी दुश्मन बन जाती हैं लेकिन सच हैं दोस्तों, जिन्दगी ही जीना सिखाती हैं.

zindagi jindagi shayari

ज़िन्दगी जीवन शायरी कविता
Zindagi jeevan shayari kavita Hindi

जिंदगी हर पल हैं एक पहेली
कभी बन जाती हैं सहेली
साथ में खेलती हैं रोज नये-नये खेल
तो कभी नाराज होकर कर लेती हैं बैर
कभी प्यार से सर सहलाती हैं
तो कभी ठोकर दे जाती हैं
बूझो तो और कठिन हो जाती हैं
रूठो तो झट से मना जाती हैं
तन्हाई भी वही देती हैं
हर राह पर साथ भी वही चलती हैं
जिन्दगी बस एक पहेली हैं  
बस एक पहेली हैं
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कभी-कभी हँसी आती हैं मुझे
कैसे इतनी मुस्कान बिखेर जाती हूँ
दिल हर पल रोता हैं
फिर भी कैसे छिपा जाती हूँ
भीड़ में भी तन्हा हैं मेरी जिन्दगी
बस आसुंओं से हैं मेरी सच्ची बन्दगी
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जिंदगी में प्यार सभी को होता हैं
हर किसी के दिल में कोई शख्स बैठा होता हैं
नसीब वाले होते हैं वो लोग
जिनके जीवन में साथ उनका होता हैं
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हर गलती की सजा देती हैं जिन्दगी
लेकिन साथ रहकर सहती भी हैं जिन्दगी
ख़ुशी हो या गम अपनाती हैं जिन्दगी
हर पल साथ निभाती हैं ज़िन्दगी
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शान-ए-जिन्दगी वही
जब कोई तुमसे से दुखी नहीं
खुद भी हँसो और दुसरो को हंसाओ
इसी ताल में जिन्दगी जी जाओ
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जीवन का सच कड़वा हैं
यहाँ कोई पल नहीं ठहरा हैं
आज जिव की रफ़्तार तेज हो गई
भगा दौड़ी में जिन्दगी कहीं खो गई हैं
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आज हम है तेरे साथ
कम हमारी यादे होंगी तेरे पास
कभी पन्ने पलट लेना उन यादों के
वादा हैं तुझे बरस उठेंगे हम तेरी आँखों से
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जीवन की राहो में हम साथ तेरा ढूंढते हैं
तेरे ख्यालो में हम अक्सर ही खो जाते हैं
कैसे जियेंगे इस जीवन में तेरे बिन
हम तो बिना तेरे साँस भी ना ले पाते हैं
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उगता सूरज ख़ुशी देता हैं
जिन्दगी के सच को जोर-जोर से कहता हैं
जो बीत गया वो कल था
जो चढ़ रहा वो आज
न पकड़ो इस समय को
बस जियो उसके साथ
जिन्दगी हैं बस पल में
ना ढूंढो उसे कल में
ना गम करो जो चला गया
ना सोचों वो जो आएगा
बस आज ही हैं जो हैं तेरे पास
जी ले और बनाले अपनी जिन्दगी को खास
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एक पल रुककर आवाज तो सुनो
ये ज़िन्दगी हैं जो तुझसे दो पल मांग रही हैं
तू कहता हैं तू जिन्दगी के लिए कमाता हैं
लेकिन दफ्तर की दौड़ में तू उसे ही भूल जाता हैं
तेरे आगे पीछे भागती वो तुझे बुलाती हैं
और तू उसी के लिए उसे छोड़ चला जाता हैं
वो अपने मन की कहना चाहती हैं
अपनी चाह तुझे बताना चाहती हैं
दो पल को तो तू उसे सुन नहीं पाता
न जाने क्या तू उसके लिये कमाता
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उदास रातों को जब नींद नहीं आती
बीती जिन्दगी पलकों पर दस्तक दे जाती
आंसू की धार के साथ वो कहानी सुनाती हैं
बीते लम्हों को फिर आज वो आँखों में सजा जाती है
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जब जीना ही हैं जिन्दगी को
तो क्यूँ पल-पल आँसू बहाये
एक बार हँसकर गले तो लगाओ गम को
ये गम आने से ही शरमाये
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पल पल बदलता हैं जिन्दगी का नजारा
खाली पन्नो में जुड़ता जाता हैं जिन्दगी का फसना
कभी पलट कर देखना उन पन्नो को
जहाँ था साथ मेरा तुम्हारा
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हर पल तुझे सोचना
ख्यालों में बस तुझे ढूँढना
धुंधला गया हैं जिन्दगी का हर एक पल
जब से तू बस गया हैं इन नैनो में
तेरे ही सपनो में सिमट गई हूँ मैं
अपनी ही जिन्दगी को भूल गई हूँ मैं
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न कहो कुछ ऐसा कि कोई रूठ जाये
किसी अपने का साथ पल में छुट जाये
दौबारा मौका दे ना दे जिन्दगी
जियों ऐसा कि हर एक जिन्दगी से जुड़ जाये
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नाराज़गी कभी सुकून नहीं देती
रूठे हुए को जिन्दगी भूला नहीं देती
साथ चलने में ही ज़िन्दगी का मजा हैं
झुककर सलाम करना ही जिन्दगी की अदा हैं
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हर पल पीछे छुटता जाता हैं
नया सवेरा सदा जिन्दगी कहलाता हैं
कभी अतीत की गहराइयों में मत जीना
जिन्दगी का मजा तो बस आज में आता हैं
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जिन्दगी तो हार जीत का नाम हैं
हर पल ख़ुशी गम का पैगाम हैं
मत छोड़ना कभी हौसलों का हाथ
चलते रहना ही हैं जिंदगी का काम
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ए काश तेरे लम्हों को बांध पाती
तेरी यादों को मुट्ठी में समेट पाती
जन्दगी कैसे भागती रहती हैं तू
जब भी तेरे करीब आओ आगे निकल जाती हैं तू
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जिन्दगी तू बहुत सताती हैं
ना महसूस करो तुझे तब भी पास आती हैं
छोड़ दूंगी किसी रोज मैं तन्हा तुझे
तब मत कहना बेवफा मुझे

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जिन्दगी के हर पल को खुबसूरत बनाओ
हर ख़ुशी हर गम को गले से लगाओ
वो ही जीतता हैं जिन्दगी की जंग
जो जीता हैं ख़ुशी से जीवन की हर एक तरंग
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ए जिन्दगी
तूने मुझे हँसना सिखाया
गम की राहों पर चलना सिखाया
कैसे चलते हैं हर दम साथ
ऐसा साथ बस तूने दिखाया
जब उदास थी मैं राहों पर
तब तूने ही मुझे प्यार से सहलाया
जब कर बैठती थी नादानी
तूने ही डाट कर रास्ता दिखाया
ए जिंदगी शुक्रगुज़ार हूँ मैं
तूने मुझे जीना सिखाया
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बहुत नाराज हैं मेरी जिन्दगी
मुझसे उदास हैं मेरी जिन्दगी
कहती हैं मुझसे तू शिकायत क्यूँ नहीं करती
जब दिल में किसी और की धड़कन हैं
तो तू इस दुनियाँ से क्यूँ नहीं कहती
घुट घुट कर तू जीती हैं और तन्हा में हो रही हूँ
बहुत नाराज हैं मेरी जिन्दगी
मुझसे उदास हैं मेरी जिन्दगी
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टुटा दिल अक्सर ही नाराज रहता हैं
जिन्दगी के पलो से उदास रहता हैं
जब भी वो सोचता हैं दो पल को
वो जिन्दगी से फिर से हार बैठता हैं
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जिन्दगी एक किताब हैं
जिनमे कोरे पन्नो का सैलाब हैं
कोई भरता हैं इसे रंगीन शब्दों से
कोई लिखता हैं इसे काले अक्षरों से
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जिंदगी तू हर पल सिखाती हैं
कभी डाट कर कभी प्यार से समझाती हैं
गलती से सिखना ही असल जिन्दगी हैं
वरना ये जिन्दगी काटों पर भी सुलाती हैं
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जिन्दगी एक सफ़र हैं
यादें जिसकी हमसफ़र हैं
सुख दुःख ही हैं इन यादों के पन्ने
कभी धूप कभी छाव से भरे हैं जिन्दगी के कलमे

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हिंदी शायरी संग्रह

कविता चलती का नाम जिन्दगी

Karnika
कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं | यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं

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